Saturday, July 31, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.८८-९०


Photo by Gopi Dasi.

अहो पतितमुत्तरोत्तरविवर्धमानभ्रमौ
महारयमहोज्ज्वलप्रणयवाहिनीस्रोतसि ।
किशोरमिथुनं मिथोऽवशविचित्रकामेहितं
करोत्यहह विस्मयस्थगितमेव वृन्दावनम् ॥

अहो ! महावेगवती महा उज्ज्वल प्रणय नदी के स्रोत में उत्तरोत्तर क्रमशः वृद्धि प्राप्त आवर्त में निपतित श्री युगल किशोर परस्पर विवश होकर विचित्र काम चेष्टाओं का प्रकाश कर रहे हैं । अहह ! श्रीवृन्दावन उन्हें विस्मय विमुग्ध ही कर रहा है ॥२.८८॥





क्व यानं क्व स्थानं किमशनमहो किं नु वसनं
किमुक्तं किं भुक्तं किमिव च गृहीतं न किमपि ।
मिथः कामक्रीडारसविवशतामेत्य कलयत्
किशोरद्वन्द्वं तत् परिचरत वृन्दावनवने ॥२.८९॥

कहां यान वाहनादि है और कहां स्थान है ? क्या भोजन है, क्या वस्त्र है ? और क्या कहा, क्या खाया, क्या ग्रहण किया ? इन सब में किसी के प्रति कुछ भी लक्ष्य न रख कर परस्पर काम क्रीडा रस में ही जो श्री युगल किशोर विवश हो रहे हैं, श्रीवृन्दावन में उन्हीं की परिचर्या कर ॥२.८९॥





केशान् बध्नन्ति भूषां विदधति वसनं वासयन्त्याशयन्ति
वीणावंश्यादिहस्ते निदधति नटनायादराद्वादयन्ते ।
वेशाद्यर्द्धिं च कर्तुं कथमपि नितरामालयः शक्नुवन्ति
श्रीराधाकृष्णयोरुन्मदमदनकलोत्कण्ठयोः कुञ्जवीथ्याम् ॥२.९०॥

सखी वृन्द कुञ्ज वीथी में उन्मद मदन कला में उत्कण्ठित श्रीराधा-कृष्ण के केशों को बांधता हैं, भूषणों को सजाती हैं, वस्त्र पहिराती हैं । भोजन कराती हैं, वाणी वंशी आदि श्रीहस्त में धारण कराती हैं । नृत्य कराने के अभिप्राय से वाद्य यन्त्रों में आदर पूर्वक तान छेड़ती हैं, एवं किसी भी प्रकार वेश भूषादि की शोभा समृद्धि के लिये अतिशय यत्नवती होती हैं ॥२.९०॥



2010-08-01 ब्रज का समाचार

मायूस राधा को रिझाने मयूर बने कान्हा


मथुरा (DJ 2010.08.01)। संसार के सामने एक बार फिर राधा-कृष्ण की लीला जीवंत होगी, जहां श्रीकृष्ण को इस बार राधाजी नहीं बल्कि पूरा संसार रिझाना होगा और नृत्य की जगह बरसाना की मोरकुटी नहीं राष्ट्र मंडल खेल का मैदान होगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं मयूर नृत्य की। द्वापर युग में कान्हा ने अपनी प्रिया को रिझाने के लिए मोरकुटी पर मयूर नृत्य किया था।

हिंदुस्तान की सरजमीं पर होने वाले राष्ट्र खेलों के आगाज को यादगार बनाने को ब्रजभूमि के पारम्परिक मयूर नृत्य को यूं हीं तरजीह नहीं मिली। यही वह नृत्य है जो द्वापर युग में हुए भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासलीला को जीवंत करेगा। दरअसल देश-विदेशों में बेहद लोक प्रिय मयूर नृत्य की उत्पत्ति मथुरा मंर बरसाना की प्राचीन पहाड़ी पर स्थित मोर कुटी से हुई।

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और ब्रषभान दुलारी राधारानी के प्रेम मिलन की लीलाएं होती थीं। एक दिन राधा जू की इच्छा मयूर को नाचते हुए देखने की हुई। उस समय मयूर विचरण का सबसे बड़ा केन्द्र बरसाना की मोरकुटी थी, सो राधा अपनी सखियों के साथ मोरकुटी पर पहुंची। काफी देर तक घूमने के बाद भी राधा जी को कोई मयूर नाचते हुए नहीं मिला।

इससे राधा जी निराश मन से लौटने लगीं। कन्हैया अपनी प्रिय राधा को निराश नहीं देखना चाहते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने सुन्दर मयूर का रूप धारण किया और नृत्य करने लगे। अचानक एक मयूर को देख राधाजी की खुशी का ठिकाना न रहा और उन्होंने जी भर कर मयूर को नाचते हुए देखा। मयूर नृत्य देखते-देखते वह इतनी खो गयीं कि खुद भी नाचने लगीं। आज भी बरसाना की मोरकुटी पर मोरों का विचरण खूब होता है। मोरकुटी भी मयूर नृत्य के लिए प्रसिद्ध है।

मयूर नृत्य को कला और संस्कृति के मंच पर आए हुए अभी करीब ढाई सौ साल ही हुए हैं। जब यह नृत्य होता है तो मानो द्वापर युग जीवंत हो उठता है। अब तो मयूर नृत्य ब्रजभूमि से निकलकर देश-विदेशों में भी धूम मचाए हुए है।



पंचमी : भाई से छिपाई कथा करील को सुनाई


मथुरा (DJ 2010.08.01)। अग्रवंश की महिलाओं ने शनिवार को भईया पंचमी का पर्व श्रद्धा, हर्ष एवं भक्ति के साथ मनाया। भक्ति से सराबोर स्त्रियों ने शुक्रवार को बनाए पकवानों एवं धूप-दीप संग करील का पूजन किया तथा कथा सुनाकर कुल की रक्षा व सम्पन्नता की प्रार्थना की।

अग्रवाल वंश में सर्व मान्य पंचमी पर्व की प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाते हुये महिलाओं ने शुक्रवार को अनेक प्रकार के व्यंजन तैयार किय। उन्हें शुद्ध एवं सुरक्षित रखा। जब शनिवार को सूर्य उदय हुआ तो महिलाओं का रुख करीलों की ओर हो गया। करीलों का विधि-विधान से पूजन किया। जो कथा भाइयों से छिपाई जाती है उसे करील को सुनाया। मान्यता है कि उस कथा को भाईयों को सुनाने पर उनकी उम्र कम हो जाती है। प्रार्थना की कवि व भाईयों की रक्षा करें। महिलाओं ने प्राचीन मान्यता के अनुसार करील के नीचे सर्पो का निवास होने का विश्वास करते हुये शुक्रवार को तैयार किया भोजन परोसा।

हजारों महिलाओं ने शहर में यमुना किनारे स्थित प्राचीन नाग टीले पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। नागराज पर दूध चढ़ाया तथा कुल की रक्षा के लिये याचना की।



बच्चों में जगाया जाएगा सेवा भाव


मथुरा (DJ 2010.08.01)। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं में सेवा भाव जगाया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में नियमित स्काउट गाइड की प्रार्थना कराई जाएगी। शिक्षक नियम और प्रतिज्ञा भी पढ़कर सुनाएंगे।

बच्चों में सेवा भाव की भावना लगातार कम हो रही है। उनको दूसरे के प्रति समर्पित करने के साथ-साथ उनकी सेवा करने के लिए अब बेसिक शिक्षा परिषद के सभी स्कूलों में स्काउट गाइड की प्रार्थना, नियम और प्रतिज्ञा का सहारा लिया जाएगा। अभी तक जिले और ब्लॉक स्तर पर तैनात शिक्षक महीने में एक बार ही एक स्कूल में पहुंच कर बच्चों को स्काउट गाइड की जानकारी दे पा रहे थे।

हालांकि हर गुरुवार को स्कूलों में स्काउट गाइड दिवस मनाये जाने के पहले से ही निर्देश है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि स्काउट गाइड दिवस के नाम पर केवल औपचारिकता ही पूरी की जा रही थी। इस मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। हाल ही में शासन ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि सभी स्कूलों में स्काउट गाइड की नियमित प्रार्थना कराई जाए। शिक्षक रोजाना बच्चों को नियम और प्रतिज्ञा पढ़कर सुनाए।



थाली में आयेंगी यूरोपीय सब्जियां


मथुरा (DJ 2010.08.01)। ब्रजवासी अब यूरोपीय सब्जियों का रसास्वादन कर सकेंगे। आपकी थाली में यह सब्जियां आपकी जेब पर भी शायद ज्यादा भारी न पड़ें। देशी सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसानों को अब यूरोपियन सब्जियां पैदा करना सिखाया जाएगा।

कृषि विविधीकरण परियोजना में जिले के सभी दस ब्लॉकों में चार-चार गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में सब्जी, फूल, मशरूम और मसालों के उत्पादन का बढ़ावा देने के लिए 0.1 हेक्टेयर में उद्यान विभाग फसलों के डेढ़ हजार प्रदर्शन कराएगा। प्रदर्शन वाले खेतों पर ही दूसरे गांवों के किसानों को बुलाकर फसलों की तकनीकी जानकारी दी जाएगी। प्रदर्शन, किसान प्रशिक्षण एवं कृषि निवेश पर करीब 46 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

खरीफ में लौकी, तोरई, करेला, पेठा, भिंडी और रबी में टमाटर, फूल गोभी, बंद गोभी, फ्रेंचबीन की फसलों के प्रदर्शन कराएं जाएंगे। मसालों में प्याज, लहसुन और मिर्च के प्रदर्शन होंगे। फूलों में गुलाब, रजनीगंधा और ग्लोडियोलस की खेती कराई जाएगी। सबसे ज्यादा जोर यूरोपियन सब्जियों के उत्पादन पर दिया जाएगा। यूरोपियन सब्जियों में बेबीकॉर्न, ब्रोकली, ब्रूसेल्स और चेरी टमेटो के प्रदर्शन कराए जाएंगे।


2010-07-31 ब्रज का समाचार

खूबसूरती के दीदार पर झाड़ियों का पर्दा


मथुरा (DJ 2010.07.30)। करोड़ों खर्च करके जिस कुसुम सरोवर को सजाया संवारा गया उसी का दीदार मुड़िया मेले में आये श्रद्धालु नहीं कर सके। यहां व्यवस्था के नाम पर झाड़ियों का पर्दा लगा दिया गया।

गोवर्धन में मेला की व्यवस्था के नाम पर पर्यटकों के साथ कितना बड़ा अन्याय किया गया यह देख हर कोई हैरान है, लेकिन है अफसोस कि प्रशासन में इस गम्भीर मसले पर पत्ता तक नहीं हिला। दरअसल पिछले दिनों गोवर्धन में लगे मुड़िया पूर्णिमा मेला में देश के तमाम राज्यों से लाखों पर्यटक यहां आये। इनके यहां आने का मकसद यही था कि गिरिराज महाराज की नगरी में परिक्रमा कर यहां धार्मिक और ऐतिहासिक प्राचीन स्थलों का दीदार किया जाए। इसी लिहाज से यहां के तमाम छोटे बड़े मंदिर और इमारतें सजाई गई थीं। इसी कड़ी में पुरातत्व विभाग के अधीन और पर्यटन विभाग की करोड़ों की योजना से प्राचीन कुसुम सरोवर भी पर्यटकों को रिझाने के लिए सजी थी। मौजूदा समय में कुसुम सरोवर की कलात्मक छतरियों को रात में भी कंसैप्ट लाइटों से जगमग रखा जाता है। इससे दिन के साथ-साथ रात में तो इमारत की खूबसूरती को चार चांद लग जाते हैं। व्यवस्था के चलते कुसुम सरोवर की बाहरी पांच फीट की दीवार और उसके ऊपर इतनी ऊंची ही लोहे की रैलिंग को कंटीली झाड़ियों से ढक दिया गया। इस बारे में पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा का कहना है कि इस मामले में पुरातत्व विभाग से जानकारी करेंगे। प्रशासन ने यह व्यवस्था इसलिए की थी कि कुसुम सरोवर में नहाने के लिए भीड़ न घुसे।



नहर से जबरन ले जा रहे किसान पानी


मथुरा (DJ 2010.07.30)। छाता इलाके में मानसून की बेरुखी ने किसानों को धान की फसल बचाने के लिए पानी की चोरी करने के लिए मजबूर कर दिया है। आगरा कैनाल के शेषाई रेगूलेटर पर कर्मचारियों को डरा धमका कर रात में किसान कई दिन से अपर खंड के रजवाहों में जबरन पानी ले जा रहे हैं। सिंचाई विभाग ने अज्ञात किसानों के खिलाफ पड़ोसी प्रांत हरियाणा के हसनपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

जिले में धान का सर्वाधिक उत्पादन छाता तहसील के किसान कर रहे हैं। बारिश की कमी फसल को प्रभावित कर रही है। किसानों को नहरी पानी फसल को बचाने के लिए समय पर नहीं मिल पा रहा है। परेशान किसानों ने नहर से जबर्दस्ती पानी लेना शुरू कर दिया है। पड़ोसी प्रांत हरियाणा की सीमा में पड़ने वाले शेषाई रेगूलेटर पर पिछले तीन दिन से रोजना किसान रात में जाकर अपर खंड आगरा कैनाल के रजवाहा शेरगढ़, सहार, नंदगांव, कोसी और बुखरारी के जबरन गेट खोल कर पानी ले जा रहे हैं। विरोध करने पर कर्मचारियों को डरा धमका दिया जाता है। बताया गया है कि किसान रात में तीन से चार घंटे तक जम कर बैठे रहते हैं। उनके जाने पर ही सिंचाई विभाग के कर्मचारी गेट बंद कर पाते हैं। इससे रात में लोअर खंड आगरा कैनाल को मिलने वाले पानी में कटौती हो जाती है। शेषाई रेगूलेटर पर किसानों की जोर जबर्दस्ती से लोअर खंड आगरा कैनाल के किसानों के सामने दिक्कतें खड़ी हो रही बताई गई हैं। अपर खंड आगरा कैनाल के अवर अभियंता टीसी शर्मा ने बताया कि इस मामले में अज्ञात किसानों के खिलाफ पड़ोसी प्रांत हरियाणा के थाना हसनपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।



कृषि मेला में उत्पादन बढ़ाने पर बल


मथुरा (DJ 2010.07.30)। कृषि मेला में जैविक उर्वरक एवं कीटनाशकों का इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाये जाने पर बल दिया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल सुरक्षा और मृदा सुधार के उपाय बताए। मेले में 45-45 हजार रुपये की छूट पर दो किसानों को टै्रक्टर भी वितरित किए गए।

कृषि तकनीकी प्रबंध अभिकरण के तहत शुक्रवार को जवाहर बाग में कृषि मेले का आयोजन किया गया। मेला का उद्घाटन करने के बाद किसानों को संबोधित करते हुए प्रभारी जिलाधिकारी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि किसान जैविक उर्वरक एवं कीटनाशकों का इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाने पर अधिक ध्यान दें। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से सलाह मशविरा कर खेती में आधुनिक तकनीकी भी अपनाएं जाने को भी किसानों से कहा। उप कृषि निदेशक बलवीर सिंह ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुआ बताया कि बीज एवं कृषि यंत्र छूट पर दिए जा रहे हैं। किसानों से इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने को कहा। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने खरीफ फसलों की समसामयिक समस्याओं की जानकारी देते हुए उनके निदान के उपाय बताए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वाई के शर्मा ने मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए हरी खाद, नाडेप व वर्मी कम्पोस्ट और गोबर की खाद का इस्तेमाल किए जाने सलाह देते हुए किसानों को मृदा परीक्षण को नमूना लेने की तकनीकी बताई। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एएस गुजैल ने धान की फसलों में लगने वाली बीमारियों से बचने के उपाय बताए। इससे पूर्व प्रभारी जिलाधिकारी ने गांव राल और मघेरा के एक-एक किसान को कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत 45-45 हजार रुपये की छूट पर ट्रैक्टर वितरित किए।



मथुरा शहर दीपावली से पहले जगमग होगा


मथुरा (DJ 2010.07.30)। दीपावली से पहले शहर में गलियां, तिराहे-चौराहे और प्रमुख मार्ग जगमगाएंगे। पालिका परिषद सौ सेमी मास्ट लाइट नगर में प्लान के तहत लगाएगी। इसके अलावा दस हजार सीएफएल लाइट भी बस्तियों में लगेंगी।

मथुरा नगर पालिका की आमदनी बढ़ने के साथ उन्हें खर्च करने की योजना भी तैयार हो रही है।

अब नये सिरे से शहर को जगमगाने की योजना तैयार हुई है। यदि बोर्ड एकमत हुआ तो आने वाले महीनों में जो बड़ी धनराशि पालिका परिषद को मिलने वाली है, उससे सुदृढ़ प्रकाश व्यवस्था के साथ-साथ अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे।

योजना के मुताबिक शहर भर में दस हजार सीएफएल लाइट लगायी जानी हैं। ये लाइटें गरीब-दलित, पिछड़ी व मुस्लिम बस्तियों में प्राथमिकता पर लगेंगी।

योजना के मुताबिक शहर में सौ सेमी मास्ट लाइट तिराहे-चौराहे व प्रमुख मार्गो पर लगेंगी, जिनमें प्रमुख स्थल, मंदिर, यमुना के घाट आदि प्रमुख तौर पर शामिल किए जाएंगे। पालिका प्रशासन पीपीपी के माध्यम से सोलर लाइट लगवाने के प्रयास में भी है। इस संबंध में दिल्ली की कुछ कंपनियों से वार्ता भी शुरू हुई है।

नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर उपाध्याय ने बताया है कि पालिका परिषद के खाते में चार करोड़ की धनराशि सितंबर तक हो जाएगी है।




इस बार कम महिलाएं बनेंगी प्रधान


मथुरा (DJ 2010.07.30)। ओबीसी बहुल स्थानीय जनपद में इस बार महिलाओं को प्रधान के 47 आरक्षित पदों का घाटा होने जा रहा है। अनुसूचित एवं अन्य पिछड़ी जातियों के पुरुषों को उनकी कीमत पर 62 पद ज्यादा मिलेंगे। प्रधान के सामान्य पदों की संख्या भी पिछले पंचायत चुनाव की अपेक्षा पांच कम हो गई है।

पिछले और सितंबर में होने जा रहे अगले पंचायत चुनाव में प्रधान पदों के लिए लागू आरक्षण में अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ी जाति के महिला-पुरुषों के पदों की संख्या कमोबेश एक समान है। पांच वर्ष पहले हुए पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए 105 प्रधान पद आरक्षित किये गये थे तो इस बार यह संख्या 103 पर ठहरी है। अन्य पिछड़ी जातियों के महिला-पुरुषों के लिए आगामी पंचायत चुनाव में जहां 127 प्रधान पद आरक्षित किये गये हैं वहीं पिछले चुनाव में इनके लिए प्रधानों के 128 पद रिजर्व किये गये थे। आगामी पंचायत चुनाव में सामान्य महिलाओं के लिए आरक्षित 81 पद बीते चुनाव की अपेक्षा आठ ज्यादा हैं।

दोनों पंचायत चुनावों में प्रधान पद के आरक्षण में जो सबसे बड़ा फर्क दिखाई दे रहा है वह अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ी जातियों की महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग आरक्षित पदों की संख्या में है। पिछले पंचायत चुनाव में जिले की कुल 479 ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जाति महिला के 53 एवं पुरुषों के 52 प्रधान पद आरक्षित किये गये थे। आगामी पंचायत चुनाव में इसी जाति के महिला एवं पुरुषों के लिए आरक्षित प्रधान पद क्रमश: 36 एवं 67 हैं। अन्य पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए इस बार प्रधान के 45 पद आरक्षित हैं, पिछले चुनाव में यह संख्या 93 थी। आगामी पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ी जातियों के 82 पुरुष आरक्षित सीटों पर प्रधान चुने जाएंगे, वहीं पिछले चुनाव में पुरुषों के 35 प्रधान पद ही आरक्षित किये गये थे।

अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ी जातियों के महिला-पुरुषों के लिए आरक्षित प्रधान पद की संख्या में फर्क आने का बड़ा कारण चक्रानुक्रम आरक्षण ही है। पिछले पंचायत चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने पिछड़ी जाति बहुल जिलों में रैपिड सर्वे कराकर पचास प्रतिशत से ज्यादा पिछड़ी जातियों वाली ग्राम पंचायतों में प्रधान का पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया था। आगामी पंचायत चुनाव में ये ग्राम पंचायतें पुन: ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं की गई हैं।



विप्रसभा नेता चुने, शपथ ग्रहण कल`


मथुरा (DJ 2010.07.30)। अखिल भारतीय ब्राह्माण महासभा कदम्ब बिहार की इकाई का चुनाव सम्पन्न हो गया। शपथ ग्रहण समारोह रविवार को होगा।

सभा अध्यक्ष होती लाल शर्मा, उपाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण शर्मा व रमेश चंद्र गौतम, महा सचिव विपिन शर्मा, कोषाध्यक्ष चंद्र मोहन उपाध्याय, संगठन मंत्री आशा राम व मुकेश उपाध्याय, ऑडीटर पीएल शर्मा, संरक्षक राम कृष्ण मिश्र, अनुरूद्ध चौबे, हरिहर नाथ शर्मा, संत शरण, जीडी शर्मा, द्वारिका प्रसाद कटारा, एमएल शर्मा, इंद्रजीत शर्मा एवं रमेश चंद्र शर्मा को चुना गया है।


Friday, July 30, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.८५-८७


Photo by Gopi Dasi.


शुद्धानन्दरसैकवारिधिमहावर्तेषु नित्यं भ्रमन्
नित्याश्चर्यवयोविलाससुषमामाधुर्यमुन्मीलयत् ।
अत्यानन्दमदान् मुहुः पुलकितं नृत्यत् सखीमण्डले
श्रीवृन्दावनसीम्नि धाम युगलं तद्गौरनीलं भजे ॥

नित्य एक मात्र शुद्धानन्द रस समुद्र के महावर्तों में भ्रमण कारी, नित्य आश्चर्य मय अवस्था, विलास, शोभा एवं माधुर्यादि को प्रकाशित करने वाले तथा अतिशय आनन्द के आधिक्य के कारण बारम्बार पुलकित अङ्ग होकर सखी समाज में नृत्य करने वाले, श्रीवृन्दावन में विराजमान उन गौर नील वर्ण विशिष्ट श्रीयुगल किशोर का मैं भजन करता हूं ॥२.८५॥




श्रीराधापादपद्मच्छविमधुरतरप्रेमचिज्ज्योतिरेकाम्
भोदेरुद्भुतफेनस्तवकमयतनूः सर्ववैदग्ध्यपूर्णाः ।
कैशोरव्यञ्जितास्तद्घनरुगपघनश्रीचमत्कारभाजो
दिव्यालङ्कारवस्त्रा अनुसरत सखे राधिकाकिङ्करीस्ताः ॥

हे सखे! श्रीराधा के पादपद्म की कान्ति द्वारा मधुरतर प्रेम चिद्घनज्योति के एकमात्र समुद्र से उत्पन्न फेन समूहमय जिन के देह हैं, जो सर्व चतुरता पूर्ण हैं, व्यक्त किशोर अवस्था एवं तारुण्य छटा के द्वारा जिनके सुन्दर अवयव समूह परम सुन्दर तथा चमत्कार के पात्र हैं, उन्हीं दिव्यालङ्कारों तथा वस्त्रों से सुशोभित श्रीराधाजी की किङ्करीयों का अनुसरण कर ॥२.८६॥




भृङ्गीगुञ्जरितं पिकीकुलकुहूरावं नटत्केलिना
केकास्ताण्डवितानि चातिललितां कादम्बयूनोर्गतिम् ।
आश्लेषं नववल्लरीक्षितिरुहां त्रस्यत्कुरङ्गेक्षितं
श्रीवृन्दाविपिनेऽनुकुर्वदनुयाह्यात्मैकबन्धुद्वयम् ॥

श्रीवृन्दावन में भ्रमरों की गुञ्जार का, कोयल समूह के कुहू कुहू मधुर शब्द का, नृत्य परायण मोर समूह की केका ध्वनि, एवं ताण्डव नृत्य का कलहंस युगल की सुललित गति का, नवीन नवीन वृक्ष लताओं के आलिङ्गन का एवं डरे हुए हरिण समूह की नयन भङ्गिमा आदि का अनुकरण करने वाले प्राण प्रियतम युगल का अनुसरण कर ॥२.८७॥


Thursday, July 29, 2010

2010-07-30 ब्रज का समाचार

यादगार होगी आलू-टमाटर की यारी


मथुरा (DJ 2010.07.29)। कृषि वैज्ञानिकों की कसरत कारगर हुई तो एक ही पौधे पर आलू और टमाटर की यारी यादगार बन जायेगी। पोमैटो तकनीक से विकसित होने वाले इस पौधे की जड़ में आलू पैदा होगा तो तने पर टमाटर फूल कर लाल सुर्ख हो जायेगा। देश के शोध संस्थानों में पौधा तो तैयार हो गया, लेकिन पैदावार में दिक्कतों ने रफ्तार रोक दी है। कृषि वैज्ञानिक अब पोमैटो पौधे को निरोग और स्वस्थ्य बनाये रखने की मशक्कत में जुटे हैं। इस मुकाम पर पहुंचने के बाद ऐसे पौधे भी तैयार हो सकेंगे जिसकी जड़ में आलू तो तने पर बैंगन, जड़ में गाजर और उसकी पौधे पर धान की बालियां लहलहातीं नजर आयेंगी।

वर्ष 1978 में सबसे पहले जर्मनी के कृषि वैज्ञानिक मल्चर इसको अपनी परीक्षणशाला में कामयाबी का रूप भी दे चुके हैं। भारत में बेलगाम होती जा रही आबादी और कृषित भूमि के सिकुड़ते क्षेत्रफल को देखते हुये कृषि वैज्ञानिक इस वरदान को अमली जामा पहनाने में जुट गये हैं। देश के चुनिंदा संस्थानों में भारतीय वैज्ञानिक इसी तर्ज पर बायोटैक्नोलोजी और टिश्यू कल्चर का सहारा लेकर इस तकनीकी से पोमैटो पौधा तैयार भी कर चुके हैं। लेकिन पोमैटो पौधा में कुछ समस्याओं ने वैज्ञानिकों के माथे पर सिलवटें डाल दीं।

मथुरा के चौमुंहा स्थित सर्वोदय कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.वी.के गुप्ता और शस्य विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ ए के यादव का कहना है कि कुछ कारणों से ऐसे रिसर्च संस्थानों का नाम उजागर नहीं कर सकते लेकिन यह तकनीकी काफी आगे जरूर बढ़ चुकी है।



हर रोज शहर में शुरू हो रही एक नयी सड़क


मथुरा (DJ 2010.07.29)। नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर उपाध्याय ने कहा है कि शहर के किसी न किसी वार्ड में हर रोज एक नई सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो रहा है। वह हर वो वादा पूरा कर रहा हैं, जो कांग्रेस के किसी जनप्रतिनिधि ने पहले पूरा नहीं किया। जनता को केवल उन्हें अनुरोध पत्र पहुंचाना है।

चेयरमैन बुधवार को बाहरी क्षेत्र में घनी आबादी वाले पूजा एन्क्लेव में छह लाख की लागत से बनी सीसी सड़क के लोकार्पण कार्यक्रम में बोल रहे थे। पंिट्टका का अनावरण वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चौ. सरदार सिंह व नारियल तारा चंद्र गोस्वामी ने फोड़ा। स्थानीय सभासद आशा सिंह व उनके पति राजवीर सिंह के नेतृत्व में लोगों ने उनका स्वागत किया।

चेयरमैन ने कहा कि यह सड़क शुरू से ही कच्ची है, जिसका निर्माण कराने का ख्याल किसी जनप्रतिनिधि को नहीं आया। यह आश्चर्यजनक है। राजेश गौतम व स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में अन्य सड़कें व ट्यूबवेल लगवाने का ज्ञापन सौंपा। पूर्व मंत्री चौ. सरदार सिंह ने कहा कि पालिका का कांग्रेसी बोर्ड शहर में अभूतपूर्व कार्य करा रहा है, जो जन अपेक्षा के अनुरूप है।



बारिश पर भारी पड़ रही उमस


मथुरा (DJ 2010.07.29)। मानसून का मौसम बना हुआ है, पर यह इतना कमजोर है कि बारिश होने के बावजूद उमस का असर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार को भी यही हुआ। बीस मिनट की मूसलाधार बारिश के पहले और बाद में उमस ने जन मानस का जीना मुहाल किए रखा।

सुबह के समय आसमान में तैर रहे काले बादल जैसे ही उड़े, तेज धूप और उमस ने लोगों को पसीने से तर-बतर कर दिया। यह स्थिति दोपहर एक बजे तक बनी रही। इसके बाद काले बादल छाये और बीस मिनट तक जमकर बरसे। इससे लोगों को राहत मिली, लेकिन फिर से तेज धूप और उमस ने वातावरण को बेचैनी भरा कर रखा। यह स्थिति रात तक बनी रही।


Wednesday, July 28, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.८२-८४



Musicians in Radha Raman temple. Photo by Gopi Dasi.

निमिषे निमिषे महाद्भुतां मदनोन्मादकतां वहन् महः ।
द्वयमेव निकुञ्जमण्डले नवगौरासितनागरं भजे ॥

जो प्रति निमेष में महा अद्भुत मदनोन्माद प्रकाशित कर रहा है, उसी निकुञ्ज मण्डल में स्थित गौर नील वर्ण ज्योतिर्मय नागर युगल का मैं भजन करता हूं ॥२.८२॥




सिञ्चन्तौ बालवल्लीद्रुममतिरुचिरं कुत्रचित् पाठयन्तौ
शारीकीरौ क्वचित् क्वापि च शिखिमिथुनं ताण्डवं शिक्षयन्तौ ।
पश्यन्तौ क्वाप्यपूर्वागतसदनुचरी दर्शितं सत् कलौघं
तौ श्रीवृन्दावनेशौ मम मनसि सदा खेलतां दिवयलीलौ ॥

जो कहीं अति सुन्दर छोटे छोटे वृक्ष लताओं में जल सिञ्चित कर रहे हैं, और कहीं तोता मैण्ना को पाठ पढ़ा रहे हैं, कहीं मयूर मयूरी को ताण्डव नृत्य शिक्षा कर रहे हैं, तो कहीं नवागत दासी के द्वारा प्रदर्शित सुन्दर सुन्दर कला विद्या का दर्शन कर रहे हैं, इस प्रकार से दिव्य लीला विनोदी वे श्रीवृन्दावनेश्वर श्रीयुगल किशोर मेरे मन में सर्वदा क्रीड़ा करें ॥२.८३॥





नवीनकलिकोद्गतिं कुसुमहाससंशोभिनीं
नवस्तवकमण्डितां नवमरन्दधारां लताम् ।
तमालतरुसङ्गतां समवलोक्य वृन्दावने
पतिष्णुमतिविह्वलामधृत कापि मे स्वामिनीम् ॥

नवीन लता में नवीन कलिका निकल रही है, और बहु कुसुम विकाश के छल रूप हास्य से संशोभित है, वह नव स्तवक से मण्डित है, एवं उस से नव मधु धारा निसृत हो रही है, इस प्रकार की लता का तरुण तमाल वृक्ष के साथ मिलन देख कर, अति विह्वल चित्त होकर मेरी स्वामिनी श्रीवृन्दावन में मूर्च्छित होकर जब गिरने लगीं, तब किसी सखी ने उन्हें धारण कर लिया ॥२.८४॥


2010-07-29 ब्रज का समाचार

अतिक्रमण के जबड़े में पुरातात्विक खजाना


मथुरा (DJ 2010.07.28)। तमाम पुरातत्व और सांस्कृतिक प्रेमियों के लिए जानकारी का खजाना समझे जाने वाले पुरातात्विक महत्व के प्राचीन सौंख टीले की पहचान पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चारों ओर से टीले की जड़ें कमजोर करने में अतिक्रमणकारी लगे हुए हैं। इसके बाद भी अफसरों का कतई ध्यान नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि यह वही प्राचीन टीला है जहां भारत और जर्मनी के बीच समझौता होकर हुई खुदाई में नार्दन इंडिया के पहले नाग मंदिर के पुरा अवशेष मिले थे।

मथुरा से बीच मिलोमीटर की दूरी पर स्थित सौंख भले ही देखने में सामान्य कस्बा लगता हो, लेकिन इसकी पहचान देश के बाहर विदेशों में भी है, खासकर जर्मनी में तो और भी ज्यादा है। लेकिन पुरातात्विक महत्व के इस टीले की पहचान बरकरार रखने के लाले पड़ सकते हैं। टीले को चारों ओर से धीरे-धीरे टीले का कटान कर अपनी जमीनों में मिलाया जा रहा है।

यहां तैनात विभागीय कर्मचारी देखभाल करने में सक्षम नहीं है। टीले पर बढ़ती झाड़ियों के कारण सड़क किनारे से टीले को देख पाना भी आसान नहीं है। इसी का फायदा अतिक्रमणकारी उठा रहे हैं। यह हालत तो तब है जब मौका लगते ही आसपास के ग्रामीण टीले की खुदाई भी करने लगते हैं और कुछ निकलता है तो उसके बारे में बताना भी जरूरी नहीं समझते।

ऐसा विगत वर्षो में दो बार हो चुका है। एक बार कुछ सिक्के मिले थे तो दूसरी बार एक आधी क्षतिग्रस्त तलवार मिली थी। सिक्कों का मामला तो पुलिस चौकी तक पहुंचा था। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी यहां झांककर भी देखना पसंद नहीं करते।



हर रोज शहर में शुरू हो रही एक नयी सड़क


मथुरा (DJ 2010.07.28)। नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर उपाध्याय ने कहा है कि शहर के किसी न किसी वार्ड में हर रोज एक नई सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो रहा है। जनता को केवल उन्हें अनुरोध पत्र पहुंचाना है।
चेयरमैन बुधवार को बाहरी क्षेत्र में घनी आबादी वाले पूजा एन्क्लेव में छह लाख की लागत से बनी सीसी सड़क के लोकार्पण कार्यक्रम में बोल रहे थे। पंट्टिका का अनावरण वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चौ. सरदार सिंह व नारियल तारा चंद्र गोस्वामी ने फोड़ा। स्थानीय सभासद आशा सिंह व उनके पति राजवीर सिंह के नेतृत्व में लोगों ने उनका स्वागत किया।

चेयरमैन ने कहा कि यह सड़क शुरू से ही कच्ची है, जिसका निर्माण कराने का ख्याल किसी जनप्रतिनिधि को नहीं आया। यह आश्चर्यजनक है। राजेश गौतम व स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में अन्य सड़कें व ट्यूबवैल लगवाने का ज्ञापन सौंपा। पूर्व मंत्री चौ. सरदार सिंह ने कहा कि पालिका का कांग्रेसी बोर्ड शहर में अभूतपूर्व कार्य करा रहा है, जो जन अपेक्षा के अनुरूप है। सभासद आशा चौधरी व राजवीर सिंह ने कहा कि भाजपा का प्रतिनिधित्व होते हुए भी चेयरमैन ने विकास कार्य कराकर सकारात्मक संदेश दिया है।



पाप-पुण्य को योग अग्नि में भस्म कर दो : जयगुरुदेव


मथुरा (DJ 2010.07.28)। संत जयगुरुदेव ने कहा है कि ईश्वर ने पाप-पुण्य का विधान बनाया है। जब सुरत निकाली जाएगी तो उसका हिसाब होगा। दुष्कर्मो की बहुत बड़ी सजा विभिन्न प्रकार के नर्को में मिलेगी। इसलिये योग अग्नि जलाओ और पाप-पुण्य दोनों को उसमें भस्म कर दो।

गुरु पर्व का समापन होने के बाद आश्रम में उपस्थित शिष्यों को प्रवचन देते हुए बुधवार को बाबा ने बताया कि आपको ध्यान रहना चाहिये कि हमें भजन करना है। सुरत को अपने घर चलने के लिये कोई काम नहीं करते।

संत ने शासन-प्रशासन से कहा है कि मंदिर के सामने फ्लाई ओवर बनाकर मंदिर की सुंदरता खराब हो जायेगी। पुल बनने से अच्छा है कि कार्यक्रम के समय रास्ता डायवर्ट कर दिया जाये। ये सड़कें बनी हुई हैं। जगह है, फिर क्यों धन खर्च करते हैं पुल बनाने में। पहले जब कहा था कि मथुरा के चारों तरफ रिंग रोड बना दीजिये कानपुर, ग्वालियर से आएंगे और उधर से होकर दिल्ली निगल जाएंगे। इसको भी बना रहने दीजिए इसमें कोई खर्चा नहीं है।

बाबा ने कहा है कि जब महोली गांव की सड़कों को बनवा रहे थे तो गांव के उस पार मिट्टी पड़ रही थी। सड़क कहां जाएगी पूछने पर बताया गया कि ये आगे मोड़ से सीधी दिल्ली रोड में मिल जाएगी। उस सड़क पर काफी मिट्टी पड़ी हुई है। लेकिन कार्य फिर बंद कर दिया। वह योजना कहां चली गई। आप अपना नाम करना चाहते हो तो आम जन को जो फायदा हो वह काम करो।



हर किसान लगाए एक कदम्ब का पौधा


मथुरा (DJ 2010.07.28)। मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से एक -एक कदम्ब का पौधा लगाए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि इसका संरक्षण भगवान श्री कृष्ण का प्रसाद समझ कर किया जाए।

जवाहर बाग में आयोजित औद्यानिक निवेश वितरण मेला में मुख्य विकास अधिकारी अजय शंकर पांडेय ने कहा कि इस बार वृहद स्तर पर कदम्ब के पौधे रोपने की तैयारी की गई थी, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि इतने पौधों का इंतजाम नहीं हो पाया, लेकिन अगले साल कदम्ब के पौधों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने किसानों से कहा कि वे अपने खेत पर एक कदम्ब का पौधे अवश्य लगाएं और इसकी सुरक्षा भगवान श्री कृष्ण का प्रसाद समझ कर करें।



सबक सिखा गई मूड़िया पूर्णिमा


मथुरा (DJ 2010.07.28)। आस्था के समुंदर श्रद्घालुओं के सैलाब के गोता लगाने के साथ ही इस बार मुडिया पूनो मेले पर कुछ “कलंक” भी लग गये। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के बावजूद इस मेले के दौरान शीतलकुंड और राधाकुंड में स्नान के दौरान आठ श्रद्घालु डूब गये। परिक्रमा मार्ग पर अफरा-तफरी मची रही। सड़क हादसों में कई श्रद्घालुओं की मौत हो गई। मेला तो निपट गया, लेकिन प्रशासन को कई सबक भी सिखा गया।

प्रशासन ने इस आयोजन के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। विभिन्न विभागों के अधिकारियों की फौज को कदम-कदम पर तैनात किया गया तो चप्पे-चप्पे पर इंतजाम के लिए जिम्मेदारियां सौंप दी थी। मुड़िया पूनो मेला ड्यूटी करने वाले कुछ मजिस्ट्रेटों की निगाह में अनेक ऐसी खामियां हुईं, जिनका परिक्रमार्थियों के हित में निराकरण कराया जा सकता है।

मसलन, मुड़िया पूनो मेला और पुरुषोत्तम मास जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर जब श्रद्धालुओं सैलाब उमड़ता है, इन श्रद्धालुओं की आस्था को कई मंदिर भुनाने में लगे रहते हैं। लाउडस्पीकरों पर एनाउंसमेंट किया जाता है कि उक्त मंदिर के दर्शन जरूर करें अन्यथा यात्रा पूर्ण नहीं होगी। इसका सबसे सटीक उदाहरण मानसी गंगा मंदिर है।

मानसी गंगा में मेले के दौरान आठ श्रद्धालुओं की डूबकर मौत हो गयी। हालांकि मानसी गंगा स्नान के लिए प्रशासन ने फब्बारों की व्यवस्था की थी। लेकिन मंदिर पर भीड़ का दबाव बना रहा। मानसी गंगा मंदिर उन अन्य मंदिरों में एक है जहां एनाउंसमेंट होता है।

इसी तरह राधा कुंड में भी दो लोगों की डूबकर मौत हुई। अधिकारी के मुताबिक, यह एनाउंसमेंट रोका जाना चाहिये।



तीन सौ पचास बीघा धान डूबा


मथुरा (DJ 2010.07.28)। नहरों की कमजोर पटरियों ने किसानों की बर्बादी की कहानी फिर लिखना शुरू कर दी है। रही सही कसर सिंचाई विभाग के अफसर पूरी कर रहे हैं। सुरीर माइनर की पटरी को टूटे हुए तीन दिन हो गए, लेकिन अभी तक कोई भी अफसर पटरी को बंद कराने के लिए नहीं पहुंचा। नगला जगरूपा के किसानों के साढ़े तीन सौ बीघा धान डूब गए। पानी मकानों से लग गया है। कभी भी गांव में घुस सकता है।

दैनिक जागरण ने पहले ही सिंचाई विभाग के अफसरों और किसानों को आगाह किया था कि नहरों की कमजोर पटरियां टूट कर खरीफ की फसलों को फिर बर्बाद करेंगी। सिंचाई विभाग के अफसरों ने समय रहते नहरों की कमजोर पटरियों की मरम्मत कराए जाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

कुछ दिन पहले ही रजवाहा गौराई की पटरी टूट जाने से दर्जनों किसानों की फसल डूब गई थी। अब सुरीर माइनर की पटरी नगला जगरुपा के समीप तीन दिन पहले टूट गई। किसानों ने पटरी को रोकने के प्रयास किए, लेकिन उनको सफलता नहीं मिल सकी। तीन दिन से लगातार किसानों के खेतों में पानी चल रहा है। प्रभावित किसान सिंचाई विभाग के अफसरों को लगातार जानकारी दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी पीड़ा नहीं सुनी गयी है।


Tuesday, July 27, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.७९-८१




कलिन्दगिरिनन्दिनीतटकदम्बकुञ्जोदरे
दरेण निलिनीभ्रमान्मधुकरादि वा धावतः ।
स कृष्ण इति कृष्ण ते शरणमागतास्मीति वाक्
प्रियासु परिरम्भणादति मुमोद दामोदरः ॥

श्रीयमुना के किनारे कदम्ब कुञ्ज में नलिनी के भ्रम से दौड़ते हुए भ्रमर के भय से, “वह कृष्ण वर्ण भ्रमर मेरी ओर आ रहा है, अत एव हे कृष्ण ! मैं ने तुम्हारी शरण ग्रहण कर ली है” इस प्रकार वाक्य उच्चारण करने वाली प्रियतमा के सुन्दर आलिङ्गन से दामोदर अति प्रसन्न हुए ॥२.७९॥




श्रीवृन्दाविपिने महापरिमलप्रोत्फुल्लमल्लीवने
श्रीराधामुरलीधरावति रसोल्लासान् मिथः स्पर्शतः ।
आसीनौ कुसुमैः परस्परवपुर्भूषां विचित्रां मुहुः
कुर्वन्तौ रतिकौतुकेन विगमाल् लब्धानवस्थौ भजे ॥

श्रीवृन्दावन में महा सुगन्ध विस्तार करने वाले खिले हुए मल्लिका वन में श्रीराधा मुरलीधर अत रसोल्लास वश सम्प्रज्ञात स्पर्श कर रहे हैं । वे दोनों कुसुमों के द्वारा बारम्बार एक दूसरे के लिय विचित्र भूषण निर्माण कर रहे हैं । रति कौतुक वश उनके वस्त्र भूषण स्थान भ्रष्ट हो गये हैं, अतः वे अनवस्था को प्राप्त हो रहे हैं, ऐसे श्रीयुगलकिशोर का मैं भजन करता हूं ॥२.८०॥




श्यामानन्दरसैकसिन्धुबुडितां वृन्दावनाधीश्वरीं
तत्स्वानन्दरसाम्बुधौ निरवधौ मग्नं च तं श्यामलम् ।
तादृक् प्राणपरार्धवल्लभयुगक्रीडावलोकोन्मदा
नन्दैकाब्धिरसभ्रमत्तनुधियो ध्यायामि तास्तत्पराः ॥

श्यामानन्द रस सिन्धु में निमज्जिता श्रीराधा का तथा श्रीराधा के असीम आनन्द रस समुद्र में मग्न उस श्री श्यामसुन्दर का और कोटि प्राण से भी अत्यन्त प्रियतम उन श्रीयुगल किशोर की क्रीड़ा का दर्शन कर, उन्मत्त कारी आनन्द सागर रस में जिन के देह एवं बुद्धि घूर्णित हो रहे हैं, उन्हीं श्रीराधा कृष्ण परायण सखियों का में ध्यान करता हूं ॥२.८१॥


2010-07-28 ब्रज का समाचार

स्वर्ण- रजत हिंडोलों में झूले द्वारिका नाथ


मथुरा (2010.07.27) । मथुरा के राजाधिराज और द्वारिका के नाथ ने मंगलवार को सोने-चांदी के हिंडोलों में झोटा लेकर अपने भक्तों को आनंद रस से सराबोर किया।

प्राचीन परम्पराओं के अनुसार मंदिर सेवकों ने मंगलवार को प्रभु के तीन चल विग्रहों को सजाया। इससे पूर्व एक सोने तथा दो चांदी के हिंडोले मंदिर के जगमोहन में स्थापित किये गये। विविध अलंकरणों से सुसज्जित प्रभु के तीनों विग्रह एक-एक कर अपनी प्रिया के संग हिंडोलों में विराजमान हुये। बस फिर क्या था सेवक समुदाय में प्रिया-प्रियतम को झुलाने की होड़ लग गई। दर्शक समुदाय भी इस पुण्य को प्राप्त करने की दौड़ में शामिल हो गया।

श्रावण मास की द्वितीया में सायं काल शुरु किये गये इस झूलनोत्सव में प्रभु के अचल विग्रह का भी अपूर्व श्रृंगार किया गया। बाहर चल और अंदर अचल विग्रह के अलौकिक स्वरूप का दर्शन को हजारों महिला-पुरुषों एवं संत-महंतों की भीड़ लगी रही। मंदिर प्रागंण की शीतलता, अनेक प्रकार के पुष्पों की सुगंध तथा भजन-संकीर्तन की ध्वनियां श्रद्धालुओं के मन-मस्तिष्क भक्ति रस से आनंदित करती रही।



महात्मा के बिना स्वर्ग नहीं: जयगुरु देव


मथुरा (DJ 2010.07.27)। संत जयगुरुदेव ने कहा है, कि किसी के मरने पर शरीर को नदी में प्रवाहित करते हैं या जला देते हैं। कहते हैं, कि व अशुद्ध हो गया। स्नान कर घर आते हैं और बारह दिन तक सफाई, शुद्धि करके 13वें दिन ब्राह्माणों को भोजन कराते हैं। कहते हैं, कि स्वर्गवासी हो गया। किंतु जीवों को मारकर उसके मृत शरीर को लोग पेट में रखते हैं। इससे उनका शरीर अशुद्ध क्यों नहीं होता ? मांसाहारी के मरने पर उसे स्वर्गवासी कैसे कह दिया जाता है ? फिर आप यदि स्वर्ग के दरवाजे पर बैठे हैं, तो भी बिना महात्मा या फकीर मिले अंदर नहीं जा सकते।

गुरु पर्व के आखिरी दिन प्रवचन करते बाबा बताया मुर्दे को बाहर मिट्टी में दबाना या जलाना चाहिये न कि पेट के अंदर रखना चाहिये। बाबा ने कहा, कि यदि नहीं मानोगे तो सबको सजा मिलेगी। बाबा ने कहा कि कलियुग में महात्मा घर-ग्रहस्थी में मिलता है, इसलिये घर की देवी को देवी की तरह समझो। बाहर जाओगे तो परमात्मा नहीं मिलेगा।

संत ने कहा, कि इस शरीर की मौत होनी है। पति, पत्‍‌नी, बच्चों का मिलन बीच-बीच में हुआ, आगे-पीछे आये और बीच में ही छूट जाएंगे। देखो जब वो जाने लगेंगे कोई कुछ नहीं कर सकेगा। इसलिये धारणा बनाओ कि हमें भजन करना है। मेहनत, ईमानदारी से काम करो, बरकत आएगी और स्वर्ग जैसा सुख मिलेगा। बाबा ने कहा कि आपको कोई कुछ कह दे, तो उसके पैर छू कर हाथ जोड़ों, कि भूल हो गई वह माफ कर देगा। आशीर्वाद लेने के बाद अधिकांश भक्त अपने घरों को रवाना हो गये।



शादी-बीमारी अनुदान में विधवा और विकलांगों को वरीयता


मथुरा (DJ 2010.07.27)। समाज कल्याण विभाग की शादी-बीमारी अनुदान योजना में अब उन आवेदकों के वरीयता दी जाएगी जिनके अभिभावक विकलांग अथवा विधवा होंगे। अनाथ विवाह योग्य कन्याओं को भी वरीयता की श्रेणी में रखा गया है। योजना में शिविर लगाकर लाभार्थियों को अनुदान राशि वितरित करने की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है। अब यह धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है।

चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 में अभी तक तीन महीनों में शादी-बीमारी अनुदान के सात सौ प्रार्थना पत्र समाज कल्याण विभाग में प्राप्त हुए हैं। सरकारी योजना में पात्र लाभार्थी को शादी के लिए दस हजार रुपये दिये जाते हैं, जबकि बीमारी अनुदान पांच हजार रुपये निर्धारित किया गया है। विभाग में प्राप्त दोनों ही अनुदानों के प्रार्थना पत्रों की स्वीकृति के लिए कमेटी का बैठना अभी बाकी है। बताया गया है कि अनुदान स्वीकृति में उन आवेदकों के प्रार्थना पत्रों को वरीयता दी जाएगी जिनके अभिभावक विधवा या विकलांग हों। अनाथ युवतियों को भी शादी अनुदान के लिए इसी श्रेणी में रखा गया है। इनके बाद जो भी प्रार्थना पत्र शेष रहेंगे, उनके आवेदकों को प्रथम आवक-प्रथम पावक के सिद्धांत पर अनुदान मंजूर किया जाएगा।

इस बीच जिले में बीते वित्तीय वर्ष के लंबित प्रार्थना पत्रों पर 401 आवेदकों को शादी अनुदान मंजूर कर दिया गया है। आलोच्य वर्ष में बीमारी अनुदान के लिए कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ। बीते साल का ऐसा कोई प्रार्थना पत्र अब लंबित नहीं रहा बताया गया है। शादी अनुदान के मंजूरशुदा प्रार्थना पत्रों की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है। पहले इसके चेक लाभार्थियों को शिविरों में दिये जाते थे। इस प्रक्रिया में लाभार्थियों के बैंक खाते खुलने में विलंब से अक्सर वे योजना के लाभ से वंचित रह जाते थे। बीते वित्तीय वर्ष से इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।



पितरों की आत्म शांति को इबादत शुरू


मथुरा (DJ 2010.07.27)। मुस्लिम बंधुओं ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिये मुकर्रर शब-ए-बारात का पर्व मंगल को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ शुरु हो गया। महिलाओं ने घरों में स्वाद भरे व्यंजन बनाकर बच्चों को खिलाए। स्त्री-पुरुषों ने नये परिधान पहनकर मस्जिदों में जाकर नमाज अदा की। इबादत का दौर बुधवार की सुबह होने वाली अजहर की नमाज तक निरंतर चलता रहेगा।

शब-ए-बारात का पर्व प्रत्येक मुसलमान के घर में मनाया जाना शुरु हो गया। महिलाओं ने घरों में हलवा तथा अनेक प्रकार के व्यंजन तैयार किये। हर किसी ने नये वस्त्र पहने। व्यंजन खिलाने तथा बांटने का दौर दोपहर से देर रात्रि तक चलता रहा। सूर्यास्त के बाद श्रद्धालुओं ने सुविधा के मुताबिक अल्लाह ताला की इबादत शुरु कर दी और जब मंगलवार की रात्रि की आखिरी दैनिक नमाज अदा हो गई, तो श्रद्धालुओं का काफिला पूर्वजों के लिये इबादत करने में लग गया।

महिला-पुरुषों ने कुरान शरीफ पढ़ने, नमाज अदा करने और अल्लाह ताला से दुआ करना सम्पूर्ण रात्रि के लिये शुरु कर दिया। मानना है कि इस रात्रि में इबादत करने, अल्लाह ताला से दुआ मांगने पर हर मुराद पूरी हो जाती है। अल्लाह ताला इबादत कबूल करते हैं। इससे न सिर्फ पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है बल्कि सभी श्रद्धालुओं की बरकत होती है। धर्म स्थलों के अलावा अल्लाह के मुरीद अपने-अपने घरों में अपनी सुविधा के मुताबिक रात्रि में इबादत करते रहेंगे।

रालोद नेता डा. यूनुस कुरैशी ने बताया, कि बुधवार की सुबह जब मस्जिदों में अजहर की नमाज अदा हो जाएगी, सभी लोग फातिहा और नमाज पढ़ने अल्लाह से दुआ करने को कब्रिस्तान में पहुंच जाएंगे।



राजस्थान ने यूपी से मांगा पानी का हिसाब


मथुरा (DJ 2010.07.27)। यमुना जल बंटवारे के उल्लंघन का आरोप लगाते हुये राजस्थान ने उत्तर प्रदेश से पानी का हिसाब मांगा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलौत के पत्र का हवाला देते हुये लखनऊ ने स्थानीय सिंचाई विभाग से असलियत पता की है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान को उसके हिस्से का पूरा पानी दिया गया।

राजस्थान के भरतपुर जिले को यमुना नदी का जल ओखला हेडव‌र्क्स से आगरा कैनाल और भरतपुर फीडर के माध्यम से प्राप्त होता है। भरतपुर फीडर रजवाहा अड़ीग से निकला है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने यूपी की मुख्यमंत्री मायावती को तीन जून को पत्र भेज कर उत्तर प्रदेश से यमुना का कम पानी मिलने का आरोप लगाया है। लखनऊ से स्थानीय सिंचाई विभाग को भेजे गये इस पत्र में श्री गहलौत ने लोअर खंड आगरा कैनाल से राजस्थान को मिले पानी के आंकड़े भी उपलब्ध कराये हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक जून 2009 में 12512 क्यूसेक दिवस और सितम्बर 2009 में 5408 क्यूसेक दिवस पानी राजस्थान के लिए छोड़ा गया। जबकि राजस्थान सीमा पर क्रमश: 5869 और 2915 क्यूसेक दिवस पानी प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री श्री गहलौत ने यह भी आरोप लगाया है कि यूपी में पड़ने वाले भरतपुर फीडर के करीब चौदह किलोमीटर हिस्से में काश्तकार पम्प और आउटलेट लगाकर पानी का अवैध रूप से दोहन कर रहे हैं। इसको रोकने के लिए यूपी सरकार आवश्यक कदम नहीं उठा रही है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री के पत्र के जवाब स्थानीय सिंचाई विभाग ने लखनऊ जानकारी भेज दी है। यूपी में किसान जल का कहीं भी अवैध उपयोग नहीं कर रहे हैं। जनवरी से जून 2009 के मध्य 26651 क्यूसेक दिवस के सापेक्ष 29254 और जुलाई से सितम्बर के मध्य 218976 क्यूसेक दिवस के सापेक्ष 273616 क्यूसेक दिवस जल भाग आगरा नहर प्रणाली से राजस्थान को उपलब्ध कराया गया। भरतपुर फीडर को फरवरी से जून 2009 में 26512 क्यूसेक दिवस और जुलाई से सितम्बर 14308 क्यूसेक दिवस पानी छोड़ा गया। जबकि राजस्थान सरकार का कहना है कि भरतपुर फीडर की राजस्थान सीमा पर क्रमश: 7741 और 4622 क्यूसेक दिवस ही उपलब्ध हो पाया। 12 मई 1994 को यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर हुए समझौते के मुताबिक राजस्थान को ओखला से नवम्बर से फरवरी के बीच 21 फीसदी, मार्च से जून के बीच 22 फीसदी और जुलाई से अक्टूबर के मध्य 15 फीसदी पानी दिया जा रहा है।

सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी/ अपर खंड आगरा कैनाल के अधिशासी अभियंता रमाकांत रस्तोगी ने बताया कि राजस्थान सरकार ने यूपी में पड़ने वाले भरतपुर फीडर के हिस्से की सफाई के लिए 2002 से कोई धनराशि उपलब्ध नहीं कराई है। कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए है। लिहाजा पानी का प्रवाह रुक रहा है।



समाज सेवी लगवाएंगे सड़कों पर बैंच


मथुरा (DJ 2010.07.27)। अगर आप सड़क पर चलते-चलते थक जाएं तो आराम से बैठने की सुविधा आपको जल्द मिलने वाली है। कॉमनवेल्थ गेम को मद्देनजर रखते हुए मथुरा नगर पालिका सड़क किनारे बैंच लगवाने जा रही है। खास बात ये है कि पालिका का इस योजना में धेला भी खर्च नहीं होगा, उल्टे राजस्व की प्राप्ति ही होगी। मतलब साफ है, हल्दी लगे न फिटकरी, रंग चोखा आयेगा।

कामनवेल्थ गेम्स के दौरान मथुरा में खासी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना है। भगवान कृष्ण के लीला स्थलों के दर्शन का सिर्फ भारतीय ही नहीं विदेशियों को भी आकर्षण रहता है। उम्मीद जतायी जा रही है कि दिल्ली से आगरा जाने वाले पर्यटक मथुरा में भी अपना खासा समय बितायेंगे। इसी उम्मीद को देखते हुए नगर को सजाने-संवारने का प्लान शुरू हो गया है।

मथुरा नगर पालिका सड़क किनारे खूबसूरत बैंच और सेल्टर बनाकर लोगों के लिए एक सुविधा उपलब्ध कराने जा रही है। यह योजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलायी जाएगी। फिलहाल पहले चरण में शहर भर में एक हजार बैंच लगाये जाने की संभावना है। इन बैंचों को प्राइवेट कम्पनियां और समाजसेवी लगवायेंगे। पालिका ने बैंचों का कोई विशेष डिजाइन भी तय नहीं किया है। हां, इतना प्रयास जरूर किया जाएगा कि एक सड़क पर एक ही डिजाइन की बैंच लगें।

इन बैंचों को लगाने वालों को भी विज्ञापन से आय प्राप्त करने का मौका मिलेगा। पालिका इन बैंचों और सेल्टर पर विज्ञापन की अनुमति देगी। इसमें विज्ञापन शुल्क पालिका के खाते में जमा होगा जबकि तय की गयी शेष राशि बैंच लगाने वाले को मिलेगी।

नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुन्दर उपाध्याय ने कहा कि पीपीपी योजना के तहत लगने वाली यह बैंच पालिका की प्रापर्टी हो जाएंगी। बैंच लगाने वालों को उस पर होने वाले विज्ञापन का एक हिस्सा लेने का अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना से पालिका पर कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं आयेगा बल्कि पालिका की आय में ही वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इन बैंचों का पैदल यात्री और मार्निग वॉक करने वालों के लिए विशेष उपयोग रहेगा। अभी शहर में ऐसे स्थान नहीं हैं जहां पैदल यात्री बैठकर थोड़ी देर सुस्ता सकें।



कम मिला आगरा कैनाल में पानी


मथुरा (DJ 2010.07.27)। आगरा कैनाल में कागजों पर अधिक और हकीकत में कम पानी चल रहा है। इसका खुलासा विभागीय अधिकारियों की जांच पड़ताल में भी हो गया। फरीदाबाद हेड पर साढ़े तीन सौ क्यूसेक पानी कम मिला, जबकि शेषाई पर बताए जा रहे पानी से अधिक पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा था।

हाल ही में दैनिक जागरण ने आगरा कैनाल में पानी गायब होने की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद सिंचाई विभाग हरकत में आ गया है। मुड़िया पूर्णिमा मेला की ड्यूटी खत्म होते ही अपर खंड आगरा कैनाल के अधिशासी अभियंता रमाकांत रस्तोगी और लोअर खंड आगरा कैनाल के अधिकारी पानी की कमी की जांच पड़ताल में जुट गए। गत दिवस फरीदाबाद हेड पर 2700 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, लेकिन जब इसकी माप की गई तो यह 2344 क्यूसेक ही निकला। करीब 356 क्यूसेक पानी कम पाया गया। इसके बाद शेषाई रेगुलूटर पर जांच की गई। यहां 617 क्यूसेक पानी रिपोर्ट किया जा रहा था, लेकिन डिस्चार्ज में 756 क्यूसेक मिला। यहां 139 क्यूसेक पानी अधिक दिया जा रहा था। कुल मिलाकर करीब पांच सौ क्यूसेक पानी की गड़बड़ी मिली। माना यह जा रहा है कि यदि यह पानी पूरा मिलता तो अपर खंड आगरा की नहरों को चलाया जा सकता था। इससे जुड़े हजारों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल जाता, लेकिन पानी की कमी से किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी नहीं मिल पा रहा है। गौर तलब है कि आगरा कैनाल के सिंचित होने वाले क्षेत्र में ही सर्वाधिक धान की खेती की जा रही है।



टेल के किसान फिर रहेंगे परेशान


मथुरा (DJ 2010.07.27)। टेल के हजारों किसान फिर सिंचाई के पानी के लिए परेशान रहेंगे। सिंचाई विभाग ने एक दर्जन रजवाह और दो दर्जन से अधिक माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इन हालातों में मानसून धोखा दे गया तो टेल हिस्से के किसानों को अपनी फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

गंगा यमुना में पानी की उपलब्धता होने पर ही नहरों का चलाया जाना प्रस्तावित है। बारिश से भले ही नदी जलाशयों में पानी बढ़ जाए, लेकिन टेल के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल पाएगा, इसमें संदेह है। अपर खंड आगरा कैनाल के रजवाह बुखरारी में 25 किमी, शेरगढ़ में 42 किमी, बांया शेरगढ़ में 14 किमी, सहार में 44 किमी, कोसी में 38.40 किमी, नंदगांव में 40 किलोमीटर तक पानी पहुंचाने का दावा किया है। माइनर शहजाद पुर में 5 किमी, जटवारी में 7 किमी, गढ़ी में 3 किमी, मघेरा में 3.5 किमी, वृंदावन में 3.7 किमी, छटीकरा में 2 किमी, कोटा में 1.60 किमी, जुल्हैंदी में 10 किमी, खामिनी में 3.5 किमी, उमराया में 2 किमी, नंदगांव में 12 किमी, कमई में 10.30 किमी, रॉकोली में 5 किमी, छाता में 7 किमी, सेही में 4 किमी, पलसो में 12 किमी, आटस में 2 किमी, जैंत में 4 किमी, हुलवाना में 8.5 किमी, दहगांव में 8 किमी, गढ़ी बरवारी में 4 किमी, खोर में 3 किमी, अगराला 17 किमी और चन्दौरी 12 किलोमीटर से आगे पानी पहुंचना संदिग्ध है। मांट ब्रांच की माइनर बंका, कूपा, दौलत पुर, नराचय, सैमरा के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाएगा। माइनर डहरुआ में 4.5 किलोमीटर से आगे के किसानों की खेतों की प्यास नहीं बुझा पाएगी। रजवाह सादाबाद में 35 किमी, मुरसान में 20 किमी, कुरसण्डा 25 किमी, दघैटा 25 किमी, खंदौली 15 किमी और बल्देव में 15 किलोमीटर तक तो सिंचाई विभाग ने पानी पहुंचाने का दावा किया है, लेकिन इससे आगे पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं। लोअर खंड आगरा कैनाल के कई रजवाह और माइनरों के अंतिम छोर के किसान भी सिंचाई को पानी के लिए परेशान रहेंगे। सिंचाई विभाग ने खरीफ सीजन के लिए जारी किए रोस्टर में स्पष्ट कर दिया है कि गंगा यमुना में पानी की उपलब्धता रही और नहरों को चलाने के लिए भरपूर पानी मिला तो टेलफीड हो जाएंगी। मगर टेल के किसानों को भरपूर पानी मिल पाएगा। इसमें सिंचाई विभाग ही संदेह जाहिर कर रहा है। सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी रमाकांत रस्तोगी ने बताया कि शीर्ष के किसानों से पानी बचाकर टेल तक पहुंचाना बड़ा ही मुश्किल काम है। शीर्ष भाग पर किसान पाइप लाइन और पंप सेट लगाकर दूर-दूर तक पानी ले जा रहे हैं। इससे शीर्ष भाग पर सिंचाई का कमांड एरिया बढ़ गया है। गंगा यमुना से भी नहरों के संचालन के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता। इससे भी समस्या खड़ी होती है। फिर भी ऐसे प्रयास किए जाते हैं कि अधिक से अधिक पानी टेल के किसानों को उपलब्ध कराया जाए।


श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.७६-७८


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मदनकोटिमनोहरमूर्ति-
नानवलताभवनोदरवर्तिना ।
प्रियसखीमिषनन्दितराधिकां 
स्मर बलाद्रमितां प्रणयाधिकाम् ॥

कोटि कामदेव सदृश मनोहर मूर्ति, नव लता गृह मध्यवर्ती श्रीहरि अत्यन्त प्रणयवती आनन्द पूर्ण श्रीराधा से प्रिय सखी के बहाने बल पूर्वक रमण कर रहे हैं, ऐसा स्मरण कर ॥२.७६॥







प्रियतमेन निजप्रियकिङ्करी-
जनसुवेशधरेण पदाम्बुजम् ।
किमपि लालयता रमितां 
स्मराम्यनुचरीं क्षिपतीमथ राधिकाम् ॥

प्रियतम अपनी प्रिय किङ्करी का सुवेश धारण कर श्रीराधा के पादपद्म को किसी अनिर्वचनीय मधुर भाव से लालन करते करते श्रीराधा को रमण करा रहे हैं, जो अपनी अनुचरी के प्रति तर्जन कर रही हैं, मैं उनका स्मरण करता हूं ॥२.७७॥







एकैकाङ्गच्छटाभिर्भरितदशदिगाभोगमत्युन्मदाढ्यं
प्रेमानन्दात्मकाभिर्विद्रुतकनकसूद्भास्वराभिः किशोरम् ।
तद्धामश्यामचन्द्रोरसि रसविवशं केलिशिञ्जानभूषं
भ्रश्यद्वासस्त्रुटत्स्रक् स्फुरति रतिमदान् निस्त्रपं कुञ्जसीम्नि ॥

जिस की प्रमानन्दात्मक, उत्तम स्वर्ण सदृश, सुन्दर तथ देदीप्यमान प्रत्येक अङ्ग च्छता से दशों दिशाएं परिपूर्ण हो रही हैं, वही अति उन्मादी किशोर मूर्ति रस विवश तथा केलि भूषण शोभित ज्योतिर्मय श्रीराधा विग्रह श्याम चन्द्र के वक्षस्थल पर रति मद पूर्णता से निर्लज्ज होकर भ्रष्ट वसन और छिन्न माल होकर निकुञ्ज में शोभा विस्तार कर रहा है ॥२.७८॥


Monday, July 26, 2010

2010-07-27 ब्रज का समाचार

जन्म भूमि पर नटखट से दूरी के गीत


मथुरा (DJ 2010.07.26)। श्री कृष्ण जन्म स्थान परिसर सुमधुर स्वरों में प्रस्तुत भजन-संकीर्तन की धुनों से मंत्र मुग्ध हो गया। रसिक कलाकारों ने कृष्ण-रुक्मिणी चरित्र और शिव-पार्वती लीला का प्रदर्शन कर दर्शकों का आनंद व‌र्द्धन किया। बाबा भोले नाथ के तांडव भक्तों को चमत्कृत कर गया।

श्री कृष्ण जन्म स्थान सेवा संस्थान एवं श्री कृष्ण संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में इस भजन संध्या का आयोजन शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप बने छप्पन प्रकार के व्यंजन यहां मौजूद गिरिराज प्रभु को अर्पित करने के साथ किया गया।

कलाकारों गणेश प्रसाद बजाज, अनिल भाई, विजय बंसल, मन मोहन सर्राफ, वीरेंद्र मित्तल, भीकचंद, घनश्याम रसिक, अंशुल, कृष्णा, सुरेश चंद छैला एवं कृष्ण गोपाल शर्मा ने भजनों के द्वारा समां बाधा। बाल कलाकार ने पशु-पक्षियों की आवाज अपने मुंह से निकाल कर श्रोताओं को लोट-पोट किया।

गणेश वंदना से आरंभ समारोह देर रात्रि तक चला। श्री कृष्ण चबूतरे पर हुये इस बड़े कार्यक्रम में संस्थान सचिव कपिल शर्मा ने भक्तों का आभार व्यक्त किया तथा कलाकारों की प्रसंशा कर उनकी हौसला आफजाई की।




प्रादुर्भाव दिवस पर पूजे महर्षि वेद व्यास


मथुरा (DJ 2010.07.26)। वेद, पुराण, उपनिषदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास महाराज के प्रादुर्भाव दिवस पर भक्तों ने उनका विधि-विधान संग पूजन-अर्चन और वंदन किया। विद्वत समाज ने महर्षि की प्राचीन तपस्थली को गंदगी से मुक्त करने की आवाज भी उठाई। पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय होने के चलते हजारों शिष्यों ने सोमवार में भी गुरुओं के पूजन का पुण्य प्राप्त किया।

मान्यता है कि महर्षि पाराशर के पुत्र वेद व्यास ने मथुरा में यमुना किनारे साधना एवं शास्त्र रचना की। यह स्थान कालांतर में कृष्ण गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां महर्षि वेद व्यास का प्राचीन मंदिर भी मौजूद है।

श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति ने महर्षि तपस्थल पर पहुंचकर उनका प्रादुर्भाव दिवस श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया। उत्सव का आरंभ संत राजा बाबा, समिति संस्थापक अमित शर्मा भारद्वाज द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के बाद हुआ। सेवकों ने महर्षि के चरणों का अभिषेक, पूजन, श्रंगार, वस्त्र अलंकरण व पुष्प सेवा कर आरती उतारी।

वक्ताओं ने गंदगी पर रोष व्यक्त भी किया। शिक्षाविद् डा. चंद्र किशोर पाठक की अध्यक्षता में आहूत धार्मिक उत्सव में प्रदीप गोस्वामी, डा. देवेंद्र शर्मा, श्याम सुंदर आचार्य, मदन व्यास, शैलेंद्र हकीम, कृष्णानंद शास्त्री, आचार्य प्रणव, दिनेश पुजारी, दीपक शास्त्री, भगवानसाचार्य ने आदि गुरु की वंदना की। संचालन आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक राधा बिहारी गोस्वामी ने किया।

प्राचीन परंपरा और शास्त्री विधि-विधान के मुताबिक पुर्णिमा तिथि के सूर्य सोमवार को उदय होने को आधार मानते हुये शिष्यों ने सोमवार को भी अपूर्व श्रद्धा के साथ गुरु पूजन किया। शिष्यों की भारी संख्या के होते हुये सुविधा के लिये रमनरेती महावन में गुरुशरणानंद महाराज का तथा द्वापरकालीन गौ गणना द्वारे गणेश चट्टी स्थित ठा. राज गोपाल जी प्रभु एवं मां महा लक्ष्मी मंदिर प्रागंण में परमहंस बंशी वाले महाराज का हजारों शिष्यों ने पूजन-अर्चन किया।



शिविर में घुस जयगुरुदेव भक्त को गोली मारी


मथुरा (DJ 2010.07.26)। जयगुरुदेव मेला में शामिल होने आए जगनेर आगरा के व्यवसायी को अज्ञात युवक ने शिविर में घुसकर कर गोली मार दी। गोली व्यवसायी के सीने को खरोंचती हुई निकल गई।

भोला शर्मा पुत्र राम खिलाड़ी निवासी बाग बसेड़ी रोड जगनेर, आगरा जयगुरुदेव मेला में सत्संग में शामिल होने परिवार के साथ आया हुआ था। भोला सलेमपुर रोड स्थित आगरा शिविर में रुका हुआ था। सुबह करीब सवा दस बजे वह अपने शिविर में परिवार के साथ बैठा था तभी अज्ञात युवक शिविर में आया। उस व्यक्ति ने बच्ची से पूछा पापा कहां हैं। बच्ची द्वारा कैंप के अंदर होने की बात कही।

इसके बाद युवक तेजी से कैंप के अंदर घुस गया और भोला शर्मा के ऊपर फायर ठोंक दिया और भाग गया। उसने पलट कर यह भी नहीं देखा कि गोली भोला के लगी है या नहीं। गोली लगते ही आसपास के शिविरों से लोग आये पर वह भाग चुका था।

गोली लगने की सूचना पर बाबा के भक्तों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में घायल को आश्रम के पदाधिकारी रामप्रताप व संतराम चौधरी जिला अस्पताल लेकर आए। सूचना पर थाना हाइवे पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आश्रम पदाधिकारी संतराम का कहना है कि घायल का दो दिन पूर्व किसी से विवाद हुआ था। भोला उसे नहीं जानता।

इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बी.डी. पाल्सन का कहना है कि मामला आपसी विवाद का प्रतीत हो रहा है। थाना हाइवे मामले की जांच में जुट गई है।



कलियुग में भक्ति व सेवा सर्वश्रेष्ठ साधन -- जयगुरुदेव


मथुरा। प्रख्यात संत बाबा जयगुरुदेव ने कहा है कि कलियुग में जीव के लिये सबसे मुफीद रास्ता सेवा तथा भक्ति का है। जीव यदि न्योछावर हो जाना सीख जाय तो उसके सभी काम बन जाते हैं। जीवन आनंदमय हो जाता है। इस युग में लोग बुराइयों में लिप्त हैं और बिना गुरु कृपा के पार जा ही नहीं सकते।

गुरु पर्व पर मथुरा आये शिष्यों एवं उनके परिजनों को प्रवचन देते बाबा ने बताया कि सदगुरु मिल जाने के बाद कुछ मिलना शेष नहीं रह जाता। इस मिलन के बाद जीव के जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का समय आने लगता है। माना जा सकता है कि अब भक्त को जन्मना-मरना नहीं पड़ेगा। यदि शिष्य गुरु भक्ति कर ले तो सदगुरु की कृपा उसे क्षण भर में पार कर देगी।

बाबा का कहना है कि जीवन-मरण के निश्चित समय की तरह संत मिलन का मुहूर्त तय होता है। संत मिलन एक महानतम घटना है। इस मिलन की तिथि, समय पूर्व जन्म में तय हो जाता है। जिन पुण्य आत्माओं को सौभाग्य जागता है उन्हीं को संतों की शरण मिलती है। मगर बिनु हरि कृपा मिलै नहिं संता इस बात को भी हमें ध्यान रखना चाहिये। भगवान को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिये। बाबा महाराज ने यहां आने वाले हजारों शिष्यों तथा उनके परिवारीजनों को ढ़ेर सारा आशीष दिया। सच्चे मार्ग पर शाकाहारी जीवन जीने, भगवत नाम स्मरण करने की सीख दी। इनके दर्जनों वे युवक-युवती भी शामिल हैं जो यहां आयोजित किये गये दहेज रहित विवाह समारोह में परिणय सूत्र बंधन में बंधे हैं।



रेलवे: पांच दिन में कमाये सवा करोड़


मथुरा (DJ 2010.07.26)। रेलवे के लिये मुडिया, गुरु पूर्णिमा और बाबा जय गुरुदेव मेला में भाग लेने आने वालों से रिकार्ड आय हुई है। अभी तक पांच दिन में करीब सवा करोड़ रुपये की आय हो चुकी है।

उत्तर मध्य रेलवे प्रतिवर्ष ब्रज मंडल में लगने वाले इस परम्परागत मेला कार्यक्रम में भाग लेने आने वालों की सुविधा के लिये मेला स्पेशल ट्रेन संचालित करता है। इस समय भी रेलवे ने मथुरा से आगरा, ग्वालियर, झांसी व बांदीकुई के लिये छह मेला स्पेशल ट्रेन 21 से 27 जुलाई तक चलायी हैं। इसके अलावा यात्रियों को आसानी से टिकट उपलब्ध कराने के लिये मथुरा जंक्शन पर सात, बाबा जय गुरुदेव मेला स्थल पर तीन व गोवर्धन में दो अतिरिक्त टिकट काउंटर की व्यवस्था की है तो रविवार से चार ट्रेनों में अतिरिक्त कोच बढाने के साथ ही तीन मेला स्पेशल और चला दी है। बताते हैं 22 जुलाई को 36 हजार यात्रियों से 13 लाख रुपये, 23 जुलाई को 34 यात्रियों से17 लाख रुपये, 24 जुलाई को 42 हजार यात्रियों से 22 लाख रुपये, 25 जुलाई को 56 हजार यात्रियो से 36 लाख रुपये व 26 जुलाई को 55 हजार यात्रियों से करीब देर शाम तक 40 लाख रुपये की आय प्राप्त की है। अब तक करीब सवा करोड़ रुपये की आय हो चुकी है। मुख्य टिकट पर्यवेक्षक मान सिंह मीना ने यह जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे द्वारा दी गयी यात्रियों को हर संभव सुविधा के चलते अभी तक यह आय हुई है आगामी दो दिन में करीब पचास लाख रुपये की आय होने की संभावना है।



मेला स्पेशल बस: बंटे एक करोड़ के कट टिकट


मथुरा (DJ 2010.07.26)। मुड़िया पूर्णिमा मेला यूपी रोडवेज के लिये बड़े मुनाफे वाला साबित हुआ है। मथुरा-गोवर्धन के बीच संचालित करीब एक हजार मेला स्पेशल बसों में लगभग एक करोड़ रुपये के टिकट बिके। इनमें ई-मशीन, कट और ब्लैंक टिकट शामिल हैं।

निगम अफसरों के मुताबिक रोडवेज ने इस मर्तबा एक हजार बसें मेला स्पेशल के तौर पर संचालित कीं। जिनमें बाहर से आने वाली अधिकांश बसों में ई-टिकट मशीन से टिकट बनाये गये। मथुरा डिपो के टिकट सैक्शन से बीस रुपये के तीन लाख तथा पच्चीस रुपये की बिक्री वाले ढ़ाई लाख मूल्य के कट टिकट जारी किये गये। इनके अलावा अनेक परिचालकों ने ब्लैंक टिकट भी बेचे। स्थानीय टिकट सैक्शन से जारी टिकटों का वास्तविक विक्रय मूल्य एक करोड़ बाईस लाख पचास हजार है।

टिकट सैक्शन के प्रभारी चरन दास ने बताया, कि यहां से जारी टिकटों में कितने बेचे गये तथा कितने शेष बचे इसका हिसाब अभी नहीं लगा है। श्री दास के मुताबिक सोमवार सायं तक दिये गये टिकटों में से वापसी का हिसाब टिकट काउंटर से अभी नहीं मिला है। नये बस स्टेंड पर मेला संचालन कर रहे स्टेशन इंचार्ज संतोष कुमार अग्रवाल ने बताया, कि कितनी बसें चली इसका सही-सही विवरण अभी उपलब्ध नहीं है। परंतु अनुमान है कि लगभग एक हजार बसें संचालित हुईं।

श्री अग्रवाल ने बताया, कि चेक पोस्ट हटा ली गई हैं, स्टाफ तथा अन्य रीजनों की अधिकांश बसें वापस लौट गई हैं। इस समय करीब दो बसें ही मथुरा में संचालित हैं। श्री अग्रवाल ने कहा, कि बिना टिकिट यात्री पकड़े जाने की जानकारी सोमवार तक नहीं मिली है।



ब्राड बैंड का आए दिन बज रहा बैंड


मथुरा (DJ 2010.07.26)। भारत संचार निगम एक ओर जहां ब्राड बैंड के पांच हजार के आसपास उपभोक्ताओं को सेवा दे रहा है, वहीं उसकी यह सेवा आए दिन बाधित हो रही है। अभी तक पुराने सर्वर से नए सर्वर पर सभी कनेक्शन शिफ्ट नहीं हो सके हैं।

पिछले पंद्रह दिन में अब तक तीन-चार बार ब्राड बैंड की सेवा ठप हो चुकी है। उपभोक्ताओं को 691 एरर के साथ यूजर नेम व पासवर्ड चेंज होने की सूचना नेट कनेक्ट करते ही मिल रही थी। इस वजह से रविवार के अवकाश में ब्राड बैंड धारक नेट सर्फिग आदि नहीं कर सके।

बताया गया है, कि निगम ने नया सर्वर लगाया हुआ है, पर इस पर अभी तक सभी कनेक्शन शिफ्ट नहीं हुए हैं। अधिकारियों को दो-दो सर्वर हैंडल करने में परेशानी हो रही है। पुराने सर्वर में यूजर नेम व पासवर्ड आदि चेंज करने के की-वर्ड स्थानीय अधिकारियों के हाथ में है, जबकि नए सर्वर का पूरी तरह संचालन बैंगलोर से हो रहा है। अधिकारी आए दिन आने वाली समस्याओं से निजात पाने के लिए नए सर्वर पर ही सभी कनेक्शन संचालित करने का मन बनाए हुए हैं, पर सभी नंबर शिफ्ट न होने से उन्हें दो-दो सर्वर हैंडल करने पड़ रहे हैं।



हर-हर बम-बम से गूंजे शिवालय


मथुरा (DJ 2010.07.26)। भक्तों ने सोमवार को श्रावण मास का प्रथम त्यौहार मानकर हर-हर बम-बम का घोष करते हुये औघड़दानी बाबा भोले नाथ की अपूर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की। प्रभु के रंगेश्वर, भूतेश्वर, गोकर्णनाथ, गर्तेश्वर, नील कंठेश्वर तथा चिंता हरण मंदिरों पर लम्बी कतारें लगीं।

सोमवार को सूर्य देव का उदय पूर्णिमा तिथि में हुआ। पुरातन मान्यताओं के अनुसार जिस तिथि में सूर्य उदय होते हैं, वहीं दूसरे दिन के सूर्योदय तक भोग करती है। परंतु ब्रजवासी भक्त शायद रविवार को मनाये गये गुरु पर्व तथा वर्तमान को अधिक महत्व देते हुये सोमवार को ही प्रभु की शरण में पहुंच गये।

भक्त समुदाय ने सुबह से ही शिवालयों में जाना शुरु कर दिया। मंदिर सेवकों ने भी इसी सोमवार को श्रावण का प्रथम दिन मानते हुये तैयारियां कीं। सेवक महिला-पुरुष एवं बालक-बालिकाएं थोड़े में ही प्रसन्न हो जाने वाले महा शिव के लिये वेल पत्र, धतूरा, सुगंधित पुष्प, हार, भांग, बेल, मिष्ठान इत्यादि लेकर दौड़ लिये। रंगेश्वर में भक्त समाज ने देर सायं बर्फ का बंगला सजाकर मोहक छवि के दर्शन कराए। अन्य मंदिरों पर पुष्पों के बंगला सजाए गये।

शिव भक्त स्त्री-पुरुषों ने सोमवार को व्रत रखकर भगवान से मुराद पुरी करने की भी याचना की। भक्तों द्वारा सुबह से लेकर अपरान्ह तक चढ़ाए गये जल, गंगा जल और दुग्ध से शिवालय की नालियां भर गई। प्राचीन तथा सिद्ध स्थान महावन में यमुना किनारे स्थित चिंताहरण मंदिर पर भक्तों का बढ़ा मेला लगा।



चतुर्वेद समाज सेवकों ने किया गोदावरी का सम्मान


PIC1मथुरा (DJ 2010.07.26)। स्वामी प्रकाशानंद की पुत्र वधु, विश्वनाथ महाराज की पत्‍‌नी भक्ति मूर्ति श्रीमती गोदावरी का तपस्वनी, आदर्श एवं विदुषी महिला के तौर पर सम्मान किया गया। चतुर्वेद मानव सेवा समाज द्वारा एक भवन में आयोजित समारोह में संगीताचार्य कन्हैया लाल चतुर्वेदी ने पद गायन तथा सारंगी वादक हरी बाबू कौशिक ने सम्मान में पद पढ़ वातावरण को संगीतमय बनाया।


श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.७३-७५



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वृन्दारण्यमनन्यभावरसिकः श्रीराधिकानागरे
वैदग्धीरससागरे नवनवानङ्गैकखेला करे ।
राधायाः क्षणकोपकातरतरे तद्भ्रूविलासाङ्कुशाहह
कृष्टात्मेन्द्रियसर्वगात्र उरुभिर्विघ्नैरचाल्यः श्रये ॥
जो वैदग्धी रस का समुद्र है एवं नव नव काम रस में क्रीड़ा परायण है, जो श्रीराधा के किञ्चित् कोप से ही अतिकातर हो जाता है, एवं श्रीराधा के भ्रू विलास रूप अङ्कुश से जिसका आत्मा, इन्द्रिय तथा सर्व देह आकृष्ट हो जाता है, उसी श्रीराधा नागर में अनन्य भाव रसिक होकर एवं अनेक विघ्नों में भी अविचल रहकर मैं इस श्रीवृन्दावन का आश्रय लेता हूं ॥२.७३॥



मदनमोहनवक्त्रसुधाकरे मुदितगोपवधूकुमुदाकरे ।
सरसराधिकया परिचुम्बिते मम मनो नवकुञ्जविलम्बिते ॥
नव निकुञ्ज विलासी गोप वधू रूप कुमुदिनी वृन्द को आनन्दित करने वाले एवं श्रीराधा के द्वारा परिचुम्बित श्रीमदनमोहन के मुख चन्द्र में मेरा मन लगा रहे ॥२.७४॥



निलयनाय निकुञ्जकुटीगतां वरसखी नयनेङ्गितसूचिताम् ।
सुमिलितां हरिणा स्मर राधिकामनु च तां परिरम्भितचुम्बिताम् ॥२.७५॥
छिपने के लिये निकुञ्ज कुटी में जाने पर एवं श्रेष्ठ सखी ललिता के नेत्रों के इशारे को पाकर, श्रीहरि के सहित सुमिलिता एवं तदनन्तर श्रीहरि के द्वारा आलिङ्गित एवं चुम्बिता श्रीराधा को स्मरण कर ॥२.७५॥


Sunday, July 25, 2010

2010-07-26 ब्रज का समाचार



Danghati temple. Pictures of previous years' Mudiya Purnima

60 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी


मथुरा (DJ 2010.07.25)। उत्तर भारत के प्रख्यात गोवर्धन मुड़िया पूर्णिमा मेला आस्था के समागम के साथ समापन हो गया। इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों से करीब साठ लाख श्रद्धालुओं ने आकर यहां गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर मानसी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इस मौके पर मेला के मुख्य आकर्षण मुड़िया संतों की शोभायात्रा पारम्परिक ढंग से निकली। इस दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे।

ब्रजभूमि के मिनी कुम्भ के रूप में मशहूर गोवर्धन के मुड़िया पूनों मेला के अंतिम दिन रविवार को गिरिराज महाराज के प्रति अगाध श्रद्धा नजर आई। यह मेला पिछले पांच दिनों से अनवरत चल रहा आ रहा था।

सबसे ज्यादा भीड़ का सैलाब पूर्णिमा के दिन उमड़ा। यहां मुड़िया पूर्णिमा के दिन गिरिराज महाराज की परिक्रमा लगाने का विशेष महत्व है। भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ गोवर्धन की ओर उमड़नी शुरू हो गई। भीड़ का दबाव यातायात के मुख्य साधन रोडवेज की बसें और ट्रेन कम पड़ गई।

हर तरफ से आ रहा श्रद्धालुओं का कारवां गोवर्धन में गिरिराज महाराज की जय-जयकार करता हुआ कस्बा में घुस रहा था। परिक्रमा मार्ग के सात कोस में गिरिराज महाराज की जय-जयकार गूंज रही थी।

मेला में मुड़िया पूर्णिमा के मुख्य आकर्षण मुड़िया संतों की शोभायात्रा रविवार अपराह्न करीब 11 बजे से चक्लेश्वर स्थित राधा श्यामसुंदर मंदिर से निकली। इसमें मुड़िया संत सनातन गोस्वामी के चित्रपट को डोला में विराजमान कर निकले। इस दौरान मुड़िया संत सिर मुंडन करा कर ढोल, झांझ, मजीरे, मृदंग आदि बजाते हुए संकीर्तन करते हुए निकले। शोभायात्रा के दौरान तमाम श्रद्धालुओं ने संत सनातन गोस्वामी को अपनी श्रद्धाजंलि दी।

शोभायात्रा चक्लेश्वर से लेकर दसविसा, बिजली घर तिराहा, सौंख अड्डा, दानघाटी, बड़ा बाजार, हाथी दरवाजा होकर वापस मंदिर पर पहुंची, जहां मुड़िया संतों की श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें संत तमालकृष्ण दास ने संतों के बीच प्रवचन दिये। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे।

इधर मेला में देश के विभिन्न राज्यों से आकर करीब साठ लाख श्रद्धालुओं ने मानसी गंगा में भक्ति के सागर में डुबकी लगाई।

यातायात व्यवस्थाएं चरमराई

गुरु पूर्णिमा पर यहां विभिन्न आश्रमों में आये श्रद्धालुओं की लौटती भीड़ के दबाव में जंक्शन रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाएं चरमरा गई। यात्री जान जोखिम में डालकर कासगंज पैसेंजर की छतों पर चढ़ गये। प्लेटफार्मो के साथ ही स्टेशन परिसर में भी यात्रियों के पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसे में उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बसों की भी यही हालत रही। भीतर ही नहीं बसों की छतों पर भी जगह के लिए मारपीट तक हुई।



करोड़ी से लख्खी हुआ मुड़िया मेला!


मथुरा (DJ 2010.07.25)। अगर मुड़िया पूर्णिमा मेला की भीड़ के आंकड़े पर गौर करें तो यह अब करोड़ी से लख्खी हो गया है। यह हालात तो तब हैं जब इस बार गिरिराज महाराज का समूचा सात कोस का दरबार काफी चौड़ा हो गया है। 2007 और 2008 में मेला में अच्छी खासी भीड़ उमड़ी थी। मेला में भीड़ का अनुमान को देख कर मेला को करोड़ी मेला का नाम दिया गया था। 2006 में तो मेला में रिकार्ड भीड़ उमड़ी थी। तब करीब सवा करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ था। 2009 के मेला से कुछ गिरावट दर्ज की गई। प्रशासन के अनुमान को ही मानें तो बीते मुड़िया पूर्णिमा मेला में अस्सी लाख श्रद्धालु आए थे। इस बार इनकी संख्या महज साठ लाख रही। गोवर्धन विकास मंच के संयोजक हरिओम शर्मा का मानना है कि मेला में भीड़ की कमी का कारण सबसे ज्यादा सुविधाओं का अभाव है।

कभी सवा करोड़ फिर अस्सी लाख और अब करीब साठ लाख श्रद्धालु। यह है उत्तर भारत के प्रख्यात मुड़िया पूर्णिमा मेला में श्रद्धालुओं की आमद का आकड़ा। सुविधाएं कम पड़ती हैं या फिर भीड़ में न आने की इच्छा या फिर कुछ और, कारण जो भी हो, लेकिन यह सोचनीय है कि आखिर मुड़िया पूर्णिमा मेला की आस्था से श्रद्धालु क्यों कतरा रहे हैं?

विगत तीन सालों पूर्व अगर मुड़िया पूर्णिमा मेला की भीड़ के आंकड़े पर गौर करें तो कुल मिलाकर गोवर्धन जैसी प्रमुख धार्मिक नगरी के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है। यह हालात तो तब हैं जब इस बार गिरिराज महाराज का समूचा सात कोस का दरबार काफी चौड़ गया है।

मेला में किसी न किसी रूप से मेला की गतिविधियों से जुड़ने वाले जानकार लोग बताते हैं कि विगत तीन साल से मेला में भीड़ की गिरावट देखी जा रही है। अगर सन् 2007 और 2008 में आयोजित मुड़िया पूर्णिमा मेला पर गौर करें तो मेला में अच्छी खासी भीड़ उमड़ी थी।

मेला में भीड़ का अनुमान को देख कर मेला को करोड़ी मेला का नाम दिया गया था। जबकि उससे पीछे 2006 के मेला में रिकार्ड भीड़ उमड़ी थी। जिसमें करीब सवा करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की लोगों ने बात कही गई थी। लेकिन विगत 2009 के मेला से कुछ गिरावट दर्ज की गई। प्रशासन के अनुमान को ही मानें तो बीते मुड़िया पूर्णिमा मेला में अस्सी लाख श्रद्धालुओं की संख्या में आकर रुका। जिस पर शायद ही किसी ने विचार किया हो, लेकिन अब मेला को पूरी तरह से राजकीय दर्जा प्राप्त हो चुका है।

व्यवस्थाओं के नाम पर बजट भी करोड़ों में पहुंच गया है जो कि कभी मिलता नहीं था और मिला भी तो महज लाखों में। लेकिन इस बार पूर्णिमा पर भीड़ जरूर उमड़ी, लेकिन उतनी नहीं जितनी पूरे मेला को देखकर अनुमान था। गौर करें तो यह भीड़ पूर्व के अस्सी लाख श्रद्धालुओं के आकड़े को भी नहीं छू सकी। इस बात को स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि प्रशासनिक अफसर भी मानने लगे हैं। जबकि मेला में श्रद्धालुओं को सुविधाएं दिये जाने को लेकर जिलाधिकारी डीसी शुक्ला कहते हैं कि प्रशासन ने अपनी ओर से सुविधाओं में कोई कमी नहीं रखी।

पूर्व से बेहतर व्यवस्थाएं की गई है। उनका कहना है कि प्रशासन ने अपनी ओर से पूरी ताकत लगाई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीडी पॉल्सन भी सुविधाओं से सहमत हैं। उनका कहना है कि इस बार तो रास्ते पूरी तरह से चौड़े हो गये हैं। इसलिए भीड़ कम दिख रही है।

रास्तों पर अतिक्रमण भी नहीं लगने दिया गया है। श्रद्धालुओं को आसानी से चलने का मौका मिला है। लेकिन वे भी मानते हैं कि इस मेला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए और इसके लिए प्रचार प्रसार होना बेहद जरूरी है। लेकिन इसके लिए स्थानीय लोगों को भी प्रयास करने चाहिए।

उधर इस बारे में मंदिर दानघाटी के सेवायत रहे मथुरा प्रसाद कौशिक कहते हैं कि विगत वर्षो की अपेक्षा इस बार मेला में भीड़ कम है, जो कि गोवर्धन के लिए अच्छा संकेत नहीं है। गोवर्धन विकास मंच के संयोजक हरिओम शर्मा का मानना है कि मेला में भीड़ की कमी का कारण सबसे ज्यादा सुविधाओं का अभाव है।

श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। ऐसे में यह भी तर्क उन्होंने दिया कि अधिक मास मेला चल कर चुका है। इस बारे में पं. शिवलाल चतुर्वेदी रसिक चाचू चौबे का कहना है कि सुविधाएं कम पड़ती हैं, भीड़ अधिक होती है, ऐसे में श्रद्धालु भीड़ में आने की बजाय सामान्य दिनों में आकर परिक्रमा करना ज्यादा बेहतर समझता है। यह भी मुड़िया मेला पर भीड़ कम आने का कारण हो सकता है।



मानसी गंगा और राधाकुण्ड में डूबने से तीन की मौत



मथुरा (DJ 2010.07.25)। मुडिया पूर्णिमा मेला के दौरान मानसी गंगा और राधारानी कुण्ड में डूबने से तीन परिक्रमार्थियों की मौत हो गई। इनमें से एक परिक्रमार्थी को तीन घंटे तक उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित किये जाने पर परिजनों ने हंगामा काटा। एक परिक्रमार्थी की हृदय गति रुक जाने से गेस्ट हाउस में मौत हो गई।

इस बार मुडि़या पर्व पर कई लाख श्रद्धालुओं ने गिरिराज जी की परिक्रमा कर मानसी गंगा मंर गोते लगाए। उनकी सुरक्षा के लिए मानसी गंगा पर पीएसी की मोटरबोट के साथ ही गोताखोर भी तैनात किये गये थे। माइक से परिक्रमार्थियों को गहरे पानी में न जाने की हिदायत दी जा रही थी। घाटों पर बल्लियां भी लगाई गर्ई थीं।

इसके बावजूद मानसी गंगा में स्नान के दौरान दो हादसे हुए। फरीदाबाद निवासी नरेश मानसी गंगा में स्नान करते समय गहरे पानी में डूब गया। इसी तरह वीरभान पुत्र छोटेलाल निवासी मुकंदपुरा बाह, आगरा भी गहरे पानी में डूब गया। उसे जैसे-तैसे पानी से बाहर निकाला गया। उपचार के लिये सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन ले जाया गया। वहां चिकित्सक नहीं मिलने पर एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां पर ले जाया गया। परिजनों ने बताया कि प्राइवेट चिकित्सक ने पेट को दबा कर पानी निकालकर इंजेक्शन लगा दिया।

यहां से वीरभान को मथुरा रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र की जीप यूपी 85 डी-0080 तड़पते युवक को लेकर तीन घंटे में मथुरा जिला अस्पताल पहुंची, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने युवक को बीच में किसी प्राइवेट अस्पताल में दिखाने की गुहार की थी, लेकिन जीप चालक ने उनकी एक नहीं सुनी। इसे लेकर परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा काटा। होलीगेट चौकी प्रभारी अनिल कुमार ने पहुंच कर परिजनों को समझाया।

एक अन्य हादसे में राधाकुंड में चिक्कू पुत्र नौरंगी ग्राम पटालौनी थाना बलदेव की स्नान करते समय डूबकर मौत हो गई। वहीं श्रद्धालु रजनी कांत लधानी निवासी मुम्बई महाराष्ट्र की मौत स्थानीय गेस्ट हाऊस में हृदय गति रुक जाने से हो गई। वह गिरिराजजी की परिक्रमा लगाकर अपने कमरे में आराम कर रहा था।



परिक्रमा अधूरी, जिंदगी पूरी


अलीगढ़ सोगरा गांव से बस संख्या पीबी 10 एम-3215 में ग्रामीण परिक्रमा करने गोवर्धन आ रहे थे। राया के डबल रेलवे फाटक के समीप आकर बस खराब हो गई। चालक और परिचालक बस को ठीक करने में लगे थे कि परिक्रमार्थी महिलाएं और पुरुष बस से उतर गए। इसी दौरान पीछे की ओर से आती मेटाडोर टाटा आरजे14जीबी-3458 के चालक ने रात करीब सवा बजे खड़ी बस में जोरदार टक्कर मार दी। घायलों को डालकर मथुरा जिला अस्पताल लेकर आया गया। यहां ओमवती निवासी लोहरई अलीगढ़ और मुन्नी देवी निवासी पचगांव मेरठ को मृत घोषित कर दिया गया। गिरि प्रसाद शर्मा व शीतल निवासी सोगरा, कुसुम व मोहर सिंह लहटोई, अलीगढ़ गंभीर रूप से घायल हो गए। जयगुरूदेव मंदिर के समीप हाईवे पार करते समय ट्रौला की चपेट में आकर विठ्ठल भाई निवासी जलगांव, महाराष्ट्र की मौत हो गई।



गोवर्धन परिक्रमा: जंक्शन पर लौटती भीड़ का भारी दबाव


मथुरा (DJ 2010.07.25)। गुरु पूर्णिमा पर्व पर यहां विभिन्न आश्रमों में आये श्रद्धालुओं की लौटती भीड़ के दबाव में जंक्शन रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाएं चरमरा गई। यात्री जान जोखिम में डालकर कासगंज पैसेंजर की छतों पर चढ़ गये। प्लेटफार्मो के साथ ही स्टेशन परिसर में भी यात्रियों के पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसे में उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

गुरु पूर्णिमा पर्व पर मथुरा-वृंदावन एवं गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं का रविवार की दोपहर से लौटने का क्रम शुरु हो गया। इससे मथुरा जंक्शन और छावनी रेलवे स्टेशनों पर भीड़ का काफी दबाव रहा। दोनों स्टेशनों पर पैर रखने तक को जगह नहीं थी। ट्रेनों में पहले से ही भीड़ होने के कारण तमाम यात्री टिकट लेने के बाद भी उनमें चढ़ नहीं सके। उन्हें जंक्शन परिसर में ही रात बिताने को मजबूर होना पड़ा।

उमस भरी गर्मी में जंक्शन पर यात्रियों का बुरा हाल था। उन्हें टिकट के लिये भी काफी जद्दो-जहद करनी पड़ी। उधर, जीआरपी एवं आरपीएफ के जवान संदिग्धों पर नजर रखे हुए थे। वे समय-समय पर प्रतीक्षालय, टिकट हॉल, स्टेशन परिसर में भ्रमण कर यात्रियों एवं उनके बैगों आदि की चेकिंग करते रहे।



स्वांस की पूंजी दूसरों को दे देते हैं संत-जयगुरुदेव


मथुरा (DJ 2010.07.25)। बाबा जयगुरुदेव ने कहा है कि जो महात्मा जिस काम के लिये आते हैं वे उसे करते हैं और बाद में बची हुई स्वांस की पूंजी दूसरे को दे देते हैं। वे समय से कार्य करके चले जाते हैं।

गुरु पूजन के लिये रविवार को आये शिष्य समुदाय को बाबा ने बताया कि बाहर की पूजा शरीर की दोनों आंखों से और सच्ची पूजा अंदर की तीसरी आंख से होती है। अंतर की दृष्टि को गुरु की तरफ करने पर पाएंगे कि गुरु प्रकाश में बैठे हैं, उनके चारों तरफ उजाला ही उजाला है। जब गुरु दरबार में रहोगे तो ऊपर और नीचे दोनों तरफ दिखाई देगा। संत ने कहा सच्चे सांई, गुरु सतलोक में हैं। पूरा देश सतलोक देश सच्चे गुरु का है। साधना तो निमित्त मात्र है बाकी सब दया का काम है। साधक प्रकाश तभी बर्दाश्त कर सकेगा जब गुरु अपना रूप दिखाते चलें। नहीं तो प्रकाश में आंखें बंद हो जाती हैं खुलती नहीं हैं। आवाज इतनी तेज आती है कि साधक बर्दाश्त नहीं कर सकता और उसकी मृत्य़ु हो सकती है। गुरु धीरे-धीरे बर्दाश्त कराते हैं।

साधना, सत्य पथ पर आरूढ़ होने के संदेश में महात्मा ने सभी से शाकाहारी रहने, कोई नशा नहीं करने तथा जीव-जंतु एवं मनुष्य को जान से न मारने की दृढ़ प्रतिज्ञा करने की सीख दी। बाबा ने इस अवसर पर नामदान दिया। यहां कई दर्जन दहेज रहित शादी भी कराई गई। गुरु पूजन के पश्चात हजारों लोग मेला परिसर में स्थापित टिकट घर से घर वापसी के लिये टिकट मांगने लगे हैं। कई हजार सेवक अपनी गाड़ियों से गंतव्य को रवाना हो गये।



गुरु दक्षिणा में ज्यादा दिखे नए संघी


मथुरा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गुरु दक्षिणा में भगवा ध्वज को प्रणाम करने वाले इस बार नए चेहरे ज्यादा थे। यह पिछले समय में चले भर्ती शिविरों का असर है, पर पारंपरिक रूप से दक्षिणा देने वालों में पुराने चेहरे कम संख्या में पहुंचे। उद्योग जगत की उपस्थिति भी नाममात्र की रही।

गुरु पूर्णिमा के पर्व पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ गुरु दक्षिणा कार्यक्रम हर साल आयोजित करता है। स्थानीय जुबली पार्क स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को अखिल भारतीय ग्राम्य विकास प्रमुख एवं संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा. दिनेश मुख्य वक्ता थे। इस मौके पर पहुंचने वाले भगवा ध्वज के समक्ष नतमस्तक हुए और लिफाफा बंद दक्षिणा भेंट की।

कार्यक्रम में संघ व भाजपा से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारी व नेताओं की उपस्थिति नहीं हो सकी। यह चर्चा का विषय भी रही, जबकि उद्योग जगत से भी एकाध ने ही कार्यक्रम में पहुंचना जरूरी समझा। हर साल आने वाले संघ, भाजपा व उसके आनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी व नेताओं के न दिखने से इस दौरान रौनक कम रही, पर गुरु दक्षिणा कार्यक्रम में नए स्वयं सेवकों के पहुंचने से संघ नेताओं के चेहरे खिले रहे।

संघ से नए जुड़े लोगों ने अभी संघ की परंपराओं व नियमों को प्राथमिक तौर पर भी पूरी तरह से नहीं समझा है, यह भी कार्यक्रम के दौरान परिलक्षित हुआ। बताया गया है कि संघ के ध्वज को नमस्कार करने का एक विशेष तरीका है, जिसे सभी नए जुड़े लोगों ने सही तरीके से अनुगमन नहीं किया, जबकि एक नए स्वयंसेवक ने तो सीधे मुख्य वक्ता के हाथ में ही दक्षिणा देने का प्रयास किया, जिसे लेने से उन्होंने विनम्रता से इंकार कर दिया।


श्रीवृन्दावन-महिमामृतं २.७०-७२


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उत्तीर्य विष्णुमायामपि वनितायामविश्वसन् प्राज्ञः ।
तद्भयचकितः सततं निवसति वृन्दावनेऽतिनिर्विण्णः ॥

विष्णु माया से उत्तीर्ण होकर भी बुद्धिमान पुरुष स्त्रियों में विश्वास न करके अत्यन्त वैराग्यवान होकर नारी के भय से चकित चित्त हुआ निरन्तर श्रीवृन्दावन वास करता है ॥२.७०॥




परदारवित्तहारिषु सत्यपदेशे महाप्रहारिषु च ।
नहि वृन्दावनवासिषु दोषं पश्यन्ति चिद्घनेषु धीराः ॥

पर स्त्री एवं धन हरण करने वाले, और कपट से महा प्रहार करने वाले, चिद्घनस्वरूप श्रीवृन्दावन वासियों में धीर पुरुष दोष नहीं देखता हैं ॥२.७१॥




वृन्दाकानन काऽऽनने सुभगता न स्तौति यस्त्वां सदा
किं तद्देहमपास्य गेहममतां यन् न त्वयि न्यस्यते ।
किं तत् पौरुषमौरसं च तनयं विक्रीय न स्थीयते
येन त्वयथ तत्त्ववित् स खलु को यस्ते तृणं नाश्रयेत् ॥

हे वृन्दावन ! जो मुख सदा आपकी स्तुति नहीं करता है उसकी क्या सुन्दरता ? गृह ममता को परित्याग करके जो देह तुम्हारे में पात नहीं करता है, वह देह कैसा ? स्ववीर्य पुत्र को भी बेचकर जो वृन्दावन वास नहीं करता, तो उसका पुरुषार्थ ही कैसा ? वह क्या तत्त्व वेत्ता कहा जा सकता है, जो श्रीवृन्दावन के तृण का भी आश्रय नहीं ले सकता ? ॥२.७२॥


Saturday, July 24, 2010

2010-07-25 ब्रज का समाचार

गोवर्धन: आस्था के सागर में भक्ति की डुबकी

गोवर्धन (DJ 2010.07.24)। गोवर्धन के प्रख्यात मुड़िया पूर्णिमा मेला में शनिवार को इस कदर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा कि समूचा गिरिराज धाम “फुल” हो गया। गिरिराज की जय जय कारों से समूचा इलाका रात भर गूंजता रहा। मानसी गंगा में सुरक्षा को धता बताकर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर स्नान किया।

अब तक एक अनुमान के मुताबिक देश के कोने-कोने से आकर करीब पचास लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मानसी गंगा में डुबकी लगाई। फुब्बारे एक तरफ लगे रह गये। यहा के सभी मंदिर, होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाऊस और आश्रम पूरी तरह से हाऊस फुल हो गये। भीड़ के दबाव के आगे इंतजाम धरे रह गये। रोडवेज श्रद्धालुओं से लदी जाम में फंसी रहीं। सभी रास्ते छोटे पड़ गये। पुलिस को इस दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी।

गिरिराज धाम में उत्तर भारत के प्रख्यात मुड़िया पूर्णिमा मेला में शनिवार को श्रद्धालुओं के सैलाब दर सैलाब उमड़ते रहे और देखते ही देखते भीड़ इस कदर गिरिराज धाम के चप्पे-चप्पे पर समाई के किलोमीटरों का दायरा छोटा पड़ गया। भक्ति के आगे धूप ताप और भीषण गर्मी भी बेअसर हो गई।

शाम के बाद से दानघाटी, सौंख अड्डा, बिजली घर तिराहा, दसविसा, बड़ा बाजार, आन्यौर, जतीपुरा, राधाकुंड से लेकर मानसी गंगा पर भीड़ के आगे पुलिस-प्रशासन के इंतजाम चरमरा गये। तमाम पुलिस कर्मियों की मनाही के बाद भी श्रद्धालुओं ने मानसी गंगा के फुब्बारों को दरकिनार कर गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया।

यहां बार-बार मेला के मजिस्ट्रेट पुलिस कर्मियों के जरिए गंगा में जाने से रोकने में लगे थे, लेकिन आस्था के आगे उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं था। मेला में अब तक करीब पचास लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। यह भीड़ विगत मेला से कम आंकी जा रही है।

इस पूर्णिमा की पूर्व संध्या चौदस होने के चलते प्रमुख मंदिर दानघाटी और मुकुट मुखारविंद पर गिरिराज महाराज के विशेष फूल बंगला के दर्शन कराए गये। इससे पहले दिन भर गिरिराज महाराज पर श्रद्धालुओं ने दूध चढ़ाकर अभिषेक कर पूजा अर्चना की।

इधर मेला में शाम से ही उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के तमाम इलाकों के अलावा देश के दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, कर्नाटक, केरल, मिजोरम, त्रिपुरा सहित तमाम राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचे।

मेला में भीड़ के चलते सुविधाएं इस तरह लड़खड़ाई कि यहां के प्रमुख मंदिरों में इंच भर पैर रखने को जगह नहीं थी। मेला में करीब तीन सैकड़ा श्रद्धालुओं के अपनों से बिछुड़ने की खबर हैं, जिन्हें खोया पाया केन्द्र के जरिए आपस में मिलाने का कार्य तेजी से चल रहा था।



गिरिराज भक्तों की सेवा को बढ़े हाथ


गोवर्धन (DJ 2010.07.24)। देश-विदेश से गिरि परिक्रमा करने तथा अपने गुरु चरणों में सिर झुकाने आये लाखों श्रद्धालुओं की सेवा में गिरिराज मित्र मंडल ने शनिवार को पलक पांवड़े बिछा दिये। सम्पन्न-विपन्न और बड़े-छोटे का भेद त्याग सेवक समुदाय प्रसाद एवं शीतल जल वितरण में लग गया।

मंडल के कार्यकर्ताओं ने गिरि परिक्रमा के लिये जाने के प्रमुख गोवर्धन चौराहे पर दोपहर भंडारा तथा शीतल पेयजल सेवा शुरु कर दी। इसका आरंभ बसपा के मथुरा-वृंदावन विधान सभा क्षेत्र कोर्डिनेटर डा. अशोक अग्रवाल ने किया।

इसमें दर्जनों ऐसे भक्त भी जुटे जिन्होंने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद कर सेवा को महत्व दिया। इस पुण्य कार्य में कृष्ण नगर पुलिस चौकी एवं हाईवे पुलिस बल के अनेक कर्मियों ने व्यवस्था संबंधी सहयोग दिया।



गिर्राजजी के हवाले जिंदगी का सफर


मथुरा (DJ 2010.07.24)। पार्थ सारथी की भूमि पर चारों दिशाओं से भीड़ उमड़ रही है। कोई गोवर्धन गिरि परिक्रमा को जा रहा है तो कोई बाबा जयगुरुदेव आश्रम पर। न गाड़ियों में कदम रखने को जगह है और न ही बसों में।

मथुरा जंक्शन के प्लेटफार्म और प्रतीक्षालय सब भरे हुए हैं। टीन शेड और पेड़ों के नीचे भी लोग बेसुध पड़े हुए हैं। हालात यह हैं कि भीड़ के दबाव के आगे खाकी लाचार और बेवश हो गई तो भक्तों ने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी है।

सैकड़ों लोग रेल की पटरियों पर बैठकर गाड़ियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। यहां तक कि उल्टी दिशा से गाड़ियों में चढ़ने को मारामारी मची हुई है। डिब्बे के गेट पर यात्री लटके हुए हैं तो ज्वाइंट पर खड़े होकर भी उनको सफर करने में डर नहीं लग रहा है। बस और रेल गाड़ियों की छत पर बैठकर भी यात्रा पूरी की जा रही है। कुल मिलाकर यही है कि श्रद्धालुओं ने अपनी जिदंगी का सफर गिर्राजी के हवाले कर दिया है।

गुरु पूर्णिमा पर हर साल की तरह इस वर्ष भी चारो दिशाओं से उमड़ रही भीड़ से कान्हा की नगरी में लघु भारत के दर्शन हो रहे हैं। गोवर्धन में गिरि परिक्रमा लगाई जा रही है तो बाबा जयगुरुदेव आश्रम पर मेला लगा हुआ है।

मथुरा-वृंदावन में भी गुरु आश्रमों पर शिष्य पूजा अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। ब्रज भूमि पर कदम रखने और वापस लौटने के बीच के सफर में श्रद्धालुओं को खतरा मोल लेना पड़ रहा है। मजबूरी में श्रद्धालुओं द्वारा उठाए जा रहे नादानी भरे कदम को रोकने में खाकी पूरी तरह से लाचार और बेवश ही दिखाई पड़ रही हैं।

मथुरा जंक्शन पर यह तस्वीर पूरी तरह से साफ ही नजर आ रही है। प्लेटफार्म और प्रतीक्षालय भरे हुए हैं। सैकड़ों यात्री पटरियों पर बैठ कर गाड़ियों का इंतजार कर रहे हैं। यहां तक कि गाड़ी आते ही चढ़ने के लिए भीड़ स्टेशन और उसकी विपरीत दिशा से टूट रही है। कोई गेट पर लटका हुआ तो कोई दो डिब्बों के बीच के ज्वाइंट पर खड़ा हुआ है।

अलवर और कासगंज की गाड़ियों की छत पर भी यात्री बैठकर आ जा रहे हैं। बसों की छतें भी यात्रियों से भरी हुई हैं। रेलवे के हाइडेंट खोल कर यात्री पटरी पर खड़े होकर स्नान कर रहे हैं। टिकट लेने को बुकिंग खिड़कियों पर मारामारी मची हुई है। यही हाल पूछताछ केंद्र का है। लाइन लगाकर यात्रियों को टिकट दिलाने वाले भी नजर नहीं आ रहे हैं। इस मारामारी में सैकड़ों यात्रियों से उनकी गाड़ी छूट गई। अगले दिन गाड़ी आने के इंतजार में वे प्लेटफार्म पर डेरा डाले हुए हैं।



हाइवे पर रेंगती रहीं गाड़ियां


मथुरा (DJ 2010.07.24)। मुड़िया पूर्णिमा से एक दिन पहले शनिवार को शहर अंदर की यातायात व्यवस्था में तो सुधार नजर आया, मगर हाइवे पर अव्यवस्था और भीड़ के कारण गाड़ियां रैंगती रहीं। खासकर गोवर्धन चौराहा और सौंख चौराहा के आसपास भारी जाम की स्थिति बनी रही।

गुरु पूर्णिमा को गिरिराज परिक्रमा लगाने के लिए शनिवार को श्रद्धालुओं का रैला टूट पड़ा। रेल, बस और निजी वाहनों से आने वाले श्रद्धालुओं को गोवर्धन पहुंचाने के लिए रोडवेज की गाड़ियां तो तत्पर रहीं, पर अव्यवस्था दूर नहीं की जा सकी। नए बस स्टेंड, महोली रोड और भूतेश्वर समेत कृष्णा नगर मार्गो पर भीड़ तो भारी रही, पर जाम नहीं लगने दिया गया।

गाड़ियां आसानी से पास हो रही थीं, पर श्री कृष्ण जन्मस्थान के आसपास पैदल यात्रियों के कारण दिन में कई बार जाम लगा। होली गेट व मसानी से पहुंचने वाले वाहन यहां फंसे रहे। जबकि महोली रोड पर यातायात व्यवस्था में सुधार दिखा। कृष्णा नगर में केवल भूतेश्वर तिराहे और गोवर्धन चौराहे के आसपास जाम लग रहा था, जिसे यातायात पुलिस संभाल रही थी। पुलिस ने नए बस स्टेंड के पास गोवर्धन की तरफ से लौटने वाली बसों के कारण कई घंटे तक गाड़ियां रेंग-रेंग कर चलीं।

इस बीच गोवर्धन चौराहा और सौंख मार्ग चौराहा पर स्थिति एकदम विपरीत रही। सुबह से तो यहां जाम लगा ही रहा, सायं होते ही जैसे ही यात्रियों की भीड़ ज्यादा बढ़ी, यहां ट्रैफिक निकल नहीं पाया। गोवर्धन की ओर जाने वाले मार्ग पर बसों के अलावा निजी वाहन देर रात तक जाम में फंसे रहे। जबकि डग्गेमार वाहनों ने भी व्यवस्था बिगाड़ी रखी थी। इस वजह से हाइवे पर दिल्ली और आगरा की ओर पास होने वाला यातायात भी प्रभावित रहा।

जयगुरु देव मंदिर के पास बैरीकेटिंग लगायी गयी है, लेकिन यहां संस्था के स्वयंसेवक ही यातायात व्यवस्था संभाल रहे हैं। मंदिर के बाहर भारी संख्या में वाहन खड़े हुए हैं, लेकिन इन्हें तरतीब से खड़ा करवाया गया है, जबकि यातायात पुलिस हाइवे के दो प्वाइंट्स पर भीड़ और जाम को काबू नहीं कर पायी।



संकेत न समझे तो सतलोक नहीं जा पाओगे- जयगुरुदेव


मथुरा (DJ 2010.07.24)। बाबा जयगुरुदेव ने कहा है कि सुरत सत्तदेश है। किसी प्रकार का मसाला नहीं है। निर्मल, स्थाई, अखंड और अकेली है। उसमें 88 हजार दीपक जलते हैं। उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। बस इशारा ही किया जा सकता है। जो साधक इशारे समझ लेते और चल पड़ते हैं वे निज धाम पहुंच जाते हैं। जो नहीं समझ पाते वे सतलोक नहीं जा पाते।

गुरू पूर्व का पुण्य कमाने आये श्रद्धालुओं को प्रवचन करते बाबा ने आगे कहा कि पहले जब सुरतें आई तो नाम को पकड़े थी। धीरे-धीरे उन पर कर्मो का परदा पड़ गया। मन, बुद्धि, चित्त पर कर्मो का अधिकार हो गया। आप लोग संसारी कामों को थोड़ा ढ़ीला व कम करो। जो करो मेहनत व ईमानदारी से करो। साधकों को बरकत मिलती है। नाम निरंतर और मन लगाकर जपो। तब तक साधना करो जब तक कि शब्द प्रकट हो जाए। जब शब्द आने लगेगा तो मन, बुद्धि, चित्त और सुरत साफ हो जाएंगे।

बाबा ने बताया साधना में विरह-वेदना, तड़प होने पर संसार शून्य हो जाता है। हर चीज का अभाव हो जाता है। महात्मा रोये और विलाप करते रहे वे यहां से पार सतदेश पहुंच गये। उन पर सांसारिकता का असर नहीं पड़ा।

प्रख्यात संत ने बताया कि प्रलय में प्रथ्वी, जल में, जल अग्नि में, अग्नि वायु में वायु आकाश में आकाश माया में, माया ईश्वर में ईश्वर ब्रह्मा में ब्रह्मा पारब्रह्मा और पारब्रह्मा महाकाल पुरुष में विलीन हो जाते हैं। जब उसकी मौज होती है तब फिर विस्तार हो जाता है।

उन्होंने महोली वासियों की सहयोगी भावना की तथा व्यवस्था में संलग्न स्थानीय एवं बाहर से आये लोगों के सराहना करते हुये कहा जो उपदेश मिलता है उसी के अनुसार शांति से चलना उचित रहता है।



जगमगाएंगे यमुना के घाट


मथुरा (DJ 2010.07.24)। बिजली चले जाने के बाद भी यमुना किनारे के घाट अब रात में जगमगाते रहेंगे। सांसद निधि से घाट किनारे सौर ऊर्जा लाइट लगाने की तैयारियां चल रही हैं। नेडा के परियोजना निदेशक ने गत दिवस रालोद कार्यकर्ताओं के साथ घाटों का भ्रमण किया।

बिजली जाते ही यमुना के घाटों पर अब अंधकार नहीं होगा। सांसद जयंत चौधरी ने रालोद नगर अध्यक्ष श्याम चतुर्वेदी की मांग पर यमुना के घाटों पर अपनी निधि से सौर ऊर्जा लाइट लगवाने की मंजूरी दे दी है।

रालोद नगर अध्यक्ष ने बताया कि नेडा के परियोजना निदेशक ने घाटों का निरीक्षण कर स्थल का चयन कर लिया है। इसी के अनुसार योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि दाऊजी घाट, श्रृंगार घाट, रामघाट, विश्राम घाट, महाप्रभूजी की बैठक समेत चौधरी चरण सिंह घाट परियोजना अंतर्गत सभी निर्मित घाटों पर करीब तीन लाख रुपये की लागत से पहले चरण में एक दर्जन सौर ऊर्जा लाइट लगाई जाएंगी। इसकी देखभाल नेडा करेगा और सुरक्षा की जिम्मेदारी नगर पालिका को सौंपी जाएगी। उन्होंने बताया कि विश्राम घाट पर ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि रात में पूरा घाट जगमगाता रहे।