Friday, May 21, 2010

वृन्दावन विकास कार्य मन्द गति से

नव निर्मित नाले भविष्य में बनेंगे जान के लाले



आचार्य महेश भारद्वाज

वृन्दावन (वृन्दावन इन्साफ, May 11, 2010): वृन्दावन॒ भगवान् श्री-कृष्ण की क्रीडा स्थली, जिसे तुलसी का वन के नाम से वृन्दावन कहा जाता है, श्री-राधा-कृष्ण की कृपा से विश्व प्रसिद्ध वह वृन्दावन अब वन नहीं रहा । वर्तमान ईंट-पत्थरों का भव्य वृन्दावन वन गया है । चारों ओर आलीशान कोठी, मठ, मन्दिर नजर आते हैं । ऐसे सुन्दर व भव्य वृन्दावन को और भव्य बनाने हेतु मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने २५० करोड़ रुपये से विकास कार्य करा रही हैं । विकास कार्य को एक वर्ष हो गया, अभी भी मन्द गति से चल रहा है । देखते हैं आखिर कब तक चलेगा ।

वृन्दावन को ईको सिटी के अन्तर्गत पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री जगदीश शर्मा के शासनकाल में वृन्दावन की सड़कें इण्टर लाक की बनाना प्रारम्भ हुआ । वर्तमान नगर पालिका अध्यक्षा के कार्यकाल में भी अनेक सड़कें इण्टार लाक की बनीं । प्रायः पूरे वृन्दावन की सड़कें इण्टर लाक ईटों से बनीं, वर्षों कार्य चला, काफी परेशानियां आयीं । वृन्दावन की जनता बेहद परेशान रही । इन इण्टर लाक की सड़कों का करोडों का भुगतान हुआ ।

इसी बीच बहिन मायावती ने वृन्दावन के विकास हेतु २५० करोड़ रुपया के विकास कार्य की योजना आ गयी, कार्य प्रारम्भ हो गया । पूरे वृन्दावन की सड़कें जो करोडों रुपया लगाकर बनी थीं, वह सब खोदकर डाल दीं, पूरा वृन्दावन खोद डाला । सीवर लाइन डाली गयीं, नाले बनाये जा रहे हैं । इन विभागों में ताल-मेल न होने के कारण करोडों रुपयों का नुकसान तो होता ही है, विभागों में आपसी ताल-मेल न होना भी सिद्ध होता है । इन सब कारनामों से स्पष्ट होता हि कि यह केवल कमीशन का खेल है ।

इस विकास कार्य से जनता, वृन्दावनवासी, दर्शनार्थी सभी वर्षों से परेशान हैं । खुदे हुए वृन्दावन में लोग आना नहीं चाहते, इससे वृन्दावन के व्यापार पर ब्रजवासियों पर असर पड़ रहा है । यहा कोई कल-कारखाने तो हैं नहीं, अधिकांश लोग आकाशीय वृत्ति पर ही अपनी गृहस्थी का पालन करते हैं । इन सब बातों का ध्यान रखते हुए कार्य को शीघ्र से शीघ्र पूरा किया जाना चाहिये । ऐसी ठेकेदारों की मनोवृत्ति होनी चाहिये क्योंकि उन्हें भी जनता के मध्य रहना है ।

वृन्दावन में जो नाले बनाये जा रहे हैं, वे भविष्य के लिये अभिशाप सिद्ध होंगे । वृन्दावन की गली और बाजारों की चौडाई छोटी है, लेकिन ठेकेदार द्वारा जो नाले बनाये जा रहे हैं, वह इतने चौडे और गहरे हैं कि अगर कोई व्यक्ति साइकिल, स्कूटर, मोटर साइकिल लेकर जरा असावधानी से गिर जाये, तो पता ही नहीं क्या लगेगा इतने गहरे और चौडे हैं । वर्षा के दिनों में अगर कोई गिर जाये तो वह बह जायेगा, यह कैसा विकास कार्य है ?

अभी तक ओवर ब्रिज भी बनकर तैयार नहीं हो पाया, केशीघाट का अर्ध चन्द्राकार पुल भी अधर में लटका हुआ है । सड़के पर खुदी पडी हैं । परिक्रमा मार्ग की दुर्दशा है । ऐसी स्थिति में ही कुम्भ मेला हो गया, अधिक मास भी निकल गया । अखिर कब तक यह विकास कार्य पूर्ण हो पायेगा ? मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी से कहना कि वे श्रीधाम वृन्दावन की दयनीय स्थिति का अवलोकन स्वयं करें या अपने अधीनस्थ से कराकर शीघ्र से शीघ्र इन विकास कार्यों को पूर्ण करायें, जिस से विकास कार्यों को पूर्ण करायें, जिस से वृन्दावन वासी व आगन्तुक दर्शनार्थी राहत की सांस ले सकें ॥

2010-05-22 Braja News


जिला प्रशासन ने हटवाए अतिक्रमण


सड़क चौड़ीकरण के लिए चलाया अभियान, हड़कंप
सख्ती : विद्यामंदिर मार्केट के बाहर की दुकानों पर बुलडोजर चलाया

वृंदावन (AU, May 22, 2010) । वृंदावन समग्र विकास योजना की सड़क चौड़ीकरण में बाधक बने अतिक्रमणों को हटाने का कार्य शुक्रवार को एक बार फिर शुरू कर दिया। प्रशासन ने अभियान की शुरुआत रमणरेती से की। दोपहर बाद तक हरि निकुंज चौराहे पर समाप्त कर दिया।

अभियान का नेतृत्व कर रहे सिटी मजिस्टे्रट मनोज कुमार सिंह, सीओ आशुतोष द्विवेदी, पुलिस बल और पीएसी के साथ सुबह करीब नौ बजे सबसे पहले विद्यामंदिर के मार्केट के बाहर की दुकानों पर बुलडोजर चलाया। इसके बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों ने आईओपी के मार्केट की सीढ़ी, शोरावाला, बालाजी आश्रम की प्याऊ, फोगला आश्रम, हनुमान टेकरी, श्यामाबाई स्कूल, वृंदा फूड्स, भारती फूड्स, साधु वेला, यमुना धाम, नेह निकुंज के अलावा अनेक पक्के अतिक्रमणों को ध्वस्त किया।

जैसे-जैसे बुलडोजर आगे बढ़ता गया, दुकान एवं भवन स्वामियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी और पालिका के अधिकारियों ने हरि निकुंज चौराहे से विद्यापीठ चौराहे तक नाप तौल की है। अभियान के दौरान ज्यादातर संतों के आश्रमों और गरीबों की मकान और दुकानें ढहाई गईं, वहीं बड़ों, रसूकदार लोगों के भवनों और प्रतिष्ठान को नहीं छेड़ा गया इससे लोगों में रोष है। इसके अलावा अभियान के दौरान सबसे पहले ब्रज बिहारी कालोनी, इस्कान मंदिर के प्रबंधन के साथ-साथ अन्य कइयों ने प्रशासन के हाथ में कोर्ट का स्टे आर्डर भी थमा दिया।

सपाइयों ने मुआवजा देने की मांग उठाई

प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में राजनैतिक दलों के नेताओं ने भी आम लोगों की रोजी-रोटी न छीने जाने की अपील की। सपा के नगर अध्यक्ष आरके सिंह और पूर्व अध्यक्ष वल्लभ भाई कुशवाहा, अखिलेश गौतम कार्यकर्ताओं के साथ अभियान स्थल पर पहुंचे। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार और पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन संतराम से क्षेत्रीय लोगों के साथ वार्ता करने की बात कही। वल्लभभाई कुशवाह ने तो दुकान एवं मकान तोड़ने के बदले मुआवजे की मांग की है।

फोटो-पी-१
वृंदावन के रमणरेती इलाके में चलाए गए अभियान के दौरान अतिक्रमण हटाता बुलडोजर।

दस लाख रोपे जायेंगे पौधे


मथुरा (DJ May 22, 2010) । जिले में पौधे रोपने के लक्ष्य में दोगुने से अधिक का इजाफा किया गया है। यह कदम ग्राम विकास मंत्री उत्तर प्रदेश के निर्देश पर उठाया गया है। इस बार मानसून सत्र में विभिन्न विभागों द्वारा दस लाख से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। सभी विभागों को पौधे रोपने का लक्ष्य आवंटित कर दिया गया है।

ग्राम विकास मंत्री उत्तर प्रदेश 27 अप्रैल को पंच सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए यहां आए थे। उन्हें जनपद में कम हरियाली नजर आई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने जिले के अधिकारियों को अधिक से अधिक पौधे रोपने के निर्देश देते हुए लक्ष्य को दो ढाई गुना बढ़ाए जाने को कहा।

मंत्री के निर्देश पर जिले में 345150 पौधे रोपने के लक्ष्य को बढ़ाकर 1043350 लाख कर दिया गया। वन विभाग 364 हेक्टेयर में चार लाख पौधे लगाएगा। इसकी तैयारियां विभाग ने कर ली हैं। 2600 पौधे उर्जा विभाग, 9100 औद्योगिक विकास, 14950 आवास एवं शहरी नियोजन, 11050 सिंचाई विभाग, 7800 पीडब्ल्यूडी, 650 सहकारिता, 5200 भूमि एवं जल संरक्षण, 50000 उद्यान विभाग, 10000 शिक्षा विभाग और कृषि विभाग को 30000 पौधे लगाने हैं। ग्राम्य विकास विभाग को 500000 पौधे रोपने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें सभी दस ब्लॉकों को 50000-50000 पौधे रोपने का लक्ष्य दिया गया है।

बताया गया है कि पौधे रोपने को मुख्य विकास अधिकारी ने पिछले दिनों बुलाई संबंधित विभागों की बैठक में दस-दस हजार पौधे रोपने का लक्ष्य ब्लॉकों को अलग से दे दिया। डीएफओ डॉ. केएल मीणा ने बताया कि विभागीय नर्सरियों में पौधे तैयार हैं। मानसून की पहली बारिश होने के बाद पौधे रोपने का काम शुरू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि इस बार 53600 शीशम, 1190 बेल, 1000 महुआ, 50 आम, 21835 नीम, 13800 इमली, 14600 जामुन, 15980 यूके लिप्टस, 10200 अर्जुन, 62400 कंजी, 21000 सिरस, 4600 सागौन, 1800 सेमल, 29800 पापड़ी, 18800 केसिया श्यामिया, 4185 पाइकस, 6200 बकेन, 11020 जंगल जलेबी, 27560 अन्य फलदार, 50280 शोभाकार पौधे रोपे जाएंगे।

नालों को कवर किए जाने से कम होंगी समस्याएं


मथुरा (DJ May 22, 2010) । बसपा के मथुरा-वृंदावन विधान सभा क्षेत्र के कोआर्डीनेटर डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा है कि जहां सड़कें कम चौड़ी हैं वहां जेनर्म में अंर्तगत निर्माणाधीन नालों को कवर किए जाने से समस्याएं कम होंगी। उन्होंने इस पर हर्ष भी व्यक्त किया है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि खुले नालों से जहां एक तरफ गंदगी एवं दुर्गध आने से स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता था और आए दिन दुर्घटनाएं होती थी। वहीं इनको कवर किए जाने से उक्त समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

पारा 45.48 डिग्री, तप रहे पृथ्वी-आसमां


मथुरा। सूरज के तेवरों में अभी कोई कमी नहीं आई है। शुक्रवार को तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। जिले का औसत तापमान 45.48 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। शहर में तापमान 47.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भीषण गर्मी से जनमानस का हाल बेहाल है।

सूरज की तेजस्विता में कमी नहीं आ रही है। शुक्रवार को औसत तापमान में .58 डिग्री सेल्सियस की मामूली गिरावट दर्ज की गई। आईसीटी/सीपीटी के वेदर स्टेशनों पर सर्वाधिक तापमान सदर में दूसरे दिन भी 47.1 डिग्री सेल्सियस बना रहा। नौहझील में भी तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। यहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

छाता और बलदेव में सूरज ने नरमी बरती। छाता में पारा 45 और बलदेव में 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गत दिवस के मुकाबले छाता और बलदेव में तापमान में मामूली गिरावट आई है। मांट में भी पारा एक डिग्री सेल्सियस नीचे खिसक कर 45 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। राया में पारा दो डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़का है। 45.8 डिग्री से गिरकर राया में तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। चौमुहां में तापमान में मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। तापमान 45.6 डिग्री से बढ़कर 45.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। फरह में भी तापमान ने मामूली उछाल भरी। फरह में 45.5 डिग्री से बढ़कर तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा। नंदगांव में 45.2 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिले में औसत तापमान 45.48 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

गत दिवस के मुकाबले औसत तापमान में .58 डिग्री सेल्सियस की मामूली गिरावट आई। औसत सापेक्ष आ‌र्द्रता में भी गिरावट का दौर जारी रहा। वायु मंडल में औसत नमी पन्द्रह प्रतिशत से घटकर ग्यारह प्रतिशत पर आ गई। दिन रात पड़ रही भीषण गर्मी से जनमानस का हाल बेहाल है। उनकी परेशानियां तब बढ़ जाती है, जब विद्युत आपूर्ति ठप हो जाती है। दोपहर में तीन से चार घंटे तक की जा रही बिजली की कटौती ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। बिजली के साथ-साथ पेयजल संकट बरकरार बना हुआ है। शहर हो या फिर देहात सभी जगह से लोग पानी संकट की शिकायत सरकारी कार्यालयों में दर्ज कर रहे हैं। फिजीशियन डॉ. मनीष बंसल बताते हैं कि गर्मी से जनित बीमारियां लोगों को घेर रही है। ज्यादा देर तक धूप में चलने या फिर काम करने से वाले लोगों का बदन झुलस रहा है।

चिराग तले अंधेरा


मथुरा (DJ May 22, 2010) । जिला प्रशासन जनपद की प्यास बुझाने की भाग दौड़ में लगा हुआ है। खुद के यहां लगे आरओ प्लांट और हैंड पम्पों पर एक नजर भी इनायत नहीं की जा रही है। कलक्ट्रेट परिसर में ही आरओ प्लांट व हैंडपंप खराब पड़े हैं, लेकिन अफसरों की या तो नजर नही पड़ी या फिर सही कराने की फुर्सत नहीं मिल रही है। जबकि पूरे जनपद में खराब हैंडपंपों की मरम्मत, री-बोरिंग और तालाबों को भरवाने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर में तीनों आरओ प्लांट खराब बताये गये हैं। इसी तरह कई हैंडपंप भी खराब हैं। कर्मचारियों को अनुभागों में रखे घड़ों को भरने के लिये दूर से पानी ढोना पड़ रहा है।

कलक्ट्रेट परिसर में तीन आरओ प्लांट लगे हैं। एडीएम के कार्यालय के बाहर लगे आरओ प्लांट के रखरखाव व मरम्मत आदि का जिम्मा एक राष्ट्रीयकृत बैंक के पास है। आरओ प्लांट खराब है, यह जानकारी संबंधित बैंक को देने की जहमत भी नहीं उठायी जा रही। नजारत के सामने व एसएसपी कार्यालय के साइड में लगे आरओ प्लांट भी पानी ठंडा नहीं कर रहे। नजारत और संबंधित अन्य अफसरों के पास इसे सही कराने की फुर्सत नहीं है। जाहिर है, कलेक्ट्रेट के अनुभागों और अधिवक्ताओं के पास आने वाले वादकारियों और अन्य लोगों को शीतल की बजाय गर्म जल पीने को मिल रहा है। कुछ कलक्ट्रेट कर्मियों के अनुसार, प्लांट खराब होने की जानकारी अफसरों को भी है, लेकिन वे इसे सही कराने की जरूरत नहीं समझ रहे। इसी तरह कलेक्ट्रेट परिसर में लगे चार हैंडपंप भी खराब बताये गये हैं। यहां गौरतलब है कि गर्मी के प्रकोप में तेजी आने के साथ ही शासन ने अफसरों को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खराब हैंडपंपों की मरम्मत आदि कराने के निर्देश दे दिये गये थे।

विद्युत: परेशान जनता, बेवश अफसर


मथुरा (DJ May 22, 2010)। कोसीकलां में प्रदर्शन, नारेबाजी, हंगामा और हा-हाकार। हालात बेकाबू और अधिकारी लाचार। विद्युत कटौती की भीषण स्थिति। कुछ ऐसे ही दृश्य नगर में आए दिन बन रहे हैं। इसके बाद भी कुछ नहीं बदला रहा है तो वह विद्युत कटौती की समस्या। जनता सुधार चाहती है। अधिकारी सफाई दे रहे हैं। लेकिन नतीजा फिलहाल सिफर है। कटौती से तंग शहर एवं देहात उबल रहा है। जनता सड़कों पर आ गई है। जिसको लेकर अब राजनैतिक गलियारों में भी उफान आना शुरू हो गया है। नतीजतन पिछले करीब एक सप्ताह में विद्युत संकट से जूझती जनता ने इतने प्रदर्शन, हंगामे, ज्ञापन दे दिए हैं कि जनता के उग्र होते प्रदर्शनों को लेकर भयभीत अधिकारियों ने दफ्तरों में बैठना छोड़ दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि जब आपूर्ति ऊपर से ही नहीं मिलेगी तो वे समस्या का समाधान कैसे कर पाएंगे। जनता के आक्रोश को झेल रहे एक्सईएन सुनील सिन्हा ने बताया कि समस्या को वे समझते हैं। इसके लिए उन्होंने समय- समय पर अपने अधिकारियों को मौखिक एवं लिखित रूप में अवगत कराकर आपूर्ति सुचारू कराने की बात कही है। लेकिन इसके सकारात्मक नतीजा नहीं आ सके। ऐसे में वे क्या करें? भाजपा व रालोद ने अपने- अपने प्रदर्शन और पत्रों में इस समस्या के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने समस्या समाधान न होने पर अनशन आदि की भी धमकी दी है। वहीं दूसरी ओर जब इस बावत बसपा सरकार के एमएलसी चौधरी लेखराज सिंह से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वे पूर्व में भी उक्त समस्या को लेकर अधिकारियों से बातचीत कर चुके हैं। इस समस्या को लेकर अब व्यवसायिक शिक्षा मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण एवं वे स्वयं लखनऊ जा रहे हैं। वहां इस समस्या को प्रमुखता से रखा जाएगा।

नालों को कवर किए जाने से कम होंगी समस्याएं

मथुरा (DJ May 22, 2010) । बसपा के मथुरा-वृंदावन विधान सभा क्षेत्र के कोआर्डीनेटर डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा है कि जहां सड़कें कम चौड़ी हैं वहां जेनर्म में अंर्तगत निर्माणाधीन नालों को कवर किए जाने से समस्याएं कम होंगी। उन्होंने इस पर हर्ष भी व्यक्त किया है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि खुले नालों से जहां एक तरफ गंदगी एवं दुर्गध आने से स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता था और आए दिन दुर्घटनाएं होती थी। वहीं इनको कवर किए जाने से उक्त समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

पारा 45.48 डिग्री, तप रहे पृथ्वी-आसमां


मथुरा। सूरज के तेवरों में अभी कोई कमी नहीं आई है। शुक्रवार को तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। जिले का औसत तापमान 45.48 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। शहर में तापमान 47.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भीषण गर्मी से जनमानस का हाल बेहाल है।

सूरज की तेजस्विता में कमी नहीं आ रही है। शुक्रवार को औसत तापमान में .58 डिग्री सेल्सियस की मामूली गिरावट दर्ज की गई। आईसीटी/सीपीटी के वेदर स्टेशनों पर सर्वाधिक तापमान सदर में दूसरे दिन भी 47.1 डिग्री सेल्सियस बना रहा। नौहझील में भी तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। यहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

छाता और बलदेव में सूरज ने नरमी बरती। छाता में पारा 45 और बलदेव में 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गत दिवस के मुकाबले छाता और बलदेव में तापमान में मामूली गिरावट आई है। मांट में भी पारा एक डिग्री सेल्सियस नीचे खिसक कर 45 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। राया में पारा दो डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़का है। 45.8 डिग्री से गिरकर राया में तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। चौमुहां में तापमान में मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। तापमान 45.6 डिग्री से बढ़कर 45.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। फरह में भी तापमान ने मामूली उछाल भरी। फरह में 45.5 डिग्री से बढ़कर तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा। नंदगांव में 45.2 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिले में औसत तापमान 45.48 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

गत दिवस के मुकाबले औसत तापमान में .58 डिग्री सेल्सियस की मामूली गिरावट आई। औसत सापेक्ष आ‌र्द्रता में भी गिरावट का दौर जारी रहा। वायु मंडल में औसत नमी पन्द्रह प्रतिशत से घटकर ग्यारह प्रतिशत पर आ गई। दिन रात पड़ रही भीषण गर्मी से जनमानस का हाल बेहाल है। उनकी परेशानियां तब बढ़ जाती है, जब विद्युत आपूर्ति ठप हो जाती है। दोपहर में तीन से चार घंटे तक की जा रही बिजली की कटौती ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। बिजली के साथ-साथ पेयजल संकट बरकरार बना हुआ है। शहर हो या फिर देहात सभी जगह से लोग पानी संकट की शिकायत सरकारी कार्यालयों में दर्ज कर रहे हैं। फिजीशियन डॉ. मनीष बंसल बताते हैं कि गर्मी से जनित बीमारियां लोगों को घेर रही है। ज्यादा देर तक धूप में चलने या फिर काम करने से वाले लोगों का बदन झुलस रहा है।

वेटन रिले रूट में जिले का नाम नहीं


कामनवेल्थ गेम्स में कृष्ण स्थली उपेक्षित, ताज नगरी को प्राथमिकता

निराशा : ओलंपिक संघ, जनप्रतिनिधि, प्रशासन की रुचि नहीं, वर्ष २००६, २००८ में जनपद में ठहरी थी वेटन रिले

मथुरा (AU May 22, 2010) अमर उजाला विशेष । कामनवेल्थ गेम्स के आयोजन से पूर्व निकलने वाली वेटन रिले के रूट चार्ट मेें मथुरा का नाम शामिल नहीं है। इससे खेल प्रेमियों में निराशा छा गयी है। इधर खेल संघ और आयोजन समिति अब भी वेटन के मथुरा में आने की संभावना का दावा कर रहे है।

दिल्ली में आयोजित कामनवेल्थ २०१० खेल आयोजन में विश्व के ७० देशों के लगभग आठ हजार खिलाड़ी और बड़ी संख्या में विदेशियों के प्रतिनिधिमंडल आ रहे हैं। खेलों के शुरू होने से पूर्व ही वेटन रिले को हाथ में लेकर संख्या में खिलाड़ी का काफिला गुजरता है। इस बार ये काफिला मथुरा में नहीं आ रहा है। भगवान कृष्ण की नगरी तथा इस्कान टेंपल के अलावा विदेश के कोने-कोने में बृज के चाहने वालों की अच्छी संख्या होने के बाद भी ताज महल को तरजीह दी गई है।

दिलचस्प बात ये है इससे पूर्व वर्ष २००६ में ऑस्टे्रलिया में हुए कामन वेल्थ की वेटन का मथुरा होकर ही गुजरी थी। वहीं २००८ में यूथ कामनवेल्थ की वेटन का ठहराव जिले के डिग्री कालेज में हुआ था। इस बार ऐसा न हो पाने की वजह जनप्रतिनिधि, प्रशासन और ओलंपिक संघ की कमजोर पैरवी माना जा रहा है। इस संदर्भ के ओलंपिक संघ के प्रांतीय सचिव आनंदेश्वर पांडे का कहना है कि अभी वेटन के मथुरा आने की संभावनाएं बचीं है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है। हाल ही में आयोजन समिति के सदस्य बने जीडी शर्मा का दावा भी कुछ इसी प्रकार का है।

क्या है वेटन रिले ?

कामन वेल्थ से पूर्व निकाली जाने वाली वेटन एक टार्च नुमा आकृति की मशाल होती है। इस पर स्पर्श के साथ ही उक्त खिलाड़ी और स्थल का नाम विश्व परिदृश्य पर झलकता है।

होटल, पर्यटन उद्योग को झटका

मथुरा। जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया अभी तक वेटन का जनपद आगमन का कार्यक्रम नहीं है ये निराशाजनक है। उन्होंने स्वीकारा इससे जनपद में आने वाले पर्यटकों की संख्या पर असर पड़ेगा। वहीं होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव अमित जैन और होटल व्यवसायी राजीव ‘ब्रजवासी’ का कहना है वेटन रिले के जनपद में न आने से होटल उद्योग की सभी तैयारियां धरी रह जाएंगी।

प्राचीन स्वरूप के रूप में हो विकास : श्रीवत्स


वृन्दावन समाचार (दैनिक जागरण, May 21, 2010): वृन्दावन हेरीटेज एलायंस की एक बैठक बुधवार को बागबुंदेला स्थित किशोरवन मेम् आयोजित की गयी. जिसमें विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गयी.

इस अवसर पर आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान में वृन्दावन में चल रहे विकास कार्य यहां के प्राचीन स्वरूप के अनुसार ही किया जाना चाहिये । नगर के समस्त मार्ग, नाले एवं जलकल व्यवस्था काफी अस्त-व्यस्त है ।

बालकृष्ण गौतम ने कहा कि इसी सप्ताह एलायंस का एक प्रतिनिधि मण्डल मण्डलायुक्त से मिलकर वृन्दावन के विकास में बरती जा रही अनियमिततायेम् एवं यहां के स्वरूप से हो रहे खिलवाड के बारे मेम् अवगत करायेगा । महेशचन्द्र शर्मा ने कहा कि वृन्दावन के ब्रजवासी, युवा तीर्थ पुरोहित को ही पर्यटन विभाग द्वार प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये ।

राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि वृक्ष वृन्दावन ही पहचान हैम् । इन्हें विकास के दौरान नुकसान पहुंचाना यहां की आस्था से खिलवाड है । अधिवक्ता प्रतिभा शर्मा ने नगर में हो रहे मोरपंख के कारोबार को प्रतिबंधित करने की अपील की ।

अध्यक्षता सेवायत गोविंद किशोर गोस्वामी ने की । इस अवसर पर गोपाल, प्रद्युम्न प्रताप महाराज, चन्द्रप्रकाश शर्मा, रामनारायण ब्रजवासी, सुरेशचंद्र शर्मा, जयकिशोर गोस्वामी, सत्यमूर्ति सारस्वत एडवोकेट, डा. देवेन्द्र चैतन्य, घनश्याम किशोर गोस्वामी, के.जी. गुप्त, केटी वाल्टर, अरूपगोविंद दास, जगन्नाथ पोद्दार, अभिषेक श्रीवास्तव, रवीन्द्र कुलश्रेष्ठ आदि उपस्थित थे । संचालन मधुमंगल शुक्ला ने किया ।

द्रष्टव्य

Thursday, May 20, 2010

2010-05-21 Braja News

नये कमिश्नर ने खींचे अफसरों के कान


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । आगरा मंडल के नवागत कमिश्नर सुधीर महादेव बोवड़े ने गुरूवार को यहां अपनी पहली बैठक में ही विकास कार्यो की समीक्षा कर कई विभागों के अफसरों के कान खींचे। उन्होंने वृंदावन प्रोजेक्ट के सभी कार्य तय समय सीमा में ही कराये जाने की अफसरों को ताकीद की। ताज ट्रिपेजियम जोन में शामिल होने की वजह से मथुरा की बिजली आपूर्ति में सुधार पर भी जोर दिया। कमिश्नर के दिल्ली रवाना होने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली।

कमिश्नर श्री बोवड़े दिल्ली जाते वक्त दोपहर करीब दो बजे रिफाइनरी गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां जिला प्रशासन, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण समेत करीब सभी विभागों के अफसर पहले से उपस्थित थे। सभी से परिचय के बाद कमिश्नर ने जनपद में चल रहे विकास कार्यो की समीक्षा शुरू की। इस दौरान नेशनल हाइवे अथारिटी, विद्युत निगम व लोक निर्माण विभाग के अधिकारी खासकर उनके निशाने पर रहे।

कमिश्नर ने कहा कि नेशनल हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों में सुधार की जरूरत है। ऐसा महसूस होता है जैसे सड़कों के पैचवर्क कार्य से हाथ जोड़ लिया गया है। कार्यो में यह शिथिलता समाप्त होनी चाहिये। वृंदावन प्रोजेक्ट में शामिल विकास कार्यों की उन्होंने विस्तार से समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता के साथ समझौता मंजूर नहीं किया जायेगा। बड़े अफसर समय-समय पर इसकी मानीटरिंग करते रहे। कार्य पूर्ण होने में यदि और देरी हुई तो संबंधित विभाग के अफसरों पर गाज गिरेगी। बैठक समाप्ति के बाद वह सीधे दिल्ली रवाना हो गये।



बेरहम पारा 46 डिग्री पार


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । सूरज के तेवर और तीखे हो गए हैं। तापमान में मामूली वृद्धि हो गई है। गुरुवार को जिले का औसत तापमान 46.06 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। शहर और नौहझील इलाका सर्वाधिक गरम रहा। तेज गर्मी में पिछले साल रोपे गए पौधे झुलस कर मर रहे हैं।

सूरज के प्रचंड तेवरों से तापमापी पर पारा उछाल भर रहा है। आईसीटी / सीपीटी के वेदर स्टेशनों पर सर्वाधिक तापमान सदर में 47.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। नौहझील में 0.5 डिग्री सेल्सियस की मामूली वृद्धि हुई और तापमान 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

जिले में शहर और नौहझील ही सबसे अधिक गर्म रहा। छाता और बलदेव में भी सूरज की वक्र दृष्टि रही। छाता में 46.3 और बलदेव में 46.1 डिग्री सेल्सियस तक पारा पहुंचा। मांट में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि राया में 45.8 डिग्री, चौमुहां में 45.6 डिग्री, फरह में 45.5 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। सबसे कम तापमान नंदगांव में 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिले में औसत तापमान 46.06 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। गत दिवस के मुकाबले औसत तापमान में 0.57 डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

औसत सापेक्ष आर्द्र ता में भी गिरावट आ गई है। वायु मंडल में औसत नमी पन्द्रह प्रतिशत से घटकर तेरह प्रतिशत तक आ गई है। आसमान से बरसती आग की चौतरफा मार पड़ रही है। इंसान और पशु पक्षी ही नहीं बल्कि प्रकृति भी सूरज की आग बरसा रही किरणों को नहीं झेल पा रही हैं। पिछले साल रोपे गए पौधे एक सप्ताह से पड़ रही तेज गर्मी से झुलस कर मर रहे हैं। वन विभाग का अनुमान है कि अब तक 15 से 20 फीसदी पौधे गर्मी की भेंट चढ़ चुके हैं। पिछले साल 416 हेक्टेयर में रोपे गए। दो लाख चालीस हजार पांच सौ पौधों के जीवन कि लिए तेज धूप खतरा बनी हुई है। वन विभाग रोड साइड के पौधों को बचाने के लिए चार टैंकर से पानी दे रहा है, लेकिन बावजूद इसके पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

बताया गया है कि नहर और ड्रेनों के किनारे लगे पौधों की सिंचाई करने के लिए टैंकर भी नहीं जा पा रहे हैं। इस काम के लिए मजदूरों को लगाया गया बताया जा रहा है। भीषण गर्मी में पौधों की प्यास न बुझाने से दो तीन साल पहले लगाए गए पौधों की पत्तियां भी तेज धूप की मार से झुलस रही हैं। हालांकि इनके तने को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा बताया गया है। वन ब्लाकों में तेज गर्मी से आग लगने की आशंका को देखते हुए फायर लाइन बना दी गई है। अग्नि सुरक्षा श्रमिकों को तैनात कर दिया गया है।

अस्पताल डायरिया रोगियों से भरे


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । गर्मी के रिकार्ड तोड़ने के साथ ही डायरिया पैर पसारती जा रही है। सरकारी हो या प्राइवेट अस्पताल, सभी डायरिया के रोगियों से भरे पड़े हैं।

जिला अस्पताल के मेडिकल और फीमेल वार्ड में डायरिया के ही रोगी नजर आ रहे हैं। इनमें शहरी और ग्रामीण रोगियों की संख्या करीब-करीब बराबर है। यहां भर्ती होने वाले सभी रोगियों को शरीर में पानी की कमी होने की वजह से पहले ग्लूकोज की बोतल चढ़ायी जा रही है। फिजीशियन डॉ. एके सचदेवा के अनुसार, इस मौसम में बासी भोजन व दूषित पीना पीना जनता की सेहत पर भारी पड़ रहा है।

गर्भ से आकर जीव भटक जाता है


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । भागवताचार्य अनीता यादव ने कहा कि आज का मानव लक्ष्य विहीन है। उसे नहीं मालूम कि मुझे यह मानव देह क्यों मिली है। वह भोगों को भोगने में व्यस्त है। जबकि वास्तविकता यह है कि मानव का लक्ष्य है प्रभु को प्राप्त करना। उन्होंने कहा कि जीव तो गर्भ में ही यह प्रण कर लेता है कि हे प्रभु मुझे इस नरक से बाहर निकालो मैं आपका भजन करूंगा। सत्कर्म करूंगा, लेकिन गर्भ से आकर यह जीव भटक जाता है।

उन्होंने कहा कि जीव का स्वभाव होता है कि सुख की चाह, आनन्द की प्राप्ति। जब तक प्राणी को ज्ञान नहीं होता तब तक वह आनन्द व भोगों को देखता रहता है, लेकिन जब ज्ञान हो जाय तब आनन्द प्रभु में नजर आता है।

योग शिविर स्वस्थ रहने के दिये गुर


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । जेसीआई ग्रेटर एवं वैदिक योग विज्ञान शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 8 दिवसीय नि:शुल्क योग शिविर में शामिल जनता को स्वस्थ रहने के गुर दिये गये।

16 मई से शोध संस्थान में लगाये शिविर में योग गुरु डा. देवव्रत के नेतृत्व में प्रशिक्षकों ने अनेक रोगों, मानसिक शांति प्राप्त करने के आसन कराए।

पुस्तक पर प्रतिबंध न लगने तक होगा आंदोलन


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के तत्वावधान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अमेरिकी लेखिका की विवादित पुस्तक के विरोध में 25 मई को देश व्यापी धरना-प्रदर्शन में भाग लेगा।

इस संबंध में अभाविप की तैयारी बैठक में गोविंद नगर कार्यालय पर हुई। इसमें आंदोलन समिति के संयोजक डॉ. कमल कौशिक के अलावा डॉ. तेजपाल सिंह ने भी विचार व्यक्त किये।

मंदिरों के आसपास इलाकों में अनैतिक धंधों का बोलबाला


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । देव-दानव संस्कृति में भेद करने का कार्य भगवान, ऋषि-मुनि तथा आधुनिक संतों ने किया है। वतन का इतिहास बताता है कि प्रभु एवं शक्ति ने राक्षस विनाश तथा देव रक्षा के लिये अवतार लिये। आज भी अत्याचारी, अनाचारी तबका से पीड़ित व्यक्ति न सिर्फ देवी-देवताओं की मिन्नत करते हैं बल्कि संतों की शरण भी लेते हैं। मगर इनमें से अनेक ऐसे भी हैं जो बदलते युग के प्रभाव से रक्ष संस्कृति का पोषण करना अपना धर्म समझते हैं।

कलि का असर कहें या फिर धन पिपाशा प्रभु के नगर में तमाम व्यक्ति मांस का भक्षण तथा उसका विक्रय अवैध व अनैतिक रूप से करने में लगे हैं। इनमें दर्जनों व्यक्ति वे हैं जो धार्मिक संस्थाओं, मंदिरों तथा संतों से धन, दुकान, कृपा एवं ग्राहक भी प्राप्त कर रहे हैं। मिलावटी खाद्य, पेय पदार्थ और नशा की वस्तुएं बेचना भी इनके लिये देव संस्कृति का परिचायक बन गया है। धंधा चोखा करने के चक्कर में दूसरे को पीड़ा पहुंचाने में इस तबका को तनिक हया-शर्म नहीं आती।

यूं कन्हैया की नगरी सम्पूर्ण धर्म नगरी है परंतु इसमें अधर्म के पर्यायवाची कर्म अधिक किये जा रहे हैं। अनेक स्थानों पर मंदिर, धार्मिक ट्रस्ट की दुकानों से ऐसे पदार्थ बेचे जा रहे हैं जिन्हें धर्म में सर्वथा त्याज्य माना जाता है। धर्म एवं संतों का जयघोष करने के समय आकर्षक फिल्म बनवाने वाला तबका भी इसमें भरपूर योगदान दे रहा है। एक कौम विशेष जिसमें मांस, अंडा का सेवन गलत नहीं माना जाता उसे छोड़ भी दिया जाए तो भी इन चीजों के विक्रय का स्तर, तरीका तथा स्थान का चयन है वह कम चौकाने वाला नहीं है।

विश्व प्रसिद्ध तथा व्यक्ति की आस्था के प्रमुख केंद्र के इलाके भी मादक पदार्थ एवं अभक्ष की बिक्री के बहुचर्चित केंद्र बन गये हैं। काली-गोरी चमड़ी के सौदे भी महाप्रभु की जन्म भूमि में खूब होते हैं। द्वारिकाधीश, जन्म भूमि, कालिंदी किनारे, भरतपुर गेट, चौक बाजार, भूतेश्वर, होली गेट क्षेत्र मे कई प्रकार के अनैतिक धंधों का बोलबाला है। कई ऐसी दुकानें मौजूद हैं जिन पर भगवान, माता, हनुमान, शिव की न सिर्फ तस्वीर लगी हैं बल्कि विक्रेता तक उनका वास्ता देकर ग्राहक को विश्वास में लेते हैं। होली गेट इलाका में एक दुकान तो ऐसी है जिसका मालिक लिखित में बकायदा रमण बिहारी लिखा हुआ है परंतु इस पर प्रतिदिन सार्वजनिक रूप से अंडे बेचे जाते हैं। संत कृपा का प्रचार-प्रसार करने वाले अनेक स्वयंभू भक्त ऐसे हैं जो भगवान की मूर्ति एवं सिक्के तक मिलावट कर सरेआम विक्रय करते हैं। इनमें अनेक ऐसे भी हैं जिन्हें देश के कानून की तनिक परवाह नहीं है और जिनका निर्माण दशकों पूर्व बंद हो गया उन विक्टोरिया के सिक्कों तक हो धड़ल्ले से बेच रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया भजन गायक साधु


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । दिल्ली में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सिपाही की हत्या के मामले में गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने वृंदावन से एक साधु को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस किसी युवक की शिनाख्त को साधु को मथुरा, वृंदावन, नंदगांव व बरसाना ले गई। साधु भजन गायक बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व नगर के प्रमुख साधु ने दिल्ली में एक धार्मिक कार्यक्रम किया था। इसके अन्तर्गत साधु के साथ रहने वाले एक व्यक्ति ने कार्यक्रम में आयोजकों के साथ धोखाधड़ी की थी। इसी कार्यक्रम के दौरान एक सिपाही की हत्या कर दी गई थी। उक्त मामले में दिल्ली में अपराध भी पंजीकृत हुआ है। उक्त मामले में कार्यवाही करते हुए दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को नगर में दबिश देकर साधु को हिरासत में ले लिया। बताया जाता है कि साधु के साथ रहने वाले राजू नामक युवक की तलाश में मथुरा, वृंदावन, नंदगांव व बरसाना में दबिश दी गई है। दिल्ली पुलिस ने साधु को हिरासत में लेने से पूर्व पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क भी किया था। साधु भजन गायक बताया जा रहा है। इसके नाम की पुष्टि करने से पुलिस के आला अधिकारी बच रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीडी पाल्सन का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने एक साधु को वृंदावन से हिरासत में लिया है। इसके साथ रहने वाले राजू नामक युवक की पुलिस को तलाश है। यह युवक साधु के साथ एक फोटो में है। संभवत: साधु से उस युवक की शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री पाल्सन ने साधु के संबंध में कुछ भी जानकारी होने से इंकार कर दिया।

विप्रा और पालिका में रार


मथुरा (DJ, May 21, 2010) । करीब साढ़े सात करोड़ रुपये के मुआवजे के लिए मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण और मथुरा नगर पालिका परिषद में कलह शुरू होती दिखाई पड़ रही है। दोनों महकमों की अपनी-अपनी दलील है। नगर पालिका प्रशासन बिर्जापुर में भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजा के रूप में इस धन की डिमांड कर रहा है, वहीं मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अफसर दूसरी ही दलील दे रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बताया गया है।

मामला सदर तहसील अंतर्गत हाईवे स्थित बिर्जापुर की 8.83 एकड़ भूमि से संबंधित है। मथुरा नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि यह भूमि सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण के लिए अधिग्रहण कर मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित की गई थी। ग्राम सभा की यह भूमि सीमा विस्तार में नगर पालिका के अधीन आयी थी। इसलिए मथुरा नगर पालिका को मुआवजे के रूप में यह धनराशि मिलनी चाहिये।

दूसरी ओर मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि वर्ष 90 में तत्कालीन जिलाधिकारी के पत्र द्वारा इस भूमि का कब्जा विप्रा को अगस्त 90 को प्राप्त हुआ था। डीएम के आदेश के खिलाफ कुछ लोग परगनाधिकारी के न्यायालय की शरण में चले गये। परगनाधिकारी के न्यायालय ने संबंधित भूमि को संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया। इस आदेश के खिलाफ अपने न्यायालय में दायर अपील में कमिश्नर ने परगनाधिकारी के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद दूसरे पक्ष के लोग कमिश्नर न्यायालय के आदेश के खिलाफ राजस्व परिषद न्यायालय में चले गये। राजस्व परिषद ने अगस्त वर्ष 2003 में दूसरे पक्ष के हक में एक पक्षीय आदेश कर दिया। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई।

हाईकोर्ट ने फरवरी 2005 में पारित आदेश द्वारा डीएम के वर्ष 90 में दिये आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2006 को इस मामले में यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिये। वर्तमान में भी संबंधित याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बताई गई है। विकास प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि उक्त वादों में ग्राम सभा बिर्जापुर और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण पक्षकार हैं। मथुरा नगर पालिका परिषद न तो पक्षकार है, न ही उसके द्वारा इस मामले में पैरवी की जा रही है। इस परिस्थिति में मथुरा नगर पालिका प्रशासन द्वारा संबंधित भूमि के मुआवजे के लिए विप्रा को लिखा-पढ़ी करना न्याय संगत नहीं है।

Save Yamuna Save Vrindavan Poster

Wednesday, May 19, 2010

श्री वृन्दावन विकास परियोजना का विरोध


आजकल श्री वृन्दावन विकास परियोजना की ओढ़ में किए जाने वाले काम के बारे में मैं कुछ विरोध प्रकट करना चाहता हूँ। केशीघाट के सामने से जाने वाले यमुना के पानी के बीचों-बीच जो पुल बनाया जा रहा है, वो उस सब को बदल देगा जो करोड़ों हिन्दुओं के लिए पावन है।

जैसे यरूसलम और मक्का अपने-अपने मज़हब के लिए ख़ास मायने रखते हैं, उसी तरह, मथुरा और वृन्दावन हिन्दुओं के धर्म के अडिग प्रतीक हैं। दोनो स्थान पौरानिक गाथाओं, धर्म-कर्म, मान्यताओं और परम्पराओं कि धरोहर हैं।

पर्यटन-स्थानों का विकास करना, ख़ासकर धर्म-पर्यटन को बढ़ावा देना बेशक एक उत्तम कार्य है, किन्तु इस बात को तो ध्यान रखना चाहिए कि उन पावन स्थानों का रूप-रंग बिगड़ने न पाए।

वृन्दावन की कुञ्ज-गलियाँ, नदी और घाट इस स्थान की धरोहर हैं। ये वो जीते जागते नाट्य मंच हैं जहाँ श्री कृष्ण ने अपनी लीलाएँ रची थीं।

केशीघाट पर बनने वाला पुल इस सब को बदल देगा। नदी के बीचों-बीच यातायात को लाकर युगों-युगों की धरोहर को हमेशा के लिए मिटा दिया जायेगा - ऐसा तो दुनिया में आxxxxज तक कभी सुना भी नहीं है। पहले ही परिक्रमा मार्ग ने घाटों को नदी-तट से दूर कर दिया है। यह यातायात से खचमच भरा हवाई-पुल, प्रदूषण के काले बादल तो लायेगा ही, हमारे वृन्दावन के ग्रामीण रूप को ज़बरदस्ती एक घिनौने शहर में बदल देगा और उसके असली चरित्र को सदा के लिए नष्ट कर देगा।

हमें दूसरे स्थानों से भी सीख लेनी चाहिए। हाल ही में, जर्मनी के ड्रेस्डेन शहर को युनेस्को की "धरोहर सूची" से हटा दिया गया - इसलिए कि उन्होंने उस एतिहासिक शहर के निकट एक राजमार्ग का निर्माण कर दिया था। करनाटक प्रदेश के हम्पी नामक तीर्थ में हमारे साथ भी एसा हो चुका है। चाहे युनेस्को माने या न माने, वृनदावन पूरे विश्व की हि नहीं, हमारी सब की धरोहर है।

हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस बेतुकी "विकास" को रोकने में हमारी मदद करें, और सारे गुटों से मिल जुल कर बातचीत शुरु करें जिससे कि हमारे पावन धाम के अनूठे रंग-रूप को बदले बिना तीर्थ-पर्यटन का उचित रूप से विकास किया जा सके।

प्रार्थना करें कि वो दिन कभी न आए जब "राधे-राधे" की गूँज से ऊँची आवाज़ मोटर गाड़ियों के हौर्न की हो।

2010-05-20_Braj News

श्रीकृष्ण जन्मभूमि में 20 और द्वारिकाधीश में 50 फीसदी श्रद्धालु कम



मथुरा (DJ, May 19, 2010) । प्रभु के अंश से प्रकाशित सूर्य नारायण का तेज श्रद्धालुओं के लिये कहर बन गया है। संकल्प पूरा करने की शपथ लेने, समर्पण एवं सुविधा से परिपूर्ण भक्तों को छोड़कर मंदिरों में कम ही दर्शनार्थी पहुंच रहे हैं। कृत्रिम विद्युत का अभाव तथा शासन-प्रशासन की अनदेखी भी भक्तों और भगवान के बीच की दूरी बढ़ा रही है। यश, कीर्ति, दया एवं वंश वृद्धि करने में समर्थ ईश्वर एवं माता के पुजारी भी भक्त समाज का इंतजार करने को विवश हो गये हैं।

वैशाख की गर्मी में यात्रियों ने अपने पांव कन्हैया की जन्मस्थली एवं क्रीड़ा स्थली की ओर बढ़ने से रोक लिये हैं। नतीजतन पुरुषोत्तम मास में यहां नजर आई यात्रियों की भीड़ दुकानदारों के साथ ही तीर्थ पुरोहितों के लिए सपना बनकर रह गई है।

विश्व ख्यात द्वारिकाधीश एवं श्रीकृष्ण जन्म भूमि जैसे देवालय भी गरमी की मार से नहीं बचे हैं। द्वारिकाधीश मंदिर के प्रबंध निरीक्षक दीनानाथ शर्मा ने बताया कि गर्मी की वजह से करीब पचास प्रतिशत दर्शनार्थी कम हो गये हैं, जबकि श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा का कहना है कि 15 से 20 प्रतिशत श्रद्धालु कम हो गये हैं।


पानी के लिए रतजगा तीन फीट उतर गया है भूमिगत जल स्तर


मथुरा। अभी वैशाख की गर्मी है, ज्येष्ठ और आषाढ़ बाकी हैं, लेकिन 45 से 46 डिग्री का तापमान जमीन के अंदर के पानी का भी काल बन गया है। इससे शहर में अब तक तीन फीट पानी उतर चुका है। जल निगम इस तथ्य को स्वीकार कर रहा है। इससे तमाम सार्वजनिक एवं निजी बोरिंग फेल हो गई हैं। नतीजतन शहर में पेयजल के लिए मारामारी मची हुई। तमाम बस्तियों की महिलाओं की नींद इसके इंतजाम में जाया हो रही है। नगर पालिका के जलकल विभाग के 86 नलकूप इस समय शहर में चालू अवस्था में बताए गए हैं। नलकूपों की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ी है, लेकिन विद्युत अनापूर्ति, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण नलकूप प्रेशर से पानी नहीं निकाल पा रहे। इस बीच ठेक नारनौल के नलकूप की मोटर बुधवार को ब‌र्स्ट हो गयी, इससे वहां पेयजल संकट खड़ा हो गया है, जबकि बहादुर पुरा की बोरिंग दो दिन से पानी नहीं उगल रही है। मानसून में विलंब होने पर स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

भरे तालाबों में नहीं मिला पानी


मथुरा (DJ, May 19, 2010) । सिंचाई विभाग के अफसरों का झूठ आखिरकार पकड़ में आ ही गया। भीषण गर्मी में तालाबों को भरने की सूची जिलाधिकारी को देकर सिंचाई विभाग के अधिकारी अपने ही बनाये जाल में बुरी तरह से फंस गए। डीएम के निर्देश पर जब खंड विकास अधिकारी और उनकी टीमें गांवों की तरफ दौड़ीं तो भरे बताये गये तालाब भी सूखे मिले। हालात यह हैं कि किसी तालाब में पानी तली में आ गया है तो कहीं गांव की नालियों का पानी भरा हुआ है। मजबूरी में पशुपालक इन्हीं तालाबों में पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए छोड़ रहे हैं।

नहरों से जिले के 253 तालाबों को भरने का लक्ष्य सिंचाई विभाग के अपर खंड आगरा कैनाल, लोअर खंड तृतीय आगरा कैनाल और निचली मांट ब्रांच खंड गंगा नहर को दिया गया था। तीनों खंड तालाब भरवाने के लक्ष्य को अभी तक पूरा नहीं कर सके हैं। अपर खंड 84 तालाबों में से 63, लोअर खंड 94 में से 80 और मांट ब्रांच 74 में से 23 तालाब में ही पानी पहुंचा सका।

अपर खुर्जा ने एक तालाब भरवाया। गत दिवस तहसील दिवस में जब तालाबों को न भरने की शिकायत जिलाधिकारी दिनेश चन्द्र शुक्ला को मिली तो उन्होंने सत्यता का पता करने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों से सूची हासिल कर ली। बताया गया है कि सूची के आधार पर तालाबों की सत्यता का पता करने के लिए खंड विकास अधिकारियों को लगा दिया गया। बुधवार की दोपहर तक ब्लॉक मथुरा, नंदगांव और फरह के खंड विकास अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी रामधनी राम को सौंप दी। रिपोर्ट के मुताबिक सिंचाई विभाग ने ब्लॉक मथुरा में दस तालाबों को भरवाने का दावा किया था, लेकिन गांव तोष, खामनी और वाटी के तालाब सूखे मिले। ब्लॉक नंदगांव में दस तालाब भरने की सूची दी गई थी, लेकिन सात तालाब नहीं भरे गए। बताया गया है कि गढ़ी बरवारी और नंदगांव के पांच तालाब मनिहारी कुंड, आरेश्वर मंदिर, विमल कुंड को भरवाया ही नहीं गया। गांव बृजवारी के तालाब को भरवाने की फर्जी रिपोर्ट पेश की गई। इस कुंड में पानी तो था, लेकिन इसको सिंचाई विभाग ने नहीं भरवाया। फरह ब्लॉक में 19 तालाब भरवाने का दावा किया गया, लेकिन जांच में पाया गया कि 19 तालाबों में पानी ही नहीं है। जिला विकास अधिकारी रामधनी राम ने बताया कि अभी तीन ही विकास खंडों की रिपोर्ट उनको मिली है। सभी विकास खंडों की रिपोर्ट प्राप्त होते ही जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। इधर सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आगरा कैनाल से अप्रैल में ही तालाब भरवाए गए थे, लेकिन भीषण गर्मी में पानी कम हो गया। इसके बाद नहर तीन सप्ताह तक बंद रही। इससे पूरे तालाब नहीं भरे जा सके। निचली मांट ब्रांच खंड के अधिकारियों का कहना है कि नहर में पानी ही नहीं है। पानी की कमी से तालाब नहीं भरे जा रहे हैं।

पारे की आग में कि सानों की उम्मीद खाक


मथुरा (May 19, 2010) । गर्मी दिनरोज बढ़ती ही जा रही है। इसका असर इंसान तो क्या फसलों पर भी पड़ रहा है। किसान उम्मीद लगाए बैठे थे कि इस बार तरकारी का उत्पादन शायद अच्छा होगा। लेकिन पारे ने उनके अरमानों को खाक कर दिया। स्थिति ये है कि खरबूज तरबूज आसमान से गिर रही आग से झुलस रहे हैं तो खीरा और कद्दू को रोगों ने घेर लिया है। सब्जियों के उत्पादन में भी गिरावट आ गई है। किसान बड़ा घाटा होने की बात कह रहे हैं।

यमुना की खादर भूमि में किसान सब्जियों की खेती के साथ-साथ खरबूज और तरबूज की भी खेती करते हैं। गांव छिनपराई से लेकर गढ़ाया लतीफपुर तक करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इनकी खेती की जा रही है। इस बार तापमान में हुई अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी ने किसानों की उम्मीदों को जला कर राख कर दिया। तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है। तापमान में बढ़ोत्तरी होने से परागण करने वाले कीट परागण नहीं कर पा रहे हैं। परागण प्रभावित होने से फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस स्थिति में उत्पादन में गिरावट आ गई है और किसानों को मिलने वाला मुनाफा नहीं मिल पा रहा है।

किसान इस बार भारी घाटा होने की बात कह रहे हैं। जहांगीरपुर के किसान श्याम सुंदर सिंह ने बताया कि खरबूज तरबूज लगाने के लिए एक गड्ढे की खुदाई पर करीब सत्तर से अस्सी रुपये का खर्च आया। एक गड्ढे में लगने वाली बेल पर छह सात फल आते हैं। स्थिति यह है कि बेल पर फूल तो आता है, लेकिन अधिक तापमान होने से फूल मुरझा कर टपक रहा है। इससे बेल पर फलों की संख्या में कमी आ गई है। बेगमपुर के किसान शिशुपाल सिंह भी नुकसान होने की बात बढ़ा हुआ तापमान बता रहे हैं। किसान ने बताया कि पूरी लागत लगाने के बाद भी भरपूर उत्पादन नहीं हो पा रहा है।

किसान महीपाल सिंह ने बताया कि इस बार उत्पादन में आई कमी से उनको खेती में घाटा ही नजर आ रहा है। किसानों ने बताया कि तापमान अधिक होने से अधिक सिंचाई करनी पड़ रही है। पिछले सालों में एक सप्ताह में दो बार सिंचाई करने पर ही काम चल जाता था, लेकिन इस बार हर दूसरे तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। किसानों ने बताया कि खरबूज, तरबूज, खीरा, कद्दू पर रोग आ गया। फल बनता है, लेकिन कीड़ा उसे खा जाता है। दवाओं का भी प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन रोग पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। किसानों ने बताया कि बाजार में खरबूज, तरबूज, खीरा, कद्दू के भाव भी कम मिल रहे हैं। इस स्थिति में फसल घाटे का सौदा ही साबित हो रही है।