Saturday, May 15, 2010

2010-05-16_Braj News

अक्षय तृतीय आज, गूंजने लगेंगी शहनाई


बृज के मंदिरों में होंगे विशेष दर्शन, सजने लगे भव्य फूल बंगले

परंपरा : समृद्ध, सौभाग्य के लिए खरीदेंगे सोना, दान से बनता है धन की प्राप्ति का योग

मथुरा। अक्षय तृतीय पर्व १६ मई को धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिरों में ठाकुर जी के फूल बंगले सजेंगे। समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक सोना खरीदने की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। इस पर्व से ही एक बार फिर से शहनाई गूंजने लगेंगी।

मार्केट में सराफा कारोबारियों ने नई डिजाइन के सोने के जेवरात तैयार कराए हैं। मंदिरों में दान पुण्य होगा। सत्तू की बिक्री भी इसी दिन से प्रारंभ हो जाएगी। सहालग का मौसम होने की वजह से अक्षय तृतीय पर्व और भी खास हो गया है।

ज्योतिषाचार्य रविंद्र कुमार के अनुसार बैसाख सुदी तृतीय के दिन अक्षय तृतीय का पुण्य पर्व मनाया जाता है। यह धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम दिन माना गया है। मान्यता अनुसार आज किया हुआ दान अक्षय अमृत पुण्य दान बनता है और कभी भी धन का नाश नहीं होता। इस दिन विवाह करने वालों को शुभ मुहूर्त का योग प्राप्त होता है। आज ही के दिन हयग्रीव एवं परशुराम जी का भी अवतार हुआ था। दान से धन प्राप्ति का योग तो बनता ही है साथ ही चिंरजीवियाें का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होता है जो शुभकारी होता है। पं. जयराम शास्त्री बताते हैं कि अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन सोना खरीदने से वर्ष भर सुख समृद्धि घर बनी रहती है।

वहीं स्वर्णकार व सराफा व्यवसायियों ने सोने का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। भारी सोने के अलावा हल्के सोने के आभूषणों का स्टॉक उन्होंने पहले से ही कर लिया है। ब्रांडेड कंपनियों द्वारा ग्राहकों को लुभाने के लिए कई प्रकार के डिस्काउंट दिए जा रहे हैं। बैंकों और डाकघर में भी विशेष छूट के सोना बेचा जा रहा है। सर्राफ प्रभात अग्रवाल, कमल अग्रवाल और माधव बंसल का कहना है कि इस बार सोने के आकर्षक डिजाइन वाले जेवरात मौजूद हैं।

इन दान का है विशेष महत्व--
  • सतुआ, स्वर्ण, अक्षय कोष, अन्नदान
  • ब्राह्मण को पीले वस्त्र का दान
  • ठाकुर जी को केसर चंदन दान
  • श्वेत वस्त्र का दान
  • घड़े, छत्री और प्याऊ का दान
  • मंदिरों में होंगे चरण दर्शन

अक्षय तृतीया पर मंदिरों में विशेष रुप से फूल बंगलों एवं चरण दर्शनों का आयोजन किया जाएगा। वृंदावन स्थित बांके बिहारी और गरुण गोविंद आदि प्रमुख मंदिरों पर चरण दर्शन की तैयारियां चल रही हैं।

चरण दर्शन देंगे प्रभु ठाकुर बांकेबिहारी


वृन्दावन (DJ) । वृन्दावन में वर्ष में एक बार होने वाले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के चरण दर्शनों के लिए उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी व्यवस्थाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद कर लिया है। शनिवार को पुलिस एवं प्रशासन के आलाधिकारियों ने बैठक कर पुलिस कर्मियों को खास दिशानिर्देश दिये।

दरअसल गतवर्ष अक्षय तृतीया पर्व पर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में दर्शनों के दौरान भारी भीड़ के दवाब के चलते एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गयी थी। इसे ध्यान में रखकर इस बार प्रशासन कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता।

मंदिर में भीड़ के दवाब को कम करने के लिए जहां प्रवेश एवं निकास द्वारों को बदला गया है वहीं मंदिर परिसर एवं उसके आसपास भीड़ जमा न होने देने के लिए पुलिसकर्मियों को खास निर्देश दिये गये हैं। शनिवार को फोगला आश्रम में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए एसपी सिटी रामलाल वर्मा ने पुलिस कर्मियों को ड्यूटी के दौरान सतर्क रहने के निर्देश दिये।

साथ ही उन्होंने अवांछनीय तत्वों पर भी पैनी निगाह रखने के आदेश दिये हैं। बैठक में एसपी सिटी द्वारा विभिन्न प्वाइंटों पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी को लेकर आकस्मिक निरीक्षण करने की भी बात कही। नगर में वाहनों के प्रवेश को पूर्णत: प्रतिबंधित करने के लिए मथुरा-वृन्दावन एवं छटीकरा वृन्दावन मार्ग पर बैरियर लगाकर वाहनों को बृज हैल्थकेयर अस्पताल के समीप एवं संत कृपालु महाराज के नवनिर्मित अस्पताल में वाहनों को खड़ा कराया जायेगा।

ठाकुर जी को लगाएंगे कपूर मिश्रित चंदन


सेवायत तैयार कर रहे प्रभु को लगने वाला लेप
तैयारी : सप्त देवालयों में फूल बंगलों का आयोजन प्रारंभ

वृंदावन (AU) । वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को आखा तीज और अक्षय तृतीया आदि नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद ही नगर के सप्त देवालयों में फूल बंगलों का आयोजन प्रारंभ हो जाता है।

वहीं नगर के राधा दामोदर, राधा गोविन्द, राधा मदनमोहन, राधा गोकुलानन्द, राधारमण, राधा श्याम सुंदर, राधा सनेह बिहारी आदि मंदिरों में चंदन शृंगार के अद्भुत दर्शन की झांकी वर्ष में एक बार ही होती है। इसके लिए मंदिर सेवायत ठाकुर जी को लगाए जाने वाले चंदन की घिसाई के कार्य करने में जुट गए हैं। नगर के सप्त देवालयों में से एक राधादामोदर मंदिर में अक्षय तृतीया के अवसर पर ठाकुर जी के श्री विग्रह का सर्वांग शृंगार कपूर मिश्रित चंदन से किया जाएगा।

मंदिर के सेवायत आचार्य निर्मल चंद्र गोस्वामी ने बताया कि चंदन दर्शन के सूत्राधार कलियुग पावन अवतार चैतन्य महाप्रभु के दादा गुरू माधवेंद्र पुरी गोस्वामी थे। वृंदावन में चंदन यात्रा का विशिष्ट भक्ति मय सेवा की परंपरा का शुभारंभ ठा.राधादामोदर महाराज के प्राकट्यकर्ता श्रील जीव गोस्वामी ने अक्षय तृतीय के दिन यहां के समस्त सप्त देवालयों में कराया। पंडित मनीष शुक्ला बताते हैं कि अक्षय तृतीया की तिथि को जो भी दान पुण्य किया जाता है, उसे यह तिथि अक्षय बना देती है।

पालिका की भूमि पर अब बनेगी पार्किंग


पोतराकुंड से भूतेश्वर स्टेशन के मध्य का स्थान चुना
खुशखबरी : बेतरतीब वाहनों को खड़ा करने की समस्या होगी खत्म, डीएम ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए लिया निर्णय.

मथुरा (AU) । श्रीकृष्ण जन्मस्थान के समीपवर्ती कालोनियों में देशी-विदेशी श्रद्धालुओं की बेतरतीब खड़ी गाड़ियों की समस्या अब खत्म होगी। जिला प्रशासन ने पोतराकुंड से भूतेश्वर स्टेशन के मध्य पड़ी पालिका की भूमि पर पार्किंग बनाने का निर्णय लिया है। पार्किंग निर्माण का काम विकास प्राधिकरण करवाएगा।

इस आशय की घोषणा जिलाधिकारी दिनेश चंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह की सुरक्षा को लेकर हुई जिला समन्वय समिति की बैठक में शनिवार को की गई। इस मौके पर जन्मभूमि की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को रखा गया। जन्मस्थान के आसपास खड़े होने वाले वाहनों की पार्किंग के मामले पर चर्चा हुई। निर्णय लिया कि पोतराकुंड से भूतेश्वर रेलवे स्टेशन के मध्य स्थित पालिका की भूमि को पार्किंग के रूप में विकसित किया जाए।

वर्तमान में यहां कूड़ा डाला जाता है। बैठक के उपरांत अपर जिलाधिकारी, चीफ इंजीनियर विकास प्राधिकरण राकेश भाई, मंदिर मजिस्ट्रेट जितेंद्र शर्मा, ईओ पालिका भैरपाल सिंह ने स्थल का निरीक्षण किया। इस मौके पर पोतराकुंड पर विकास प्राधिकरण द्वारा लगाई गई पांच हाईमास्क लाइट अक्सर खराब रहने पर भी चर्चा की गई। तय किया गया कि विकास प्राधिकरण इन लाइटों को सही कराकर जन्मस्थान संस्था को रखरखाव के लिए हस्तगत कर देगा। पोतराकुंड पर पंजाब नेशनल बैक द्वारा पोषित प्याऊ को ठीक कराने के निर्देश बैंक को दिए।

जन्मस्थान पर सुरक्षा बतौर मोर्चा बनाने के लिए लोकनिर्माण विभाग को निर्देशित किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से जन्मस्थान के पास अग्निशमन केंद्र स्थापना की योजना तैयार की गई। जन्मस्थान परिसर की विद्युत आपूर्ति, सफाई, सीसी कैमरों की स्थिति, अतिक्रमण तथा आवश्यकतानुसार बाहरी क्षेत्रों में चेकिंग पर भी विचार किया गया। बैठक में एसएसपी बीडी पाल्सन समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

शेखावत को था ब्रज से विशेष लगाव


१९५३ में चौक में हुई जनसभा को किया था संबोधित
स्मरण: अमर उजाला को जताई थी ब्रज विकास की चिंता. मुख्यमंत्री बनने पर लगाई थी गिरिराज की परिक्रमा.

मथुरा (AU) । पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत का ब्रज भूमि से विशेष लगाव था। सबसे पहले वर्ष १९५३ में उन्होंने बृजभूमि को अपने ओजस्वी भाषण से लोगों को झकझोरा था। इसके बाद उनका बृज में आना-जाना लगा रहा। राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने मनौती स्वरूप गोवर्धन की कार से परिक्रमा भी लगाई थी। तब उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में ब्रज भूमि के विकास के प्रति अपनी चिंता का अहसास का कराया था।

जनसंघ की राजनीति में आने के बाद १९५२ के आम चुनाव में राजस्थान से चुने जाने के बाद १९५३ में हुए निकाय चुनाव में भैरों सिंह ने मथुरा के चौक बाजार में जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद ब्रज से उनका नाता जुड़ गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दर्शन के लिए तो वे दर्जन भर बार मथुरा आए। कई बार तो उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता बांके बिहारी माहेश्वरी के स्वामी घाट स्थित निवास पर रात्रि विश्राम भी किया। भाजपा नेता के मुताबिक शेखावत जब भी आते तब पार्टी की सक्रियता और स्थानीय राजनीति पर चरचा जरूर करते।

वर्ष १९९६ में राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर चुनने के बाद मनौती स्वरूप उन्होंने गोवर्धन की २१ किलोमीटर लंबी परिक्रमा लगाई थी। उस वक्त तत्कालीन डीएम सदाकांत शुक्ला से उन्होंने ब्रज के हालात जाने थे। अमर उजाला के विशेष बातचीत में शेखावत ने ब्रज के विकास के प्रति अपनी गंभीरता का अहसास ही नहीं कराया, बल्कि परिक्रमा के तत्काल बाद राजस्थान सीमा में आने वाले गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के पूंछरी क्षेत्र में सड़क का निर्माण और पौधारोपण कराया। करीब तीन वर्ष पूर्व वे भाजपा नेता कारिंदा सिंह के आवास पर भी आए थे। यह बृजभूमि में उनका आखिरी आगमन था।

दाऊजी के चरण दर्शन आज, समय बदला


बलदेव (AU) । श्रीदाऊजी महाराज मंदिर के प्रबंधक पीतंबर लाल पांडेय के अनुसार अक्षय तृतीया से मंदिर के दर्शनों का समय परिवर्तित हो जाएगा। रविवार से प्रातः छह से बारह बजे, सायं चार से पांच बजे, रात्रि सात से नौ बजे तक मंदिर दर्शनों के लिए खुला रहेगा। इससे पूर्व रविवार को दाऊजी के चरण दर्शनों का आयोजन किया जाएगा। मंदिर पुजारी रामनिवास शर्मा ने बताया कि दाऊजी महाराज के इस विशेष दर्शनों का विशेष पुण्य लाभ मिलता है।

अधिक मास के समापन पर नगर में उमड़े परक्रिमार्थियों का लोगों ने जगह-जगह सेवा सत्कार किया।
नगर में श्रद्धालुओं की सेवा में बस स्टैंड, शिव रतन बाजार, मोती बाजार, सराय, परिक्रमा मार्ग, रामजी मंदिर, नरहौली में शनिदेव मंदिर आदि प्रमुख स्थानों पर भंडारा और प्रसाद की व्यवस्थाएं की गईं। इसके अलावा पूड़ी सब्जी, बूंदी, मोमनथार, चाय, हलुआ आदि वितरित किया। इस अवसर पर दाऊदयाल शर्मा, बच्चन लाल पांडेय काकाजी, ज्ञानेंद्र पांडेय, अखिलेश पाठक, सोनू, मुकुट बिहारी, विनोद गर्ग, तोष पांडेय, अगंद शर्मा, बिहारी लाल, दाऊदयाल और सुनील अग्रवाल आदि थे।

भारतीय संस्कृति के पुरोधा है मुकुंद हरि महाराज


विद्वत सम्मेलन में संतों ने रखे विचार
आयोजन : पांच दिन तक मनाया जाएगा जयंती महोत्सव

वृंदावन (AU)। सुदामा कुटी में चल रहे संकीर्तन सम्राट स्वामी मुकुंद हरि महाराज के पांच दिवसीय जयंती महोत्सव के अंतर्गत संत-विद्वत सम्मेलन में सुदामा कुटी के अध्यक्ष महंत भगवान दास महाराज ने कहा कि संकीर्तन सम्राट स्वामी मुकुंद हरि महाराज भारतीय संस्कृति के बहुमूल्य पुरोधा थे। वह स्वरचित पदों का गायन अपने मधुर कंठ से करके सभी को भाव-विभोर कर देते थे। उनका सवर कोयल के समान था। मुख्य अतिथि चतुः संप्रदाय विरक्त वैष्णव परिषद् के अध्यक्ष महंत सच्चिदानंद दास महाराज ने बाबा गोपालदास लघु सखी कृत मुकुंद हरि चालीसा नामक पुस्तक का लोकार्पण किया।

संयोजक बाबा गोपालदास ने कहा कि इस संसार में प्रतिदिन असंख्य व्यक्ति पैदा होते हैं और असंख्य लोग विदा होते हैं। याद केवल स्वामी मुकुंद हरि जैसे संतों को ही किया जाता है। कार्यक्रम में संगीतज्ञ वरुण, अंबरीश, नरेश कुमार ने मृदुल स्वर लहरियों के मध्य मुकुंद हरि महाराज द्वारा रचित पदों का गायन कर मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर स्वामी आदित्यानंद महाराज, महंत जगन्नाथ दास शास्त्री, भक्तमाल दास, बिहार लाल वशिष्ठ, डा. गोपाल चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।

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कैप्शन- वृंदावन के सुदामा कुटी में मुकुंद हरि महाराज के जयंती महोत्सव में उपस्थित संत एवं विद्वतजन।

महर्षि परशुराम जयंती पर विद्वत संगोष्ठी


मथुरा (DJ)। श्री रंगनाथ लोक सेवा संस्थान के तत्वावधान में भगवान परशुराम जयंती की पूर्व बेला पर एक विद्वत संगोष्ठी का आयोजन शनिवार को रंगनाथ प्रेस प्रांगण में किया गया।

इस अवसर पर आचार्य नरेश नारायण ने भगवान परशुराम को श्रीमन्नारायण का आवेशावतार बताते हुए 24 अवतारों में श्रेष्ठ अवतार बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को जीतकर उसे ब्राह्माणों को प्रदान किया। महेश शर्मा ने कहा कि हमें अपने जीवन में बड़ों का सम्मान करना सीखना चाहिए। सुरेश शर्मा ने कहा कि शक्ति तप से प्राप्त होता है। आज विप्र समाज तप से विमुख होता जा रहा है।

आनंद शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम अपने पिता के आज्ञाकारी थे। पिता का आशीर्वाद सर्वोपरि है। गिरिराज शास्त्री ने कहा कि भगवान मानव जीवन को संतुलित बनाने के लिए समय-समय पर अवतार धारण करते हैं। मधुमंगल शुक्ला ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की चिंता छोड़नी पड़ती है। भगवान परशुराम जी हमारे आदर्श हैं। महेश भारद्वाज ने कहा कि ब्राह्माणों को संतोषी एवं तपस्वी होना चाहिए तभी विप्र समाज का गौरव बढे़गा।

Friday, May 14, 2010

May 15 Braj News

Taken from today's online Dainik Jagaran (Yahoo India) and Amar Ujala websites. This is a lot of fun, but would be better with pictures.

प्रभु ब्याह में मगन-धरा और गगन


मथुरा। अधिक मास का पुण्य दो गुना हो गया। एक पखवाड़े में अपने प्रभु को दो बार दूल्हा के रूप में सजाकर भक्तों ने नया इतिहास बना दिया। प्रभु की मोहिनी छवि, श्रंगार, महोत्सव की सुंदरता तथा श्रद्धा और उमंग का दीदार कर धरा एवं गगन भी मगन दिखाई दिये। अनेक फिल्मों का फिल्मांकन के योग्य इस ब्याह का आनंद लूटने के लिये जुटी भीड़ कई कीर्तिमान तोड़ कर नए प्रतिमान स्थापित कर दिये।

तीन साल तक तिथियों की घट-बढ़ के पश्चात तैयार होता है एक अधिकमास। धर्म क्षेत्र में पुण्य प्राप्ति के लिये इसे सर्वाधिक उत्तम माना जाता है। मंदिरों में पूरे साल में होने वाले सभी मनोरथ इस एक माह में पूर्ण किये जाते हैं। प्रभु द्वारिकाधीश के मंदिर में इसी परंपरा का पालन जोर शोर से किया गया। अभी कुछ ही दिन पूर्व नगर के चतुर्वेदी परिवार ने ब्याबला मनोरथ कराया था। इसका आनंद और उल्लास देखने के बाद अन्य भक्त समाज भी आगे बढ़ा। ऐसे उत्साही सेवकों से भरपूर गिर्राज सेवा समिति ने शुक्रवार को एक बार फिर प्रभु को दूल्हा बनाने की ठानी।

समिति के सेवकों ने कई दिन की तैयारियों के बाद शुक्रवार को सायंकाल द्वारिकानाथ को अलौकिक, दिव्य श्रंगार से सुशोभित कर आनंद की बरसात की। इस दौरान मंदिर और उसके आस-पास के बाजार की चमक-दमक भरी सजावट अत्यंत मोहकता का आमचन कराती रही। महंके और दूर-दराज से मंगाए गये पुष्प तथा इत्र- फुलेल की सुगंध से वातावरण पूरे समय महकता रहा।

सायंकाल 6.30 बजे जैसे ही प्रभु ने मंद-मंद मुस्कान बिखरते हुये दर्शन देना शुरु किया हर ओर से जय-जयकार की ध्वनि ने गगन को मगन कर दिया। समिति के मुरारी अग्रवाल, दीनानाथ, अशोक कुमार आढ़ती, नीरज गोयल ने सपरिवार बराती एवं घरातियों की सेवा की। रात्रि में प्रभु के शयन के पश्चात दोनों पक्षों की जमकर दावत हुई।

..अब गूंजेगी शहनाई, चहकेगी तरुणाई

मथुरा। दैविक विधि-विधान के साथ अधिक मास का शुक्रवार को समापन हो गया। जिन्हें शुभ कर्म करने की एक मास के चाह थी उनका इंतजार खत्म हो गया। धार्मिक तबका शनिवार से अपने सभी शुभ कर्म करने के लिये स्वतंत्र हो जाएगा।

धार्मिक क्षेत्र में नियम है कि तीन साल में बचे समय से बना अधिकमास पुण्य कमाने के लिये भले अत्यंत महत्व का है किंतु इस दौरान शुभ कर्म पूरी तरह प्रतिबंधित होते हैं। तीस दिन से बेटे-बेटियों की शादी, मंदिर, ग्रह, दूकान, निर्माण, वाहन पूजन तथा अन्य प्रकार के सांसारिक शुभ कार्य शुरु करने के लिये इंतजार कर रहे थे। अधिकमास समाप्ति के पश्चात अब उन्हें शहनाई बजवाने तथा सभी शुभ कर्म करने की छूट होगी।

जानकार बताते हैं कि इस बार प्रथमा तिथि शनिवार को कुछ ही समय होने का भी लाभ मिल सकेगा। शुभ कार्य नहीं हो पाने से परेशान लोग शनिवार को लगने वाली द्वितीया तिथि के समय अपने कार्य शुरु कर सकेंगे। इस अधिकमास की समाप्ति का सबसे बड़ा मुहूर्त 16 मई को अक्षय तृतीय के दिन निकलेगा। अबूझ साया तथा अखंड मुहूर्त होने के चलते इस दिन सैकड़ों शादियां तथा पूजन-अर्चन, निर्माण इत्यादि शुभ कर्म किये जाएंगे। सबसे अहम और सगुन कार्य यह होगा कि युवा दिल चहक उठेंगे। सगाई, लगन और शादी जो होने लगेंगी।

मानसून की ज्यादा मेहरबानी फेर न दे किस्मत पर पानी


मथुरा। इस बार मानसून की ज्यादा मेहरबानी हो गई तो किसानों की किस्मत पर ही पानी फिर जाएगा। अधिक बारिश होने पर फसलें डूब जाएंगी। अतिरिक्त पानी को बरसाती नाले तेजी से नहीं खींच पाएंगे। क्योंकि तीन साल से इनकी सफाई नहीं कराई गई है। सभी नाले झाड़-झंखड़, घास-फूस और सिल्ट से अटे पड़े हैं।

बाढ़ आने से निपटने की भले ही तैयारियां चल रही हो, लेकिन अधिक बारिश होने पर फसलों को डूबने से बचाने की अभी कहीं कोई तैयारी नहीं की जा रही है। बरसाती पानी की निकासी के लिए अपर खंड आगरा केनाल में 53, लोअर खंड तृतीय में 51 और निचली मांट ब्रांच खंड गंगा नहर में 63 नाले है। इनमें राल, हुलवाना, कोसी आर्टिरीयल, बठैन और गोवर्धन ड्रेन ट्रंक ड्रेन है।

रनवारी के ऊपर से निकली राल ड्रेन सात गांवों में होने वाले जलभराव की निकासी कर यमुना में गिरती है। कई छोटे नाले भी इसी ड्रेन से जोड़े गए हैं। लालपुर, दहगांव, कामर, गिड़ोह में होने वाले जल भराव को गांव लालपुर से निकली हुलवान ड्रेन खींच कर गोवर्धन ड्रेन में डालती है। खरोट, अजीजपुर, दौताना, छाता, सेमरी और परखम में भरने वाले पानी की निकासी गांव खरोट से करीब दो किलोमीटर दूर से निकली कोसीआर्टिरीयल ड्रेन खींचती है। बठैन, कमई, जाब, खायरा, डहरौली को जलमग्न होने से बचाने का काम बठैन ड्रेन करती है।

कामा रेगुलेटर से निकली अंतर्राज्यीय गोवर्धन ड्रेन सीधे हाथिया, सौंख, रसूलपुर के पानी की निकासी करती है। गांव पैंठा में होने वाले जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए बना पैंठा नाला अतिरिक्त बरसाती पानी को खींच कर इसी ड्रेन में डालता है। हुलवाना और बठैन ड्रेन इसी ड्रेन में जाकर मिलती है। गांव सोन, सैंहा, नगला सांम, चक के पानी को निकासी लालपुर नाले से होती है। कुदरवन और बोरपा नाले से कुदरवन, जुनसुटी, ऊंचा गांव, कुंजेरा नाला कुंजेरा और राधाकुंड नाला राधाकुंड, मुखराई के अतिरिक्त पानी की निकासी होती है।

जिखन गांव नाल भी एक बड़े भू भाग की फसलों को डूबने से बचाता है। पचहेरा, भूरेका, कोलाहार, पथवाला, करहारी, ईखू, नवल गढ़, राया ब्यौंही बिजहारी, महावन, अलीपुर, पचावर, बल्देव, बिलंदपुर नाले सैकड़ों गांवों के किसानों की फसल को अतिरिक्त पानी से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। बताया गया है कि जिलाधिकारी दिनेश चंद शुक्ला ने पिछले दिनों बाढ़ नियंत्रण की ली बैठक में 31 मई तक नालों की सफाई कराए जाने के निर्देश दिए थे। बैठक में स्पष्ट कहा गया था कि बरसाती नालों में पानी के बहाव में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। अभी तक किसी भी नाले की सफाई का काम शुरू नहीं हो सका है।


वृंदावन: अक्षय तृतीया पर यातायात के पुख्ता



मथुरा। पुलिस ने अक्षय तृतीया पर वृंदावन नगर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था का खाका तैयार किया है। वाहन पार्किंग के स्थल भी चयन कर लिये गए हैं। बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाली सड़क पर बैरीकेडिंग लगाई जायेगी। पोंटून पुल से चार पहिया वाहनों के नगर के अंदर प्रवेश पर रोक रहेगी।

अपर पुलिस अधीक्षक नगर रामलाल वर्मा ने बताया कि रविवार को अक्षय तृतीया पर वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी जी के दर्शन करने को श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था पर मंथन किया गया। श्री वर्मा ने बताया कि दिल्ली और आगरा राजमार्ग से आने वाले समस्त वाहनों को छटीकरा से होकर रमणरेती से पूर्व पार्किंग स्थलों पर पार्क कराया जायेगा। छोटे वाहन एफसीआई गोदाम के अहाते व बड़े वाहन पीएल सर्राफ अस्पताल के समीप सेठ नारायण दस के प्लाट में पार्क होंगे। मथुरा से जाने वाले छोटे वाहन टीबी सेनोटोरियम के अहाते, बृजवासी अहाते एवं कात्यानी देवी अहाते में पार्क होंगे। बड़े वाहन टीबी सेनोटोरियम अस्पताल के सामने मार्ग पर पार्क कराए जायेंगे। यहीं से टेम्पो सवारी उठायेंगे। यहीं पर सवारी छोड़ेंगे। रोडवेज की बसें दिल्ली-आगरा राजमार्ग से वृंदावन जा सकेंगी। बसें मथुरा होकर वृंदावन रोडवेज बस स्टैंड जा सकेंगी। रिक्शा, साइकिल, मोटरसाइकिल, विद्यापीठ चौराहे पर डा.के.गोपाल की कोठी के सामने चौराहा गौतम पाड़ा, तिराहा सेवाकुंज की ओर गली राधा दामोदर रोड, प्रेमगली और सत्याकुंज से भजनकुंज रोड से ओम बिहारी मंदिर की ओर नहीं जाने दिए जायेंगे। इन स्थानों पर नगर पालिका बैरिकेडिंग करायेगी। मांट की ओर से आने वाले चार पहिया वाहन पोंन्टून पुल से नहीं निकलने दिए जायेंगे।

आसमान से बरस रही आग


मथुरा। पिछले तीन दिन से आसमान से बरस रही आग ने जनमानस का हाल बेहाल कर दिया है। तापमान भले ही एक डिग्री सेल्सियस नीचे खिसक गया हो, लेकिन गर्मी के तेवरों में कहीं भी कमी नहीं आई है। मौसम के जानकारों का पूर्वानुमान है कि दो चार दिन में बूंदाबांदी हो सकती है।

मौसम ने सुबह बदलाव के संकेत दिए थे। आसमान में अचानक बादल छा गए और इक्का-दुक्का बूंद भी गिरी। इसके बाद मौसम साफ हो गया। सूरज के चढ़ते ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। दोपहर में आग बरसने लगी। कृषि संभागीय परीक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र राया के तापमापी पर गत दिवस अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, लेकिन शुक्रवार को इसमें एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ गई। दिन का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

रात में भी पारा एक डिग्री गिर कर 25 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। आर्द्ररता में भी दो प्रतिशत की कमी आई। वायुमंडल में नमी 36 प्रतिशत से घट कर 32 प्रतिशत पर आ गई है। पारा भले ही एक डिग्री सेल्सियस गिर गया हो, लेकिन गर्मी की मार जनमानस पर बरकरार पड़ रही है। एलर्जी एवं चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा को नुकसान पहुंच रहा है सनवर्न की शिकायत बढ़ने लगी है। शरीर के खुले भाग धूप में निकलने से काले पड़ने लगे हैं। शरीर में फुंसी भी निकल रही है। इनको खुजलाने से शरीर में संक्रमण फैल रहा है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि आंखों में भी एलर्जी की शिकायत बढ़ रही है। आंख लाल पड़ रही हैं और उनसे चिपचिपा पदार्थ निकल रहा है।


कुसुम सरोवर पर बिखरेगी अब शरदोत्सव की छटा


संस्कृति विभाग ने शासन को भेजा प्रस्ताव

अब हर वर्ष के लिए यही होगा आयोजन स्थल
पांच एकड़ में फैले गुलाब बाड़ी में बनेगा मंच

अमर उजाला एक्सक्लूसिव

मथुरा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो ब्रज के बहुप्रतीक्षित शरद महोत्सव के रंग अब गोवर्धन स्थित पौराणिक स्थल कुसुम वन सरोवर पर बिखरा करेंगे। चंद्रमा की धवल चांदनी और कृष्ण लीला के साक्षी खूबसूरत सरोवर पर कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां भारतीय संस्कृति की एक अलग ही छवि प्रस्तुत करेंगी। यह पर्यटन और संस्कृति दृष्टिकोण से बेहद बेहतरीन साबित होगा। इसी कांसेप्ट के साथ संस्कृति विभाग ने कुसुम सरोवर पर शरदोत्सव के प्रतिवर्ष आयोजन का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

गौरतलब है कि अप्रैल में केंद्रीय और राज्य पर्यटन सचिव के संयुक्त दौरे ने ही कुसुम सरोवर की कायापलट के संकेत दे दिए थे। सचिवों ने कुसुम सरोवर की भव्यता से प्रभावित होकर इसके उच्चस्तरीय विकास की योजना बनाने के निर्देश संबधित अधिकारियों को दिए थे। सूत्रों के मुताबिक इन निर्देशों के मद्देनजर ही इस स्थल पर शरद महोत्सव जैसे उत्सव के आयोजन की योजना बनाई गई है। इसके पास होने की संभावना जताई जा रही है।

इससे पूर्व पौराणिक स्थल को आयोजन के लिए मुफीद बनाया जाएगा। कुसुम वन सरोवर स्थित पांच एकड़ में फैले गुलाब बाड़ी क्षेत्र से बबूल और अन्य पेड़ हटवाकर इस स्थल पर महोत्सव के लिए मंच और लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। पार्किंग स्थल, पहुंच मार्ग आदि का विकास किया जाएगा। संस्कृति, पर्यटन और पुरातत्व विभाग मिल कर विकास कार्य करेंगे।

उप्र संस्कृति विभाग के वाईपी सिंह ने बताया कि कुसुम सरोवर पर शरद महोत्सव के आयोजन का प्रपोजल शासन को भेजा गया है। बजट पास होने का इंतजार है। आगरा मंडल के कल्चरल इंचार्ज रत्नेश शर्मा ने बताया कि प्रपोजल पास होने के बाद इस दिशा में कारगर कदम उठाए जाएंगे।

अक्षय तृतीया : मंदिरों में सजने लगे फूल बंगले


वृंदावन में उमड़ने लगा श्रद्धालुओं का रेला इंतजाम

बांके बिहारी मंदिर में चरण दर्शन की तैयारी पूरी वाहनों का प्रवेश होगा वर्जित, अन्य जिले से मांगा फोर्स |

वृंदावन। १६ मई को अक्षय तृतीया पर्व पर श्री धाम वृंदावन के सप्त देवालयों में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस पावन पर्व की मंदिरों में तैयारी जोरों पर हैं। मंदिरों को भव्यता देने के लिए सजाया संवारा जा रहा है। वहीं अनेक मंदिरों में भव्य फूल बंगले भी सजाए जाएंगे।

बांके बिहारी मंदिर में वर्ष में एक बार होने वाले चरण दर्शन के लिए मंदिर में तैयारियां पूरी की
यह पर्यटन और संस्कृति दृष्टिकोण से बेहद बेहतरीन साबित होगा। इसी कांसेप्ट के साथ संस्कृति विभाग ने कुसुम सरोवर पर शरदोत्सव के प्रतिवर्ष आयोजन का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

गौरतलब है कि अप्रैल में केंद्रीय और राज्य पर्यटन सचिव के संयुक्त दौरे ने ही कुसुम सरोवर की कायापलट के संकेत दे दिए थे। सचिवों ने कुसुम सरोवर की भव्यता से प्रभावित होकर इसके उच्चस्तरीय विकास की योजना बनाने के निर्देश संबधित अधिकारियों को दिए थे। सूत्रों के मुताबिक इन निर्देशों के मद्देनजर ही इस स्थल पर शरद महोत्सव जैसे उत्सव के आयोजन की योजना बनाई गई है। इसके पास होने की संभावना जताई जा रही है।

इससे पूर्व पौराणिक स्थल को आयोजन के लिए मुफीद बनाया जाएगा। कुसुम वन सरोवर स्थित पांच एकड़ में फैले गुलाब बाड़ी क्षेत्र से बबूल और अन्य पेड़ हटवाकर इस स्थल पर महोत्सव के लिए मंच और लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। पार्किंग स्थल, पहुंच मार्ग आदि का विकास किया जाएगा। संस्कृति, पर्यटन और पुरातत्व विभाग मिल कर विकास कार्य करेंगे।

उप्र संस्कृति विभाग के वाईपी सिंह ने बताया कि कुसुम सरोवर पर शरद महोत्सव के आयोजन का प्रपोजल शासन को भेजा गया है। बजट पास होने का इंतजार है। आगरा मंडल के कल्चरल इंचार्ज रत्नेश शर्मा ने बताया कि प्रपोजल पास होने के बाद इस दिशा में कारगर कदम उठाए जाएंगे।


पहले जयपुर मंदिर में होता था उत्सव


मथुरा। वर्षों तक शरदोत्सव वृंदावन स्थित राजस्थान सरकार के देवस्थान के अधीन संचालित जयपुर मंदिर में हुआ करता था। पिछले ८-१० सालों से ये महोत्सव नहीं हो पा रहा। संस्कृति विभाग और प्रशासन की पहल पर वर्ष २००९ में ये आयोजन एक बार फिर वृंदावन स्थित शोध संस्थान पर आयोजित किया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब यह आयोजन गोवर्धन में किए जाएगा।

यह पर्यटन और संस्कृति दृष्टिकोण से बेहद बेहतरीन साबित होगा। इसी कांसेप्ट के साथ संस्कृति विभाग ने कुसुम सरोवर पर शरदोत्सव के प्रतिवर्ष आयोजन का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

गौरतलब है कि अप्रैल में केंद्रीय और राज्य पर्यटन सचिव के संयुक्त दौरे ने ही कुसुम सरोवर की कायापलट के संकेत दे दिए थे। सचिवों ने कुसुम सरोवर की भव्यता से प्रभावित होकर इसके उच्चस्तरीय विकास की योजना बनाने के निर्देश संबधित अधिकारियों को दिए थे। सूत्रों के मुताबिक इन निर्देशों के मद्देनजर ही इस स्थल पर शरद महोत्सव जैसे उत्सव के आयोजन की योजना बनाई गई है। इसके पास होने की संभावना जताई जा रही है।

इससे पूर्व पौराणिक स्थल को आयोजन के लिए मुफीद बनाया जाएगा। कुसुम वन सरोवर स्थित पांच एकड़ में फैले गुलाब बाड़ी क्षेत्र से बबूल और अन्य पेड़ हटवाकर इस स्थल पर महोत्सव के लिए मंच और लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। पार्किंग स्थल, पहुंच मार्ग आदि का विकास किया जाएगा। संस्कृति, पर्यटन और पुरातत्व विभाग मिल कर विकास कार्य करेंगे।

उप्र संस्कृति विभाग के वाईपी सिंह ने बताया कि कुसुम सरोवर पर शरद महोत्सव के आयोजन का प्रपोजल शासन को भेजा गया है। बजट पास होने का इंतजार है। आगरा मंडल के कल्चरल इंचार्ज रत्नेश शर्मा ने बताया कि प्रपोजल पास होने के बाद इस दिशा में कारगर कदम उठाए जाएंगे।


पोखर और तालाब सूखे पशु-पक्षी अकुलाए

पानी नहीं भरवाया तो करेंगे आंदोलन: हालात ज्वार-बाजरा सूखने के कगार पर पानी की टंकी और हैंडपंप खराब

अकोस (बलदेव)। गरमी चरम पर पहुंचने से देहात में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। पोखर और तालाब सूखने लगे हैं। इंसान तो इंसान पशु-पक्षी भी पानी के लिए अकुला रहे हैं। समस्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

क्षेत्र के गांव बरौली, कचनऊ और पटलौनी में पानी की टंकियां बंद पड़ी हैं। गढ़ी सुक्खा, मगना, गढ़सौली, नगला डियोंड़िया, आंगई और सेलखेड़ा आदि गांव की पोखर सूखने से पशुओं तक को पीने के पानी के लाले पड़े हैं। बलदेव, दघेंटा रजवाहा में कई माह से पानी नहीं आया। इससे पेयजल के साथ पशुओं के लिए हरा चारा उगाने तक की समस्या खड़ी हो गई है। ज्वार-बाजरा की फसल पानी के अभाव में सूख रही है।

गांव चौरम्बार के अजीत सिंह, गढ़ी सुक्खा के कोमल सिंह, गढ़सौली के राजपाल तोमर, मड़ौरा के योगेंद्र सिंह, सेलखेड़ा के श्रीनिवास पहलवान, पटलौनी के डा. मीनेश चौधरी आदि ने बंद पड़ हैंडपंपों को चालू कराने की प्रशासन से मांग की है। किसान नेता बुद्धा सिंह प्रधान, रालोद मंडल उपाध्यक्ष डा. एनपी सिंह भरंगर, भाजपा ब्लाक अध्यक्ष डा. धु्रव सिंह तोमर, भाकियू नेता गजेंद्र सिंह पंच आदि ने जिलाधिकारी से सूखी पड़ी पोखर और तालाबों को भरवाने, रजवाहों में पानी छुड़वाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं किया तो आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

छटीकरा से न जाकर मथुरा मार्ग से वृंदावन पहुंचेंगी बसें


अक्षय तृतीया पर ट्रैफिक का नया खाका: रूट डाइवर्जन

पैंटून पुल से किसी वाहन को नहीं आने दिया जाएगा। पानी गांव पुल से होकर वाहनों को गुजरने की व्यवस्था।

मथुरा। अक्षय तृतीया के पर्व के मद्दे नजर वृंदावन नगर में यातायात व्यवस्था की गई है। रोडवेज की बसें हाइवे से छटीकरा होती हुए वृंदावन न जाकर मथुरा रोड होकर सीधा वृंदावन बस अड्डा पहुंचेगी। वहीं वाहनों को मांट के पैंटून पुल की बजाए पानी गांव पुल से मथुरा में प्रवेश कराया जाएगा।

एसएसपी बीडी पॉल्सन ने इस संबंध में बताया कि दिल्ली और आगरा राजमार्ग से आने वाले सभी वाहनों को छटीकरा होकर रमणरेती के पूर्व पार्क कराया जाएगा। छोटे वाहनों को एफसीआई गोदाम के अहाते में तथा बड़े वाहनों को पीएल सर्राफा अस्पताल के पास सेठ नारायण दास के अहाते में पार्क कराया जाएगा। वाहनों को रोड के किनारे खड़ा नहीं होने दिया जाएगा। परिक्रमा मार्ग की ओर किसी भी वाहन को जाने नहीं दिया जाएगा। कुछ वाहन सुनरख रोड से परिक्रमा में प्रवेश करेंगे उन्हें तिराहे पर ही रोक कर पार्क करा दिया जाएगा।

मथुरा की ओर से वृंदावन आने वाले छोटे वाहनों को टीवी सैनिटोरियम से पहले बृजवासी अहाते में तथा टीवी अस्पताल के अहाते में एवं कात्यानी देवी अहाते में पार्क कराया जाएगा। बड़े वाहन टीवी सैनिटोरियम अस्पताल के सामने पार्क कराए जाएंगे। रिक्शा, साइकिल, मोटरसाइकिल बांके बिहारी मंदिर की तरफ से यातायात को प्रभावित कर सकते हैं। अतः रिक्शा, साइकिल एवं बाइक विद्यापीठ चौराहा. डा. के गोपल की कोठी के सामने चौराहा गौतम पाड़ा, तिराहा सेवाकुंज की ओर गली, राधादामोदर रोड, प्रेम गली, सत्या कुंज से भजन कुंज रोड से ओम बिहारी मंदिर की ओर नहीं जाने दिए जाएंगे। रंगजी मंदिर के सामने विद्यापीठ तिराहा, रमणरेती अटल्ला चुंगी के पास बांके बिहारी वाली सड़क पर बैरीकेडिंग की व्यवस्था की गई है।

अमावस्या पर गोवर्धन में उमड़े लाखों श्रद्धालु


अधिकमास के अंतिम दिन पुण्य कमाने की होड़
समूचे परिक्रमा मार्ग में लगे भंडारे एवं प्याऊ की सेवा

गोवर्धन। अधिक मास के अंतिम दिन अमावस्या के अवसर पर रात्रि में परिक्रमार्थियों को जन सैलाब उमड़ा। अव्यवस्थाओं पर आस्था भारी पड़ गई। रात्रि को गई बिजली प्रातः तक नहीं आई। फलतः परिक्रमार्थियों को काफी दिक्कतें हुइर्ं। श्रद्धालुओं ने मानसी गंगा का स्नान कर गिरिराज पूजा की।

अधिक मास के अवसर पर अमावस्या के होने के कारण चौदस की रात्रि में १० बजे से परिक्रमा में सिर ही सिर दिखने लगे। वहीं मथुरा पैंठ वाली पार्किंग पर प्राइवेट डग्गेमार वाहनों के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी कारण श्रद्धालुओं ने तीन किलोमीटर दूर से परिक्रमा प्रारंभ की। परिक्रमा मार्ग में सड़क निर्माण के चलते जगह-जगह गिट्टियां होने से परेशानी उठानी पड़ी। आन्यौर परिक्रमा मार्ग में नालियां गंदगी से भरी पड़ी थी। उधर जतीपुरा स्थित गिरिराज मुखारबिंद के बाजार में अतिक्रमण के चलते परेशानी श्रद्धालुओं को कष्ट झेलना पड़ा। पूंछरी के लौठा के निकट अंधकार रहा। बड़ा बाजार की नालियों का पानी मार्ग में फैल रहा था, जिससे नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था की पोल खुलती दिखी।

अमावस्या के कारण सप्तकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित भंडारे चल रहे थे, वहीं निःशुल्क दवा का भी वितरण हो रहा था। राधाकुण्ड परिक्रमा मार्ग में वैष्णव सेवा आश्रम पर श्री जयश्री कृष्णाचार्य के निर्देशन में प्रसाद वितरण हुआ। श्रीराधा दामोदर सेवा आश्रम ट्रस्ट की ओर से प्याऊ लगाई गई। रामानदांश्रम आन्यौर परिक्रमा मार्ग में संत कृष्णदास कंचन महाराज के निर्देशन में रात्रि भर प्रसाद वितरण हुआ। कंचन धाम पर रामलीला में दर्शकों को बैठाकर भोजन कराया गया। कलाधारी आश्रम पर चल रहे भण्डारों को बाल भोग, राजभोग के साथ जलजीरा की प्याऊ लगाई। गिरिराज सेवा समिति मुंबई श्रीचंद मुक्खीराम नदबई, भरतपुर की ओर से श्रद्धालुओं को शर्बत दिया गया।

Thursday, May 13, 2010

May 14 Braj News

May 14, Jagaran. Typos are from the site itself.

ब्रज का विकास कराएंगे गोवा के मुख्यमंत्री


मथुरा। गोवा के मुख्यमंत्री दिगंबर कामथ ने कहा है कि प्रभु श्री कृष्ण की जन्म भूमि में हुआ विकास कार्य पर्याप्त नहीं है। वह अपने व्यक्तिगत संपर्क एवं प्रभाव का इस्तेमाल करके मथुरा-वृंदावन क्षेत्र का और अधिक विकास कराएंगे।

धार्मिक यात्रा पर आये मुख्यमंत्री ने ये बातें गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहीं। श्री कामथ ने पढ़रपुर जैसे धार्मिक स्थल का हवाला देते हुये बताया कि वहां के समुचित विकास के लिये उन्होंने हर संभव सहयोग लिया। उनकी इच्छा है कि सुंदर, मनोरम गोवा तथा भगवान की जन्म भूमि का संबंध आत्मीय बने। एक दूसरे के काम आएं।

मुख्यमंत्री के साथ आये श्री प्रमोद कृष्णम् महाराज ने बताया कि जिस संभल में भगवान कल्कि अवतार धारण करेंगे वह वहां के पीठाधीश्वर हैं। नृसिंह, राम-कृष्ण के बाद अब कल्कि अवतार होगा। उनकी इच्छा है कि प्रभु कृष्ण की नगरी से अमृत से जीवन वास्ते प्रेम का रास्ता निकाले। मुख्यमंत्री श्री कामथ ने सायंकाल रामायण प्रचारिणी समिति के वार्षिकोत्सव, श्री राम कथा-प्रवचन एवं भजन संध्या समारोह का भी आनंद लिया। द्वारिकाधीश व श्री कृष्ण जन्म भूमि स्थित केशव देव के दर्शन किये।

गोवा के मुख्यमंत्री ने मंदिरों के दर्शन किए



वृंदावन। गोवा के मुख्यमंत्री दिगंबर कामथ ने परिवार के साथ गुरुवार की शाम नगर के विभिन्न मंदिरों के दर्शन किए। इस्कॉन मंदिर में दर्शन के बाद वे भक्तों के साथ नाचने भी लगे।

राजनीतिक चर्चा पर एतराज जताते हुए उन्होंने पत्रकारों से धार्मिक बातें कीं। उन्होंने कहा कि गोवा और वृंदावन में बहुत समानताएं भी हैं। वहां पाश्चात्य का प्रेम है तो यहां भक्ति का। भक्ति सर्वोपरि है, इसलिए मनुष्य चाहे कहीं भी रहे लेकिन ब्रज में आकर भक्ति से वंचित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि गोवा में भी मंदिरों की संख्या बढ़ रही है।

कामथ ने कहा कि गोवा विदेशी एवं देशी सैलानियों के लिए विशेष पर्यटकस्थल है। वहां की सुरक्षा के लिए केंद्र एवं गोवा की सरकार कृत संकल्पित है। इससे पहले उन्होंने इस्कॉन एवं बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर नारायण गिरि महाराज, रामगोपाल, जुगलकिशोर गोस्वामी, रामकिशन उपस्थित थे।

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वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में दर्शन के बाद बाहर आते गोवा के मुख्यमंत्री दिगंबर कामथ।

मथुरा-वृंदावन दस वर्ष पूर्व जैसा ही: कामत


शिरडी जैसा विकास यहां नहीं दिखता

मथुरा। दस वर्ष पूर्व जैसा ही है मथुरा-वृदांवन, जबकि महाराष्ट्र का धार्मिक स्थल शिरडी बदल चुका है। वहां पर्याप्त विकास हुआ है। यह कथन है गोवा के मुख्यमंत्री दिगबंर कामत का। उन्होंने कहा कि मथुरा और वृंदावन समेत ब्रज के समस्त दर्शनीय स्थलों को संजोकर रखने की आवश्कता है।

कामत ने गुरुवार को यहां अमर उजाला से एक अनौपचारिक मुलाकात में कहा कि वह मथुरा-वृदांवन में दर्शन के लिए आते रहे हैं। १० वर्ष से यहां आने के बाद देखा है कि मथुरा-वृंदावन विकास के मामले में पहले जैसा ही है। कोई विकास नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि योगीराज श्रीकृष्ण की नगरी की टूटी सड़कें देख श्रद्धालुओं को यह सब कचोटता होगा।

उन्होंने शिरडी का उदाहरण देते हुए कहा कि दस वर्ष पहले वहां कुछ नहीं था। अब शिरडी का विकास देखने लायक है। महाराष्ट्र सरकार ने ऐसा कर दिखाया है। शिरडी आने वाले भक्त को सुविधा मिल रही है। वहां आने वाला हर श्रद्धालु गदगद हो जाता है। इसी प्रकार मथुरा-वृंदावन का विकास भी वह देखना चाहते हैं। वार्ता के दौरान सुनील अग्रवाल स्वीटी, राजन पाठक, कांग्रेस नेता गिरधारी लाल पाठक मौजूद रहे।

वर्तमान में यमुना का अस्तित्व खतरे में


मथुरा। वृन्दावन हेरीटेज एलायंस की एक बैठक बुधवार को वंशीवट स्थित ठा. वंशीवट बिहारी मंदिर में महंत गोविंद शरण महाराज की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें वृन्दावन के बिगड़ते स्वरूप पर चिंता जताई गई। इस अवसर पर भगवतशरण गौतम ने कहा कि यमुना, ब्रज रज एवं प्राचीन वृक्ष वृन्दावन की पहचान हैं।

वर्तमान में यमुना का अस्तित्व खतरे में है। आचार्य नरेश नारायण ने कहा कि यमुना में नालों को गिरने से रोका जाय। कोई भी ब्रजवासी यमुना को गंदा होते नहीं देख सकता है। अधिवक्ता प्रतिभा शर्मा ने कहा कि यमुना योगीराज भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी की लीलाओं की रास लीलाओं की साक्षी रही है।

इसे जितनी प्राचीनता से सुसज्जित किया जाय, वह उतनी ही सुंदर लगेगी। बालकृष्ण गौतम ने कहा कि वृन्दावन के घाट अन्य तीर्थ स्थलियों के घाटों से वास्तुकला की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनको भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित किया जाना चाहिए।

सांसद ने ली यमुना प्रदूषण की जानकारी


मथुरा। सांसद जयंत चौधरी ने गुरुवार को यमुना प्रदूषण मुद्दे पर शहर के गणमान्य व्यक्तियों के साथ मंथन किया। इस मौके पर इस मुद्दे से जुड़े तमाम लोगों ने उन्हें प्रदूषण मुक्ति में आने वाली अड़चनों और प्रशासनिक रुख की जानकारी दी। इस पर सांसद ने इस मामले को संसद में उठाने का आश्वासन दिया।

सांसद जयंत चौधरी ने यमुना प्रदूषण मुद्दे पर स्वयं पहल करते हुए इस मामले से जुड़े चतुर्वेदी समाज, ब्राह्मण समाज, प्रेस एवं संभ्रांत लोगों की बैठक बुलाई। इस मौके पर उन्होंने सभी से यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए सुझाव मांगे। इस दौरान कांतानाथ चतुर्वेदी ने अवगत कराया कि इस मामले में करोड़ों खर्च के बाद भी यमुना की दशा नहीं सुधरी है।

हाईकोर्ट के आदेशों की प्रशासन लगातार धज्जियां उड़ा रहा है। इस पर सांसद जयंत ने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों की कापी मांगी। साथ ही इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि इस मामले में रालोद का एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से मिलेगा। इस मौके पर प्रशासन से जवाब-तलब कर करोड़ों खर्च कहां हुआ, इसका ब्यौरा मांगा जाएगा। इस अवसर पर रालोद के नगर अध्यक्ष श्याम चतुर्वेदी, संजीव चतुर्वेदी समेत अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पेयजल और सफाई


मथुरा। एक तरफ शासन भीषण गर्मी में पानी और गंदगी को लेकर संवेदनशील है तो दूसरी तरफ अफसरों की मौज मस्ती चल रही है। पेयजल और सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी कहां गये हैं और कब आयेंगे कोई नहीं जानता।
सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. बृजेश चंद्रा सफाई कार्यो में रुचि नहीं ले रहे। मुख्य स्वच्छता निरीक्षक नरेश बाबू कोर्ट में पेशी के लिए एक दिन का अवकाश लेकर गए थे।

पेयजल की किल्लत के बीच तो हाल और भी बुरा है। कार्यवाहक जलकल अभियंता कुं. रवींद्र सिंह दो दिन के अवकाश पर गए थे, लेकिन वह तीस अप्रैल से गायब हैं। उनकी अनुपस्थिति में जलकल में आने वाली शिकायतों का निस्तारण लटका हुआ है। नलकूपों की हालत खराब बतायी जा रही है।

अपर जिलाधिकारी कानून व्यवस्था एवं वित्त प्रभारी अवधेश तिवारी दो बार खराब एवं नए बने नलकूपों का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन जो खराब हैं, उनकी मरम्मत का कार्य ठीक से नहीं हो रहा है तो दूसरी ओर कई नए नलकूपों से सप्लाई अभी भी शुरू नहीं हो पायी है।

भागवत 3ाव!ा से ान की प्राक्त्रित


मथुरा। ब्रजराज श्री कृष्ण के गोपियों संग प्रेम और स्नेह की कथाओं से आज पूरा देश ही नहीं बल्कि धरती के कोने-कोने पर प्रेम संदेश फैला हुआ है। जिससे विदेशों से भी कृष्ण प्रेम रस में डूबने के लिए श्रद्धालुओं का जमघट ब्रज में लगा रहता है।

यह प्रवचन नगर के बल्देवगंज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पं. नन्नूमल शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा रसपान कराने के दौरान व्यक्त किये। उन्होने कहा कि बिना प्रेम और स्नेह के प्रार्थना सफल नहीं होती। तभी तो जब ऊधौ श्री कृष्ण को गोकुल से लेने आए तो गोपियों ने उन्हें कृष्ण को न ले जाने देने के लिए हर सम्भव प्रयास किये।

जिस पर जिस कृष्ण ने कहा कि मेरा तन जरूर जा रहा है, लेकिन मन हमेशा तुम्हारे पास ही रहेगा। इस दौरान उन्होने ये तो प्रेम की बात है ऊधौ भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान कलाकरों द्वारा प्रस्तुत संगीतमयी धुनों ने पूरा वातावरण कृष्णमयी कर दिया।

Tuesday, May 11, 2010

May 12 Braj News


एक करोड़ श्रद्धालुओं ने गोवर्धन परिक्रमा दी

गिर्राज महाराज पर चढ़ रहा सिंथेटिक दूध


आस्था

२७ दिन में लाखों रुपये का दूध से हुआ अभिषेक

गोवर्धन। अधिकमास के २७ दिन में अनुमान है कि इन दिनों में एक करोड़ लोगों ने परिक्रमा की है। लाखों रुपये का सिंथेटिक दूध गिरिराज महाराज पर चढ़ चुका है।

अधिक मास मेले में दूरदराज से भारी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। अभी तक २७ दिन में करीब एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के परिक्रमा लगाए जाने का अनुमान है। परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले गिरिराज मुखारबिंद मुकुट, मानसी गंगा, दान घाटी और जतीपुरा गिरिराज मुखारबिन्द में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ रही है। प्रत्येक परिक्रमार्थी इन स्थानों पर दूध चढ़ाकर अपने आराध्य को नमन कर रहा है।

इन स्थानों पर लगभग ६०० दुकानें केवल दूध-भोग की लगी हुई हैं, जिन पर पांच रुपये से २५ रुपये तक के कु ल्हड़ में दूध मिलता है। इससे अधिक मांगने पर प्लास्टिक की बाल्टी में दिया जाता था। यह दूध असली न होकर पानी जैसा या फिर पाउडर से तैयार किया जाता है।

दूध वालों की पौ बारह तो हुई हैं, वहीं श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची। इसके बावजूद भी परिक्रमार्थियाें की श्रद्धा कहीं भी कम दिखाई नहीं दी। लगातार अपने आराध्य के प्रति आस्था दिन-ब-दिन बढ़ने वाली भीड़ से आंकी जा सकती है। हालांकि प्रशासन एवं नगर पंचायत की व्यवस्थाओं को श्रद्धालु कोसते दिख जाएंगे।



भीख के लिए भगवान का रूप


मथुरा। राधा-कृष्ण की नगरी में इमोशनल ब्लैकमेलिंग का अपना ही अंदाज है। कोई राधा-कृष्ण के भेष में भीख मांग रहा है तो कोई भगवान शिव की तरह सांप डाले घूम रहा है।

हाल में राधा-कृष्ण के स्वरूप को लेकर की गई टिप्पणी के बाद ब्रजवासियों में इस कदर उबाल आया कि अखबार रंग गये। लेकिन यहां तो राधा-कृष्ण के रूप को इस कदर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के सामने पेश किया जा रहा है कि न केवल ब्रजभूमि बल्कि सभ्य समाज भी शर्मसार हो जाए। जिन आराध्य को पूजने के लिए लोग तरह-तरह के जतन कर रहे हैं उन्हीं का स्वरूप धर कर बच्चों से भीख मंगवाई जा रही है।

सात कोसीय गिरिराज परिक्रमा में तो मानो मान-मर्यादा ही ताक पर रख दी गयी है। गर्मी के दिनों में शाम होते ही भीख मांगने वालों की पलटन परिक्रमा मार्ग में जहां-तहां पहुंच जाती है। परिक्रमा में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर राधा-कृष्ण की तरह मुकुट लगाये और माला पहने बच्चों के जोड़े हाथ में कटोरा लिये मिल जाएंगे।

और तो और भीख देने वालों को राधा-कृष्ण की तरह आशीर्वाद और न देने वालों को कटु शब्द बोलना परम्परा बन गयी है। इमोशनल ब्लैकमेलिंग यहीं खत्म नहीं होती। मान्यता है कि ब्रज में सभी देवताओं का वास था। शायद इसी लिए भगवान शंकर के रूप में बच्चे कटोरा लिये घूमते मिल जाएंगे।

कोई अपने शरीर पर सांप डाल लेता है तो कोई बीच सड़क पर सर्प डालकर खड़ा हो जाता है। रामनामी ओढ़े भिखारी श्रद्धालुओं के सामने कभी सांप को दूध के लिए तो कभी गाय को चारे के लिए भीख मांगते हैं। भगवान के नाम और रूप पर भीख मांगने वालों में दस-बारह साल के बच्चों की संख्या अधिक है। कोई भावना में बहकर तो कोई डर के मारे पैसा दे देता है।

यही नहीं परिक्रमा मार्ग में ऐसे भी भिखारी मिल जाएंगे जो रात में अपने अंग-भंग दिखाकर भीख मांगते हैं और सुबह मजे से मस्ती करते हैं। हाथ और पैर से विकलांग बनने के लिए शरीर पर लेप लगा लिया जाता है। यह तरीका गोवर्धन के अलावा बरसाने में भी खूब अपनाया जा रहा है।

कुम्भ मेला स्थल को शीघ्र कुम्भ मेला क्षेत्र घोषित किया जाये

वृन्दावन (वृन्दावन इन्साफ, २०१०-०५-११) – भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा की एक बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें साधु समाज, पण्डा समाज और ब्राह्मण समाज व अन्य लोगों ने काफी सङ्ख्या में भाग लिया ।

महन्त श्री फूलडोल विहारीदासजी ने कहा कि कुम्भ मेला स्थित सारी जगह साधु-नागा बाबाओं की है । इस कुम्भ मेला की जगह पर माफियाओं की कडी दृष्टि लगी हुई है । वह इस जमीन पर कब्जा करना चाहते हैम् । यह कुम्भ मेला की जगह छोड दी जाये, यही हमारा जिलाधिकारी महोदय से निवेदन है ।

राष्ट्रीय अध्यक्ष मुनेश शर्मा (राम गुरु) ने कहा कि वृन्दावन में काफी बडे सम्मेलन लगते रहते हैम् । लेकिन उसके लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं है । कुम्भ मेले की जमीन पर साधु-सन्तों द्वारा किसी भी सम्मेलन का विशाल आयोजन किया जा सकता है । जो लोग इस जमीन को अपना बताते हैं, उन पर इसके कोई भी कागजात नहीं हैम् । इसलिए यह जगह नागा बाबाओं की ही है ।

महन्त श्री नगर अध्यक्ष चैतन्य चरण महाराज ने कहा कि हम प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि यमुना मैया के किनारे स्थित कुम्भ मेले की जगह पर हर साल मेले का आयोजन किया जाये, जिससे माफिया इस जगह पर कब्जा नहीं डाल पायेंगे ।

मोर्चे के जिलाध्यक्ष पं विनोद शर्मा ने कहा कि वृन्दावन के नागरिक और बाहर से आनेवाला दर्शनार्थी इस जगह का भरपूर आनन्द उठाएंगे । अब कुम्भ मेला स्थल का शीघ्र से शीघ्र कुम्भ मेला क्षेत्र घोषित किया जाए ।

बैठक में सर्वश्री राष्ट्रीय महा सचिव महेन्द्र भ्रंग एडवोकेट, राष्ट्रीय सचिव विहारीलाल वशिष्ठ, अरविंद तिवारी, मुकेश शर्मा, बबलू बीज भण्डार, सोनू शास्त्री, महेश (अटलजी), उपेन्द्र गोस्वामी, पवन पोशाक वाला, जगन अग्रवाल, गैला पण्डित, सुरेश शर्मा आदि लोग उपस्थित थे ॥

Friday, May 7, 2010

श्रीधाम वृन्दावन को सुरक्षित और सुन्दर बनाने का संकल्प


वृन्दावन (वृन्दावन इन्साफ, २०१०-०५-११) – ब्रज वृन्दावन हेरिटेज एलायंस की एक बैठक बुधवार को किशोरवन मेम् आयोजित की गई, जिसमें प्राचीन भजन स्थली किशोरवन की लता-पताओं को पुनः आच्छादित कर सुन्दर बनाने का संकल्प किया गया ।

इस अवसर पर विनायक सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य नरेश नारायण ने कहा कि किशोरवन को पुनः करे वृक्षों से आच्छादित कर प्राचीन कुंज-निकुंजों का स्वरूप पुनः तैयार करने का संकल्प लिया गया है, क्योंकि वृन्दावन भगवान् श्रीकृष्ण की क्रीडास्थली है ।

सभासद श्रीमती सीता अग्रवाल ने कहा कि हम सभी को वृन्दावन को पुनः दर्शनार्थ एवं वंदनीय बनाने का संकल्प लेना है । चन्द्रप्रकाश शर्मा ने कहा संस्था ने जो ठोस कार्य करने का वीणा उठाया है, वह वृन्दावन को पुनः प्राचीन स्वरूप दिलाने में सहायक सिद्ध होगा । सुश्री प्रतिभा शर्मा एडवोकेट ने कहा ब्रजवासियों को यमुना के पुराने स्वरूप को बहाल करने के लिये यमुना किनारे भी व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने चाहिये ।

बैठक में श्री सुरेश त्रिपाठी, सुरेश चन्द्र शर्मा, बालकृष्ण गौतम, भागवत्.आत्म गोपाल, राम नारायण ब्रजवासी आदि ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये ।

इस से पूर्व भजन गायक पं दामोदर महाराज ने मंगला.चन्द्र में ब्रज महिला का वर्णन कर सभी को मन्त्रमुग्ध कर दिया । इस अवसर पर डा. देवेन्द्र चैतन्य ब्रह्मचारी, के.जी. गुप्ता, निर्गुणा दासी, जगदानन्द दास, अरुण कृष्ण दास, इन्द्र आहूजा, सत्यमूर्ति सारस्वत, जगन्नाथ पोद्दार, सीता अग्रवाल, डा. चन्द्रप्रकाश शर्मा आदि अनेक लोग उपस्थित थे । संचालन मधुमंगल शुक्ला एवम् आभार व्यक्त किशोरवन के सेवायत श्री गोविन्द किशोर गोस्वामी जी ने किया ॥ और देखिये

Sunday, May 2, 2010

वृन्दावन की मूल संस्कृति का ध्यान रख कर ही विकास कार्य हो

रवीन्द्र कुमार कुलश्रेष्ठ

वृन्दावन (वृन्दावन इन्साफ) : व्रज वृन्दावन हैरिटेज एलायंस की एक बैठक श्री राधा गोकुलानन्द मन्दिरे के प्रांगण में मन्दिरे के महन्त श्री निताइदास महाराज की अध्यक्षता में हुई । बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री कृष्णगोपाल गुप्ता ने कहा कि वृन्दावन की शोभा यहां की कुंज गलियों से है । यहां पर अनावश्यक सड़क चौड़ीकरण करके यहां के मठ-मन्दिरो एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को न तोडा जाये ।

उन्होंने कहा कि सड़क के किनारे बनाये जा रहे इतने गहरे नाले बनाने से नालों की सफाई नहीं हो पायेगी, जिससे उफनते हुए नाले आनेवाले तीर्थ यात्रियों पर बुरा प्रभाव डालेगा ।

स्वामी सेवक शरण ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण करते समय यदि कोई वृक्ष बीच मेम् आता है तो उसे काटा नहीं जाना चाहिये, बल्कि विभागीय अधिकारियों को सड़क के नक्शे को बदल देना चाहिये । उन्होंने कहा कि एक प्राचीन वृक्ष का मुकाबला नये पौधे नहीं कर सकते ।

पंo बालकृष्ण गौतम ने कहा कि हम सभी ब्रजवासियों का कर्तव्य है कि हम ब्रज के धरोहर एवं संस्कार को सुरक्षित रखेम् । जिसमें पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव हमारे संस्कार में न पडे ।

पण्डा सभा के उपाध्यक्ष श्री रामनारायण ब्रजवासी ने कहा कि वृन्दावन तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों में शराब का ठेका नहीं उठने देना चाहिये । उन्होंने कहा कि वृन्दावन में मांस और मदिरा पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगन चाहिये ।

आचार्य श्रीवत्स गुणत्वी ने मांग की कि वृन्दावन को तीर्थ स्थल घोषित किया जाये । उन्होंने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र को संरक्षित करके उसे मेला भूमि घोषित किया जाये, जिससे कि उस स्थान पर ब्रज यात्रा के पडाव डाला जा सके । उस स्थान का उपयोग बडे-बडे कथाओं का आयोजन करने के लिये किया जा सकता है ।

मधुमंगल शुक्ला ने कहा कि यमुना संचरण भूमि से अतिक्रमण हटाना चाहिये, जिससे यमुना के प्रवाह में कोई बाधा उत्पन्न न हो ।

मीराबाई मन्दिर के महन्त श्री प्रद्युम्न प्रताप महाराज ने कहा कि वृन्दावन में तीन मंजिला इमारत से अधिक मंजिल वाले भवन बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिये । उन्होंने कहा कि वृन्दावन को तीर्थ भूमि बनाये रखना चाहिये तथा इसे मुम्बाई-दिल्ली के तर्ज पर नहीं बनाया जाना चाहिये ।

विनायक सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य नरेश नारायण ने कहा कि भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित मन्दिरों की हाल दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है । विभाग द्वारा इन स्मारकों के ऊपर कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है । इनके मन्दिरों को चारोम् और अवैध निर्माण हो रहा है और विभागीय अधिकारी कुम्भकर्णी नींद सो रहे हैम् ।

इस बैठक में डाo देवेन्द्र चैतन्य, आचार्य सुरेश वेदपाठी, विक्रान्त अग्रवाल, कन्हैया गुप्ता, अशोक गुप्ता, अनन्त किशोर शरण, श्रीमती मालती आदि ने विचार व्यक्त किया ॥