Friday, December 24, 2010

मागोइ का उपहार

एक डॉलर और सत्तासी सेंट. बस इतने ही पैसे थे. और इस में से साठ पेनी सिक्के थे. ये पेनी एक-एक दो-दो करके उसने पंसारी और सब्जीवालों के साथ इतनी कड़ी सौदेबाजी करके जमा किये थे कि अपनी कंजूसी पर लज्जा के मारे उसके गाल लाल हो जाया करते थे. डेला ने सिक्कों को तीन बार गिना. एक डॉलर सत्तासी सेंट. बस. और अगले दिन क्रिसमस है.

करने को कुछ नहीं था सिवाय छोटे जर्जर सोफे पर धड़ाम से गिर कर आह भरी जाए. डेला ने ऐसा ही किया. ऐसे करने से यह ही विचार मन में आती है कि मनुष्य का जीवन सिसकने, आंख-नाक से पानि बहाने और मुसकुराने से मिल कर बना है. जिस में आंख-नाक से पानि बहाना मुख्य हैं.

जब तक घर की मालकिन धीरे-धीरे पहले दशा से दूसरी पर आ रही है तो उसके घर की दशा जरा देखें. एक फर्निचर-युक्त फ्लैट, 8 डॉलर साप्ताहिक किराया पर. यह किसी भिखारी का वर्णन नहीं है, लेकिन ठीक ठीक भिक्षा मांगनेवालों की तरह ही है.

नीचे हाल में एक लेटर बॉक्स है जिस में पत्र डालने वाला कोई नहीं है. उस के पास एक बिजली बटन है जिस से कोई प्राणी की उंगली घंटी नहीं बजा सकती. इनके पास एक नेमकार्ड लगा था, जिस पर लिखा है, "मिस्टर जेम्स डिलिंघम यंग."

“डिलिंघम” नाम तब मौज-मस्ती से पुराने खुशहाल समय में लिखा गया था, जब इस नाम का हकदार $30 प्रति सप्ताह का वेतन पाता था. अब जब आमदनी $30 से सिकुड़ कर $20 हो गयी है तो उन्होंने गंभीरता से सोचा कि “डिलिंघम” को सिकोड़ कर एक विनम्र विनीत “डी” करना उचित है.

लेकिन जब भी मिस्टर जेम्स डिलिंघम यंग घर आते और ऊपर अपने फ्लैट में प्रवेश करते तो उसकी पत्नी, मिसेज जेम्स डिलिंघम यंग, जिस का डेला नाम से पहले परिचय कराया गया, उसे "जिम" कहकर जोर से गले लगाया करती थी. जो सब बहुत अच्छा लगता है.

डेला ने अपना रोना समाप्त किया और कपड़े से गाल पर पाउडर लगाया. वह खिड़की के पास खड़ी हो गई और धुंधली नजर से घर के धूसर पिछवाड़े आंगण में धूसर चारदिवारी पर घुम रही धूसर बिल्ली को देखते लगी. कल बड़ा दिन और उसके पास मात्र एक डॉलर और सत्तासी सेंट थे, जिन से जिम के लिये एक उपहार खरीदना पड़ेगा. इतने महीनों से एक-एक पाई बचाने के बाद भी यह हालत है. बीस डॉलर प्रति सप्ताह ज्यादा दिन नहीं चलते हैं. खर्चे उसके अनुमान से ज्यादा हैं. जैसा कि हमेशा होता है. केवल एक डॉलर और सत्तासी सेंट जिम का उपहार खरीदने के लिए. उसका अपना प्रिय जिम.

कितने घंटों से खुश हो कर उसने जिम के लिये कुछ अच्छा खरीदनेकी योजना बनायी थी. कोई अच्छी चीज, कोई दुर्लभ और उत्कृष्ट वस्तु, ऐसा कुछ जिस से वह अपने आप पर जिम की पत्नी होने का गर्व करें.

कमरे में खिड़कियों के बीच एक तंग कांच लगा था. $8 किराये के फ्लैट में आप ने शायद ऐसा कांच देखा होगा. शायद एक पतला और चुस्त व्यक्ति इस कांच के सामने तीव्र गति से गजरते हुए अपनी आकृति की एक-एक लंबा हिस्से का टुकड़ा एक साथ जोड़ कर अपने पूरे रूप का सटीक अनुमान लगा सकता है. डेला पतली होने के कारण इस कला में माहिर थी.

अचानक वह खिड़की से घुमकर शीशे के सामने खड़ी हो गयी है. उसकी आँखें चमक रही थीं, पर बीस सेकंड के अंदर उसके चेहरे का रंग उतर गया. तेजी से उसने अपने बाल खोलकर नीचे लहरा दिये.

अभी श्रोताओंको एक बात बताना जरूरी है कि जेम्स डिलिंघम यंग नामक दम्पति की केवल दो संपत्तियां थीं जिन पर उन दोनों को अत्यन्त गर्व था. एक जिम की सोने की घड़ी, जो उसकी पिता-दादा की जायदाद थी. और दूसरी—डेला के केश. अगर शबा की महारानी स्वयं उनकी सामनेवाली फ्लैट में रहती तो डेला कभी अपने बाल खोलकर खिड़की से बाहर लहराकर उसके गहनों की शोभा कम कर देती. और अगर खुद सम्राट सुलैमान इस फ्लैट के तहखाने में ढेर लगे खजाने का मालिक बन जाता, तो जिम उसके पास से गुजरने पर हर बार अपनी घड़ी बाहर निकालता, कि देखें कैसे सुलैमान ईर्ष्या से अपनी दाढ़ी खींचता है.

अब डेला के बाल उसके चारों तरफ बिखर कर भूरे पानी के झरने की तरह लहरा रहे थे. बालों ने घुटनों के नीचे तक पहुंच कर उसे कपड़े की तरह ढक लिया था. डेला ने घबराकर जल्दी से बालों को ऊपर उठाया एक क्षण के लिये लड़खड़ा कर फिर सीधी खड़ी हो गयी, जबकि एक-दो आंसू उसकी आंखों से निकल कर लाल कालीन पर छिटक गये.

उसने अपना पुराना भूरे रंग का जैकेट पहना, और भूरे रंग का पुराना हैट. और फिर तेजी से आँखों में शानदार चमक लिये. अपनी स्कर्ट को लहराती हुए दरवाजे से बाहर निकली और सीढ़ियों से उतर कर नीचे सड़क पर चलने लगी.

जहां वह जाकर रुकी वहां एक दुकान के बोर्ड पर लिखा था: " मैडम जाफरानी. यहां केश की सभी सामग्री के लिये सम्पर्क करें". डेला तुरंत दौड़ कर सीढ़ियों से ऊपर गयी, और अपने आपको संभाल कर हांफते हुए अंदर गयी. मैडम बड़ी थी, उसके त्वचा और बाल बहुत ज्यादा सफेद थे, और वह रुखी स्वभावा थी. संक्षेपतः, वह बिलकुल जाफरान जैसी नहीं लगती थी.

डेला ने पूछा,"क्या आप मेरे बाल खरीदेंगी ?"

"हां बिल्कुल, मैं बाल खरीदती हूं," मैडम ने कहा. "अपनी टोपी उतार, तेरा क्या है जरा देखें."

बाल भूरे पानी के झरने की तरह लहराने लगे.

मैडम ने अपने अनुभवी हाथों से बाल पकड़ कर कहा, "बीस डॉलर."

डेला ने कहा, “ठीक है, मुझे तुरंत पैसे दे दो.”

आहा! अगले दो घंटे कैसे गुलाबी पंखों पर उड़ गये! ना, ना, यह अनुपयुक्त रूपक भूल जाओ. जिम के उपहार के लिये वह उत्तेजित होकर उन्मादिता-सी दुकानों को उलट-पालट कर रही थी.

आखिर में उसे मिल ही गया, जो निश्चित रूप से जिम के लिए ही बना था, अन्य किसी के लिये नहीं. किसी दुकान में इस जैसा कुछ और नहीं था, क्योंकि उसने सब दुकानों को उलट-पालट करके देखा था. यह एक प्लैटिनम की चेन थी, यह एक प्लैटिनम की साधारण और पवित्र डिजाइन वाली चेन थी, जिसकी कीमत उसकी चमक-दमक और नक्काशी से नहीं, बल्कि धातु के स्वाभाविक गुण से ही पता चल जाती है. जैसा सब अच्छी चीजों के लिये लागू होना चाहिये. और यह चेन जिम की घड़ी के लायक भी थी. यह जिम की तरह शालीन और मूल्यवान थी.

उस ने चेन का मूल्य इक्कीस डॉलर चुकाया और बाकी सत्तासी सेंट लेकर शीघ्र घर वापस आयी. उसने सोचा कि आज से जिम अपनी घड़ी में चेन लगाकर कभी भी कहीं भी लोगों के बीच अपनी घड़ी में समय देख सकेगा. इतनी शानदार घड़ी होने के बावजूद उसे देखने में जिम को शरम आती, क्योंकि इस में चेन की बजाय चमड़े का एक पुराना पट्टा था.

जब डेला घर पहुंची तो उसका नशा दूर हुआ और थोड़ा होश आया. उसने कर्लिंग आइरन निकाल कर गैस जलायी और प्यार की उदारता से जो नुकसान हुआ, उसे सुधारने के लिये बाकी बचे बालों को घूंघराला बनाने लगी. हे प्रिय मित्रो ! ऐसा नुकसान भरपायी करना कभी आसान नहीं है.

चालीस मिनट के अंदर उसका सिर छोटे छोटे घूँघराले बालों से ढक गया. अभी वह अजीब ढंग से इस्कूल से भागे हुए एक बच्चे की तरह लग रही थी. उसने आईने में अपने-आपको देर तक बड़ी गौर से देखने के बाद सोचा, “अगर जिम मुझे जान से मार न डालें तो मुझे दुबारा देखने के पहले ही कहेगा कि मैं कोनी आइलैंड की नर्तकी की तरह लगती हूं. हाय ! लेकिन मैं एक डॉलर और सत्तासी सेंट से क्या कर पाती ?"

सात बजते ही कॉफी बन चुकी थी और स्टोव के पीछे फ्राइंग पैन खाना बनाने के लिए तैयार रखा था.

जिम कभी देर से नहीं आता. डेला ने चेन को अपने हाथ में रखा और दरवाजे के पास मेज के कोने पर बैठ गयी. फिर उसने नीचे सीढ़ियों पर जिमके कदमों की आहट सुनी तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया. वह हमेशा मामुली मामलों के लिये भी मौन प्रार्थना किया करती थी, आज भी वह फुसफुसायी, "हे भगवान ! कि मैं आज भी उसे पहले जितनी सुंदर लगूं."

दरवाजा खुला और जिम ने अंदर आ कर इसे बंद कर दिया. देखने में वह पतला और गंभीर था. बेचारा, सिर्फ बाईस साल का था और इसी उम्र में भी एक परिवार का बोझ उसके कांधों पर था. उसे एक नये ओवरकोट की जरूरत थी और हाथों पर दस्ताने भी थे नहीं.

दरवाजे के सामने जिम रुक कर ऐसे निश्चल खड़ा हो गया जैसे बटेर की गंध पाके शिकारी कुत्ता. उसकी दृष्टि डेला पर टिकी थी और उसकी आंखों में जो भाव आया था, जिसे डेला समझ नहीं पायी. वह भयभीत हो गयी. जिम को न गुस्सा था, न आश्चर्य, न ही अस्वीकृति, न सदमा. ऐसा कोई भाव नहीं था जिस के लिये वह तैयार थी. बस वह उसी भाव से टकटकी लगा कर उसे घूर रहा था.

डेला टेबिल के पीछे से खिसक कर जिम के पास पहुंची.

"प्रिय जिम!" डेला चिल्लायी, "मुझे एसे मत घूरो. मैंने अपने बाल कटवा कर इस लिये बेच दिये कि मैं तुम्हे एक अच्छा-सा उपहार दिये विना नहीं रह सकती. मेरे बाल फिर बड़े हो जाएंगे. मेरे बाल तेजी से बढ़ते हैं. आप बुरा मत मानो. मुझे बस यह सब करना पड़ा. चलो, अब खुश होकर एक बार 'मेरी क्रिसमस!' कहो. तुम्हें पता नहीं है मैं तुम्हारे लिए कितना सुंदर उपहार लायी हूं!"

जिम ने हिचकिचाते हुए पूछा, "क्या तुम ने बाल कटवा दिये?” जैसे कि कठिन मानसिक उलझन के कारण अभी भी मुद्दा समझ नहीं पाया.

डेला ने जवाब दिया, "हां, जिम, कटवा कर बेच भी दिये. क्या मैं तुम्हें ऐसे अच्छी नहीं लगती हूं ? मैं बालों के विना भी वही डेला हूं, न?"

जिम अचरजता से कमरे की चारों तरफ निहारता था. बेवकूफ का सा फिर सवाल पुछा, "तुम कहती हो कि तुम्हारे बाल चले गये ?"

"ऐसे ढूंढ़ने का कोई लाभ नहीं,” डेला ने कहा, “बताया हूं, बेच दिये. बिक चुके हैं. बस खतम. आज क्रिसमस की शाम है, जिम. दया करो, मेरे साथ अच्छी बातें करो, क्योंकि ये बाल मैं ने तुम्हारे लिए कटवाये हैं. शायद मेरे सिर के बाल गिने जा सकते हैं..." गभीर होकर मधुरता से कहने लगी. "लेकिन मेरे प्यार की गिनती कोई नहीं कर सकेगा... क्या अभी खाना चढ़ा दूँ, जिम ?"

जिम जैसे बेहोशी से एक दम जागा हो. उस ने उठ कर डेला को अपने बांहों में भर लिया. दस सेकंड के लिए हम किसी दूसरी तरफ ध्यान दें और कुछ अलग तरह से विचार करें. देखिये, हफ्ते में आठ डलार या वर्ष मैं एक करोड़, इस से क्या फ़र्क पड़ता है ? कोई गणितज्ञ या वाक्पटु व्यक्ति गलत की जवाब देगा.

जो मागोइ जेसू के पास आये थे, वे मूल्यवान उपहार लाये थे, पर उनके उपहारों में ये सब नहीं था. इस गंभीर रहस्य पर हम बाद में रोशनी डालेंगे.

जिम ने अपने ओवरकोट की जेब से एक पैकेट निकाला और मेज पर फेंक दिया.

"मुझे गलत मत समझो, डेल," उसने कहा, "तुम्हारे बाल कटवाने, गंजी हो जाने या शैम्पू करने से मेरा तुम्हारे प्रति प्रेम कम नहीं होता. लेकिन अगर तुम यह पैकेट खोलोगी, शायद तुम समझ जाओगी मैं क्यों घबराया."

सफेद फुर्तीली उंगलियों के द्वारा डेला स्ट्रिंग और कागज फाड़ने लगी. फाड़ते ही खुशी की लहर दौड़ गयी और फिर हाय! क्षण भर बाद औरतों की तरह आँसू और रोना-धोना शूरु हो गया. जिस के कारण उनकी सान्त्वना देने के लिये गृह स्वामी को अपनी सारी शक्तियों का प्रयोग करना पड़ा.

क्योंकि, पैकट में उन कंघियों का सेट था, जिन्हें डेला काफी समय से ब्रॉडवे की एक दुकान की खिड़की में देख कर पाने की कामना करती थी. उसके सुंदर बालों में दायें-बायें और पीछे लगाने वाली कंघियां, असली कछुए के खोल से बनी और रत्नों से सुसज्जित थीं. बस उतनी सुंदर जितने उसके गायब हुए बाल. वे कंघियां महंगी थीं, डेला जानती थी. इन कंघियों के पाने की लेश मात्र उम्मीद नहीं होने के बाद भी, उसका दिल उनके लिये कितना तरसता और लालायित रहता था. और अब, वे उसकी थीं, लेकिन इनसे सजाने संवारने वाले बाल जा चुके थे.

डेला ने इन कंघियों को छाती से लगा लिया और भरी हुई आँखों से ऊपर देख कर मुस्काते हुए बोली: "जिम, मेरे बाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं !"

अचानक डेला छोटी बिल्ली की तरह उछल कर चिल्लायी, "ओह, ओह !" जिम ने अभी तक उसका सुंदर उपहार नहीं देखा है. डेला ने उत्सुकता से उसे अपनी हथेली पर रखा था. यह कीमती धुंधली धातु डेला के जोश और उत्साह की तरह चमक रही थी.

"वाकई यह अति सुंदर है न, जिम ? इसके लिये मैंने पुरा शहर छान मारा. अब आप दिन में सौ बार घड़ी में समय देख सकते हो. घड़ी दो मुझे. मैं देखना चाहती हूं कि यह चेन उस पर कैसी लगती है."

उसकी बात मानने के बजाय जिम ने सोफे पर गिर कर अपने हाथों को सिरे के पीछे रख लिया और मुस्कुराने लगा.

"डेल," उसने कहा, "चलो, कुछ देर के लिये अपने क्रिसमस के उपहार एक तरफ रख दें. ये बेश कीमती चीजें हैं जो अभी इस्तेमाल नहीं कर सकते. मैं ने तुम्हारी कंघी खरीदने के लिए अपनी घड़ी बेच दी. अब तुम शायद खाना बना सकती हो."

मागोइ दूरदर्शी लोग थे, जैसे आप सब जानते होंगे, कितने दूरदर्शी थे वे. वे चरनी के शिशु के लिए तोहफे लाये थे. इस तरह उन्होंने क्रिसमस के समय तोहफे देने की प्रथा को जन्म दिया. दूरदर्शी होने के नाते, उनके उपहार निःसंदेह उपयुक्त थे, संभवतः किसी उपहार के दो बार मिलने पर अदला-बदली करने का अधिकार भी मिल जाता था. और यहाँ मैं ने आप के लिए असंतोषजनक ढंग से एक फ्लैट में रहनेवाले दो मूर्ख बच्चों की कथा सुनायी, जिन्होंने बड़े भोलेपन से एक दूसरे के लिये अपने घर की सब से बड़ी सम्पत्तियां न्यौछावर कर दी.

लेकिन समझदार और दूरदर्शी लोगों के लिए एक अंतिम वाक्य कहा जाए, कि दुनिया के समस्त उपहार देनेवालों में से यह जोड़ी समझदार और दूरदर्शी है. हे साधु जन! मेरी सुनिये ! सर्वत्र सर्वदा ऐसे लोग सब से समझदार और दूरदर्शी उपहार देने वाले हैं. मागोइ वे ही हैं.


The Gift of the Magi by O. Henry. Translated by Jagat and Vivek Arya.

Wednesday, August 25, 2010

श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.६२-६४


बरसाना (Photo from Lake of Flowers).




प्रसीद श्रीवृन्दावन वितनु मां स्वैकतृणकं
यदङ्घ्रिस्पर्शात्युत्सवमनुभवेत्त्वय्युदितयोः ।
तयोर्गौरश्यामाद्भुतरसिकयूनोर्नवनव
स्मरोत्कण्ठाभाजोर्निभृतवनवीथ्यां विहरतोः ॥
हे वृन्दावन ! अपना एकमें क्षुद्र तृण कृपाकर मुखे दान करो, जो तुम्हारे बीच विराजमान नव नव कामोत्कण्ठयुक्त, निर्जन वनपथ में विहार करने वाले उन गौरश्यामवर्ण अद्भुत रसिकयुगल के चरणकमलों के स्पर्श का सुख अनुभव करता रहता है ॥३.६२॥




न कालिन्दीमिन्दीवरकमलकह्लारकुमुदा
दिभिर्नित्योत्फुल्लैर्मधुपकुलझङ्कारमधुरैः ।
सहालिश्रीराधामुरलिधरकेलिप्रणयिनीम्
अपश्यन् यो वृन्दावनपरिसरे जीवित स किम् ॥
नीलोत्पल, कमल, कह्लार और कुमुदिनी आदि पुष्पों से प्रफुल्लित, भंवरों की गुञ्जार से मधुर एवं जिसमें सखियों के सहित श्रीराधा-मुरलीधर केलि करते हैं, ऐसी श्रीयमुना जी के, श्रीवृन्दावन में जो व्यक्ति विना दर्शन किये जीवित रहता है, उसे क्या लाभ ? अर्थात् उसका जन्म वृथा है ॥३.६३॥




वृन्दारण्यमिलत्कलिन्दतनयां वन्देऽरविन्देन तां
नानारत्नमयेन नित्यरुचिरामानन्दसिन्धुस्रुताम् ।
रम्यां चान्यविचित्रदिव्यकुसुमैर् गम्यां न सम्यक् त्रयी
मौलीनामपि मत्तषट्पदखगश्रेणीसुकोलाहलाम् ॥
श्रीवृन्दावन से संयुक्त उस श्रीयमुना जी को मैं नमस्कार करता हूं, जो अनेक प्रकार के रत्नमय कमलों से नित्य मनोहर हो रही है, एवं आनन्द समुद्र की कन्या है, अन्योन्य विचित्र दिव्य कुसुमों से सुशोभिता है, ऋक्, साम, यजु वेदत्रय शिरोमणि भी जिसकी सम्यक् महिमा को नहीं जान सकते एवं मत्त मधुकरों तथा विविध पक्षियों के कोलाहल से मुखरित हो रही है ॥३.६४॥


Tuesday, August 24, 2010

श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.५९-६१


राधाकी मानलीला (बरसाना) (Photo from Lake of Flowers).




स्त्रीपुत्रदेहगेहद्रविणादौ मैव विश्वसीर्मूढ ।
क्षणमपि नैव विचारय चारय वृन्दारण्यमुखं चरणौ ॥
हे मूर्ख! स्त्री पुत्र देह घर सम्पत्ति आदि का विश्वास मत कर, एक क्षण भी विचार न करके श्रीवृन्दावन की ओर पांव बढ़ा ॥३.५९॥




राधाकृष्णविलासरञ्जितलतासाद्मलिपद्माकर-
श्रीकालिन्द्तटीपटीरविपिनाद्यद्रीन्द्रसत्कन्दरम् ।
जीवातुर्मम नित्यसौभगचमत्कारैकधाराकरं
नित्यानङ्कुशवर्धमानपरमाश्चर्यर्द्धि वृन्दावनम् ॥
श्रीराधा-कृष्ण के विलास से रञ्जित लतागृहों एवं तडा़ों से, श्रीकालिन्दी के किनारों पर स्थित चन्दन-वनादिकों से, एवं श्रीगिरिराज की सुन्दर सुन्दर गुफाओं से जो सुशोभित है, जो एकमें सौभाग्य एवं चमत्कार की वर्षा करता है, तथा जो नित्य स्वतन्त्र रूप से वर्धनशील परम आश्चर्य की समृद्धि से पूर्ण है, ऐसा श्रीवृन्दावन मेरी जीवन औषध है ॥३.६०॥




शरीरं श्रीवृन्दावनभुवि सदा स्थापय मनः
सदा पार्श्वे वृन्दावनरसिकयोर्न्यस्य भजने ।
वचस्तत्केलीनामनवरतगाने रमय तत्
कथापीयूषादौ श्रवणयुगलं प्रीतिविकलम् ॥
शरीर को सदा श्रीवृन्दावन भूमि में स्थिर रख, मनको श्रीवृन्दावन रसिकयुगल श्रीराधा-कृष्ण के निकट भजन में लगा, उनकी लीला गान में निरन्तर वाणी का प्रयोग कर एवं प्रेम से व्याकुल कानों को उनके कथामृत से तृप्त कर ॥३.६१॥


Monday, August 23, 2010

श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.५६-५८


बरसाने का दृश्य (Photo from Lake of Flowers).


मानापमानकोटिभिरक्षुभितात्मा समस्तनिरपेक्षः ।
वृन्दावनभुवि राधानागरमाराधये कदा मुदितः ॥
कोटि कोटि मानापमान होने पर भी क्षुभित न होकर किसी की भी अपेक्षा न करते हुए कब श्रीवृन्दावन में श्रीराधानागर की आनन्दपूर्वक मैं आराधना करूंगा ॥३.५६॥




वृन्दावनैकशरणस्त्यक्तश्रुतिलोकवर्त्मसंचरणः ।
भावाद्धरिचर्णान्तरपरिचरणाद्व्याकुलः कदा नु स्याम् ॥
अहो एकमें श्रीवृन्दावन की ही शरण ग्रहण करके वेदमार्ग एवं लौकिक समस्त आचरण त्याग कर, कब भावपूर्वक श्रीहरि के चरणों की मानसी सेवा करके मैं व्याकुल होऊंगा ॥३.५७॥




इह न सुखं न सुखमरे क्वापि वृथा न पत मोहजालेऽस्मिन् ।
अनुदिनं परमानन्दवृन्दावनं हि समाश्रयाद्यैव ॥
इस संसार में सुख नहीं है । अरे ! कहीं भी सुख नहीं है ! वृथा इस मोह जाल में मत फंस । आज ही नित्य परमानन्दमय श्रीवृन्दावन का सम्यक् प्रकार से आश्रय ग्रहण कर ॥३.५८॥


Sunday, August 22, 2010

2010-08-23 ब्रज समाचार

श्रावण में श्रद्धालुओं से ब्रज गुलजार


मथुरा (AU, August 23, 2010) । सावन की भीड़ अब ब्रज में हर ओर दिखने लगी है। रक्षाबंधन से पूर्व रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर चहल-पहल बढ़ गई है। धर्मशालाएं और गेस्टहाउस तीर्थयात्रियों से भर गए हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक मथुरा शहर ही नहीं बरसाना, वृंदावन, गोवर्धन, बलदेव व गोकुल में खासी भीड़ रहेगी।

रक्षाबंधन से पहले ही श्रद्धालुओं ने ब्रज में डेरा डाल लिया है। श्रावण के दौरान शहर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों को देखने की इनकी दिलचस्पी देखते ही बन रही है। द्वारिकाधीश मंदिर और श्री कृष्णजन्म स्थान पर हिंडोलों और घटा दर्शकों को आकर्षित कर रहीं हैं। धर्मशालाओं और गेस्टहाउस पर भी अब रौनक हो गई है। तीर्थ पुरोहित कांतानाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि शहर के ८० प्रतिशत धर्मशाला और गेस्टहाउस पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा है। पहले से ही बुकिंग हो गई है।

वहीं, रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में मिठाई का कारोबार खूब हो रहा है। रात-दिन घेवर तैयार किया जा रहा है। महंगाई के चलते घेवर के दामों में पिछली वर्ष की अपेक्षा ३० से ४० रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। मलाई और सादा घेवर की कीमत ऊंची दुकानों पर २२० रुपये प्रति किलो तक कर दी गई हैं, जबकि छोटे और कस्बाई मिष्ठान विक्रेताओं के यहां १६० रुपये किलो तक घेवर बेचा जा रहा है।

त्योहार पर वन-वे ट्रैफिक

मथुरा (ब्यूरो)। सावन में तीर्थयात्रियों की आमद पर लगा ब्रेक रक्षाबंधन से पूर्व टूटता दिखने लगा है। स्थानीय लोग भी तैयारियों में जुटे हैं। भीड़ को देखते हुए प्रमुख बाजारों में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करनी पड़ रही है। भीड़ का आलम यह है कि छत्ता बाजार में दिन के समय पुलिस को वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।

आकर्षक गिफ्ट आइटम और राखी

मथुरा (ब्यूरो)। रक्षा सूत्र बांधने पर बहनों को उपहार देने का प्रचलन जोर पकड़ने लगा है। आभूषणों से लेकर कपड़ों और खिलौने तक बहनों को गिफ्ट किए जाते हैं। यही वजह है कि आभूषण विक्रेताओं ने जहां चांदी और सोने के रक्षा सूत्र तैयार किए हैं, वहीं वस्त्र विक्रेताओं ने साड़ी, सूट, जींस और टी-शर्ट की खास रैंज प्रदर्शित की है। राखी स्पेशल के नाम से छूट भी दी जा रही है। गिफ्ट आयट्म विक्रेता भी इस दौड़ में पीछे नहीं।



श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू


मथुरा (AU, August 23, 2010) । श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव समिति और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ३० अगस्त से श्रीकृष्ण जन्मस्थान रंगमंच पर वृंदावन के रासाचार्य स्वामी श्रीराम शर्मा निमाई के निर्देशन में १० दिवसीय रासलीलाएं होंगी।

समिति के महामंत्री कृष्ण मुरारी बंसल, सांस्कृतिक कार्यक्रम संयोजक मूलचंद्र गर्ग, गिरीश चंद्र सर्राफ ने बताया कि जन्माष्टमी (दो सितंबर) को सांस्कृतिक कार्यक्रम, भक्ति, संगीत और पदगान आदि होंगे। मुख्य अतिथि कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानंद महाराज होंगे। इसी ही दिन शाम चार बजे शोभायात्रा भरतपुर गेट से होलीगेट, छत्ता बाजार, विश्रामघाट, मंडी रामदास होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पहुंचेगी। छह को भगवान कृष्ण को छप्पन भोग का प्रसाद लगाया जाएगा।



रौद्र रूप लेने लगी कालिंदी


मथुरा/वृंदावन/कोसीकलां ा (AU, August 23, 2010) । यमुना अब रौद्र रूप में आने लगी है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में हुई वर्षा के पानी का दबाव मथुरा की सीमा में बढ़ गया है। पूर्व में छोड़ पानी निकल भी नहीं पाया कि रविवार को ताजेवाला बांध से ३.०४ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया। यह पानी पांच दिन बाद मथुरा में बाढ़ के हालात पैदा कर सकता है। वृंदावन के कुछ निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे ऊपर नौहझील और शेरगढ़ के खादरों में भी यमुना ने फसल को बहा दिया है।

यमुना में एक सप्ताह से ४० हजार ५०० क्यूसेक के आसपास पानी प्रवाहित हो रहा है। पांच दिन पूर्व ६६ हजार क्यूसेक पानी ओखला डैम से छोड़ा गया। यह पानी शनिवार रात से मथुरा की सीमा में है। इससे यमुना के किनारे निचले इलाकों में पानी भरने लगा है। रविवार दोपहर एक बजे मथुरा में यमुना का जल स्तर १६९.९७ था। शाम छह बजे १६९.९८ हो गया। वह खतरे के निशान से मात्र २२ सेमी नीचे है जबकि वर्तमान में यमुना चेतावनी निशान से ७७ सेमी ऊपर है।

जिला प्रशासन ने बढ़ते पानी के खतरे को देख निचले इलाकों में बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को मुनादी करा दी है। आधा दर्जन स्थानों पर बाढ़ चौकियां स्थापित करा दी हैं। गोकुल बैराज के सभी २२ गेट रविवार दोपहर खोल दिए गए। बाढ़ राहत प्रभारी एडीएम (वित्त व राजस्व) ज्ञानेश कुमार ने बताया कि हरियाणा स्थित ताजेवाला हेड से रविवार को ३.०४ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इसका असर मथुरा में पांच दिन बाद देखने को मिलेगा। इसके लिए यमुना किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा है।

वृंदावन संवाददाता के अनुसार दो दिन से जलस्तर तेजी के साथ बढ़ा है। यमुना किनारे बसी कालोनी कालीदह घाट, सूरज घाट, जुगल घाट, पानी घाट, दुर्गापुरम, यमुना नगर कालोनी के कुछ क्षेत्र इसकी चपेट में आ गए हैं। इससे सैकड़ों लोगों घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। कई आश्रम और गौशालाएं भी जलमग्न हो गईं हैं।

कोसीकलां संवाददाता के अनुसार प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए आधे-अधूरे इंतजाम किए हैं। किसानों का कहना है कि यमुना में पानी का चढ़ाव प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रहा है। क्षेत्र के गांव रामपुर, बढ़ा, मंझोई, शाहपुर, पीरपुर, चौड़रस, धीमरी, धानौता, सिहाना की ओर पानी ने फसलों को चपेट में ले लिया है। छाता के तहसीलदार कुलदेव सिंह ने अधीनस्थों के साथ यमुना से प्रभावित होने वाले गांवों का जायजा लिया। बाजना संवाददाता के अनुसार नौहझील के आसपास खादर में पानी बढ़ गया। निचले इलाकों में झोपड़ी डूब गई हैं।



रजवाहों में पानी हो गया ओवर फ्लो


कोसीकलां। बरसात के साथ रजवाहे और ड्रेन उबल पड़े। हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई। कोसी क्षेत्र के गांवों में तबाही का मंजर पैदा हो गया है। धान की फसल नष्ट हो गई। चारे और ईंधन का भी अभाव पैदा हो गया है।

बठैनकलां, बठैनखुर्द, सुरवारी, जाब, धर्मनगर, पीपरवाला, सिरथला, पूठरी, कांमर, गढ़ी बरवारी आदि में भारी बारिश के बाद जलभराव हो गया है। खेतों का पानी सड़क को काटकर गांव की ओर रुख करने लगा है। जलभराव के बाद रजवाहों में पानी ओवर चल रहा है। ग्रामीणों के अनेक मकान भी धराशाई हो गए हैं। बुर्जी-बिटौरे नष्ट होने से चारे और ईंधन का संकट पैदा होने लगा है। खेतों में खड़ी धान की फसल की पानी की भेंट चढ़ जाएगी। ग्रामीण का कहना था कि जैसे-तैसे कर्ज लेकर उन्होंने धान की पौध की रोपाई की थी। यही स्थिती रही तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।



आधा दर्जन गांवों को पानी ने घेरा


मथुरा । बरसात से क्षेत्र के निचले इलाके वाले करीब आधा दर्जन गांवों के हालात बिगड़ सकते हैं। बरसाती पानी खेतों को डुबोकर गांवों के आसपास आ गया है। पशुओं के बांधने से लेकर दैनिक कार्यो के लिए भी कोई स्थान नहीं बचा है। आगे और बरसात हुई तो हालात बेकाबू होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

काफी इंतजार के बाद आई बरसात से मौसम जरूर सुहाना हो गया है लेकिन तराई वाले इलाकों में हालात बद से बदतर होने की कगार पर हैं। गांव लालपुर, कामर, सिरथला, बठैनकलां, बठैन खुर्द, हुलवाना आदि करीब आधा दर्जन गांव बरसाती पानी की चपेट में आ चुके हैं। इनके पड़ोसी गांवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन गांवों से पानी निकासी के इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं। यहां पानी खेतों को ड़ूबोता हुआ गांवों तक पहुंच गया है। फिलहाल पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर हो रही बरसात से यहां खेत खलिहान पानी से लबालब हो गए हैं। सैकड़ों एकड़ फसल बरसाती पानी की चपेट में आ चुकी है।



अब खतरा ही खतरा


मथुरा । यमुना की त्यौरियांच्चढ़ने के साथ ही मथुरा में रविवार को खतरे का 'सायरन' बज ग या। लगातार उफनती जा रही यमुना के तेवर देख प्रशासन ने तटवर्ती इलाके में मुनादी करवा दी। गांवों को खाली करने की सलाह के साथ ही उनके अस्थाई ठिकाने भी बना दिये हैं। अगले दो दिन खतरे की घंटी और तेज होने की आशंका जताई गई है।

यमुना में ताजेवाला बांध से लगातार चौथे दिन 3.24 लाख क्यूसेक पानी और छोडे़ जाने से मथुरा में यमुना खतरे की ओर बढ़ती जा रही है।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रमाकांत रस्तोगी के मुताबिक दिल्ली ओखला से सर्वाधिक जल रविवार सुबह 8 बजे 66003 क्यूसेक छोड़ा गया। हालांकि यमुना अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। यमुना के जल स्तर बढ़ने के साथ ही गोकुल बैराज से डिच्चार्ज बढ़ा दिया गया है।

अपर जिलाधिकारी वित्त ज्ञानेश कुमार का कहना था कि अगले दो दिन में जल स्तर में बढ़ोत्तरी की संभावना के मद्देनजर छाता, मांट, मथुरा एवं महावन तहसीलों में यमुना तटवर्ती क्षेत्र में बसे गांवों में तहसील की टीम भेजकर मुनादी करा दी गई है। बाढ़ में फंसने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर ठहराने के लिये विद्यालय चिन्हित कर लिये गये हैं।


श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.५३-५५


बरसाने का दृश्य (Photo from Lake of Flowers).





वृन्दावनमनुविन्दाम्यहमपि देहं श्वशूकरादीनाम् ।
न पुनः परत्र सच्चित्सुखमयमपि दुर्लभं देवैः ॥
श्रीवृन्दावन के कूकर शूकरादि का शरीर भी धारण करूंगा, किन्तु और जगह देवताओं के लिये भी दुर्लभ सच्चिदानन्दमय शरीर को मैं नहीं चाहता ॥३.५३॥




श्रीवृन्दावनमध्ये बहुदुःखेनापि यातु जन्मैतत् ।
लोकोत्तरसुखसम्पत्त्यापि न चान्यत्र मे निमिषः ॥
श्रीवृन्दावन में अत्यन्त दुखों में ही मेरा यह जन्म बीत जाये, तथापि अन्य स्थान पर अलौकिक सुख सम्पत्ति एक निमिष काल के लिये भी प्रार्थना नहीं करूंगा ॥३.५४॥




करतलकलितकपोलो गलदश्रुलोचनः कृष्ण कृष्णेति ।
विलपन् रहसि कदा स्यां वृन्दारण्येऽत्यकिञ्चनो धन्यः ॥
हथेली पर कपोल धर कर अश्रु पूर्ण नेत्रों से कृष्ण कृष्ण कहकर विलाप करते करते कब श्रीवृन्दावन के निर्जन स्थान पर अति दीनभाव से रहकर मैं कृतार्थ होऊंगा ॥३.५५॥


2010-08-22 ब्रज समाचार (2)

रूप गोस्वामी पाद के जीवन पर प्रकाश डाला


वृंदावन – गौडीय वैष्णवाचार्य रूप गोस्वामी पाद की तिरोभाव तिथि पर पत्थरपुरा स्थित बड़ी सुरमा कुंज में संत-विद्वत संगोष्ठी में प्रेमदास शास्त्री ने कहा कि उन्होंने भगवान चैतन्य महाप्रभु की आज्ञा पर मंत्री पद एवं धन-वैभव को त्याग दिया । वे वृंदावन चले आये ।

डा. अच्युतलाल भट्ट ने कहा कि रूप गोस्वामी का नाम स्मरण ही भक्ति प्रदायक है । महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि रूप गोस्वामी जी महाराज की कृपा से ही राधाकृष्ण की प्रेमसेवा प्राप्त हो सकती है ।

डा. शैलेंद्रनाथ पांडेय एवं पं. बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि उनके भक्तिरसामृतसिन्धु तथा उज्ज्वलनीलमणि भक्तिरस के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ हैं ।

संगोष्ठी में महंत सच्चिदानंद दास, स्वामी जगन्नाथानंद, डा. विनोद बनर्जी, गिरिराज शास्त्री उपस्थित थे ।



श्रद्धालुओं ने लगाई गिरिराज परिक्रमा


गोवर्धन (AU 2010.08.21)। श्रावण के अंतिम शनिवार को श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह उमंग के साथ सप्तकोसी परिक्रमा लगाते एवं प्राचीन नारद कुंड स्नान किया ।

स्नान एवं परिक्रमा के बाद श्रद्धालुओं ने प्रमुख मंदिरों में झूले के दर्शन किए एवं पूजा अर्चना की । गिरिराज महाराज की जय-जयकार से संपूर्ण परिक्रमा मार्ग गुंजायमान हो उठा । राधा कुंड और नारद कुंड पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी ।

नारद कुंड स्नान के बाद शनिदेव की भक्ति भावना के साथ पूजा अर्चना की । इस दौरान बस स्तैंड बिजली घर, सौंख अड्डा पर सड़क निर्माण कार्य के कारण परेशानि का सामना करना पड़ा । एकादशी होने के कारण गिरिराज मुखारविंद मुकट, दान घाटी, नंदबाबा, प्राचीन मंदिर राधा श्यामसुंदर, देवकी नंदन जी महाराज, विश्वकर्मा मंदिर आदि में ठाकुर जी ने झूलों में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए ।



व्रजविभूति थे देवरहा बाबा


वृंदावन – योगी सम्राट देवरहा बाबा की २०वीं पुण्यतिथि पर सभा का आयोजन दावानल कुंड पर किया गया । रामजानकी ट्रस्ट द्वारा संत मधुसूदन दास त्यागी के सांनिध्य में हुई सभा में गोपाल लाल शर्मा ने कहा कि देवरहा बाबा ब्रज विभूति थे । राजकुमार मूदड़ा और त्रिलोकीनाथ ने कथा कि बाबा महाराज के दर्शन मात्र से प्राणी का कल्याण हो जाता था । अवधबिहारी दास और संतोष रस्तोगी ने बताया कि वह सभी संप्रदायों का सम्मान करते थे ।



आया सावन झूम के पर थिरके पांव


अग्रसेन मानव सेवा महिला प्रकोष्ठ का आयोजन
अग्रवाल सभा महिला समिति ने मनाया तीज महोत्सव


मथुरा । हरियाली तीज का खुमार अब तलक महिलाओं पर छाया हुआ है । महिला संगठन पर्व का जश्न धूमधाम से मना रहे हैं । सावन के गीत और मल्हार के मध्य सांस्कृतिक कार्यकर्मों से जश्न में चार चांद लगाए जा रहे हैं ।

अग्रसेन मानव सेवा महिलाओंका प्रकोष्ठ का कार्यक्रम आया सावन झूम के चित्रकूट मसानी पर आयोजित किया गया । शुभारंभ मुख्य अतिथि निर्मल अग्रवाल ने राधा-कृष्ण की छवि के समक्ष दीप प्रवलित कर किया ।

इस मौके पर महिलाओं ने नृत्य किया और प्रतियोगिताओं में भाग लिया । साथ ही लकी ड्रा निकाला गया । सावन के गीत लिखो, बाल उठाओ टब में डालो, सब्जी ढूंढो, बरसात में छाता लगाकर चलो जैसी रोचक प्रतियोगिताएं आयोज्ज्त हुईं ।

श्री अग्रवाल सभा महिला समिति का हरियाली तीज महोत्सव रंगारंग कार्यक्रमों के मध्यम मनाया गया । इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि बीना अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया । महिलाओं ने राधा कृष्ण की अनूठी प्रस्तुतियां दीं । इस अवसर मीरा मित्तल ने हास्य प्रद प्रस्तुति दी जिसे श्रोताओं ने बेहद सराहा ।

इस मौके पर श्रोताओं को सावन के महत्त्व से रूबरू कराया गया । इस दौरान आयोजित किचन चैंपियन शो में संगीता अग्रवाल को विजेता घोषित किया गया ।



भागवत मोक्ष के साधनों में सर्वश्रेष्ठ


वृंदावन –



भागवत मोक्ष के साधनों में सर्वश्रेष्ठ


वृंदावन – श्रीराधा सर्वैश्वर भगवान के प्रथम पाट्योत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में महामंडलेश्वर राधामोहन दास ने कहा कि भागवत मानस के मोक्ष और कल्याण के साधनों में सर्वश्रेष्ठ है ।

श्रीराधा सर्वैश्वर पीठ आश्रम पर महाराज जी ने कहा कि मन को भागवत परायण बनाने के लिए गुरुदेव के वचनों में निष्ठा, संतों क् समागम और ग्रंथों का श्रवण-कीर्तन करना चाहिये । यदि हम भगवान के चरणों में सुख की अनुभूति कर लें तो भगवान गोवर्धननाथ की सहज प्राप्ति हो जाएगी ।

उन्होंने कहा कि भजन मोक्ष प्राप्ति का एक ऐसा सशक्त माध्यम है । इसमें बड़ी से बड़ी से आसुरी शक्तियां भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती हैं । इस मौके पर उन्होंने कथा में भगवान के सभी अवतारों की विस्तार से व्याख्या की ॥



सच्चे मन से करें प्रभु की उपासना


वृंदावन – यदि हमें भगवान की उपासना सच्चे मन से करनी है तो हमें आचरण, व्यवहार और खानपान शुद्ध और सात्त्विक रखना होगा । मन, वचन और कर्म से हमें पूर्णरूपेण सात्त्विक आचरण करना होगा । तभी हम भगवान उपासना के अधिकारी हो सकते हैं । ये वाक्य रमणरेति स्थित पद्मश्री स्वामी रामस्वरूप शर्मा के लीला पंडाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ से भागवताचार्य डा. बड़े ठाकुर ने प्रवचन के दौरान कहे ।

कथा के पश्चात मुख्य यजमान एसएन शर्मा ने पत्नी मनोरमा शर्मा सहित भागवतजी का पूजन-अर्चन किया । इस अवसर पर तोताराम उपाध्याय, ब्रजमोहन खांडल, रतनलाल, सुरेशचंद्र शर्मा, मनीष शुक्ला, दिनेश मनी, नित्यानंद शर्मा, शांति शर्मा, ब्रजभूषण अरोड़ा आदि थे ॥