Sunday, July 4, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृतम् २.१०-१२


Photo by Abha Shahra.

राधाकृष्णौ परमकुतुकाद्यल्लतापादपानां
चित्वा पुष्पादिकमुरूविधं श्लाघमानौ जुषाते ।
स्नानाद्यं यत् सरसि कुरुतः खेलतो यत् खगाद्यैः
वृन्दारण्यं चरमपरमं तन्न सेवेत को वा ॥

परम कौतुक वशतः श्रीराधा-कृष्ण जहां के वृक्ष लताओं के अनेक विध पुष्पादि चयन कर प्रशंसा पूर्वक उन्हें अपनी सेवा में नियोजित करते हैं, जहां के सरोवरों में वे स्नानादि करते हैं एवं जहां के पक्षियों के साथ वे खेलते हैं, उस सर्व सुन्दर श्रीवृन्दावन का सेवन किसके लिये उचित नहीं है ? ॥२.१०॥



आबाल्यं जलसेचनेन वरणेनाबालनिर्माणतः
स्वेन श्रीकरपल्लवेन मृदुणा श्रीराधिकामाधवौ ।
यान् संवर्ध्य विहाय नव्यकुसुमाद्य् अलोक्य सन्नर्मभिर्
मोदेते सुलतातरून् अहह तान् वृन्दावनीयान् नुमः ॥

शिशुकाल से अपने कोमल कर पल्लवों के द्वारा आवरण तथा आलवाल निर्माण करते हुए समें जल सिञ्चित कर श्री राधा माधव ने जो समस्त सुमनोहर वृक्ष-लतादि अति यत्न पूर्वक वर्धित कर विवाह दिये थे, एवं जिनके नवीन नवीन कुसुमादि देखकर दोनों परिहास वचन बोलते बोलते आनन्द प्राप्त करते हैं, हम श्रीवृन्दावन के उन लता-वृक्षों को नमस्कार करते हैं ॥२.११॥



द्रवन्ति हरिभावतस्तरणतारणेऽति क्षमास्
ततो द्रुमतरुप्रथा व्रततयश्च कृष्णव्रताः ।
स्फुरन्ति हरिणा इह प्रकटकृष्णसारप्रथा
मृगाश्च पदमार्गिणः प्रविलसन्ति वृन्दावने ॥

श्रीवृन्दावन में श्रीहरि के भाव वश द्रवीभूत हो जाने से अन्वर्थ नामधारी द्रुम विराजमान हैं, एवंअपनी तथा दूसरे की रक्षा करने से उनका तरु नाम भी यार्थ ही हुआ है । लता समूह ने कृष्ण व्रत धारण कर व्रतती नाम सार्थक किया है, यहां के हरिणों ने श्रीकृष्ण को ही सारातिसार जाना है, अतः कृष्णसार नाम को प्राप्त हुए हैं, एवं श्रीकृष्ण के चरण चिह्नों का मार्गण कर उन्होंने मृग नाम की भी सार्थकता सम्पादन की है ॥१.१२॥


Saturday, July 3, 2010

2010-07-04 ब्रज का समाचार

वृन्दावन प्रोजेक्ट की उखड़ने लगी नई सड़क व फुटपाथ


वृन्दावन (DJ 2010.07.04)। वृन्दावन समग्र विकास योजना शायद वृन्दावन-छटीकरा मार्ग पर ही चल रही है। क्योंकि शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का दौरा इसी मार्ग पर रहता है। यहीं कारण है कि मथुरा-वृन्दावन मार्ग खस्ता हाल हो चुका है और छटीकरा-वृन्दावन चमक रहा है। आलम यह है कि मथुरा-वृन्दावन मार्ग पर नवीन निर्माण के साथ ही सड़क उखड़ने लगी है और स्थान-स्थान पर गहरे गड्ढे बन गये हैं जो हादसों का सबब बन रहे हैं।

प्रदेश की मुखिया मायावती द्वारा वृन्दावन नगर की महत्ता के दृष्टिगत सम्पूर्ण विकास के लिए लगभग 250 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की गयी है। लेकिन संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली ने पूरी योजना को छटीकरा-वृन्दावन मार्ग पर ही केन्द्रित कर दिया है।

सड़क निर्माण हो या फिर सीवर लाइन या फिर अतिक्रमण हटाने का कार्य, सभी कार्य उक्त मार्ग पर ही चल रहे हैं। क्योंकि प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों का निरीक्षण भी इसी मार्ग पर होता है इसलिए भी अधिकारियों ने अपनी कार्ययोजना का पूरा ध्यान इसी क्षेत्र में केन्द्रित कर दिया है।

इसके विपरीत मथुरा-वृन्दावन मार्ग पर अधिकारियों का जरा भी ध्यान नहीं है। उक्त क्षेत्र में कोई भी निर्माण कार्य हो, ठेकेदारों की मनमानी और गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ का नमूना पल-पल देखने को मिल रहा है। उक्त मार्ग को अभी हाल ही में लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाया गया है, लेकिन सीवर लाइन डालने के दौरान लीक हुई पाइप लाइनों से पानी रिसने के कारण उक्त सड़क जगह-जगह से धंस गई है।

स्थिति यह है कि सड़क के बीचोंबीच गहरे गड्ढे बन गये हैं जो आयेदिन दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। यही हाल फुटपाथों का है। सड़क किनारे बनाये गये फुटपाथ पहली ही बारिश में उखड़ गये हैं।



पौधारोपण के साथ रोटरी क्लब का नवीन सत्र शुरू


वृन्दावन (DJ 2010.07.04)| वृन्दावन में सामाजिक सेवा संगठन रोटरी क्लब आफ वृन्दावन के नये सत्र का शुभारम्भ वृक्षारोपण के साथ हुआ। संस्थान के तत्वावधान में परिक्रमा मार्ग स्थित बिंदु सेवा संस्थान प्रांगण में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाये गये।

इस अवसर पर स्वामी बालकदास महाराज ने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिग के दौर से गुजर रहा है। वृक्ष पृथ्वी के लिए अमूल्य उपहार हैं। पर्यावरण मित्र देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि वृक्ष हमारे फेफडे़ हैं। मानव को सांस लेने के लिए प्राणवायु की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति वृक्ष ही करते हैं। क्लब के अध्यक्ष अनूप शर्मा ने कहा कि मानव एवं वृक्ष एक-दूसरे के पूरक हैं। कैलाश खण्डेलवाल ने कहा कि प्रकृति में असंतुलन वृक्षों की कमी के कारण ही है।



विप्रा ने वृंदावन में जमीन तलाशी


कांशीराम योजना में ९२५ आवास बनेंगे
कोसी, छाता में पहले ही चिह्नित हुई भूमि


मथुरा (AU 2010.07.04)। कांशीराम गरीब आवास योजना के तहत कोसी और छाता के बाद वृंदावन में भी भूमि मिल गई है। प्रशासन ने विप्रा को योजना के तहत बनने वाले मकानों के लिए नौ एकड़ भूमि चयनित कर दे दी है। भूमि मिलने के बाद विकास प्राधिकरण ने मकान निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है।
शासन ने कांशीराम गरीब आवास योजना के अंतर्गत जिले में दूसरे चरण में १५०० नए आवास बनाने का आदेश दिया है। इसके लिए पूर्व में कोसीकलां, गोवर्धन और वृंदावन का चयन किया गया, लेकिन बाद में गोवर्धन को हटाकर छाता में आवास बनाने का निर्णय लिया गया।

इसके लिए कोसी और छाता में बनने वाले क्रमशः ३०० और २७५ आवासों के लिए तीन-तीन एकड़ भूमि पहले ही चिह्नित कर ली गई थी, लेकिन वृंदावन में भूमि को लेकर संशय बरकरार था।

वृंदावन में नवनिर्मित महिला अस्पताल के बराबर में जमीन मिली। यहां नौ एकड़ भूमि पर पहले चरण में ९२५ गरीब आवास बनाए जाएंगे। भूमि मिलने से विप्रा अफसर खासी राहत महसूस कर रहे हैं। इस पर निर्माण शीघ्र शुरू होने की संभावना है। विप्रा उपाध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि वृंदावन में जल्द मकान निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।



कुंभ क्षेत्र को राज्य सरकार अतिक्रमण मुक्त कराए


हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर रखा पक्ष
ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष ने दायर की थी याचिका


वृंदावन (AU 2010.07.04)। वृंदावन में हर बारह वर्ष में लगने वाले कुंभ मेला की भूमि को धार्मिक आयोजन एवं मेला क्षेत्र घोषित करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी एवं चौदह अन्य लोगों ने एक जनहित याचिका दायर की गई। इस पर अदालत ने अपना पक्ष रखते हुए कुंभ मेला स्थल को राज्य सरकार में निहित माना है। इस भूमि के संरक्षण और प्रयोग संबंधी अधिकार भी राज्य सरकार को है।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का यह भी दायित्व है कि वह कुंभ मेला क्षेत्र से किसी भी प्रकार के अतिक्रमण हटाने के लिए समुचित कदम उठाए। जनहित याचिका पर अदालत द्वारा रखे गए पक्ष की याचिकाकर्ता आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने सराहना की।

उन्होंने कहा कि अब यह राज्य सरकार पर है कि वह इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर धार्मिक जनभावनाओं का सम्मान करे। महंत फूलडोल बिहारी दास और महेशानंद सरस्वती ने अदालत के रुख से सहमति जताते हुए कहा कि ब्रज भूमि धार्मिक भूमि है। यहां वर्ष भर धार्मिक आयोजन चलते रहते हैं। इनके लाभार्थ इस भूमि का प्रयोग किया जा सकता है।

इस अवसर पर चतुः संप्रदाय के अध्यक्ष महंत सच्चिदानंद महाराज, केजी गुप्ता, पं. बिहारीलाल वशिष्ठ, बालकृष्ण गौतम, महंत ब्रज बिहारी दास, महंत लाड़ली शरण दास, राजेंद्र बजाज, बालो पंडित और युगल किशोर कटारे आदि ने अदालत के पक्ष को धार्मिक हित में बताया है।

फोटो-पी-४ : वृंदावन कुंभ मेला स्थल पर हाई कोर्ट के पक्ष की सराहाना करते संत और गणमान्य लोग।



महिला कुंड की होगी चारदीवारी


मथुरा (DJ 2010.07.04)। उपजिलाधिकारी छाता राजपाल सिंह व तहसीलदार कुलदेव सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि कुंड की स्थिति कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने इसकी चारों ओर से दीवार कराने की बात कही है। उन्होने बताया कि इसमें केवल प्रवेश एवं निकास के लिए द्वार रहेगा। मंदिर के महंत प्रेमदास महाराज ने कुंड के दीवारों के कार्य को अगले दो दिनों में शुरू कराने की बात कही है।



शनिधाम में गुंडों का उठपात, पुलिस चौकी फूंकी


कोसीकलां (DJ 2010.07.04)। कोसीकलां के पास शनिदेव धाम कोकिलावन में शनिवार का दिन "काला शनिवार" साबित हुआ। आधी रात को श्रद्धालुओं के रूप में आए उपद्रवी युवकों ने कुंड में स्नान करती महिलाओं को उठाने का प्रयास किया।

महिलाओं के चीख पुकार सुनकर बचाव को आयी पुलिस को भी इन युवकों ने दौड़ा दिया। पुलिसकर्मियों ने बमुश्किल चौकी में बंद होकर जान बचाई। पुलिसकर्मियों के अंदर बंद होने के बाद उपद्रवियों ने चौकी में आग लगा दी। तीन बाइकें और चौकी का सारा सामान राख हो गया। पुलिस ने बचाव में हवा में गोलियां चलाईं। बाद में पुलिस ने मौके से पांच उपद्रवियों को दबोच लिया है।

कोसी से करीब आठ किलो मीटर दूर स्थित शनिदेव धाम कोकिलावन में शनिवार को शनि मेला लगता है। यहां पर शुक्रवार से ही दूरदराज से हजारों श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। रात 12 बजे से शुरू हुए मेले में महिला- पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई थी।

शुक्रवार-शनिवार की रात करीब 1.30 बजे श्रद्धालु सूरज कुंड में स्नान कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ उपद्रवी सुरज कुंड के महिला कुंड में कूद गए। इन लोगों ने स्नान करती महिला श्रद्धालुओं को जबरन उठाकर ले जाने का प्रयास किया।

उपद्रवियों की हरकत देख महिला श्रद्धालुओं में चीख-पुकार मच गई। कुंड पर ड्यूटी पर तैनात दो होमगार्डो ने उपद्रवियों को रोकने का प्रयास किया। लेकिन उपद्रवियों ने उनकी पिटाई कर दी और उनको कुंड में घसीट कर ले गए। उपद्रवियों से जान बचाने को कुछ महिला श्रद्धालु पुलिस चौकी जा पहुंचीं।

चौकी पर मौजूद उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह अपने साथी पुलिसकर्मी को लेकर सूरज कुंड पर पहुंच गए। उन्होंने उपद्रवी लड़कों में से एक को पकड़ लिया। उस लड़के को लेकर वह जब पुलिस चौकी पहुंचे तो पकड़े गये लड़के के साथियों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इन लोगों ने जमकर पत्थर बरसाये।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। अचानक हुए हमले में कांस्टेबल ब्रजेश कुमार व होमगार्ड रमजान घायल हो गए। उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों के मोबाइल छीन लिये। इन लोगों ने पुलिस से असलाह भी छीनने के प्रयास किए।

लड़कों की भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने चौकी के कमरे में खुद को बंद कर अपनी जान बचाई। बौखलाए उपद्रवी इसके बाद भी नहीं माने। उपद्रवियों ने चौकी हवालात से पकड़े गये साथी को छुड़ा लिया और चौकी में खड़ी सरकारी बाइक व दो अन्य बाइकों में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। उन्होंने चौकी के कुर्सी मेज, तख्त सहित सारे सामान को आग के हवाले कर दिया। करीब एक घंटे उपद्रवियों का तांडव होता रहा।

इस घटना के बाद श्रद्धालुओं में भी भगदड़ मच गई। इस बीच मंदिर प्रबंधतंत्र से जुड़े लोगों ने कोसी थाने को सूचना दी। इस पर सीओ छाता बाबूलाल आर्य, थाना प्रभारी एके सिंह, बरसाना पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने हवाई फायरिंग कर उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू कर दिया।

सीओ बाबूलाल आर्य ने बताया कि पुलिस ने पांच उपद्रवियों अनुज पुत्र हरेंद्र चौहान निवासी चंडौस अलीगढ़, रोहित पुत्र हंसराज दरियापुर मंडौरा पलवल, सोनू पुत्र भगवान सिंह निवासी भिडूकी पलवल, प्रेमचंद पुत्र सूबेदार व किशन पुत्र देवीराम निवासी नगला चांद हट को पकड़ा है। इनके साथी भागने में सफल हो गए। एसडीएम छाता राजपाल सिंह व तहसीलदार कुलदेव सिंह ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। चौकी प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने पकड़े गए आरोपी व उनके अन्य साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।


श्रीवृन्दावन-महिमामृतम् २.७-९


Photo by Abha Shahra.

स्वपरसकलवस्तुन्यत्र सूर्येन्दुकोटि-
च्छविविमललसच्चिद्विग्रहे सद्गुणौघे ।
बहिरगतदृगन्तुर्धैर्यमालम्ब्य नित्य-
स्मृतिरधिवस वृन्दारण्यमन्यानपेक्षः ॥

यहां की अपनी व परायी सब वस्तुएं ही कोटि कोटि सूर्य चन्द्र की कांति युक्त हैं, निर्मल चिन्मय मूर्ति एवंउत्तम गुण समूह से पूर्ण हैं । यह नित्य स्मरण रखते हुए बाह्य विषय की ओर दृष्टिपात न कर धैर्य पूर्वक निरपेक्ष होकर श्रीवृन्दावन में वास कर ॥२.७॥



श्रीराधापादपद्मच्छविमधुरतरप्रेमचिज्ज्योतिरेका-
म्बोधेरुद्भूत फेनस्तवकमयतनूः सर्ववैदग्ध्यपूर्णाः ।
कैशोरव्यञ्जितास्तद्घनरुगपघनश्रीचमत्कारभाजो
दिव्यालङ्कारवस्त्रा अनुसरत सखे राधिकाकिङ्करीस्ताः ॥

घोर संसार के कारण इसी कुत्सित् शरीर में वृथा अध्यास, अर्थात् अहंता-ममता, त्याग कर, अपना शरीर एवं श्रीवृन्दावनका समस्त ही चिद्घन जानकर धारणा कर, यहां कोटि कोटि घोरतर विपत्तियों के आने पर भी तुम विकार ग्रस मत होना, जब तक प्रारब्ध नाश नहीं होती इस श्रीवृन्दावन में ही वास कर एवं नित्य श्रीयुगलकिशोर की लीला का चिन्तन कर ॥२.८॥



दिव्यस्वर्णसुनीलरत्नसुभगं लीलासनालारुणा-
म्भोजश्रीमुरलीधरं पृथुलसद्वेणीसुभर्होज्ज्वलम् ।
संवीतोज्ज्वलशोणपीतवसनं कन्दर्पलीलामयं
श्रीवृन्दावनकुञ्ज एव किमपि ज्योतिर्द्वयं सेव्यताम् ॥

कन्दर्प लीलामय किसी एक अनिर्वचनीय ज्योतिर्मय जोड़ी की श्रीवृन्दावन के कुञ्जों में ही सेवा कर, उनमें में एक दिव्य स्वर्ण वर्ण है, अपर सुन्दर इन्द्रनील मणि वर्ण विशिष्ट है, एक के हाथ में नीलिमा युक्त रक्त वर्ण विशिष्ट लीला पद्म एवं दूसरे के हाथों में मोहन मुरली है, एक के सिर पर विशाल वेणी एवं दूसरे के सिर पर मोर पुच्छ सुशोभित है, परिधान में एक ने उज्ज्वल रक्त वर्ण वसन एवंअपर ने सुन्दर पीताम्बर धारण कर रखा है ॥२.९॥


Friday, July 2, 2010

2010-07-03 ब्रज का समाचार

हेरिटेज स्थलों पर लगाए जाएंगे बोर्ड


विप्रा ने प्रोजेक्ट शासन के पास भेजा
५० स्थलों को कर लिया गया है चयनित
बोर्डों पर लिखा जाएगी पुरातात्विक इतिहास


मथुरा (AU 2010.07.03)। ब्रज की सभी हेरिटेज स्थल अब अपना इतिहास खुद बताएंगे। चौंकिए मत, पर्यटन विभाग ने जिले के ५० हेरिटेज स्थलों पर उनके इतिहास को उकेरते हुए शाइनिंग बोर्ड लगवाने की योजना तैयार की है।

यही नहीं, वृंदावन में भी बेतरतीब खड़े होने वाले वाहनों के लिए बड़ी पार्किंग बनाई जाएगी। इन दोनों का दो करोड़ रुपये का एस्टीमेट विप्रा ने तैयार कर शासन को भेज दिया है।

कामनवेल्थ गेम्स को देखते हुए पर्यटन विभाग ने ब्रज में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां के हेरिटेज स्थलों पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए विशेष योजना तैयार की है। इसके लिए विभाग ने ब्रज के ५० हेरिटेज स्थल चयनित किए हैं।

इन सभी स्थलों पर शाइनिंग बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों पर उक्त स्थल का इतिहास दर्ज होगा। रात में भी ये बोर्ड नजर आएंगे। यही नहीं, वृंदावन में पार्किंग की समस्या को देखते हुए यहां एक वृहद पार्किंग बनाने की योजना तैयार की है। विभाग ने विकास प्राधिकरण (विप्रा) को प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। विप्रा ने इन दोनों कामों को देखते हुए दो करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है।

इसमें ५० लाख रुपये से शाइनिंग बोर्ड तैयार करवाए जाएंगे, जबकि डेढ़ करोड़ से पार्किंग तैयार होगी। इस एस्टीमेट को स्वीकृति के लिए शासन के पास भेज दिया है।

विप्रा उपाध्यक्ष आरके सिंह ने बताया कि एस्टीमेट तैयार करा लिया गया है। शासन से हेरिटेज स्थलों के अलावा पार्किंग के लिए कुल दो करोड़ की डिमांड भेजी जा रही है।



लेटलतीफी पर कमिश्नर खफा


मथुरा (DJ 2010.07.03)। आगरा कमिश्नर सुधीर महादेव बोवड़े ने मथुरा और छाता ब्लाक के तीन अम्बेडकर गांवों तथा वृंदावन प्रोजेक्ट में शामिल विकास कार्यो की प्रगति मौके पर जानीं। कार्यो को पूरा करने में लेटलतीफी पर उन्होंने साथ चल रहे संबंधित अफसरों को हड़काया। कमिश्नर ने राल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जानीं।

कमिश्नर श्री बोवड़े एडीएम कानून-व्यवस्था और प्रभारी सीडीओ अवधेश तिवारी के साथ प्रात: करीब नौ बजे मथुरा ब्लाक के राल गांव पहुंचे और यहां निर्माणाधीन ड्रेन के कार्य का निरीक्षण किया। गांव में बन रही नाली का लेविल सही न मिलने और ड्रेन के निर्माण कार्य में देरी पर उन्होंने अफसरों को आड़े हाथ लिया।

बाजना में भी करीब-करीब यही हाल रहा। राल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण में कमिश्नर ने यहां उपस्थिति पंजिका के निरीक्षण के साथ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव सिंघल से व्यवस्थाओं को जाना। डॉ. सिंघल ने एक्सरे टेक्नीशियन न होने तथा सर्जन के न होने से आपरेशन थियेटर बंद रहने की जानकारी दी।

कमिश्नर ने वृंदावन परिक्रमा मार्ग में बन रही सड़क और नाले के निर्माण कार्य को भी देखा। कार्य की धीमी गति पर उन्होंने संबंधित अफसरों से नाराजगी जताई। यहां उनके साथ एसडीएम सदर राकेश मालपानी भी थे। यहां से कमिश्नर छाता ब्लाक के नगला मेव गये।



म्यूजियम में लगाई चतुर्मखी शिवलिंग प्रतिमा


सीबीआई ने तस्करों से बरामद की थी मूर्ति
वर्ष २००९ से रखी हुई थी संग्रहालय में
पर्यटक ले रहे हैं प्रतिमा के बारे में जानकारी


मथुरा (AU 2010.07.03)। भरतपुर की कामां तहसील से सीबीआई द्वारा वर्ष २००९ में बरामद प्राचीन चतुर्मुखी शिवलिंग की प्रतिमा इन दिनों राजकीय संग्रहालय (म्यूजियम) में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय लोगों में भी प्रतिमा को लेकर उत्साह है।

वर्ष २००९ में जून माह में भरतपुर की कामां तहसील से तस्कर द्वारा छिपाई गई प्रतिमा का सौदा करने से पूर्व दिल्ली से आई सीबीआई अधिकारियों की टीम ने इसे कब्जे में ले लिया था। मूर्ति डीलर बनकर सीबीआई टीम तस्कर से मिली थी। आरोपी ने प्रतिमा को गोबर में दबा रखा था। मूर्ति तस्कर से १.५० लाख रुपये के सौदे का लालच दे प्रतिमा को चार्ज में लिया गया था।

यह प्रकरण स्थानीय लोगों के लिए चर्चा का विषय रहा था। बाद में प्रतिमा यहां राजकीय संग्रहालय के सुपुर्द कर दी गई। संग्रहालय में स्थापित नवीन वीथिकाओं में अब जाकर इस मूर्ति को लगाया गया। संग्रहालय के सहायक निदेशक और गैलरी इंचार्ज डा. शत्रुघ्न शर्मा बताते हैं कि स्थानीय आगंतुकों के साथ-साथ पर्यटक भी इस प्रतिमा को लेकर उत्साहित हैं। इसकी जानकारी एकत्रित कर रहे हैं।

बेहद रेयर है प्रतिमा

प्रतिमा के प्रति इतिहास के जानकारों का अलग ही क्रेज है। संग्रहालय में चतुर्मुखी शिवलिंग की यह पहली प्रतिमा है, जो बेहद रेयर है। इसकी प्रमुखता लाल पत्थर में शिवलिंग का होना। शिव की प्रतिमा की जटा के चारों ओर नरमुंड माला का होना, चारों देवताओं के बीच शिवलिंग का होना और सभी देवताओं के वाहन एक साथ किसी प्रतिमा में दिखाए जाना है।



किसान ने बदला जल स्रोत


मथुरा (DJ 2010.07.03)। रेत में भले ही नाव नहीं चलाई जा सकती हो, लेकिन एक प्रगतिशील किसान ने ऐसे ही असंभव कार्य को संभव करके दिखा दिया। आवश्यकता आविष्कार की जननी के तर्ज पर प्रगतिशील किसान ने ऐसी तकनीकी ईजाद की कि खारी पानी का जल स्रोत बदल गया और नलकूप का जल स्तर पांच साल में भी नीचे नहीं खिसका। जिस नलकूप के पानी से कभी कोई फसल नहीं होती थीं, आज उसीका पानी पीकर फसलें लहलहा रही हैं।

जनपद के ब्लॉक मथुरा की ग्राम पंचायत वाटी के प्रगतिशील किसान मोती सिंह कुशवाह ने खारी पानी के जल स्रोत को बदलने के लिए लगातार सोलह साल तक कड़ी मेहनत कर एक प्रोजेक्ट तैयार किया था।

इस प्रोजेक्ट को पास कराने के लिए किसान ने मंत्रियों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक के दरवाजों पर दस्तक दी। प्रशासनिक और कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट के नक्शे को देखा और मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया।

सभी ने पहली ही नजर में मान लिया था कि प्रोजेक्ट कामयाब हुआ तो वाटर रिचार्ज तो होगा ही साथ ही नलकूप का जल स्तर भी स्थिर बना रहेगा। करीब पांच साल पहले शासन ने इसकी स्वीकृति दे दी।

लघु सिंचाई विभाग से किसान को 85 हजार रुपये का अनुदान मिला। कांग्रेस विधायक प्रदीप माथुर ने एक लाख रुपये पाइप लाइन बिछाने के लिए अपनी निधि से दिए। शेष खर्चा किसान ने स्वयं वहन किया। इस पर करीब आठ लाख रुपये का खर्चा हुआ। तब जाकर किसान को कामयाबी मिली।

प्रगतिशील किसान मोती सिंह ने बताया कि राल नाले के किनारे तीन वाई पांच मीटर चौड़ा और पांच मीटर गहरा पक्का टैंक बनाया गया। इसको पाइप लाइन डालकर नाले से जोड़ दिया गया। दूसरा टैंक बालू और गिट्टी डालकर बनाया गया। इससे पहले टैंक का पानी दूसरे टैंक मे छनकर पहुंच रहा है।

टैंक के पास ही एक छह इंच का बोरिंग की गई और इसका व्यास 18 इंच रखा गया। इसमें गिट्टी भर दी गई हैं। इसको पाइप लाइन से जोड़ दिया गया है। जोड़ पर एक चूड़ीदार वाल्व लगाया गया है, जो तली से तीन फीट ऊंचा है।

बारिश का पानी सीधे बोरिंग में डालकर रीचार्ज किया जा रहा है। वाटर लेवल तक खुदाई करके एक बोरिंग के पास पंखा लगाकर इसके नलकूप से जोड़ दिया गया है।

श्री कुशवाह ने का दावा है कि लगातार वाटर रिचार्ज होने से पानी का स्रोत बदल गया है। पहले नलकूप का खारी पानी था, लेकिन अब मीठा हो गया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल से नलकूप का पानी नीचे नहीं खिसका है। इसी पानी से सिंचाई करके सभी फसलें उगाई जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि आसपास के अन्य नलकूपों का पानी नीचे खिसक गया है। पिछले पांच साल से उनके नलकूप का पानी चालीस फीट पर ही स्थिर बना हुआ है। जबकि बांगर में पानी साठ से अस्सी फीट तक नीचे पहुंच चुका है।



मनरेगा के पैसे से होगी किसानों की नि:शुल्क बोरिंग


मथुरा (DJ 2010.07.03) । चालू वित्तीय वर्ष में जनपद में किसानों की नि:शुल्क बोरिंग भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के पैसे से की जाएंगी।

इसके लिए लघु सिंचाई विभाग में धन उपलब्ध है, पर विकास खण्डों से जिला मुख्यालय पर लाभार्थियों की सूची अपेक्षानुरूप नहीं मिल पा रहीं। इसके अभाव में नौ विकास खण्डों में अभी तक सिर्फ 86 चयनित लाभार्थियों की आईडी ही भेजी जा सकी है। नि:शुल्क बोरिंग के लाभार्थी किसानों की अनुदान राशि में वृद्धि भी की गई है।

इस साल जिले में 523 किसानों की नि:शुल्क बोरिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें 162 लाभार्थी सामान्य जाति के होंगे, शेष सभी लाभार्थी अनुसूचित जाति/जनजाति के चयनित किये जाएंगे।

वित्तीय वर्ष के तीन महीने व्यतीत हो चुके हैं, पर फरह को छोड़कर अन्य विकास खण्डों से चयनित लाभार्थियों की सूची लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय में अत्यंत धीमी गति से मुहैया कराई जा रही हैं। अभी तक जिला मुख्यालय से सिर्फ 86 चयनित लाभार्थियों की आईडी ही नौ विकास खण्डों में भेजी जा सकी हैं। डार्क जोन होने के चलते नौहझील ब्लॉक में नि:शुल्क बोरिंग पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

खास बात यह है कि इस साल किसानों की नि:शुल्क बोरिंग महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के पैसे से कराई जाएंगी। इसके लिए जिला ग्राम्य विकास अभिकरण से लघु सिंचाई विभाग को अग्रिम तौर पर धनराशि उपलब्ध करा दी गई है।

शर्त इतनी है कि नि:शुल्क बोरिंग में मनरेगा के सामग्री और मजदूरी के अनुपात को मेंटेन किया जाए। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता महेन्द्र सिंह ने बताया कि नि:शुल्क बोरिंग में सामग्री का खर्चा बढ़ने की सूरत में इसकी विभागीय धनराशि से डबटेलिंग की जाएगी।

उन्होंने इस साल नि:शुल्क बोरिंग में अनुसूचित जाति/जनजाति एवं सामान्य जाति के किसानों को दिये जाने वाले अनुदान में वृद्धि की जानकारी भी दी। अनुसूचित जाति के किसानों को इस साल नि:शुल्क बोरिंग के लिए चार हजार रुपये अधिक मिलेंगे, सामान्य किसानों के लिए इसमें तीन हजार रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है।



शहर में 28 हजार परिवार गरीब


मथुरा (DJ 2010.07.03)। महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना सर्वे में 28 हजार परिवार ढूंढे जा सके हैं। तीन दिन का सर्वे ग्यारह दिन में निबट सका है, जिसमें आंकड़ों के लिए प्रगणक मकान गणना के सर्वे पर ज्यादा निर्भर रहे। ढूंढे गए परिवारों में भी पात्रता कंप्यूटर तय करेगा।

मथुरा नगर पालिका क्षेत्र में महामाया गरीब आर्थिक मदद सर्वे का पैक अप गुरुवार को हो सका। यह सर्वे प्रगणकों को तीन दिन के अंदर करना था, लेकिन पहले से चल रही मकान गणना के बीच में दो-दो सर्वे हो जाने से प्रगणकों के लिए काफी दिक्कतें पैदा हो गयीं।
इसका तोड़ भी उन्होंने निकाल लिया।

फील्ड में दोनों सर्वे साथ-साथ तो चले, मगर उन्हीं प्रगणकों ने इस सर्वे में फ्रेश आंकड़े एकत्र किए, जो बाद में जुड़े थे। ज्यादातर प्रगणकों ने मकान गणना के आंकड़ों का इसमें इस्तेमाल किया बताते हैं।

यह सर्वे वैसे तो दलित, पिछड़ी और गरीब बस्तियों में ज्यादा चला है, लेकिन सामान्य इलाकों के गरीब परिवारों की गिनती में काफी संख्या छूट भी गयी है। नगर पालिका प्रशासन ने जो आंकड़े जिला प्रशासन को भेजे हैं, उसके अनुसार 28 हजार दो सौ से ज्यादा परिवार गिने गए हैं।

इन परिवारों को उनकी माली हालत के आधार पर गरीब श्रेणी का पाया गया है। जानकारों का कहना है कि आमतौर पर सभी सामान्य बस्तियों में सर्वे का कार्य पूरा नहीं किया गया है, जिससे सैकड़ों में शामिल होने से कुछ परिवार वंचित रह गए हैं।

सर्वे में 19 प्वाइंट शामिल किए गए थे, जिसमें अनुसूचित जाति-जनजाति, विमुक्ति जाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के गरीब भी शामिल गए हैं। परिवार के मुखिया के व्यवसाय या वेतन भोगी के अलावा निराश्रित परिवार भी लिए गए हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां उनकी भूमि उपलब्धता के बारे में पूछा गया है, वहीं नगर में घर की स्थिति, श्रमिक स्थिति, जीविका का साधन और कोई रोग है, तो उसकी स्थिति भी जानी गयी है।

प्रदेश सरकार महामाया के नाम से गरीबों को आर्थिक मदद मुहैया कराने के लिए यह सर्वे करा रही है। बताया गया है कि एक ओर जहां सर्वे में काफी ऐसे परिवार जुड़ने से वंचित रह गए हैं, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध आंकड़ों में भी प्रत्येक परिवार की पात्रता से चयन अंतिम रूप से बाद में होगा। इसके लिए कंप्यूटर का सहारा लिया जाएगा।



महामाया आवास: खातों में पहुंची 124 लाभार्थियों की पहली किस्त


मथुरा (DJ 2010.07.03) । महामाया आवास योजना के तहत जनपद में 124 गरीब निराश्रित परिवारों को उनकी अपनी छत के लिए पहली किस्त बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी गई है। योजना में लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए 45 हजार रुपये दिये जाएंगे।

चालू वित्तीय वर्ष में न सिर्फ महामाया आवास योजना की धनराशि में वृद्धि की गई है बल्कि इसके दिशा निर्देशक सिद्धांतों में भी मूलभूत बदलाव कर दिया गया है। अब योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी का नाम वर्ष 2002 की बीपीएल सर्वे सूची में होना भी आवश्यक नहीं है।

नये कलेवर की महामाया आवास योजना में इस साल जनपद में 186 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इस लक्ष्य के अनुरूप यहां ग्राम्य विकास विभाग में शासन से 83.70 लाख
रुपये का बजट भी मिल चुका है।

आवासीय योजना में चयनित उपरोक्त लाभार्थियों में से 124 लाभार्थियों की पहली किस्त के 33,750 रुपये उनके बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिये गये हैं। आवास निर्माण लाभार्थी स्वयं करायेंगे। आवास निर्माण के छत पटाव स्तर तक पहुंचने पर लाभार्थियों को योजना की दूसरी किस्त दी जाएगी।


2010-07-02 ब्रज का समाचार

66.58 करोड़ की योजना से सुधरेंगे हालात!


मथुरा (DJ 2010.07.02)। जरूरत सिर्फ प्रशासन की इच्छा शक्ति की है। शासन की भू-गर्भ जल संरक्षण की मंशा पूरी करने के लिए जनपद में वाटर रिचार्जिग की पंच वर्षीय कार्य-योजना तैयार कर ली गई है। करीब 66.58 करोड़ रुपये की यह कार्य-योजना क्रिटिकल ब्लॉक नौहझील समेत सेमी क्रिटिकल ब्लॉकों मथुरा, छाता, मांट, राया एवं बलदेव में लागू की जाएगी।

इसमें सर्वाधिक 18.81 करोड़ रुपये नौहझील ब्लॉक में खर्च किये जाएंगे तो छाता में करीब 18 करोड़, बलदेव 9.36 करोड़, राया 8.82 करोड़, मथुरा 6.81 करोड़ एवं मांट ब्लॉक में 4.75 करोड़ रुपये व्यय किये जाना प्रस्तावित है।

कार्य-योजना में तालाब-पोखरों के जीर्णोद्धार के साथ-साथ मेंड़बंदी एवं पिट्स बनाया जाना शुमार किया गया है। ये काम ब्लॉकों के साथ ही लघु सिंचाई एवं भूमि संरक्षण विभाग करेंगे। कार्य-योजना में फिलहाल चेक डेम को शामिल नहीं किया बताया गया है।



मुडिया पूर्णिमा मेले के दबाव से अफसर ठंडे


मथुरा (DJ 2010.07.02)। योगेश्वर की लीलाओं का साक्षी रहे गिरिराज धाम में मुडिया पूर्णिमा पर लगने वाले विश्व प्रसिद्ध मेले का दबाव प्रशासन के सिर चढ़कर बोलने लगा है।

मेले की व्यवस्थाओं के लिये जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ रोडवेज एवं परिवहन महकमे में भीड़ का प्रभाव अभी से दिखाई देने लगा है। एक अफसर की कुर्सी खाली हो गई है तो दूसरे ने सामान की आपूर्ति शुरु कर असर का संकेत दे दिया है। नये माहौल ने यात्रियों के साथ दलालों की खुशी बढ़ा दी है।

धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और इसी माह की 25 तारीख को गोवर्धन में लगने वाले इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। जन संख्या का अनुपात भले कम रहे मगर मेले में प्रति वर्ष भक्तों की तादात बढ़ जाती है।

अपने वाहनों से आये या फिर भाडे़ से दोनों तरह के धर्मावलंवियों की सेवा का प्रमुख दायित्व रोडवेज एवं परिवहन महकमे का रहता है। इन दोनों पर ही मेला और लाखों की भीड़ का असर प्रत्यक्ष होने लगा है।

एक तरह जहां सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन राजेश कुमार वर्मा एक माह के लिये अवकाश पर चले गये हैं तो वहीं रोडवेज के क्षेत्रीय अफसरों ने मथुरा डिपो को जरूरी सामान की आपूर्ति करना शुरु कर दिया है। रोडवेज के मथुरा डिपो तथा यात्रियों को इससे लाभ हुआ है वहीं एआरटीओ के घर जाते ही दलालों का दफ्तर में दखल बढ़ गया है।

रोडवेज मथुरा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि 16 बैटरी मिल गई हैं। इनसे 10-12 बसें शेल्फ स्टार्ट हो जाएंगी। टायरों की कमी नहीं रह गई है। अन्य जरूरी यांत्रिक सामान भी मिल गया है। श्री कुमार ने बताया कि इनके अलावा अभी 10 और बसें धक्का स्टार्ट हैं। उनका कहना है कि मेले से पूर्व ये बसें भी शेल्फ स्टार्ट हो जाएंगी। और बैटरी देने का भरोसा क्षेत्रीय अधिकारियों ने दिया है।



पेट्रो मूल्य वृद्धि पर भाजपाइयों ने किया पुतला दहन


मथुरा (DJ 2010.07.02)। केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर नगर भाजपा ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान करते हुए शहर में दो जगह पुतला दहन किया।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने जयसिंह पुरा एवं चौक बाजार में विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री का पुतला दहन किया। इन मौकों पर नगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता और महामंत्री हरीश शर्मा ने कहा कि मूल्य वृद्धि करते केंद्र सरकार आम जनता की कमर तोड़ दी है। महंगाई के कारण गरीब लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जो देश और समाज के लिए घातक स्थिति है। इसके लिए कांग्रेस जिम्मेवार है।

नगर उपाध्यक्ष योगेश आवा एवं मंत्री रामकिशन पाठक ने कहा कि महंगाई के लिए यूपीए की गलत आर्थिक नीतियां जिम्मेवार हैं। प्रधानमंत्री को महंगाई पर लगाम न लगा पाने के एवज में इस्तीफा दे देना चाहिए। कहा कि बसपा और सपा का विरोध धोखा है। मंत्री अनीस वर्मा, शैलेष चौहान, प्रेम बाबू सैनी व सतीश चंद्र विसाबर वालों ने कहा कि विरोध जारी रहेगा।



करंट से भैंस मरी, गुस्साए ग्रामीणों ने बिजली घर घेरा


मथुरा (DJ 2010.07.02)। गांव रैपुरा जाट में बिजली करंट से भैंस मरने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा बिजली घर पर उतरा। ग्रामीणों ने प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए कई फीडरों की बिजली बंद करा दी।

गांव में ग्रामीण की भैंस उस समय करंट की चपेट में आ गई जब पानी में खड़े बिजली पोल में करंट आ गया। इस पोल में पूर्व में भी करंट आने के कारण पशु मरे चुके हैं।

गुरुवार को भैंस मरने के बाद ग्रामीणों में गुस्सा और बढ़ गया। ग्रामीण एकत्र होकर बिजली घर फरह पर पहुंच गये। उन्होंने विद्युत अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की।

गुस्साए ग्रामीणों ने विद्युत कर्मियों पर कई फीडरों की बिजली आपूर्ति को काफी देर के लिए बंद करा दिया। काफी देर समझाने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हो सका। ग्रामीणों ने कहा कि विद्युत करंट से कई पशु मर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी लापरवाही थम नहीं रही है। उन्होंने कार्यवाही की मांग करने और मृत भैंस का मुआवजा दिलाने की मांग की है।



ड्रेन न होती तो प्यासे मर जाते बाइस गांव


मथुरा (DJ 2010.07.02)। अगर चार किलोमीटर दूर गोवर्धन ड्रेन न होती तो मगोर्रा क्षेत्र के बड़े गांवों में शुमार फौंडर बाइसी की जनता प्यासी मर जाती या फिर गांव खाली हो जाते। जी हां “नीर की पीर” का देखना हो तो गोवर्धन विकास खंड के गांव फौंडर की जनता के बीच पहुंचकर उनकी जुबान से ही दर्द को समझा जा सकता है। जनपद मुख्यालय से बीस किलोमीटर दूर फौंडर बाइसी गांव में मीठे पानी का जबर्दस्त संकट है।

फौंडर और उससे सटे गांव अड़ीग रजवाह और गोवर्धन ड्रेन की टेल पर बसे हैं। गांव में 1965 तक पानी की कोई कमी नहीं थी। जल स्तर भी ऊंचा था। कुएं भरे रहते थे। खैंचू यानी हैंडपम्प खूब चलते और पानी देते थे।

अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि फौंडर के गांव धाम में जनता महज एक कुएं पर निर्भर रह गई है। कुएं पर सुबह और शाम महिला, बच्चों के बीच पानी भरने को लेकर किचकिच आम बात है। पानी भरने के लिए भीड़ रहने से महिलाओं को अपनी-अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। ज्यादा खिंचाई होने के कारण कुएं के पानी का स्वाद बदल कर हल्का खारी हो रहा है।

यहां अगर बरसात के दिनों में पास की ड्रेन में पानी न आए तो प्यासे मरने को मजबूर होना पड़ जाए। यहां से चार किलोमीटर दूर फौंडर गांव के लोग भी यहां से पानी मंगवाते हैं। फौंडर गांव की हालत और भी खराब है।

यहां से चार किलोमीटर दूर गोवर्धन ड्रेन ही फौंडर वासियों के लिए जीवन धारा है। यह ड्रेन भी साल में अधिकांश समय सूखी रहती है पर गांव के एक दर्जन सम्पन्न लोगों ने इसी ड्रेन में बोरिंग करा ली है। ड्रेन में ही कुछ लोगों ने कुएं जैसे बना रखे हैं। बोरिंग का पानी चार किलोमीटर दूर पाइप लाइन से गांव में लाया जाता है। जिन लोगों ने यह व्यवस्था की है उन्होंने व्यक्तिगत लाखों रुपया खर्च किया है। गांव में पानी के अलावा सिंचाई की व्यवस्था भी खराब है। यहां सिंचाई गोवर्धन ड्रेन से लायी गई पाइप लाइन से ही होती है। यही कारण है कि गांवों के लोग साल में गेहूं या सरसों की एक ही फसल ले पाते हैं। जितनी पैदावार अन्य इलाके में होती उतनी पैदावार भी नहीं मिल पाती। गांव में पानी की विकराल समस्या पैदा हो गई है। गांव के बहुत परिवार मगोर्रा, जाजन पट्टी और इससे भी आगे रारह कस्बा तक से टैंकरों से पानी मंगवाते हैं। टैंकरों के ही पानी से यहां कई-कई दिन पानी का इस्तेमाल होता है। हैंडपम्प गांव में लगे तो हैं पर सभी का पानी खारी हैं। इनमें से भी कई खराब पड़े हैं। गांव में कोई साइकिल पर कैन बांध कर पानी लाता है तो कोई बग्गी पर ड्रम लादकर पानी ढोता है। लोगों की सुबह और शाम पानी की चिंता में निकल जाती है।

फौंडर से जुड़े बाइस गांवों में गांव धाम, खारी, बर, छोटा धाम, घरू, भान, जलफा, आंधू, दाड़ी, गोला, खनापुर, भूच, सपेरा, नगला श्रीचंद, गांव घड़ी सहित गांवों में खारी पानी है। इनमें से भी सड़क के पार के गांवों में लोग पानी के इंतजाम के लिए सोन और पाली गांव के पास से भी लेकर आते हैं। अड़ीग रजवाहा से भी काफी राहत सिंचाई के मामले में है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब पानी टेल तक आए, वैसे पानी को पहले ही रोक कर लोग अपने खेतों में ले जाते हैं और टेल के गांव फौंडर तक आते-आते पानी कम हो जाता है। गांव में तमाम छोटे परिवार तो पानी से भरी कैन खरीदाने को मजबूर हैं। यदि हालात ऐसे ही रहे तो वे दिन दूर नहीं या तो गांवों को छोड़ना पड़ जाएगा या फिर पानी के लिए संघर्ष करना पड़ जाएगा।



दिनभर गर्मी, शाम को बूंदाबांदी


अंधड़ आने से टीन शेड और छप्पर उड़े
अधिकतम तापमान ३८ डिग्री सेल्सियस


मथुरा/बलदेव/छाता (AU 2010.07.02)। गुरुवार को दिनभर गर्मी के बाद शाम को मौसम ने करवट ली। हल्की बूंदाबांदी के साथ ही ठंडी हवा से लोगों ने राहत की सांस ली। तापमान में भी दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।

गुरुवार को दिन में आसमान पर हल्के बादल छा गए थे। इस बीच बादलों की ओट से सूर्य की तपिश भी लोगों को सताती रही। शाम को बूंदे पड़ने के कारण गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। अधिकतम तापमान ३८ डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो बीते दिन के मुकाबले दो डिग्री कम था। छाता संवाददाता के अनुसार शाम को आंधी और तेज हवा से घरों पर पड़े टीन और छप्पर उड़ गए। उसके बाद हल्की बरसात से मौसम खुशनुमा हो गया।

बलदेव संवाददाता के अनुसार शाम पांच बजे से अचानक मौसम ने करवट ली और काले बादल घिर आए। तेज अंधड़ के साथ आई वर्षा ने मौसम को सुहावना कर दिया। अंधड़ से कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए और होर्डिंग्स, टिन शेड हवा में उड़ गए।



कमिश्नर ने गांवों की व्यवस्थाएं परखीं


राल सामुदायिक अस्पताल का भी निरीक्षण, ड्रेन सिस्टम जांचा
सिस्टम में रुकावट नहीं आने देने के निर्देश
बाजना, नगला मेव के लोगों का हाला जाना


मथुरा (AU 2010.07.02)। कमिश्नर एसएम बोवड़े ने गुरुवार को राल, बाजना तथा नगला मेव का अचानक दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं की परख की। इस दौरान उन्होंने तीनों गांवों के ड्रेनेज सिस्टम को देखा। ड्रेनेज में रुकावट मामले में उन्होंने आरईएस अफसरों को इसे ठीक करने की नसीहत दी। उन्होंने राल में सामुदायिक अस्पताल का भी निरीक्षण किया।

कमिश्नर शंकर महादेव बोवड़े गुरुवार को आकस्मिक निरीक्षण पर मथुरा आए थे। उन्होंने डीडीओ रामधनीराम के साथ पूर्व में अंबेडकर गांव रहे गांव राल, बाजना एवं नगला मेव का दौरा किया। उन्होंने तीनों गांवों के ड्रेनेज सिस्टम की बारीकी से जांच की। इस दौरान मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आरईएस अफसरों को इन्हें दूर कराने के निर्देश दिए। हैंडपंप, मनरेगा के कामकाज तथा शुष्क शौचालयों की स्थिति भी परखी।

उन्होंने अफसरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसके बाद वह टीम के साथ राल के सामुदायिक अस्पताल पहुंच गए। दरअसल उन्हें शिकायत मिली थी कि इस सामुदायिक केंद्र पर चिकित्सक नहीं आते। एक्सरे तकनीशियन नहीं है और मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। निरीक्षण में अस्पताल में भीषण गंदगी मिली। इस पर कमिश्नर ने अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी मामले में शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें तमाम समस्याओं की जानकारी दी। भ्रमण के दौरान जिला विकास अधिकारी रामधनी राम समेत अन्य अफसर मौजूद थे।



किसान नेत्रियों ने महिला अधिवक्ता को पीटा


वकीलों ने मथुरा-आगरा हाइवे जाम किया
झगड़ा करने वाली नेत्रियों के विरुद्ध रिपोर्ट
वकील से एडवांस रुपये लौटाने की मांग


मथुरा (DJ 2010.07.02)। तहसील से कचहरी के लिए लौटती एक महिला वकील के साथ किसान सभा की महिला नेत्री और कार्यकर्ताओं ने मारपीट कर दी। विरोध में वकीलों ने हंगामा काटा और सिविल लाइन पुलिस चौकी के सामने मथुरा-आगरा हाइवे जाम कर दिया। यह देख इंचार्ज चौकी छोड़ कर भाग निकला।

गुरुवार को महिला अधिवक्ता बबीता सिंह को जिला पंचायत कार्यालय के गेट के समीप किसान सभा की महिलाओं ने घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। किसान सभा की नेता राधा चौहान और लीलावती सहित अन्य महिलाएं महिला वकील को नजदीक स्थित सिविल लाइन चौकी ले गई।

इस बीच काफी संख्या में अधिवक्ता पुलिस चौकी पर आ गए और जमकर नारेबाजी करने लगे। वकील और किसान सभा की महिलाओं में फिर गुत्थमगुत्था शुरू हो गई। किसान सभा की महिलाओं का कहना था कि लड़की की शादी के लिए अनुदान दिलवाने के लिए ली एडवांस राशि वकील से लौटवाई जाए। चौकी इंचार्ज और अन्य पुलिसकर्मी इस घटना को मूक दर्शक बने देखते रहे, उन्होंने हस्तक्षेप करने की जहमत तक नहीं उठाई।

कड़े विरोध के चलते किसान सभा की महिलाएं वहां से खिसक गईं। पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए चौकी का सामने सड़क पर बैठ गए।

बार के उपाध्यक्ष अधिवक्ता हरीहरनाथ ने इस घटना का पुरजोर विरोध करते हुए जाम कर रहे वकीलों का साथ दिया। बार के अध्यक्ष आलोक सिंह ने इंस्पेक्टर सदर बाजार से मिलकर बबीता सिंह की तहरीर पर मारपीट करने वाली महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। आलोक सिंह ने कहा कि कचहरी पर किसी भी व्यक्ति की गुंडागर्दी सहन नहीं की जाएगी।


श्रीवृन्दावन-महिमामृतम् २.४-६

Photo by Abha Shahra.

मरकतमयपत्रैर्हीरपुष्पैः सुमुक्ता
निकरकलिकयाढ्यैः कौरविन्दप्रवालैः ।
बहुविधरसपूर्णैः पद्मरागैः फलाद्यै-
रविरलमधुवर्षईर्नीलरत्नालिमालैः ॥

जिनके पत्र समूह मरकत मणिमय हैं, पुष्प समूह हीरा के सदृश हैं, कलिका समूह सुन्दर सुन्दर मुक्तावत् हैं, प्रवाल अङ्कुर समूह कुरुविन्द मणि की भांति हैं, अनेक प्रकार के रसों से पूर्ण फल समूह पद्मराग मणिवत् हैं एवं अविरल मधुवर्षी तथा नील रत्नों के समान मधुकर समूह से परिवेष्टित श्रीवृन्दावन के वृक्षराज शोभित हो रहे हैं ॥२.४॥



अगणितरविकोटिप्रस्फुरद्दिव्यभातिः
सकृदपि हृदि भातैः शीतलानन्ददृष्ट्या ।
प्रशमितभवतापैर्दुर्लभार्यान् दुहद्भिः
परमरुचिरहैमासङ्ख्यवृक्षैः परीतम् ॥

असंख्य कोटि कोटि सूर्य प्रभा के समान प्रकाशमान् परम रमणीय स्वर्णमय वृक्षों से श्रीवृन्दावन परिपूर्ण है । वह समस्त वृक्ष समूह एक वार मात्र हृदय में स्फुरित होने पर शीतलानन्द की वृष्टि के द्वारा संसार तापों को प्रशमन कर देता है एवं दुर्लभ पुरुषार्थ को देनेवाला है ॥२.५॥



वृन्दाटव्यामगणितचिदानन्दचन्द्रोज्ज्वलायां
सान्द्रप्रेमामृतरसपरिस्पन्दनैः शीतलायाम् ।
कूजन्मत्तद्विजकुलवृतानल्पकल्पद्रुमायां
राधाकृष्णावचलविहृतौ कस्य नो याति चेतः ॥

असंख्य चिदानन्द चन्द्रों की चांदनी के द्वारा प्रकाशमान, निविडएषां प्रेमामृत रस के हिलोड़ों से शीतल, पक्षि कुल के द्वार मुखरित एवं अनेक कल्प वृक्षों से शोभित श्रीवृन्दावन में निरंतर विहार करने वाले श्रीराधाकृष्ण की ओर किसका चित्त धावित नहीं होता ? ॥२.६॥


Thursday, July 1, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृतम् २.१-२.३




(२)


श्रीवृन्दावन-महिमामृतम्


अथ द्वितीयं शतकम्



वृन्दारण्ये वरं स्यां कृमिरपि परतो नो चिदानन्ददेहो
रङ्कोऽपि स्यामतुल्यः परमिह न परत्राद्भुतानन्तभूतिः ।
शून्योऽपि स्यामिह श्रीहरिभजनलवेनातितुच्छार्थमात्रे
लुब्धो नान्यत्र गोपीजनरमणपदाम्भोजदीक्षासुखेऽपि

श्रीवृन्दावन में भले ही मैं कृमि होकर रहूंगा, किंतु अन्यत्र चिदानन्द देह के लिये भी प्रार्थना नहीं करता हूं । यहाम् अतुलनीय दरिद्र की भले ही इच्छा करता हूं, किंतु और स्थान पर अनन्त विभूतियों की भी इच्छा नही है । भले ही श्रीहरिभजनलवशून्य होकर, अर्थात् लवमात्र भी हरिभजन न कर, अतितुच्छ विषयों में लोलुप हुआ ब्रज में वास करूंगा, तथापि श्रीगोपीजनरमण के पादपद्मों की दीक्षा के सुख में भी लुब्ध होकर अन्यत्र नहीं जाऊंगा ॥२.१॥




दिव्यानेकविचित्रपुष्पफलवद्वल्लीतरूणां तति-
र्दिव्यानेकमयूरकोकिलशुकाद्यानन्दमाद्यत्कलाः ।
दिव्यानेकसरः सरिद्गिरिवरप्रत्यग्रकुञ्जावली-
र्दिव्या काञ्चनरत्नभूमिरपि मां वृन्दावनेऽमोहयत् ॥

श्रीवृन्दावन में जो दिव्य दिव्य अनेक विचित्र पुष्प एवं फलशाली वृक्ष-लताओं का समूह है, दिव्य दिव्य अनेक मोरों कोकिलाओं एवं शुकादि पक्षियों की जो आनन्द उन्मत्त ध्वनि है, दिव्य दिव्य अनेक सरोवरों, नदियों, पर्वतों से शोभित जो नवीन नवीन कुञ्ज समूह हैं एवं दिव्य स्वर्णमयी जो रत्नभूमि है, इन्हों ने मुझे मोहित कर लिया है ॥२.२॥




भुवः स्वच्छाश्चिन्तामणिभिरतिचित्रैर्विरचिताश्
चिदानन्दाभासः फलकुसुमपूर्णद्रुमलताः ।
खगश्रेणीः सामस्वरकलकलाश्चिद्रससरित्
सरांसि श्रीवृन्दावनमनु मनो मे विमृशतु ॥२.३॥

श्रीवृन्दावन स्वच्छ एवं अति विचित्र चिन्तामणियों से रचित भूमण्डल को, चिन्मय आनन्द विस्तार करने वाले फल पुष्प युक्त वृक्ष-लताओं को, सामवेद के गान की अव्यक्त मधुर ध्वनि से कलकलायमान, अर्थात् गुञ्जार करते हुए पक्षिसमूह को एवं चिन्मय रसयुक्त नदी तथा जलाशयों को मेरा मन स्मरण करे ॥२.३॥