धरती को हरी रहने दीजिए
पेड़ों का हरापन मनुष्यों की
भूरी-भुरसट दुनिया में
निचाटपन के विरूद्ध
पानी की हलचल है
पानी के हाथों की तरह
पेड़ों की टहनियाँ
लगातार हिलती हैं
और पत्तियों की स्निग्ध भाषा
आदमी की आँखों को
बंजर होने से रोकती हैं
(चंद्रकांत देवताले की कविता पेड़ की पंक्तियाँ)
दूर तक देखता हूँ तो सिर्फ धूल उड़ती है। सिर पर तेज बरसता सूरज है। धूप और धुल उड़ती हुई आँखों में एक खौफनाक मंजर रचती है। इसी मंजर के बियाबान में कोई पेड़ नहीं दिखता। दूर तक कोई पेड़ नहीं दिखता। पेड़ नहीं होने से बंजर के मंजर में कोई हरापन नहीं। बस, लू चलती है। और यह लू बदन जितना नहीं झुलसाती उतना मन झुलसा देती है।
कहीं कोई हरापन नहीं। दूर तक हरेपन का एक छोटा सा-धब्बा तक नहीं। दूर तक कुछ न हो, और सिर्फ हरेपन का छोटा सा धब्बा हो तो तपते सूरज के नीचे चलते हुए सफर कुछ सहनीय होने लगता है। लगता है बस थोड़ी ही दूर थोड़ी देर में वह हरा धब्बा एक पेड़ में बदल जाएगा।
बस फिर क्या उसके नीचे बैठकर उसके जादू को महसूस किया जा सकता है। अचानक कुमार गंधर्व की आवाज गूँजती है-गुरुजी जहाँ बैठूँ, वहाँ छाया दे। कैसी विरल पुकार है। मन को भेदती हुई। जैसे लगातार जलते जीवन में झुलसते हुए छाँव माँगी जा रही है। दूर तक कोई पेड़ नहीं। बस गाड़ियाँ ही गाड़ियाँ है। तेज रफ्तार से चलती हुई। धूल और धुआँ उडा़ती हुई। हर दृश्य को बदरंग करती हुई।
कहीं कोई पेड़ दिख भी जाता है तो वह धूल में नहाया दिखता है। जैसे धूल पीता हुआ उसी के रंग में रंग चुका है। इतनी गाड़ियाँ है कि सड़क को चौड़ा करना पड़ रहा है। इसलिए पेड़ों को काटा जा रहा है। गाड़ियों गुजर सके इसलिए पेड़ों को रास्ते से हटाया जा रहा है। सड़कों के किनारे पेड़ों की हत्याएँ की जा रही है। वे खामोश गिरते रहते हैं। धूल उड़ती रहती है। सड़क किनारें कटे पेड़ों की शाखें सूखती रहती हैं। लोग आते-जाते रहते हैं।
एक पेड़ का कटना, पेड़ कटना ही नहीं होता। मनुष्य की आँख में रहने वाले हरेपन का मरना होता है। वह हरापन जिसकी वजह से जीवन में पानी की हलचलें बनी रहती हैं। यानी हरापन बचा रहना मनुष्य के बचे होने का प्रमाण है। इसी हरेपन की वजह से मनुष्य, मनुष्य बना रहता है। उसकी उम्मीद औऱ आशा बची रहती है।
इसलिए एक पेड़ का धराशायी होना मनुष्य की आँख में बचे हरेपन का धराशायी होना है। इसलिए हरापन बचा रहना यानी आदमी की आँखों को बंजर होने से बचाए रखना। हम धरती के बंजर होने की चिंता करने के साथ मनुष्य की आँखों के बंजर हो जाने की चिंता भी करनी चाहिए। इसलिए एक पेड़ उगाइए, धरती को बंजर होने से बचाइए और इस तरह मनुष्य की आँखों को भी बंजर होने से बचा लीजिए। यह हरापन रहेगा तो जीवन रहेगा। यह हरापन रहेगा तो जीवन में उम्मीद रहेगी।
(रवींद्र व्यास, DJ, July 4, 2009)
Friday, June 4, 2010
श्रीवृन्दावन-महिमामृत १.३१-३३
सर्वाशानां मूलमुद्धृत्य सम्यक् ।
दैवाल् लब्धेनैव निर्वाह्य देहं
श्रीमद्वृन्दाकानने जोषमास्स्व ॥
स्त्री पिशाची का सङ्ग दूर से त्याग कर, समस्त वासनाओं को सम्यक् प्रकार से मूल से उच्छेद कर, एवं दैव लब्ध वस्तु द्वारा देह यात्रा का निर्वाह करते हुए श्रीवृन्दावन में प्रीति-पूर्वक वास कर ॥१.३१॥
स्मर मिथुनमहस् तद्गौरनीलं स्मरार्तम् ।
बहुजनसमवायाद्दूरमुद्विज्य याहि
प्रिय निवसतु दिव्यश्रीलवृन्दावनान्तः ॥
तुम्हारे लिये कर्तव्य और वक्तव्य कुछ भी नहीं, दृश्यमान समस्त वस्तुओं को भूल जा, कामातुर उस गौर-नील जोड़ी को स्मरण कर, जिस स्थान पर लोकों का समूह, उस स्थान से उद्विग्न चित्त होकर दूर चला जा, हे प्रिय, अप्राकृत श्रीमद् वृन्दावन में वास कर ॥१.३२॥
परिहृतजनसङ्गोऽरोचमानानुयानः ।
प्रतिपद बहुलार्त्या राधिकाकृष्णदास्ये
वसति परमधन्यः कोऽपि वृन्दावनेऽस्मिन् ॥
नित्य कपोलदेश पर हाथ रखे हुए अश्रु प्रवाह करते करते निसङ्ग होकर एवं सेवक अनुचर रहित होकर प्रतिक्षण व्याकुलता-पूर्वक जो श्रीराधाकृष्ण के दास्य रस में निमग्न होकर इस श्रीवृन्दावन में वास करता है, वही परम धन्य है ॥१.३३॥
Wednesday, June 2, 2010
श्रीवृन्दावन-महिमामृत १.२८-३०
Photo of Tattiyasthan by Abha Shahra
किं वा योगैः परपदकृतैः किं परैर्वाभियोगैः ।
वासेनैव प्रसन्नमखिलानन्दसारातिसारं
वृन्दारण्ये मधुरमुरलीनादमाकर्णयिष्ये ॥
अतीव परमानन्द देने वाले उन समस्त साम्राज्य भोगों से हमें क्या ? स्वर्गादि की प्राप्ति के लिये योग समूह से क्या लाभ ? अन्यान्य विषयों में अभिनिवेश करने से क्या फल ? क्यों कि श्रीवृन्दावन में वास करने से तो निखिल आनन्द का परम सार मधुर मुरली निनाद हठात् कानों में प्रवेश करेगा ॥१.२८॥
र्निन्दासंस्तवकोटिभिर्बहुविभूत्यत्यन्तदैन्यादिभिः ।
जीवन्नेव मृतो यथा न विकृतिं प्राप्तः कथंचित् क्वचित्
श्रीवृन्दावनमाश्रये प्रियमहानन्दैककन्दं परम् ॥
उत्तम उत्तम वस्त्र-भूषणादि की प्राप्ति में अथवा कर-पादादि के काटे या जलाये जाने पर, कोटि कोटि निन्दा होने पर भी जीवन्मृत की तरह कभी भी किसी प्रकार से विकार को प्राप्त न होकर परम प्रिय महानन्द बीज स्वरूप इस श्रीवृन्दावन का आश्रय करता हूं ॥१.२९॥
मन्येथा अधमैश्च दुष्परिभवान् संमानवत् सत्तमैः ।
दैन्यान्येव महाविभूतिमतिसल्लाभान् अलभान् सदा
पापान्येव च पुण्यमन्ति यदि ते वृन्दावनं जीवनम् ॥
यदि श्रीवृन्दावन में तेरा जीवन हो, तो दुखों को तू सुख समूह जान, अपयश को परमा कीर्ति मान, अधम पुरुषों के द्वारा अत्यन्त अपमानित होने पर उसे ही तू साधु पुरुषों के द्वारा किये हुए सम्मानवत् जान, दरिद्रता राशि को महा विभूति स्वरूप, अत्युत्तम मायिक लाभों की महा क्षति स्वरूप एवं पाप समूह को पुण्य रूप प्रतीत कर ॥१.३०॥
2010-06-03 ब्रज का समाचार
अभिनेत्री हेमा को भी भाया वृंदावन
मथुरा (DJ June 3, 2010)। पूर्व राज्य सभा सदस्य और मशहूर अदाकारा हेमामालिनी की सांसद निधि से वृन्दावन स्थित इस्कान संस्था के गुरुकुल में अंतर्राष्ट्रीय मानकों वाले शॉवरों के दस-दस टायलेट एवं बाथरूम बनाये जा रहे हैं। गुरुकुल का पुनरोद्धार भी कराया जा रहा है। 'ड्रीम गर्ल' के वृंदावन में आधुनिक टायलेट व बाथरूमों के प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिए मुंबई सब-अरबन डिस्ट्रिक्ट के कलेक्टर ने 25 लाख रुपये मंजूर किये। हेमा मालिनी की सांसद निधि के करीब 59 लाख रुपये से जनपद के विभिन्न स्कूलों में कक्ष एवं बरामदा निर्माण के साथ ही वात्सल्य ग्राम से गोविंद गोशाला की ओर अक्रूर मार्ग पर 16 लाख से करीब आधा किमी. सीसी रोड, करनावल स्थित श्रीकृष्ण इंटर कालेज के भू-तल एवं प्रथम तल पर 20 लाख से दो-दो कक्षों तथा ग्राम मुड़लिया, नौहझील स्थित डा. ब्रजपाल मोहरपाल सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 23 लाख से पांच कक्षों एवं बरामदा निर्माण कार्य प्रगति में बताये गये।पानी पर नींद कुर्बान
मथुरा (DJ June 3, 2010)। पेयजल के लिए अपनी नींद कुर्बान करने वाली महिलाओं की किस्मत नहीं बदली है। श्वांस, अस्थमा, ब्लड प्रेशर है या घुटनों का दर्द, नगर पालिका की कम आपूर्ति के मर्ज के आगे उन्हें अपना मर्ज कम और प्यास बड़ी लगती है।तीस-चालीस साल पहले घनी आबादी की महिलाएं जिस तरह पानी के लिए रात-रात भर जागती थीं, वैसी रातें आज भी उनके हिस्से में हैं। फर्क इतना पड़ा है कि पहले उनकी सास यह जरूरी काम रात में निबटाती थी और आज वह सास और वृद्धा के रूप में इस जरूरी कारज को अंजाम दे रही हैं।
इन सालों में नलकूप कई गुना बढ़ गए हैं और हैंडपंप भी उनकी बस्तियों में खड़े हुए हैं, लेकिन पेयजल की दौड़-भाग समाप्त नहीं हो सकी है। टंकी और नलकूप से नलों के जरिए पहुंचने वाला पेयजल आज भी उसी तरह भरा जा रहा है।
वनखंडी व सुभाष नगर की सप्लाई सुबह चार बजे के आसपास पहुंचती है, पर खाली बर्तनों के साथ वृद्ध महिलाओं का जमघट आधी रात से ही लगना शुरू हो जाता है। जिसका बर्तन नल के जितने करीब होगा, वह सप्लाई आते ही उतना पहले पानी भर लेता है।
पहले नंबर के फेर में उनकी आंखों की नींद कब पूरी होती है, इसे कोई देखने वाला नहीं है। फिर चाहे झींगुर पुरा हो या बहादुर पुरा, अंबाखार, जनरल गंज या पापड़ा पीर, कठौती कुआं, भैंस बहोरा या चौबिया पाड़ा, इस भीषण गर्मी में नलों के आसपास महिलाओं के रतजगे हर जगह मिल जाएंगे।
बनखंडी निवासी नसीम बानो कहती हैं कि उन्हें अस्थमा है, पर सुबह रोटी पकाने से लेकर पूरे दिन बच्चों की प्यास बुझाने के लिए पानी जरूरी है। वह सालों से इसी तरह पानी भर रही हैं। हालांकि उनके आसपास कुछ निजी बोरिंग हुए हैं, लेकिन गर्मियों में वे लोग भी पानी चलाने से हिचकिचाते हैं। अगर एक-दो बाल्टी खारी पानी भर भी लिया तो क्या हुआ, प्यास तो पालिका के मीठे पानी से ही भरती है।
सुभाष नगर निवासी राम देई कहती हैं कि सालों से मोहल्ले में रात में ही सप्लाई आती है। जागकर बर्तन भरना मजबूरी है। उनके घुटनों में दर्द रहता है, पर क्या करें। रात में आलस्य कर लिया तो दिन में ज्यादा दौड़ना पड़ता है।
क्वालिटी होटल से डैंपीयर नगर जाने वाले रास्ते में एक-दो नल लगे हुए हैं। इन पर दूर-दूर से पानी भरने के लिए महिलाएं आती हैं। सिर पर बर्तन रखकर आती-जाती महिलाएं रात के सन्नाटे में बिना किसी भय के गुजरती हैं। यह उनकी दिनचर्या जो है।
धौरेरावासी पीने के पानी से वंचित
गांव के अधिकतर हैंडपंप का पानी खाराआक्रोश : शिकायत के बाद भी अधिकारियों ने नहीं ली सुध
निजी टैंकरों के इंतजार में घंटों बैठे रहते हैं ग्रामीण
वृंदावन (AU June 3, 2010)। जिस गांव में पीने के पानी को लोग तरसते हों, मार्ग गंदगी से अटे पड़े हों तथा सीवर व्यवस्था का अभाव हो, ऐसे गांव के बाशिंदों का क्या हाल होगा। जी हां! हम बात कर रहे है वृंदावन-मथुरा पर स्थित गांव धौरेरा की।
यह गांव विकास से कोसों दूर है। ग्रामीण समस्याओं के निदान के लिए जनप्रतिनिधिओं और अधिकारियों के यहां चक्कर लगाते थक चुके हैं, लेकिन क्षेत्र की समस्या का निदान नहीं हो पाया है। गांव के अधिकतर हैंडपंपों का पानी सूख चुका है और पानी की लाइन नहीं। इसीलिए महिलाओं को सुदूर क्षेत्रों से पानी लाकर काम चलाना पड़ रहा है या फिर गांववासी निजी संस्थाओं के टैंकरों का इंतजार करते हैं।
गांव के अधिकांश हैंडपंप का पानी खारा है। गांव निवासी निहाल चंद्र, जवाहर एवं जगदीश बघेल का कहना है कि वर्षों से यहां पेयजल का अभाव है। इससे महिलाओं को काफी दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। कुसुमलता, जमुनादेवी, रमेश, जयनारायण कहना है कि गांव में लगे अधिकतर खरंजे उखड़ चुके हैं। इससे वहां से होकर निकलना ग्रामीणों के लिए बहुत मुश्किल है। राम सिंह और जितेंद्र का कहना है कि हर सुबह गांव के लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
ग्राम प्रधान पतोली सिंह का कहना है कि कई बार शासन को पत्र लिखे जाने के बावजूद भी यहां के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। कुछ सामाजिक संस्थाओं से सहयोग लेकर यहां टैंकर और नलकूपों की व्यवस्था कराई गई है।
बाक्स
वृंदावन (AU June 3, 2010)। ग्राम धौरेरा के प्रधान पतोली के अनुसार गांव की कुल आबादी करीब तीन हजार है, जबकि मतदाता संख्या दो हजार के आसपास है। इस आबादी में लगभग १९०० दलित, सर्वण ९०, बघेल ४५०, मल्लाह ३०० बाकी अन्य जातियों अल्पसंख्यक के अलावा अन्य जातियों के लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने पानी जैसी सुविधा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
फोटो-पी-२ मथुरा-वृंदावन मार्ग स्थित धौरेरा गांव में टैंकर से पानी भरतीं महिलाएं।
सोना : बढ़ती कीमत में बिक्री हुई कम
जरूरत के हिसाब से सोने की खरीददारीगिरावट : बुधवार को दस ग्राम सोने के दाम दो सौ रुपये गिरे
आभूषण खरीदने में हिचक रहे है लोग
मथुरा (AU June 3, 2010)। सोना भले ही तेजी के शिखर पर पहुंच गया हो लेकिन इस स्वर्णिम दौर में उसके कद्रदानों की संख्या कम हो गई है। बाजार में सोना और उससे बने आभूषणों को खरीदने में लोग हिचक रहे हैं। सहालग के समय में भी लोग जरूरत के हिसाब से ही सोने की खरीददारी कर रहे हैं।
कारोबारी सूत्रों के अनुसार मंगलवार को सोने की कीमत १९०५० प्रति दस ग्राम रही, जबकि बुधवार को सोने की कीमत में लगभग २०० रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट आई। इसके बावजूद बाजार में इसकी जरूरत के ही हिसाब से खरीददारी की जा रही है।
सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश बंसल बताते हैं कि तेजी से बाजार में बिक्री को मानो ग्रहण लग गया है। लोग सिर्फ आवश्यकता के अनुसार ही खरीददारी कर रहे हैं। बिक्री ठप होने से सोने की कीमत में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। एक अन्य कारोबारी प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि तेजी के इस दौरान भी बाजार में सोना बेचने वालों का भी टोटा पड़ गया है। लोग देखो और इंतजार करो की नीति पर चल रहे है।
सोने की तेजी ने बिगाड़ा बजट
मथुरा (AU June 3, 2010)। बीते कुछ माह में ही सोने के भावों में बेलगाम तेजी ने शादियों के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है। महोली रोड निवासी रामजीलाल के घर में बिटिया की शादी है। एक साल पूर्व हुई सगाई के दौरान सोने के भाव १३ हजार के आसपास थे, उस समय उन्होंने सौ ग्राम सोने के आभूषण देने का वायदा कर दिया। वर्तमान में इसकी कीमत उछल कर १९ हजार प्रति दस ग्राम पहुंच गई है। कीमत के इस अंतर की भरपाई के लिए उन्हें दहेज के अन्य सामान में कटौती करनी पड़ रही है।
गरमी ने पसीने छुड़ाने के साथ हलक भी सुखाए
धरना-प्रदर्शनों का विद्युत विभाग पर असर नहींराहत : पशु ने गर्मी को नालों में शांत किया
रात में छह घंटे बिजली गुल की
कोसीकलां (AU June 3, 2010)। धूप की तल्खी भरी चमक ने जनमानस के पसीने छुड़ाने के साथ हलक भी सुखा दिए हैं। पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। गरमी में बिजली कटौती ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। कूलर, पंखे, ऐसी शोपीस बने हुए हैं।
गरमी की प्रचंडता ने बुधवार को एक बार फिर एहसास करा दिया। गरमी लोगों का सिर तपाती दिखी। इससे बचने के लिए जहां युवा रूमाल और कैप का प्रयोग करते दिखे तो अधेड़ साफी, गमछे का। युवतियां छतरी लगाकर सड़कों से गुजरीं। शरीर झुलसाने वाली धूप ने राहगीरों को छांव में ही चलने को विवश कर दिया। प्रातः आठ बजे से ही सूर्यदेवता की तीखी किरणों से गरमी का अहसास होने लगा। इससे लोग बेहाल हो गए। गरमी बढ़ने से शरीर का पसीना नहीं सूख रहा था। कूलर, पंखों की हवा भी फेल हो रही थी। महिलाएं हाथों में पंखे हिलाती देखी गईं। पशु भी नाले-नाली, तालाब, पोखरों में अपनी गरमी को शांत करने में लगे रहे।
उधर, बिजली कटौती ने सारे रिकार्ड तोड़ डाले। धरना-प्रदर्शन, आंदोलनों का भी विद्युत अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा। अधिकारी आपूर्ति सुधारने की बजाए पब्लिक से बचने के लिए सुरक्षा की गुहार लगाते हुए घूम रहे हैं। बुधवार को बिजली ने अपने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर डाले। रात्रि में १२ बजे गई आपूर्ति सुबह छह बजे शुरू हुई तो लुकाछिपी चालू हो गई। दिन में भरी गरमी में एक बजे से चार बजे तक आपूर्ति भंग रही। शाम को तो बिजली की कटौती ने सभी को पसीना-पसीना कर दिया।
सांस्कृतिक गतिविधियों पर गर्मी ने ब्रेक लगाया
प्रचंड गर्मी में कार्य करने को कलाकार तैयार नहींतपिश : संगोष्ठी, काव्य पाठ, साहित्यक आयोजन भी ठप
पुरुषोत्तम मास के दौरान ही हुए बड़े कार्यक्रम
मथुरा (AU June 3, 2010)। झुलसाने वाली गर्मी ने शहर में सांस्कृतिक गतिविधियों पर विराम सा लगा दिया है। विगत माह से जिले में कोई बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है। इसके अलावा साहित्य और धर्म संस्कृति से संबधित कोई विशेष बड़े आयोजन भी नहीं हुए हैं।
मई माह में अधिक मास की समाप्ति के बाद से सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों का दौर थम सा गया है। अप्रैल के प्रारंभ में शुरू हुए पुरुषोत्तम मास के दौरान तीर्थयात्रियों की आवाजाही ब्रज में उम्मीद से ज्यादा हुई थी। तापमान बढ़ने पर भी धर्मप्रेमियों के जोश में कोई कमी नहीं आई थी। गर्मी पर आस्था भारी पड़ रही थी। अधिक मास के चलते जिले में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। रामायण पाठ, भागवत कथा से लेकर यमुना जी का चुनरी मनोरथ, मंदिरों में मनोरथ कार्यक्रमों की बड़ी फेहरिस्त इस माह का हिस्सा रहे। इनके अलावा गीत-संगीत, काव्य पाठ, साहित्य संबधित गोष्ठियाें के अधिक आयोजन भी अप्रैल में ही अधिक हुए। इसके बाद मई-जून में पड़ी प्रचंड गर्मी ने बड़े कार्यक्रमों की शृंखलाओं पर मानो ब्रेक सा लगा दिया है। इक्का-दुक्का धार्मिक कार्यक्रमों को छोड़कर कोई बड़ा प्रोग्राम शहर में नहीं हुआ है। चुनरी मनोरथ कार्यक्रमों में भी दर्ज की गई है। गीत-संगीत, काव्य संध्याओं के अलावा सांस्कृतिक गतिविधियों में भी कमी आ गई है।
सांस्कृतिक संस्था निकेतन के प्रमुख दीपक कुमार का कहना है कि इतनी गर्मी में किसी प्रकार के आयोजनों के लिए कलाकार तैयार नहीं हो रहे हैं। बढ़ते तापमान में किसी प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन न होना ही बेहतर है।
बलदेव के रजवाहों में पानी नहीं
गर्मी की मार से पशु हरा चारे और पानी के लिए तरस रहेनिर्णय : नेताओं ने अधिशाषी अभियंता को घेरने का मन बनाया
रबी सीजन की आवपासी की वसूली स्थगित की मांग
अकोस/बलदेव (AU June 3, 2010)। एक तो गर्मी ऊपर से नहर और रजवाहों में पानी की किल्लत। इससे किसान परेशान हैं।
बलदेव और दघेंटा रजवाह में पानी नहीं आने से किसानों के सामने पशुओं के लिए हरे चारे के अलावा मूंग, अगैती बाजरा की फसल को बचाने की समस्या पैदा हो गई है। सूखी पड़ी पोखरों में पानी नहीं भरा जा रहा है। महीनों से रजवाहों में पानी नहीं आने से किसानों में आक्रोश पनपने लगा है। रबी सीजन की आवपासी की बसूली स्थगित करने और पानी की मांग को लेकर बलदेव के रालोद कार्यकर्ताओं ने नहर और सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता के घेराव का निर्णय लिया है।
बलदेव के पप्पू पांडे, नगला विधि के सौदान सिंह और मानसिंह बधौतिया, दघैटा के ओमप्रकाश, आंगई के ओमवीर सिकरवार, हथकौली के कौशल सिकरवार बताते हैं कि बलदेव और दघेंटा रजवाहा पांच-छह महीने से पानी नहीं आने से सूख गए हैं। गेहूं की सिंचाई के समय भी पानी नहीं आया था। अब चरी, बाजरा और मूंग की खेती के लिए भी पानी नहीं है। सैकड़ों बीघा जायद और खरीफ की फसल प्रभावित हो रही है।
वहीं, किसान नेता बुद्धा सिंह प्रधान और डा. एनपी सिंह भरंगर का कहना है कि नहर रजवाहों में पानी नहीं आने से किसान परेशान हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। रजवाहों में पानी छोड़ने एवं रबी सीजन की सिंचाई की आवपासी की वसूली स्थगित करने की मांग को लेकर सिंचाई विभाग मांट ब्रांच गंग नहर के अधिशाषी अभियंता को ज्ञापन सौंपेंगे। अगर चार दिन के अंदर दोनों रजवाहों में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान सिंचाई कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
वहीं, रालोद जिलाध्यक्ष रामवीर सिंह भरंगर का कहना है कि नहरों और रजवाहों में पानी छोड़ने के लिए कई बार अधिकारियों से कह चुके हैं, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता उन्हें नहरों में पानी छोड़ने का आश्वासन देते रहते हैं।
बेचने का आरोप लगाया पिता पर
मथुरा (DJ June 3, 2010)। जिसने पाल-पोस कर बड़ा किया, पुत्री अब उसी के खिलाफ खड़ी हो गई है। पति प्यारा और पिता दुश्मन नजर आ रहा है। मामला बलदेव विकास खण्ड के ग्राम मेदुआ का है। स्थानीय निवासी एक शराबी पिता ने अपनी पुत्री के वैवाहिक सम्बन्ध के खिलाफ आरोप लगाये तो पुत्री ने इसे न केवल नकार दिया बल्कि पिता पर बेचने का आरोप भी लगा दिया। वह पति के साथ जीने मरने की कसम खा रही है।मेदुआ निवासी राजेश व पत्नी ममता के बीच अनबन है। इस वजह से ममता पिछले नौ साल से अपने पति से अलग मायके में रह रही थी। ममता की पुत्री प्रीति को भी नाना-मामा ने पढ़ाया लिखाया और समय पर उसकी शादी कर दी। प्रीति की शादी 23 मई, 2010 को सगुन मैरिज होम अलीगढ़ में बैंक कॉलोनी निवासी उमाशंकर शर्मा के पुत्र नौनिहाल शर्मा से रीतिरिवाज के साथ सम्पन्न हुई।
इस सम्बन्ध में पुत्री के पिता ने वर की जाति अलग होने व लड़की के नाबालिग होने का आरोप लगाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलीगढ़ से शिकायत की। इस पर एसएसपी अलीगढ़ ने सीएमओ से लड़की के नाबालिग होने की जाँच करायी। सीएमओ ने जाँच में लड़की को बालिग पाया। पिता के आरोपों को लेकर पुत्री व उसके पति को थाना प्रभारी बलदेव ने भी जाँच हेतु बुलाया जिस पर पुत्री प्रीति व उसका पति नौनिहाल शर्मा व प्रीति की माँ ममता अपने मायके वालों के साथ थाना बलदेव आयी।
प्रीति ने अपने पति के साथ रहने की बात कही तथा अपने पिता पर बेचने का आरोप लगाया, जिस पर लड़की का पिता थाना बलदेव से मुँह छिपाकर भाग गया।
विवाहिता को जिंदा जलाने का प्रयास
सास, ससुर सहित आधा दर्जन नामजददुस्साहस : ससुरालीजनों ने कमरे में बंद कर उस पर केरोसिन डाला
५० हजार, फ्रिज और वाशिंग मशीन की कर रहे थे मांग
कोसीकलां (AU June 3, 2010)। दहेज में ५० हजार रुपये, फ्रिज, वाशिंग मशीन न लाने पर ससुराली जनों ने विवाहिता को मिट्टी का तेल छिड़ककर जलाकर मारने का प्रयास किया। इसकी रिपोर्ट सास-ससुर, पति सहित पांच के खिलाफ दहेज एक्ट के तहत दर्ज कराई है।
बुखरारी निवासी गंगा श्याम का आरोप है कि उसने बेटी इंदिरा की शादी २७ फरवरी २००९ को सैलोठी पलवल निवासी लालाराम के पुत्र चंद्रपाल के साथ की थी। शादी में सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज दिया था। ससुराली जन लगातार ५० हजार रुपये नकद, फ्रिज, कपड़ा धोने की मशीन आदि की मांग करते हुए उसका उत्पीड़न करते रहे। कुछ समय तक तो इंदिरा सब कुछ सहती रही। बाद में यह बात उसने पिता को बताई तो पंचायत के माध्यम से मामले को सुलह कराने का प्रयास किया गया। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इस पर ससुरालीजन उसे मायके छोड़ गए।
पांच-छह दिन पूर्व खबर मिली कि उसके पति चंद्रपाल एक दुर्घटना में घायल हो गया है। उसको देखने के लिए वह पलवल पहुंची तो वहां उसके ससुरालीजनों ने काफी दुर्व्यवहार किया। इसके बाद भी इंदिरा वहीं रुक गई। ३१ मई को ससुरालीजनों ने इंदिरा को एक कमरे में बंद कर दिया और उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर जलाकर मारने का प्रयास किया। किसी तरह इंदिरा बच निकली। विवाहिता के पिता ने घटना की रिपोर्ट पति चंद्रपाल, ससुर लालाराम, सास लक्ष्मी, देवर परवीन, नंद मुन्नी के खिलाफ आईपीसी की धारा ४९८ ए, ३२३, ५०६, ५/४ दहेज एक्ट के खिलाफ दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई।
एडीएम प्रशासन पद से वर्मा का तबादला
मथुरा (DJ June 3, 2010)। करीब साढ़े तीन माह पहले ही यहां अपर जिलाधिकारी प्रशासन बनाकर भेजे गये श्रीश चन्द वर्मा का तबादला एक बार फिर नोएडा विकास प्राधिकरण के सचिव पद पर होने की चर्चा है। पुलिस-प्रशासन के कई अफसरों द्वारा उनके कार्यालय में जाकर मुलाकात करने से भी इस चर्चा को बल मिल रहा है। श्री वर्मा ने बताया कि अभी उनके पास तबादला आदेश नहीं आया है।विकास भवन में होगा विकास
मथुरा (DJ June 3, 2010)। यदि सब कुछ सीडीओ की मंशा के अनुसार चला तो निकट भविष्य में विकास (राजीव) भवन का कायाकल्प होता दिखाई देगा। विकास भवन के केन्द्रीय कक्ष एवं दफ्तरों में आधुनिक सुविधाओं के लिए शासन को 50 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके प्रोजेक्ट जिला ग्राम्य विकास अभिकरण एवं आरईएस ने तैयार किये हैं।पिछले दिनों सरकारी कार्य से लखनऊ गये सीडीओ अजय शंकर पाण्डेय ने इस संबंध में प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास से भेंट की थी। उनकी सोच है कि जिले में ग्राम्य विकास योजनाओं के संचालन के प्रमुख केन्द्र विकास भवन को खुद इस मामले में मॉडल दिखना चाहिए। प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास ने सीडीओ की भावना को ध्यान में रखते हुए उन्हें मौखिक रूप से इसके लिए आश्वस्त कर दिया बताया गया।
यहां यह तथ्य काबिले गौर है कि दो दशक पहले अस्तित्व में आए विकास भवन के अनुरक्षण के लिए शासन से हर साल एक लाख रुपया जिला प्रशासन को मिलता रहा है। इसका समुचित उपयोग नहीं किया गया।
फील्ड में कुल 115 प्रगणक
मथुरा (DJ June 3, 2010)। नगर में जनगणना का कार्य अधिशासी अधिकारी के बदले जाने से भी प्रभावित हुआ है। गणना को गति देने के लिए एडीएम वित्त एवं प्रभारी जिलाधिकारी ज्ञानेश कुमार ने मीटिंग लेकर जरूरी निर्देश दिए।सायं कलक्ट्रेट सभागार में हुई मीटिंग में प्रभारी जिलाधिकारी ने नवागत अधिशासी अधिकारी शिव कुमार शर्मा को जल्द ब्लाक बनाकर नक्शे तैयार कराने के निर्देश दिए और निर्धारित तिथि तक कार्य पूरा करने को कहा।
अधिशासी अधिकारी ने 28 मई को चार्ज संभालने के बाद ब्लाक बनाए जाने के निर्देश कर निरीक्षकों को दिए थे। ईओ श्री शर्मा ने बताया है कि उनके चार्ज लेने से पहले तो जनगणना ठीक से शुरू ही नहीं हुई थी। ब्लाक व नक्शा नहीं बने थे। गत छह दिन में पचास फीसदी ब्लाक बना दिए गए हैं और 115 कर्मचारियों को फील्ड में रवाना कर दिया गया है।
नगर में शिथिल पड़ा जनगणना
मथुरा (DJ June 3, 2010)। शहर में जनगणना कागजों पर ज्यादा और फील्ड में कम हो रही है। एक पखवाड़े से प्रगणक आधा-अधूरा काम ही कर पा रहे हैं। वजह है ब्लाक और नक्शा नहीं दिया जाना।जनगणना 2011 के अंतर्गत शहर में तीस जून तक मकानों की गणना होनी है। एक-एक बस्ती के एक-एक मकान को गणना में शामिल किया जाना है। इसके लिए 765 प्रगणक से गिनती करायी जानी थी, लेकिन इतनी संख्या तो जनगणना अधिकारी अभी तक हासिल नहीं कर पाए हैं, उल्टे जितने कर्मचारी गणना में लगे हुए हैं, वे लक्ष्य के मुताबिक कार्य नहीं कर पा रहे।
नगर पालिका परिषद जनगणना के लिए प्रगणक को केवल स्टेशनरी वितरण तो एक पखवाड़े से कर रही है, लेकिन कर्मचारियों को किन दिशा में कौन से मोहल्ले लेने हैं, यह उन्हें ठीक से पता ही नहीं है। दरअसल उन्हें ब्लाक क्षेत्र और मोहल्लों का नक्शा बनाकर नहीं दिया गया है।
जैसी कि आशंका दैनिक जागरण ने शुरू में जतायी थी, उसी ढर्रे पर गणना का काम आ गया है। मकानों की गिनती का काम पालिका कर्मचारियों के अलावा अन्य विभागों के कर्मचारियों, शिक्षकों और सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताओं से भी लिया जा रहा है। मकान वार सर्वे में पालिका के रिकार्ड पर जनगणना आधारित होने से नयी बस्तियों के पूरी तरह शामिल हो पाने में संदेह जताया जाता रहा है।
अब फिर से निर्देश जारी हुए हैं कि नगर पालिका का गृह कर व जलकर देने वाले मकानों की गिनती प्राथमिकता से की जाएगी। नगर पालिका के इंजीनियर ने ब्लाक के जो नक्शे बनाए हैं, वे प्रगणकों के पहचान में नहीं आए, जबकि इस कार्य पर तीस हजार का व्यय हो चुका है। छह दिन पहले नए ईओ ने पालिका के समस्त कर निरीक्षकों से अपने-अपने क्षेत्रों के नक्शे बनाने को कहा है, लेकिन अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हो पायी है। नियमानुसार एक ब्लाक में डेढ़ सौ मकान लिए जाने हैं, लेकिन ब्लाक वार नक्शा न होने से गिनती लक्ष्य के हिसाब से नहीं हो रही।
12 महीने, तीन मेले और पांच को नौकरी
मथुरा (DJ June 3, 2010)। बेरोजगार हताश और निराश हैं। केंद्र, प्रदेश सरकार एवं उनसे संबद्ध संस्थान रोजगार देने में असफल साबित हो गये हैं। जिले के तीस हजार से अधिक रजिस्टर्ड युवक नौकरी की तलाश में है। इनमें से तीन हजार से अधिक दस साल से काम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 12 महीने में तीन रोजगार मेले आयोजित होने के बाद मात्र पांच का समायोजन हो सका है, जबकि जिले में 565 पंजीकृत नियोजक मौजूद हैं।जनपद में सरकारी नियम-कानून के अंतर्गत सेवायोजन कार्यालय कार्यरत है। कई प्रकार की रोजगार परक शिक्षा-दीक्षा देता है। सरकारी व गैर सरकारी पंजीकृत 565 नियोजन संस्थान हैं किंतु उनमें से करीब 14 प्रतिशत ने अपने यहां पदों की रिक्तियों की सूचना देना जरूरी नहीं समझा है। यह हालात तब हैं जबकि कानून में सूचना न देने वालों को दंडित करने का विधान है। कानून की अवहेलना करने वालों में सबसे अधिक सरकारी संस्थान हैं, किंतु उनके अधिकारी किसी प्रकार के दंड से बेखौफ हैं।
आकड़े दिखा रहे आइना?
सरकारी आकड़े बताते हैं कि शहरी क्षेत्र में हाई स्कूल से कम 116, हाई स्कूल 678, इंटर 550, स्नातक 1306, स्नातकोत्तर 414, आईटीआई 101, डिप्लोमाधारी 33, प्रशिक्षित बीटीसी 1, बीएड, एलटी 314, अनुसूचित 480, अनुसूचित जन जाति 2 अन्य पिछड़ा वर्ग 261 महिला 251 पिछले पांच साल से, हाई स्कूल से कम 73, हाई स्कूल 395, इंटर 339, स्नातक 711, स्नातकोत्तर 73, आईटीआई 49, डिप्लोमा 18, बीटीसी 2, बीएड 173, अनुसूचित 264, अनु.ज.जा. 3, अन्य पिछड़ा 142, महिला 113 दस वर्ष तक के तथा योग्यता क्रम से 22, 119, 46, 105, 24, 8, 2, 1, 34, 45, 37, 1, 19, 11 दस साल से अधिक समय से रोजगार की तलाश में सेवायोजन विभाग पर भरोसा कर रहे हैं।
यमुना: पतित पावनी या कचरा वाहनी
मथुरा (DJ 2008.04.12) । कभी कलकल कर बहती यमुना अब 'कचरा वाहक' बनकर रह गयी है। निकला केमिकल युक्त कचरा और शहर की सीवर लाइन इसकी पवित्रता को तार-तार in pieces, shreds कर रहे हैं। वह इस असहनीय पीड़ा के बाद भी खामोश है। इसका विस्तृत रूप भी अब छोटा हो गया है। साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यमुना मैली ही दिखाई देती है।
प्रदूषित नदियों में शुमार हो चुकी यमुना यमुनोत्री से दिल्ली तक आते-आते गंदे नालों के पानी को समाहित कर प्रदूषित हो जाती है। यमुना कई शहरों में होते हुए पहले बांध ताजेवाला तक पहुंचती है। ताजेवाला से इसकी दो नहरें पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहर निकली हैं। बरसात के दिनों के अलावा यहां यमुना नदी का स्वरूप नजर नहीं आता। राजधानी में दम तोड़ चुकी यमुना अपने बेसिन में फरीदाबाद, बल्लभगढ़, पलवल, कोसी, शेरगढ़, चीरघाट, वृन्दावन के बडे़ नालों को इकट्ठा करके 19 बड़े-बड़े नालों को मथुरा में समाहित करती है। यमुना नदी पूर्वोत्तर की ओर से शाहदरा ड्रेन के बाद खैर टप्पल नौहझील, ईशापुर लक्ष्मी नगर तथा रावल तक की सम्पूर्ण गन्दगी समाहित करती चलती है।
किनारे के शहरों की गंदगी को समेटे यमुना का प्रदूषण मथुरा तक चरम पर पहुंच जाता है।
यहां साड़ी और चांदी उद्योग से साइनाइड और क्रोमियम भी यमुना में ही छोड़ा जा रहा है। छपाई उद्योग में प्रयुक्त केमिकल यमुना को भारी मात्रा में जहरीला बना रहा है तो धातु उद्योग के कारण तेजाबी मात्रा पानी में अत्याधिक बढ़ रही है। बरसात के दिनों में तो पूरे शहर की गंदगी ही यमुना में पहुंच जाती है। भयावह गंदगी व प्रदूषित पानी यमुना में जाने से पतित पावनी की पवित्रता तार-तार हो रही है। हद तो तब पार हो जाती है, जब यमुना में मृत पशुओं को भी फेंक दिया जाता है।
कई बार तो इसमें नर कंकाल भी निकले हैं। ये रिवर पुलिस की लापरवाही को उजागर करते हैं। इससे श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचती है। इस समय यमुना का पानी आचमन के योग्य भी नहीं है। इसके बाद भी पतित पावनी असहनीय पीड़ा को सहते हुए शांत रूप में कचरे को ढो रही है। तमाम समाज सेवी संगठन भी इसको प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए आगे आये लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस है।
गोकुल बैराज के आगे यमुना शोधन के बाद गाद को आगरा के लिए यमुना में ही छोड़ दिया जाता है। इसके बाद जल संस्थान आगरा द्वारा समस्त पानी सोख लेने के उपरांत यमुना अभी तक के तथाकथित जल से भी मुक्त होकर अपने अस्तित्व को ही समाप्त कर देती है।
प्रदूषित नदियों में शुमार हो चुकी यमुना यमुनोत्री से दिल्ली तक आते-आते गंदे नालों के पानी को समाहित कर प्रदूषित हो जाती है। यमुना कई शहरों में होते हुए पहले बांध ताजेवाला तक पहुंचती है। ताजेवाला से इसकी दो नहरें पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहर निकली हैं। बरसात के दिनों के अलावा यहां यमुना नदी का स्वरूप नजर नहीं आता। राजधानी में दम तोड़ चुकी यमुना अपने बेसिन में फरीदाबाद, बल्लभगढ़, पलवल, कोसी, शेरगढ़, चीरघाट, वृन्दावन के बडे़ नालों को इकट्ठा करके 19 बड़े-बड़े नालों को मथुरा में समाहित करती है। यमुना नदी पूर्वोत्तर की ओर से शाहदरा ड्रेन के बाद खैर टप्पल नौहझील, ईशापुर लक्ष्मी नगर तथा रावल तक की सम्पूर्ण गन्दगी समाहित करती चलती है।
किनारे के शहरों की गंदगी को समेटे यमुना का प्रदूषण मथुरा तक चरम पर पहुंच जाता है।
यहां साड़ी और चांदी उद्योग से साइनाइड और क्रोमियम भी यमुना में ही छोड़ा जा रहा है। छपाई उद्योग में प्रयुक्त केमिकल यमुना को भारी मात्रा में जहरीला बना रहा है तो धातु उद्योग के कारण तेजाबी मात्रा पानी में अत्याधिक बढ़ रही है। बरसात के दिनों में तो पूरे शहर की गंदगी ही यमुना में पहुंच जाती है। भयावह गंदगी व प्रदूषित पानी यमुना में जाने से पतित पावनी की पवित्रता तार-तार हो रही है। हद तो तब पार हो जाती है, जब यमुना में मृत पशुओं को भी फेंक दिया जाता है।
कई बार तो इसमें नर कंकाल भी निकले हैं। ये रिवर पुलिस की लापरवाही को उजागर करते हैं। इससे श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचती है। इस समय यमुना का पानी आचमन के योग्य भी नहीं है। इसके बाद भी पतित पावनी असहनीय पीड़ा को सहते हुए शांत रूप में कचरे को ढो रही है। तमाम समाज सेवी संगठन भी इसको प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए आगे आये लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस है।
गोकुल बैराज के आगे यमुना शोधन के बाद गाद को आगरा के लिए यमुना में ही छोड़ दिया जाता है। इसके बाद जल संस्थान आगरा द्वारा समस्त पानी सोख लेने के उपरांत यमुना अभी तक के तथाकथित जल से भी मुक्त होकर अपने अस्तित्व को ही समाप्त कर देती है।
Tuesday, June 1, 2010
वृन्दावन-महिमामृत १.२५-२७
स्वाप्नैश्वर्योत्फुल्लितैः किं च मुक्तः ।
शून्यालम्बैर्वैष्णवैर्वापि किं नः
श्रीमद्वृन्दाकाननैकान्तभाजाम् ॥
एकान्तभाव से श्रीवृन्दावनाश्रयी हमारा राजाओं से क्या प्रयोजन ? देवताओं से क्या गरज ? और स्वाप्न ऐश्वर्य तुल्य ऐश्वर्य के द्वारा उत्फुल्लित मुक्तगणों से हमारा क्या प्रयोजन ? अन्य शून्यावलम्बी [परव्योम वैकुण्ठादि की प्राप्ति ही जिनका लक्ष है] वैष्णवों से ही हमारा क्या काम ? ॥१.२५॥
द्वित्रैकान्तिप्रेममात्रैकपात्री ।
आनन्दात्मा शेषसत्त्वा निधात्री
श्रीवृन्दाटव्यस्तु मेऽन्धस्य धात्री ॥
अनायास में सवका सुख विधान करने वाली, दो तीन इने-गिने एकान्ती जनों की ही ऐकान्तिक प्रेम-पात्र एवं निखिल जीवों को आनन्दस्वरूप प्रदान करने वाली ऐसी जो श्रीवृन्दाटवी है, वही मुझ जैसे अन्धे की पालन करने वाली धात्री है ॥१.२६॥
संवीत श्रीकनकवसनः शीतकालिन्दीतीरे ।
पश्यन् राधावदनकमलं कोऽपि दिव्यः किशोरः
श्यामः कामप्रकृतिरिह मे प्रेम वृन्दावनेऽस्तु ॥
शीतल श्रीयमुना के तीर पर कदंब वृक्ष के मूल का अवलम्बन लिये हुए सुन्दर पीताम्बरधारी श्यामवर्ण कामप्रकृतिविशिष्ट कोई एक दिव्य किशोर श्रीराधा मुखकमल दर्शन करते करते जहां आनन्दपूर्वक वेणु बजाता है, उसी श्रीवृन्दावन में मेरी प्रीति हो ॥१.२७॥
2010-06-02 ब्रज का समाचार
वृंदावन प्रोजेक्ट: हरिनिकुंज चौराहे तक वन वे ट्रैफिक लागू होगा!
मथुरा (DJ, June 2, 2010। वृंदावन प्रोजेक्ट में शामिल वृंदावन-छटीकरा मार्ग व नाला निर्माण कार्य में तेजी व आये दिन रास्ता जाम की समस्या से बचने के लिये रमणरेती पुलिस चौकी से हरिनिकुंज चौराहे तक वन वे ट्रैफिक करने का निर्णय लिया जा सकता है। कार्यदायी संस्था के अफसर ने अपनी इस मंशा से जिला प्रशासन के अफसरों को अवगत करा दिया है। एसएसपी से भी वन वे ट्रैफिक लागू करने का आग्रह किया गया है।छह किमी लंबे वृंदावन-छटीकरा मार्ग पर सीवर लाइन डलने के कार्य में देरी की वजह से निर्माण कार्य बाधित हो रहा है। पहले अतिक्रमण को भी इस कार्य में रोड़ा बताया जा रहा था, लेकिन करीब एक माह पहले आबादी वाले मार्ग से जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटवा दिया। लेकिन सीवर लाइन व सड़क निर्माण कार्य में अपेक्षाकृत तेजी नहीं आयी। सोमवार को आगरा मंडल के कमिश्नर श्री बोबड़े ने इस बारे में अधिकारियों से पूछताछ की तो कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के साथ ही विकास प्राधिकरण के अफसरों ने सीवर लाइन पड़ने में देरी वजह बतायी। बताया गया कि अक्सर रास्ता जाम हो जाने की समस्या से भी मार्ग निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ पा रही। बताते हैं कमिश्नर ने इस मार्ग पर वन वे ट्रैफिक लागू करने पर सहमति जता दी है। इसके बाद कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता संतराम ने जिला प्रशासन के अफसरों को अपनी मंशा से अवगत कराते हुये एसएसपी बीडी पाल्सन से रमणरेती पुलिस चौकी से हरिनिकुंज चौराहे तक वन वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है। एक्सईएन ने मौके पर कुछ पुलिस फोर्स की तैनाती करने की भी अपेक्षा की है।
गौरा नगर के मकानों में पानी घुसा, दरारें पड़ीं
लोगों ने जल निगम के खिलाफ किया प्रदर्शनलापरवाही : सीवर लाइन डालने के दौरान पानी की पाइप क्षतिग्रस्त
कालोनी में पीने के पानी की किल्लत हुई, लोग परेशान
वृंदावन (AU, June 2, 2010)। जल निगम द्वारा गौरा नगर कालोनी में सीवर लाइन डालने के दौरान बरती जा रही लापरवाही से मकानों को खतरा हो रहा है। क्षेत्र की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इससे जहां क्षेत्र में पानी की किल्लत पैदा हो गई है, वहीं पानी रिसने से कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। लोगों ने जल निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचे पालिका के ईओ ने गेंद जल निगम के पाले में डाल दी है।
गौरा नगर कालोनी स्थित चार संप्रदाय आश्रम के पीछे तार वाली गली में काफी समय से सीवर लाइन डालने का कार्य चल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार की लेबर द्वारा गड्ढा खोदे जाने के दौरान नगर पालिका की पानी की लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। इससे गड्ढे में पानी भर गया और धीरे-धीरे मिट्टी बह गई। मिट्टी बहने के कारण कई मकानों की नींव में पानी भर गया। इससे मकानों में दरारें पड़ गईं। वहीं मकानों में भी पानी भर गया।
इधर, पानी की लाइन क्षतिग्रस्त होने से पिछले कई दिनों से क्षेत्र में पानी की किल्लत भी पैदा हो गई है। स्थानीय निवासी सुधा, हेमलता, कंचन, गीता, रंगनाथ, विष्णु मिश्रा, शंकर, मुकेश शिवराम आदि ने बताया कि पिछले कई दिन से लोग गड्ढे में पानी भरने के कारण घरों में कैद होकर रह गए हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद जल निगम के अधिकारियों ने मौका मुआयना करना भी जरूरी नहीं समझा। मौके पर पहुंचे पालिका के ईओ एसके शर्मा ने कहा कि लाइन जोड़ने की जिम्मेदारी जल निगम की है।
हरियाणा के राज्यपाल ने गोवर्धन में परिक्रमा लगाई
मथुरा (DJ, June 2, 2010)। हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने सपत्नीक गोवर्धन में जाकर गिर्राज महाराज की परिक्रमा लगाई। परिक्रमा पूरी करने के बाद वह दिल्ली रवाना हो गये। श्री पहाड़िया दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे पहले लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस पर आये। यहां करीब आधा घंटे रूकने के बाद वह वाहनों के काफिले के साथ परिक्रमा लगाने गोवर्धन रवाना हो गये। वाहन में बैठे-बैठे उन्होंने परिक्रमा पूरी की। इससे पहले मथुरा में लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में पत्रकारों ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन श्री पहाड़िया ने इंकार कर दिया। एसडीएम सदर राकेश मालपानी पूरे समय उनके साथ बने रहे।
हरियाणा के राज्यपाल ने कार से लगाई गिरिराज परिक्रमा
दानघाटी पर परिवार संग किया दुग्धाभिषेकमथुरा/गोवर्धन (AU, June 2, 2010)। हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने सपरिवार मंगलवार को दानघाटी मंदिर पर दुग्धाभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने कार से गोवर्धन परिक्रमा भी लगाई। कांग्रेसियों ने उनका जगह-जगह स्वागत अभिनंदन किया।
राजस्थान से चंडीगढ़ जाते समय हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया मंगलवार को कुछ देर के लिए पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में रुके। यहां कांग्रेसियों ने मनरेगा समिति के चेयरमैन ताराचंद गोस्वामी के नेतृत्व में उनका फूलमालाओं से स्वागत किया। इसके बाद राज्यपाल अपनी पत्नी शांति पहाड़िया एवं पुत्र के साथ गोवर्धन रवाना हो गए। यहां पहुंचकर उन्होंने परिवार के साथ दानघाटी मंदिर में दुग्धाभिषेक किया।
उन्होंने राधाकुंड होते हुए जतीपुरा की कार से परिक्रमा भी लगाई। परिक्रमा के बाद ब्रजेंद्र खंडेलवाल, अचल खंडेलवाल ने उनका पटुका ओढ़ाकर स्वागत किया। यहां राज्यपाल ने जलपान किया। राज्यपाल को मनरेगा समिति अध्यक्ष ताराचंद गोस्वामी, करन सिंह बघेल, मनीष लंबरदार, अंशु कौशिक, जीआर शर्मा, दिनेश दीक्षित कोटवन बार्डर तक छोड़ने गए।
वृद्धाश्रम के शिलान्यास समारोह की तैयारी शुरू
भूमि पूजन और शिलान्यास तीन कोआयोजन : राजबब्बर, रमाशंकर कठेरिया, जयंत चौधरी के आने की संभावना
वृंदावन (AU, June 2, 2010)। बांके बिहारी सेवक संगठन के तत्वावधान में हरिदास बिहारी वृद्ध आश्रम का तीन जून को होने वाले भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह की तैयारियों पर मंथन के लिए मंगलवार को हरिदास मंदिर प्रांगण में सभा हुई। सभा की अध्यक्षता करते हुए ललित वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बांके बिहारी सेवक संगठन द्वारा जो हरिदास बिहारी वृद्ध आश्रम को बनाने का बीड़ा उठाया है, उसमें किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसमें भजन एवं साधना करने वाले वृद्धों को ही रखा जाएगा। कार्यक्रम संयोजक प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वृद्धा आश्रम का निर्माण मोतीझील स्थित क्षेत्र में पूरा होगा तथा यहां का भक्तिमय वातावरण वृद्ध भक्तों को वृंदावन से जोड़ेगा।
उन्होंने बताया कि वृद्ध आश्रम का शिलान्यास तीन जून को सायं चार बजे सुखदा भक्ति आश्रम के निकट मोतीझील पर होगा। उन्होंने बताया कि शिलान्यास समारोह में संत-महंतों के अलावा फीरोजाबाद के सांसद राज बब्बर, आगरा के सांसद रमाशंकर कठेरिया और मथुरा के सांसद जयंत चौधरी के आने की संभावना है। इस अवसर पर पूर्व सभासद मुकेश गौतम, प्रहलाद दास अग्रवाल, आचार्य नवल बिहारी गोस्वामी, गोविंद शर्मा, बिट्ठल चौहान आदि उपस्थित थे।
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हरिदास बिहारी वृद्ध आश्रम के शिलान्यास समारोह की तैयारी पर चर्चा करते आयोजक।
यमुना कार्ययोजना: नोडल अफसर का निरीक्षण रहा बेमानी
मथुरा (DJ, June 2, 2010। यमुना कार्ययोजना की स्थिति इसलिए भी बदतर है कि अफसरों के निरीक्षण भी दिखावटी ही रह गए हैं। वरना क्या मजाल कि नोडल अधिकारी निरीक्षण करके हिदायतें दें और एक महीने तक उस पर अमल ही न हो।यमुना कार्ययोजना के नोडल अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने ठीक एक माह पहले दोनों एसटीपी समेत नालों, यमुना और सीवेज पंपिंग स्टेशनों का निरीक्षण किया। उन्हें बाढ़ पुरा एसपीएस पर छह में चार पंप ही ठीक मिले थे, जबकि एक बड़ा व एक छोटा पंप खराब था। सिल्ट से नाला इस कदर अटा हुआ था। बंगाली घाट एसपीएस पर चार में से तीन पंप खराब थे। मसानी पंप पर एक बड़ा पंप व जनरेटर खराब था। एसपीएस का चैनल सिल्ट से अटा पड़ा था। इसी तरह दोनों एसटीपी भी गंदे पानी का शोधन नहीं कर रहे थे।
एक माह बाद स्थिति नहीं बदली। प्रदूषण कारी उद्योगों में ईटीपी (Effluent Treatment Plant) संचालन की मानीटरिंग नजर नहीं आ रही। अधिकांश इकाइयां इन्हें चला ही नहीं रहीं, जिससे यमुना में विषाक्त रसायन घुल रहे हैं। दिसंबर 09 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को एक सप्ताह के अंदर ईटीपी व सीटीपी (Chemical Treatment Plant) संचालन संबंधी जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश तत्कालीन नोडल अधिकारी ने जारी किए थे, लेकिन मामले में क्या कार्यवाही की गयी।
कार्ययोजना के आरंभ में तय किए गए कई बिंदुओं पर तो अब तक अमल नहीं हुआ है। चांदी उद्योग के लिए शहर बाहर जगह आवंटित करने की कार्यवाही अभी तक जिला प्रशासन स्तर पर लंबित है। दो साल पहले एक बार फिर से इसकी फाइल चली थी, फाइल तो अवैध कंट्टी घर को स्थान दिलाने की भी चली थी, लेकिन विप्रा उपाध्यक्ष इसमें कोई नतीजा नहीं दे सके।
यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए करेंगे आंदोलन
पांच से आंदोलन की करेंगे शुरुआत : बाबाआक्रोश : सरकारी कार्यशैली पर नाराजगी जताई
वृंदावन (AU, June 2, 2010)। दिनोंदिन बद से बदतर होती यमुना की हालत को लेकर चिंतित स्वामी मोहनानंद लाल बाबा द्वारा यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए पांच जून से आंदोलन की शुरूआत की जाएगी।
लालबाबा द्वारा अब यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए पांच जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे। आंदोलन के माध्यम से वह नगर पालिका एवं एनजीओ संस्थाओं की कार्यशैली से भी जनमानस को अवगत कराएंगे। संत मोहनानंद बाबा ने डीएम को लिखे पत्र में बताया कि उनके द्वारा अपर जिलाधिकारी को ५८ पन्नों में साक्ष्य उपलब्ध कराकर अपने बयान दर्ज करा जांच दल भेजे जाने की मांग की, लेकिन यह जांच प्रक्रिया सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गई है।
उन्होंने बताया कि उनका यमुना को स्वच्छ कराने के लिए पत्राचार तकरीबन छह मास से चल रहा है, पर प्रशासनिक अमले द्वारा यमुना शुद्धि को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
यमुना में बढ़ते प्रदूषण से चिंतित लाल बाबा ने पत्र में कहा कि वह अब यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए पांच जून से २१ जून तक आंदोलन करेंगे। उनके अनुसार यह आंदोलन यमुना के विभिन्न घाटों, श्मशान भूमि, केशीघाट, खपाटिया घेरा के अलावा लखनऊ और दिल्ली में भी चलाया जाएगा। इसके माध्यम से वह यमुना को शुद्ध कराने के लिए प्रयास करेंगे साथ ही नगर पालिका एवं एनजीओ द्वारा यमुना के नाम पर लिए जा रहे लाभ के संबंध में लोगों एवं उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे।
पारे ने फिर भरी उछाल
मथुरा (DJ, June 2, 2010। तापमापी पर पारा एक बार फिर उछाल भरने लगा है। मंगलवार को जिले में औसत तापमान ने दो डिग्री सेल्सियस से अधिक की छलांग लगाई और पारा 44.9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। 45.7 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ शहरी क्षेत्र सबसे अधिक गर्म रहा।पिछले दिनों बूंदाबांदी के बाद पारा नीचे लुढ़क आया था और गर्मी से राहत भी मिली। मौसम के साफ होते ही सूरज भी आग बरसाने लगा है। तापमापी पर पारे ने उछाल भरना शुरू कर दिया है। आईसीटी/सीएफटी के थर्मामीटरों पर मंगलवार को औसत तापमान 42.3 डिग्री सेल्सियस से छलांग लगाकर 44.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। दोहपर में निकली तेज धूप असहनीय रही। शहर में तापमान 44.8 डिग्री से बढ़कर 45.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मांट में 45 डिग्री, फरह में 45.5 डिग्री, नौहझील में 45.6 डिग्री, राया में 44.8 डिग्री, बलदेव में 44.5 डिग्री, छाता में 45 डिग्री, नंदगांव में 44.2 डिग्री, चौमुहां में 44.3 डिग्री और गोवर्धन में 45.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। गर्मी ने एक बार फिर अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। दोपहर में निकलने पर एक बार फिर धूप से शरीर में जलन का अहसास किया जाने लगा है। सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा केएल वर्मा ने बताया कि तापमान बढ़ गया है और उच्च तापक्रम पर धान की नर्सरी डालने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दबाव में सिंचाई विभाग के अफसर
मथुरा (DJ, June 2, 2010। गंगा-यमुना में पानी की कमी ने सिंचाई विभाग के अफसरों के पसीने छुड़ा रखे हैं। शासन का अफसरों पर दबाव है कि टेल तक पानी पहुंचाए और तालाब भरवाएं। मगर नहरों में इतना पानी नहीं आ रहा है कि दोनों काम हो जाए। दरअसल में मेरठ से ही पानी में कटौती की जा रही बताई गई है।धान की नर्सरी को नहीं मिलेगा पर्याप्त पानी
मथुरा (DJ, June 2, 2010। गर्मी की मार से नहर और रजवाहे भी नहीं बच पा रहे हैं। नहरों को भरपूर पानी न मिल पाने से वे रजवाहों की भी प्यास नहीं बुझा पा रही हैं। हालत ये है कि अधिकांश रजवाहे सूखे पड़े हुए हैं। ऐसे में आगरा कैनाल और मांट ब्रांच से किसानों को धान की नर्सरी डालने के लिए जरुरत भर का पानी नहीं मिल पाएगा। हैड भाग के किसान तो जोड़-तोड़ कर काम चला लेंगे, लेकिन टेल हिस्से के खेत प्यासे ही रहेंगे।धान की रोपाई के लिए पौधे तैयार करने को नर्सरी डालने का वक्त आ गया है। लेकिन किसानों को पानी की समस्या सता रही है। मांट ब्रांच ने देहरा हैड पर 2000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन मंगलवार को 750 क्यूसेक पानी ही मिल पाया। निचली मांट ब्रांच खंड गंगा नहर की सीमा बालनपुर तक आते-आते पानी 550 क्यूसेक ही रह गया। बालनपुर पर प्राप्त पानी में से 250 क्यूसेक पानी पड़ोसी जनपद हाथरस की नहरों के संचालन के लिए आवंटित कर दिया गया है। 210 क्यूसेक पानी हरनौल स्केप के माध्यम से यमुना में मथुरा-आगरा की पेयजल आपूर्ति के लिए डाला जा रहा है। शेष करीब 90 क्यूसेक पानी निचली मांट ब्रांच खंड गंगा नहर में चल रहा है। भीषण गर्मी में जल हानि भी अधिक बढ़ गई है। बताया गया है कि निचली मांट ब्रांच खंड गंगा नहर का कोई भी रजवाह फिलहाल नहीं चल पा रहा है। यही स्थिति आगरा कैनाल लोअर खंड तृतीय की है। शेषाई पर 1500 क्यूसेक पानी की मांग की गई थी, लेकिन 700 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो पाया। सहायक अभियंता लोअर खंड तृतीय अमर सिंह ने बताया कुछ पानी अड़ीग सिस्टम दिया जा रहा तो शेष पानी आगरा के किसानों को सिंचाई के लिए दिया जा रहा है। जिले में पड़ने वाले खंड के रजवाह नहीं चल पा रहे हैं।
मनरेगा में जिले का लेबर बजट जटा
मथुरा (DJ, June 2, 2010)। बीते साल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में आवंटित बजट का 69 फीसदी हिस्सा ही व्यय हो पाने का नतीजा चालू वित्तीय वर्ष में जिले का लेबर बजट घटने मंन दिखाई दिया है। इस साल रोजगार परक योजना में मजदूरी मद में 30.62 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। वित्तीय वर्ष के शुरुआती दो महीनों में लक्ष्य से अधिक मानव दिवस सृजित करने के लिए शासन में संयुक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक की पीठ थपथपाई गई है।गुजरे वित्तीय वर्ष भारत सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जिले में कराये गये कामों को लेकर अफसरों की जान सांसत में रही। मजदूरों को जॉब कार्ड न मिलने, उनकी मजदूरी का भुगतान न होने एवं योजना के कामों में जेसीबी के इस्तेमाल आदि की शिकायतों के निस्तारण में अफसर पूरे साल चकरघिन्नी रहे। इन हालात में जिले में आवंटित लेबर बजट के करीब 45.87 करोड़ रुपये में से 28.76 करोड़ ही पूरे साल में व्यय हो पाए। यहां यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि आवंटित लेबर बजट में जिले को 41.54 करोड़ रुपये ही मिल पाए थे।
बीते साल पूरा लेबर बजट न खप पाने के चलते चालू वित्तीय वर्ष के लिए केन्द्र ने इस मद में 30.62 करोड़ रुपये ही आवंटित किये हैं। यह पैसा किस्तों में मिलना शुरू हो गया है, पर योजना के काम मार्च के अंत में शेष रह गये 15.83 करोड़ से जारी रहे। इस साल मई महीने तक मनरेगा में पांच करोड़ 48 लाख रुपये लेबर बजट में व्यय किये जा चुके हैं। इस पैसे से तीन करोड़ 81 लाख मानव दिवस सृजित किये गये हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य तीन करोड़ 29 लाख मानव दिवस का था। अप्रैल व मई महीने में योजनांतर्गत 11 हजार से कुछ अधिक परिवारों को रोजगार दिया गया है।
सेटेलाइट के कैमरे में कैद होने लगी मामूली सी आग
फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने डेवलप किया सेटेलाइट इमेजनरी सिस्टमसहूलियत : हर डीएफओ के मोबाइल पर आ रहे अग्निकांड के एसएमएस
१४ मई से एक जून तक मथुरा में आठ अग्निकांड की सूचना मिली
मथुरा (AU, June 2, 2010)। देश में कहीं भी जरा सी चिंगारी निकली नहीं कि सेटेलाइट तत्काल उसे अपने कैमरे में कैद कर कंप्यूटर के स्क्रीन पर डाल रहा है। सेटेलाइट की मदद से अब फायर ब्रिगेड को आग की सूचना पाने में बड़ी मदद मिलने जा रही है। इससे धन और जनहानि रोकने में सहायता मिलेगी।
यह कमाल कर दिखाया है फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने। उसके देहरादून स्थित मुख्यालय को सेटेलाइट इमेजरी सिस्टम से जोड़ दिया गया है। ये सिस्टम कुछ ही देर में वन्य अफसरों तक आग लगने की सूचना पहुंचाने लगा है। १७ दिन पूर्व शुरू हुए इस सिस्टम से मथुरा जनपद में अब तक दर्जनभर अग्निकांड पता चले चुके हैं। यही नहीं, अन्य जिलों को भी अग्निकांड की सूचनाएं मिलने लगी हैं।
दरअसल, जंगल में आग लगने की जानकारी देरी से मिलने के कारण वन विभाग को जब-तब मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता था। इससे निपटने के लिए वन विभाग ने सेटेलाइट इमेजरी सिस्टम की मदद ली। अब चुटकियों में पता लग रहा है कि आग कहां लगी है। आग लगते ही तत्काल एसएमएस से संबधित जिले के वन विभाग को सूचित किया जा रहा था।
१४ मई से फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के मुख्यालय ने इस सेवा का विस्तार किया। अब सेटेलाइट के जरिए पूरे देश में आग की घटनाओं की मॉनीटरिंग हो रही है। जहां भी गैर वन क्षेत्र में अग्निकांड हो रहे हैं, वहां के वन विभाग के डीएफओ को फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया एसएमएस के जरिए सूचना दे रहा है। एसएमएस में अग्नि प्रभावित क्षेत्र की दिशा और अग्निकांड का टाइप अंकित रहता है। सेटेलाइट एक मीटर वर्गाकार में कहीं भी लगी आग को कैमरे में कैद कर कंप्यूटर पर भेजने में सक्षम है।
मथुरा में सेटेलाइट के जरिए १४ मई से एक जून तक आठ अग्निकांड डिटेक्ट किए जा चुके हैं। ये अग्निकांड १४ से १७, २४ से २६, २८ मई के अलावा एक जून को हुए हैं। प्रभागीय वन निदेशक मथुरा केएल मीना ने एसएमएस से वन और शहरी क्षेत्र के अग्निकांड की पड़ताल में मदद मिली है।
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