Tuesday, June 22, 2010

श्रीवृन्दावन-महिमामृत १.७७-७९


राधाकृष्णौ परममृणिनौ कुर्वतः सर्वतः श्री-
विष्णोर्धाम्नः स्फुरदतिमहानन्दवृन्दावनस्थान् ।
जन्तून् हन्तुर्विरचितकृतीन् पुरु प्रेमभाजो
दानैर्मानैरहह भजतो धन्यधन्यान् नमामः ॥
श्रीविष्णु के समस्त धामों से परव्योम से भी अधिक स्फूर्तिशील महानन्दमय जो श्रीवृन्दावन है, उस धाम के सब जीव अपनी हत्या करने वालों की भी दान और मान से सेवा करते हैं, एवं जिन्होंने श्रीराधाकृष्ण को परम ऋणी किया है, उन पूर्ण प्रेम के भाजन धन्य धन्य पुरुषों को हम नमस्कार करते हैं ॥१.७७॥

इस श्लोक के तृतीय चरण में छन्दः दोष दिखता है । इस लिये पाठ की शुद्धि के बारे में कुछ सन्देह भी आता है । जो भी हो, जैसा मिला वैसा प्रकाश करता हूं ।



मरिष्यसे कदा सखे त्वमिति किं विजानासि किं
शिशोः सुतरुणस्थ वा न खलु मृत्युराकस्मिकः ।
तदद्य निरवद्यधीरवपुरिन्द्रियासक्तिक्तो
न किञ्चन विचारय द्रुतमुपैतु वृन्दावनम् ॥

हे सखे ! किस दिन मृत्यु होगी, क्या तू यह जानता है ? बालक या नवीन युवक की क्या अकस्मात् मृत्यु नहीं होती है ? अत एव अनिन्दनीय बुद्धि एवं देह इन्द्रियादि से आसक्ति रहित होकर कोई विचार न करते हुए आज शीघ्र ही श्रीवृन्दावन के लिये चल दे ॥१.७८॥



शुद्धामाद्यरतिं समस्तभगवद्रत्युच्छ्रितश्रीमतीं
त्वं चेत् काङ्क्षसि माधुरीभरधुरीणानन्दसन्दोहिनीम् ।
धर्मज्ञानविरक्तिभक्तिपदवीं तत्साध्यमप्यस्पृशन्
दुर्भेदं सहसा विभिद्य निगडं संन्यस्य वृन्दावने ॥

समस्त भगवत् रतिसमूह से भी उन्नत श्रीयुक्त एवं माधुर्यरस श्रेष्ठ आनन्दयुक्त विशुद्ध आद्यरति (मधुररति) की यदि तू चाहता है, तो धर्म, ज्ञान, वैराग्य एवं भक्तिरूप साधन तथा उसके साध्य को स्पर्श न करके दुर्भेद्य पाशों को बलपूर्वक तोड़कर श्रीवृन्दावन में निरन्तर वास करने का संन्यासव्रत ग्रहण कर ॥१.७९॥


2010-06-23 ब्रज का समाचार

मथुरा में पुर्नजन्म की अजब कहानी

मथुरा (DJ 2010.06.23)। सुरीर कस्बे से करीब छह वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में मौत का शिकार हुए युवक के पुर्नजन्म होने का मामला प्रकाश में आया है। खैर के समीप गांव दरकन नगरिया में जन्मे एक बालक ने पूर्व जन्म में टैंटीगांव का सोनू होने की बात कहीं और टैंटीगांव आकर अपने परिजनों को भी पहचान कर सभी हैरान कर डाला।

खैर के समीप स्थित गांव दरकन नगरिया में ओम चौधरी की पत्नी श्रीमती राधा ने करीब पांच वर्ष पहले एक बालक को जन्म दिया। जिसका नाम उन्होंने गौरव चौधरी रखा। धीर-धीरे बालक जब बड़ा होने लगा तो उसकी बातें सुन-सुनकर परिजन चकरा जाते थे।

यह बालक अपने आप को टैंटागांव का सोनू उर्फ यतेन्द्र पुत्र अशोक कुमार शर्मा बताते हुए कहता था कि उसकी मौत दुर्घटना में हो गयी थी और टैंटीगांव में उसके माता-पिता, बहन व पत्नी रहते हैं और टैंटीगांव जाने की जिद करता था।

आखिरकार ओम चौधरी अपने भाई मलिखान सिंह के साथ इस बालक को लेकर सोमवार को टैंटीगांव पहुंचे तो यह बालक आगे-आगे चलकर अशोक कुमार शर्मा के घर में घुस गया और उनको अपना पिता कहते हुए लिपट गया। इतना ही नहीं, इस बालक ने अपनी मां रजनी शर्मा, बहन कुसमलता एवं पत्नी को भी पहचान लिया।

यह बालक घर के कमरों में ऐसे घूमता फिरा कि वह सब कुछ जानता है। इस बालक के सोनू होने की बात सुनकर टैंटीगांव में उसे देखने के लिए लोगों का अशोक कुमार के घर तांता सा लग गया।

इस बालक ने पूछने पर तमाम बातें बताई, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण बालक घबराने लगा। इसके कारण उसे कमरे में आराम करने के लिए सुला दिया। बाद में टैंटीगांव के अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि करीब 6 वर्ष पूर्व उनके बेटे सोनू की मांट के समीप सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी। उसके द्वारा पूर्व जन्म की बातें बताने से विश्वास हो गया है कि मेरे बेटे का पुर्नजन्म गौरव के रूप में हो गया है। इस बालक को टैंटीगांव में सोनू के रूप में ही देखा जा रहा है। हालांकि बालक को लेकर ओम चौधरी अपने घर वापिस चले गये हैं, लेकिन एक पुर्नजन्म की चर्चा लोगों में छिड़ गयी है।



अभिमान पतन का कारण : डा. मनोजमोहन

वृन्दावन (DJ 2010.06.23)। गांधी मार्ग स्थित श्रीनाथ धाम में आयोजित दिव्य श्रीराम कथा के अवसर पर व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए मानस राजहंस डा. मनोज मोहन शास्त्री ने मंगलवार को कहा कि विद्या अहंकार रहित होकर प्राप्त करनी चाहिए। रामजी ने जो विद्या प्राप्त की उसने समाज को नई दिशा प्रदान की। श्री शास्त्री ने कहा कि विश्वामित्र जब दशरथ जी के पास राम, लक्ष्मण को मांगने गये तो दुखी मन से उन्होंने कहा कि अब आप ही इनके पिता हैं। श्रीराम ने अनेकों राक्षसों का वध किया। फिर धनुष यज्ञ में पधारे। श्री शास्त्री ने कहा कि सीताजी की विदाई के समय सभी श्रोताओं को अश्रुपात हो रहा था।



सुदामा चरित्र सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु

वृन्दावन (DJ 2010.06.23)। सत्य, नम्रता व त्याग यह तीन गुण जिसके भी जीवन में हों वह संत से भगवंत बन जाता है। निष्काम संत और प्रभु भक्त के आत्ममिलन से होने वाले सत्संग की कथा, समाधि से युक्त साधक के लिए सदा मोक्ष प्रदायिनी होती है।

वृन्दावन के गोविंद घेरा स्थित साक्षीगोपाल परिसर में अखिल भारतीय श्री पंच झाड़िया निर्मोही अखाड़ा प्राचीन सिंहपौर हनुमान मंदिर के साकेतवासी महंत लालदास महाराज के ब्रज रज प्राप्ति महोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ में व्यासपीठ से महंत मदनमोहन दास महाराज ने सुदामा चरित्र का बखान करते हुए कहा कि भागवत में श्री राधारानी तथा परम भक्त सुदामा जी का नाम वैसे ही अदृश्य है जैसे दूध में घी।

भक्त के जीवन में जहां से तृष्णा समाप्त होती है वहीं उसे उसके मन-मंदिर में श्रीकृष्ण की भक्ति का शुभारंभ होता है। उन्होंने कहा कि श्री सुदामा जी दरिद्र न होकर परम संतोषी, सत्संगी विप्र थे। श्रीकृष्ण की प्रेरणा रूपी धर्म परायणा पत्नी सुशीला ने पतिदेव सुदामा जी को द्वारिकानाथ के पास जाने का निवेदन किया तो सुदामा जी ने कहा कि देवी! यदि तुम किसी कामना से मुझे मेरे सखा श्रीकृष्ण के पास भेजना चाह रही हो तो मैं कदापि नही जाऊंगा। पर यदि तुम मुझे श्रीकृष्ण दर्शन की कामना से प्रेरित कर रही हो तो मैं वहां अवश्य जाऊंगा। उन्होंने कहा कि प्रभु का विस्मरण ही विपत्ति है तथा स्मरण ही सम्पत्ति है।



गर्मी से डिहाईड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ी

अस्पतालों में मरीजों की लगी कतार
सलाह : चिकित्सकों ने अधिक पानी पीने की दी सलाह


वृंदावन (AU 2010.06.23)। भीषण गर्मी के कारण डिहाईड्रेशन से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नगर के अधिकतर अस्पतालों में मरीजों की भरमार हो गई हैं। मरीजों में उल्टी, दस्त, बुखार एवं पेट दर्द की शिकायत मिल रही है। मरीजों में अधिकतर बच्चे और वृद्ध देखे जा सकते हैं।

भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण नगर में बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। नगर के अस्पतालों में अधिकतर बेड भरे हैं। पिछले तीन दिनों से बढ़ी गर्मी की तपिश के कारण स्थानीय रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में मरीजों की संख्या में यकायक बढ़ोत्तरी हुई है। अस्पताल के सभी जनरल एवं प्राइवेट वार्ड भी मरीजों से भरे पड़े है। मरीजों में अधिकतर कम उम्र के बच्चे और वृद्ध हैं। वहीं सरकारी हैजा अस्पताल में भी मरीजों की संख्या में दिनोंदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। नगर के प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम में भी मरीजों की भीड़ देखी जा सकती है।

इस बारे में सरकारी हैजा अस्पताल के मेडिकल आफीसर पीयूष चौबे का कहना है कि हर वर्ष मौसम बदलने पर यह रोग फैलते हैं। लोगों को गर्मी से बचना चाहिए। उनके अनुसार उल्टी, दस्त एवं बुखार से ग्रसित पीड़ितों को दवा देकर बीमारी को नियंत्रण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीमारी से बचने के लिए धूप में न निकलें और अगर निकलें भी तो चेहरे को पूरी तरह से ढककर ही निकले। उन्होंने कहा कि डिहाईड्रेशन से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करें।



पारे से पसीना-पसीना हुए किसान

मथुरा (DJ 2010.06.23)। भीषण गर्मी एवं बढ़ते पारे ने किसानों के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। एक पखवाड़े पूर्व आसमान में घिरे बादलों को देखकर धान की रोपाई की तैयारी में जुटे किसान अब परेशान हैं। नर्सरी भी झुलस रही है। बरसात में देरी अगेती रोपाई के रास्ते में रोड़ा बन सकती है।

पिछले कई दिनों से तापमान के तेवर कुछ ज्यादा ही तीखे नजर आ रहे हैं। आसमान की ओर से आदमी व पशु पक्षियों से लेकर फसलें भी झुलस रही है। बढ़ते पारे ने धान की तैयार हो रही नर्सरी पर भी प्रभाव डाला है। किसानों के अनुसार भीषण गर्मी के कारण नर्सरी झुलस रही है। जिसके लिए हर रोज सिंचाई की आवश्यकता पड़ रही है।

किसानों ने बताया कि यदि इस समस्या से जल्द छुटकारा नहीं मिला तो नर्सरी की ऊपर से कटाई की आवश्यकता पड़ सकती है। चूंकि अगेती रोपाई करने वाले किसानों की पिछले पखवाड़े से ही पूरी तैयारी थी।

आसमान में छाए बादलों के बरसने के इंतजार में वे रुके हुए थे। किसान वैज्ञानिकों की मानसून के बारे में की जा रही भविष्यवाणी को लेकर चल रहे थे। लेकिन मानसून की धीमी पड़ी रफ्तार ने किसानों के सारे गणित को बिगाड़ दिया है।

किसानों ने बताया कि अगर जल्द बरसात नहीं हुई तो अगेती खेती करने वाले किसानों पर इसका काफी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि मौसम विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा जताई जा रही 25 जून तक मानसून के यूपी में पहुंचने की संभावना से किसानों को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन तापमान के तेवरों ने उनकी धड़कनों को बढ़ा रखा है।



सूरज हुआ लाल, जीना हुआ मुहाल

मथुरा (DJ 2010.06.23)। जून माह के उत्तरा‌र्द्ध में सूरज की चढ़ती त्योरी आम जनमानस ही नहीं पशु-पक्षियों के लिये भी परेशानी का कारण बन गयी है, ऊपर से उमस भरी गर्मी ने हाल-बेहाल कर दिया। तापमान एक डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ कर 47 पर पहुंच गया। इसके चलते आग उगलते सूरज की तपिश से लोगों के बदन जलने लगे हैं।

पिछले कुछ दिनों से सूरज के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। यही कारण है कि सूरज की त्योरी के चढ़ने से आम जन कराह उठा है। मंगलवार को अगर तापमान की बात करें तो एक डिग्री चढ़ गया है। प्रात: से ही उमस भरे वातावरण में लोगों को दिक्कतें होने लगी, हालात ये रहे कि शरीर से पसीना सूखने का नाम नहीं ले रहा था, तो बेचैनी बढ़ रही थी। ज्यों-ज्यों दिन निकलता गया सूरज की तपिश ने लोगों का घरों से निकलना बंद करा दिया। जरुरत मंद लोग ही सड़कों पर नजर आ रहे थे। बदन को झुलसा देने वाली तपिश ने जीना मुहाल कर दिया, तो पशु-पक्षी भी अकुला उठे।

कृषि संभागीय परीक्षण एवं प्रदर्शन केन्द्र राया के तापमापी ने सूरज की त्योरी को पढ़ा तो वह कल से दो डिग्री ऊपर यानि 45 डिग्री मापा गया, न्यूनतम तापमान 28 डिग्री तो आद्रता 41 डिग्री रही। वहीं दूसरी ओर आईसीटी के तापमानी ने भी एक डिग्री बढ़ते हुए 47 डिग्री मापा। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि सूर्य की तपिश ने आमजनों को व्याकुल कर दिया।

सड़कों पर तो लोगों को जला देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ा। हालत ये थे कि घर हो अथवा ऑफिसों में लगे कूलर की बात क्या करें एसी भी साथ छोड़ गये, लोगों को लग ही नहीं रहा था कि एसी चल रहे हैं। देहातों में गर्म हवाओं के थपेड़ों ने और हालत खराब करके रख दी। उमस के कारण लोगों ने बच्चों के अलावा परिवारी जनों को नीबू की शिकंजी ग्लूकोज का सेवन कराया, ताकि बीमारी से बचा जा सके।



सियासी पचड़े में कोसी गोवर्धन रोड का निर्माण

मथुरा (DJ 2010.06.23)। कोसीकलां से नंदगांव व बरसाना होते हुए गोवर्धन जाने वाले मार्ग के प्रोजेक्ट को केंद्र द्वारा अस्वीकृत किए जाने से क्षेत्र वासी काफी आहत है। क्षेत्रीय लोग इस रुकावट के पीछे राजनीति का द्वंद करार दे रहे हैं।

कोसीकलां-गोवर्धन मार्ग ब्रज के सबसे व्यस्ततम मार्गो में शुमार है। हर माह इस मार्ग से लाखों श्रद्धालु यात्रा करते हैं। वहीं इस मार्ग पर छाता एवं गोवर्धन विधान सभा के तमाम गांव जुड़े हुए हैं। पड़ौसी राज्य राजस्थान की सीमा की सीमा भी जुड़ी हुई है। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी इस मार्ग की हालत सुधारे नहीं सुधर पा रही है।

पहले तो पीडब्ल्यूडी का उदासीन रवैया ही इस मार्ग की दुर्दशा को सुधारने में रोड़ा रहा, लेकिन जब विभाग ने प्रयास किया तो इसके प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने खामियों के कारण वापस लौट दिया। ऐसे में निर्माण की उम्मीद एक बार फिर ओझल हो गई, इस मार्ग की विडम्बना को लेकर स्थानीय लोग परेशान हैं।

ग्रामीण विजय सिंह कहते हैं कि कई दशक गुजर गए और कई नेताओं का नेतृत्व भी बदल गया। लेकिन इस कोसी-गोवर्धन मार्ग के हालात कभी नहीं बदल पाए। उन्होंने बताया कि इस मार्ग के घटिया हाल का उनके एवं उनके बच्चों के जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। जिसकी शासन प्रशासन अनदेखी कर रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस मामले में राजनीति हो रही है। राजनीति में श्रेय लेने के चक्कर में ही यह प्रोजेक्ट केन्द्र ने वापस कर दिया है।

इस मार्ग से अक्सर निकलने वाले खजान सिंह कहते हैं कि जर्जर हाल के चलते इस मार्ग के किनारे बसें गांवों में रहने वाले लोग ज्यादातर धूल जनित रोगों से प्रभावित हैं। मसलन लोग दमे एवं टीबी की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। वे कहते हैं कि जब किसी गांव तक पहुंचने के रास्ते ही घटिया होंगे तो फिर उसके विकास का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस पर भी राजनीतिक दांव पेंच अपनाकर इसे राजनीति का अखाड़ा बनाया जाता रहा है। जो कि जनता के साथ अन्याय है। कोसी से राजस्थान की यात्रा के लिए बस में यात्रा करने वाले राहगीर विनोद चंदेल का कहना है कि उनकी अगर मजबूरी न होती तो वे यहां आना कतई पसंद नहीं करते। वे हैरान है कि यहां की इस वर्षो पुरानी समस्या को नेता सुलझा नहीं पाए हैं।



तालाब पर पानी पीने जाती पशु को ट्रक ने रौंदा

मथुरा (DJ 2010.06.23)। खारे पानी की समस्या से जूझ रहे गांव नगला मौजी के एक पशु पालक को गांव से दूर तालाब पर पशुओं को पानी पिलाने की कीमत भैंस की जान देकर चुकानी पड़ी। कस्बा सुरीर के समीपवर्ती गांव नगला मौजी में खारे पानी की समस्या विगत कई वर्षो से चली आ रही है। गांव में पीने लायक पानी न होने से ग्रामीण पीने का पानी दूर से भरकर लाते हैं। ऐसे ही पशुओं को भी पानी पिलाने के लिए गांव से काफी दूर तालाब पर ले जाते हैं।

मंगलवार को रोजाना की तरह गांव नगला मौजी निवासी सीताराम पुत्र हरीशंचद्र अपने पशुओं को पानी पिलाने के लिए गांव से करीब दो किमी. दूर बिजलीघर के समीप स्थित तालाब पर ले गया, जहां पशुओं का पानी पिलाने के बाद उन्हें लेकर वापिस लौट रहा था, तभी राया-नौहझील मार्ग पर सड़क पार करते समय टैंटीगांव की ओर से आ रहे ट्रक ने एक भैंस में टक्कर मार दी। इससे भैंस की मौके पर ही मौत हो गयी। दुर्घटना के बाद चालक ट्रक को भगा ले गया, जिसका कहीं पता नहीं चल सका। पीड़ित ने कोतवाली में भी सूचना दी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।



उड़नखटोले से विदा कराके लाया दुल्हन

गोवर्धन में उतरने से पूर्व हेलीकाप्टर से लगाई गिरि परिक्रमा
अजबगजब : दुल्हन महज १२ किमी दूर डीग के गांव सावई की
नायाब क्षणों को नजरों में कैद करने उमड़ पड़ा हुजूम
भीड़ नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने किया लाठीचार्ज


गोवर्धन (AU 2010.06.23)। शाहजहां ने बेगम मुमताज को ताजमहल गिफ्ट कर दांपत्य जीवन में चार चांद लगा दिए थे, तो गोवर्धन के एक युवक ने अपनी दुल्हन को हेलीकाप्टर से विदा करा कर लाने के पलों को यादगार बना दिया। इन नायाब क्षणों को नजरों में कैद करने को दुल्हन के गांव व दूल्हे के यहां हुजूम उमड़ पड़ा।
मथुरा के गोवर्धन कस्बे में मंगलवार प्रातः जो कुछ भी हुआ, वह स्थानीय लोगों के लिए एक यादगार पल बन गया। जिले के बड़े-बड़े उद्योगपति और नामी-गिरामी लोगों को पीछे छोड़ते हुए कस्बे का उत्साही तुलसी केशोरैया अपनी दुल्हन को हेलीकाप्टर से लेकर आया। फाइनेंस कार्य में लगे रवि कैशोरया का पुत्र तुलसी अपनी दुल्हन राजकुमारी को वास्तव में राजकुमारी की तरह राजस्थान के गांव सावई (डीग) से उड़नखटोले से विदा कराकर लाया।

दुल्हन का गांव सावई गोवर्धन से मात्र १२ किमी दूर डीग क्षेत्र में है। हेलीकाप्टर इस गांव से महज पांच मिनट में गोवर्धन आ गया। सेवन सीटर हेलीकाप्टर में वर-वधू के अलावा वर की तीन बहनें और पिता बैठकर आए। गोवर्धन में उतरने से पूर्व हेलीकाप्टर से ही परिक्रमा भी लगाई गई। वधू के गांव में भीड़ ज्यादा एकत्रित हो गई। वहां तीन बार पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।

एक सपने के सच होने जैसा
राजकुमारी ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी विदा हकीकत में किसी राजकुमारी की भांति होगी। बीए कर रहीं राजकुमारी का ख्वाब था कि कोई राजकुमार आए और उनको राजसी ठाठ-बाट के साथ हेलीकाप्टर में विदा कर ले जाए। अपने इस सपने को पूरा करने का श्रेय वह अपने पति तुलसी को देती हैं और उनके इस कदम से वह काफी खुश हैं। दुल्हन राजकुमारी ने अमर उजाला को बताया कि यह सब एक सपने के सच होने जैसा है। खुशी व्यक्त करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं।

दूल्हे ने दादा की तमन्ना पूरी की

दूल्हे तुलसी केशोरैया ने बताया कि उनके दादा गोपीनाथ की इच्छा थी उनके नाती की दुल्हन उड़नखटोले में विदा होकर घर की चौखट चढ़े। यह उनकी यह तमन्ना पूरी की गई है।

एक लाख रुपये से अधिक हुआ खर्च

दुल्हन को हेलीकाप्टर से विदा कराने के लिए एक लाख रुपये से अधिक खर्च हुए। भरतपुर जिले में लंबे समय के बाद अपने आप में इस तरह का यह पहला ही मामला सामने आया है।

बाराती तो दावत खाकर सोमवार रात ही गिर्राजजी के परिक्रमा मार्ग से निकल गए। मगर दूल्हा और उसके पिता गांव में ही रुक गए और मंगलवार प्रातः दिल्ली से आए हेलीकाप्टर से गोवर्धन के लिए रवाना हुए। इस संबंध में रवि के शूरिया ने पिछले दिनों भरतपुर के डीएम कार्यालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसके आधार पर उसे हेलीकाप्टर लाने की मंजूरी मिली। इस हिसाब से प्रशासन के अलावा सरकारी तंत्र ने भी व्यवस्थाएं कीं। गांव में पीडब्ल्यूडी द्वारा हेलीपेड का निर्माण कराया गया। पुलिस फोर्स भी लगाया गया। प्रातः लगभग आठ बजे दिल्ली से एक निजी कंपनी का हेलीकाप्टर ग्राम सावई में आया तो इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। आधा घंटा तक हेलीकाप्टर खड़ा रहा। बाद में रवि कुमार उसका पुत्र तुलसीराम और पुत्रवधू राजकुमारी इस पर सवार होकर अपने घर के लिए रवाना हुए।



कान्हा की नगरी में भीषण गंदगी

मथुरा (DJ 2010.06.23)। मथुरा पालिका के कामकाज का ढर्रा किसी से छिपा नहीं है। मानसून आने को है लेकिन पालिका अभी तक शहर के अधिकांश नालों की सफाई नहीं करा पाई है। अधिकतर नाले अभी भी गंदगी से अटे पड़े हैं। अगर किसी नाले की सफाई हो भी गई है तो अभी तक सिल्ट नहीं उठवाई गई है। नाले के सहारे पड़ी सिल्ट हवा के साथ घरों में घुस रही है। ऐसी स्थिति में शहर को नरक बनने से कोई नहीं बचा पायेगा। नये बस स्टैण्ड रेलवे पुल की बात तो छोड़िए। यहां तो बिन बरसात ही पानी भर जाता है।

शहर में वनखंडी से लेकर सुभाष नगर तक नाले से करीब एक पखवाड़ा पहले निकली सिल्ट अभी घरों के सामने ही पड़ी है। हवा का झोंका चलने पर धूल घरों में पहुंचती है। जबकि अंतापाड़ा नाला अभी भी सिल्ट से लबालब है। यहां सिल्ट निकालने की अभी शुरूआत भी नहीं हुई है। इतना ही नहीं मंगलवार को नये बस स्टैंड रेलवे पुल के नीचे बिन बारिश के जलभराव हुआ। भूतेश्वर-सौंख रोड और बीएसए कालेज से लेकर भूतेश्वर के समीप तक सड़क किनारे लंबे समय से पानी भरा हुआ है।

जिलाधिकारी डीसी शुक्ल ने मई माह में नगर पालिका के ईओ आदि अफसरों की बैठक बुलाकर 31 मई तक सभी नालों की सफाई का कार्य पूरा करा देने के निर्देश दिये थे। लेकिन नगर पालिका प्रशासन पर इसका असर नहीं हुआ। मंडी समिति से भूतेश्वर की ओर आने वाले नाले हों या देवनगर से नये बस स्टैंड की आने वाला नाला। बीएसए कालेज के पीछे का नाला हो या कंकाली के आसपास का। सभी सिल्ट से लबालब हैं।

अंतापाड़ा नाला तो पूरी तरह सिल्ट से भरा पड़ा है ही, आसपास की नालियों तक की महीनों से सफाई नहीं हुई है। इन नालों की सफाई कब तक पूरी नहीं हो पायेगी। लेकिन इतना तय है कि इनकी सफाई नहीं हुई तो ये बारिश की शुरूआत के बाद शहरी जनता पर कहर ढाएंगे। घरों में पानी भरेगा। अंबेडकर कालोनी के लोग तो अभी से बारिश की शुरूआत के बाद अंजाम को सोचकर परेशान हैं।



कार्बन डाईआक्साइड में कमी बड़ी उपलब्धि

जायजा : केंद्रीय पेट्रोलियम सचिव का रिफाइनरी दौरा
देश में पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्ति में अहम योगदान


मथुरा (AU 2010.06.23)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भारत सरकार के सचिव एस.सुंदरेशन ने मथुरा रिफाइनरी के गैस टरबाइन के लिए प्रयुक्त फामी कूलर का उद्घाटन किया।

सोमवार को सचिव सुंदरेशन ने न्यू यूनिट कंट्रोल रूम तथा वहां इकॅलाजीकल पार्क का भ्रमण कर वहां वृक्षारोपण किया। उन्होंने एनवार्यनमेन्टल पार्क देखकर कहा कि यहां का हरा भरा विकसित पार्क एवं उसमें चिड़ियों का समूह अपने आप में स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दे रहा है। इस मौके पर हुए कार्यक्रम में रिफाइनरी उच्च प्रबंधन एवं अधिकारियों से पेट्रोलियम सचिव ने कहा कि उनका मथुरा रिफाइनरी का दौरा एक सुखद अनुभव रहा। मथुरा रिफाइनरी देश में पैट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में अपना शानदार योगदान दे रही है।

निदेशक रिफाइनरीज बी.एन बंकापुर ने मथुरा रिफाइनरी चालू होने के आरंभिक वर्षों के दौरान इसकी ताजमहल से नजदीकी होने के कारण पर्यावरणीय कठिनाईयों की चर्चा की। कार्बन डाईआक्साइड का स्तर पर्याप्त रूप से कम हुआ है। रिफाइनरी की शोधन क्षमता ६ मिलियन टन वार्षिक से ८ मिलियन टन वार्षिक हुई। दोनों अधिकारियों के समक्ष मथुरा रिफाइनरी के वित्तीय कार्य निष्पादन, परियोजना एवं अन्य उपलब्धियों पर आधारित प्रस्तुतीकरण किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन में कार्यकारी निदेशक जेपी गुहाराय ने किया।

श्रीवृन्दावन-महिमामृत १.७४-७६



निष्किञ्चनान् कृष्णरसे निमग्नान्
महानिरीहान् जनसङ्गभीतान् ।
वृन्दावनस्थान् वसनाशनाद्यै-
र्यः सेवतेऽसौ वशयेत्तदीशौ ॥

निष्किञ्चन कृष्णरस में मग्नचित्त एवं महानिरीह (वासनारहित) तथा जनसङ्गभीत एकान्तप्रिय श्रीवृन्दावन में वास करने वले महात्माओं की जो वस्त्र एवं भोजनादि के द्वारा सेवा करता है, वह श्रीयुगलकिशोर को ही वशीभूत कर लेता है ॥१.७४॥



वृन्दारण्यमन्यभावमधुराकारेहितो राधिका
कृष्णक्रीडितरञ्जितप्रविलसत्कुञ्जावलीमञ्जुलम् ।
योऽन्यत्रापि कृतस्थित्र् विधिवशाच् छोचन् सदा चिन्तयेन्
नित्यं तन्मिलनं विचिन्त यदहं तद्धामयुग्मं भजे ॥

जो अन्य स्थान में वासरूप दुर्भाग्य से दुखी होते हुए अनन्य भाव से मधुराकृति श्रीवृन्दावन के लिये लालसायित होकर श्रीराधाकृष्ण के क्रीडामय, रमणीय एवं विलासमय कुंजों से परिशोधित श्रीवृन्दावन की सदा चिन्ता करता रहता है, उसको मिलने के लिये जो नित्य श्रीवृन्दावन में चिन्ता करते हैं, उन ज्योतिर्मय श्रीयुगलकिशोर का मैं भजन करता हूं ॥१.७५॥



राज्यं निष्कण्टकमपि परित्यज्य दिव्याश्च रामाः
कामान् सर्वानपि च विहितांस्तिक्ततिक्तान् विदन्तः ।
हित्वा विद्याकुलधनजनाद्याभिमानं प्रविष्टा
ये श्रीवृन्दाविपिनमपुनर्निर्गमांस्तान् नमामः ॥

श्रीविष्णु के समस्त धामों से (परव्योम से) भी अधिक स्फूर्तिशील महानन्दमय जो श्रीवृन्दावन है, उस धाम के सब जीव अपनी हत्या करने वालों की भी दान और मान से सेवा करते हैं, एवं जिन्होंने श्रीराधाकृष्ण को परम ऋणी किया है, उन पूर्ण प्रेम के भोजन धन्य धन्य पुरुषों को हम नमस्कार करते हैं ॥१.७६॥


Monday, June 21, 2010

2010-06-22 ब्रज का समाचार

वृक्षों के कटान पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

वृंदावन (AU 2010.06.22)। वृंदावन विकास योजना के अंतर्गत सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे जा रहे हरे वृक्षों पर चिंता जताते हुए ब्रज वृंदावन हैरिटेज एलायंस के संयोजक मधुमंगल शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसके अलावा उन्होंने दो अन्य मुद्दों को भी इस याचिका में जोड़ा है।

हाईकोर्ट में वर्ष २०१० में दाखिल जनहित याचिका में उन्होंने विकास की भेंट चढ़ रहे हरे वृक्ष और नष्ट हो रही हरितिमा को वृंदावन के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि वृंदावन की पहचान लता-पता, सघन वृक्षावली से है। प्राचीन वृक्षों को काटा जाना वृंदावन के स्वरूप से खिलवाड़ है।

याचिकाकर्ता मधुमंगल शुक्ला ने न्यायालय में दाखिल याचिका में वृक्षों का कटान नहीं किए जाने के साथ-साथ बंदरों की बढ़ती जनसंख्या पर रोक और कुंभ मेला क्षेत्र को संरक्षित करने वाले मुद्दों को भी शामिल किया है। याचिका पर सुनवाई मंगलवार को होने की उम्मीद है।



गंगा दशहरा पर हजारों ने यमुना में डुबकी लगाई

श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया पर्व
आस्था : यमुना के घाटों पर उमड़ी भीड़, स्नान किया


मथुरा (AU 2010.06.22)। बृज में गंगा अवतरण का पर्व गंगा दशहरा सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही लोगों ने यमुना में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। जगह-जगह जल और शर्बतों की प्याऊ लगाईं गईं। युवाओं ने पतंगबाजी में जौहर दिखाए। बाजार में भंडारे लगाए गए। दिन भर पूड़ी और सब्जी वितरित हुईं।

भगवान श्री कृष्ण की नगरी में गंगा दशहरा पर्व के मौके पर यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। पालिका और प्रशासन की व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हुई। इस बीच धर्म प्रेमी लोगों ने जगह-जगह भंडारे और प्याऊ लगाकर पुण्य कमाया। उत्तर प्रदेश वाहन चालक परिचालक परिषद व तिलक द्वार व्यापारी संघ के तत्वाधान में भंडारे का आयोजन किया गया। नागरिक सुरक्षा संगठन द्वारा यमुना नदी में स्नान करने आए श्रद्धालुओं को नदी की गहराई के बारे में सचेत किया गया। इस अवसर पर नागरिक सुरक्षा के जेपी यादव, कृष्ण मोहन शर्मा, छोटे लाल, सुभाष सैनी, सुरेंद्र उपाध्याय, वृषभान गोस्वामी, जितेंद्र मणि, अजय नारायण गुप्ता, अभिषेक राठी, प्रमोद कुमार गुप्ता आदि मौजूद थे।

तरबूज खरीदने की होड़

दशहरा के पर्व पर शहर में जलेबी कचौड़ी और तरबूज विके्रताओं के यहां ग्राहकों की कतार लगी रही। मंडी में तरबूजे दो गुने भावों पर बिका। एक दिन पूर्व चार रुपये किलो बिकने वाला तरबूज दशहरा पर १० रुपये किलो तक पहुंच गया।



गंगा दशहरा : आचमन से कतराये, गोता खूब लगाये


मथुरा (DJ 2010.06.22)। पतित पावनी मां गंगा के अवतरण दिवस पर तपती जमीन श्रद्धालुओं का हौसला नहीं डिगा सकी। कामना लेकर यमुना में स्नान करने आये भक्तों ने आस्था का परचम फहराया। डुबकी लगाने में लोगों ने सुकून का अहसास किया। स्नान करने का सुबह शुरु हुआ सिलसिला देर सायं तक निरंतर चलता रहा।

भागीरथ के पूर्वजों का कल्याण करने के लिये देव लोक से पृथ्वी पर गंगा के उतरने का पर्व हर्ष, उल्लास एवं श्रद्धा के साथ मना। स्थानीय एवं देश के स्थानीय और सुदूर प्रांतों से आये सेवक समाज ने जगह-जगह शीतल और मीठे जल की प्याऊ लगाकर सेवा की। एक सप्ताह से पड़ रही तेज गर्मी से परेशान आम जन सूर्योदय से पूर्व ही स्नान के लिये घाटों की तरफ बढ़े चले आये। कलिंद गिरि से निकलने के बाद मथुरा में विश्राम के लिये रुकी मैया के प्राचीन घाट विश्राम घाट पर स्नान-पूजन के लिये लोगों की भारी भीड़ रही।

दूसरे घाटों पर भी खूब स्नान हुआ। गंगा स्नान, यमुना पान की मान्यता तथा प्रदूषण से दु:खी स्थानीय लोगों ने गंगा जल की बूंदें पानी में मिलाकर घरों में स्नान करके पर्व का पुण्य प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने यमुना स्नान के बाद द्वारिकाधीश, श्री कृष्ण जन्म भूमि समेत अन्य अनेक मंदिरों में जाकर अपने आराध्य देव और देवियों के दर्शन किये। प्रभु केशवदेव, राजाधिराज का इस अवसर पर विशिष्ट श्रंगार किया गया।



यमुना में डूबने से दो युवकों की मौत


मथुरा (DJ 2010.06.22)। गंगा दशहरा पर यमुनाजी में स्नान करते समय दो युवकों की डूब जाने से मौत हो गई। एक युवक तो अच्छा तैराक था। जबकि दूसरे युवक की शिनाख्त नहीं हो सकी है।

थाना गोविन्द नगर की बिड़ला मंदिर पुलिस चौकी अंतर्गत अहिल्यागंज के खेत में खम्बे के समीप महेश पुत्र सोनी निवासी लक्ष्मीनगर जयसिंहपुरा का शव पुलिस ने बरामद किया है। युवक की मौत यमुना नदी में डूबने से हुई बताई जा रही है। मृतक महेश तैराक था। वह रोज यमुना नदी तैरकर मंदिर दर्शन करने जाता था। सोमवार को भी वह यमुना में तैरकर लौट रहा था।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि विद्युत खम्बे के पास आकर वह गहरे पानी में डूब गया। कुछ लोगों का कहना था कि विद्युत खम्बा पानी में था, हो सकता है उस में करंट आ गया हो। मामले की जानकारी पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं थे।

वहीं दूसरी ओर थाना जमुनापार अंतर्गत पुराने रेलवे पुल के समीप यमुना किनारे एक 16 वर्षीय किशोर का शव बरामद किया गया है। किशोर की शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि किशोर की यमुना में नहाते समय डूबने से मौत हो गई। किसी तैराक ने शव को निकाल कर किनारे पर डाल दिया। किशोर ने काले रंग की पेंट पहन रखा थी।


इसलिये हैं यमुना में प्रदूषण और गंदगी


मथुरा (DJ 2010.06.22)। हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक सभी नाले टेप होने चाहिये, सीवेज पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चलने चाहिये। यमुना जल का बहाव बना रहना चाहिये, हाईकोर्ट की ओर से यमुना में गाय-भैंस व आवारों जानवरों के प्रवेश, कूड़ा-करकट व शव बहाने पर भी प्रतिबंध है।

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, यमुना किनारे सघन वृक्षारोपण जरूरी है। लेकिन ऐसा नहीं है। पुराने नाले तो टेप हैं, लेकिन यमुना किनारे तमाम कालोनियां विकसित होने से कई नये नाले अस्तित्व में आ गये हैं, जो टेप नहीं हैं, जाहिर है ये यमुना में गंदा जल उड़ेल रहे हैं। इसी तरह सीवेज पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बिजली संकट और जनरेटर न चलाये जाने से अक्सर बंद रहते हैं।

इसी तरह कैटिल कालोनी न बनने से गाय-भैंस भी यमुना में आते-जाते हैं। न केवल घरों का कूड़ा-करकट व अस्पताली कचरा धड़ल्ले से यमुना में बहा दिया जाता है, बल्कि आये दिन शव भी तैरते देखे जाते हैं। गोकुल बैराज बनने के बाद से यमुना का बहाव भी प्रभावित हुआ है। बहाव तेज न होने से गंदगी यमुना के नीचे ही बैठ जाती है। वृक्षारोपण तो नजर ही नहीं आता।



मथुरा में यमुना के घाटों की सफाई का काम जोरों पर

मथुरा (Hindustan, 2010.06.22) :मथुरा में इन दिनों यमुना नदी के घाटों की सफाई का कार्य जोरों पर है। गंगा दशहरा पर्व (21 जून) से पहले यह कार्य पूर्ण कर लिया जाए ताकि देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु मथुरा तथा वन्दावन के घाटों पर स्वच्छ जल में स्नान कर कर सकें।

मथुरा को प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए तैनात किए गए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी उठाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सहयोग कर रहे है। इस पावन कार्य के लिए पांच अधिकारियों ने अपने वेतन से 42 हजार रूपये की धनराशि दी है। बाकी अपेक्षित धनराशि भी स्थानीय उद्यमियों व जनसहयोग से जुटाई गयी है।

पिछले कई वर्षों से श्रीकृष्ण सेवा संस्थान गंगा दशहरा तथा यमुना छठ आदि पर्वों पर अपने स्तर से सफाई कराता चला आ रहा है। इस वर्ष भी यही तय किया गया था, लेकिन क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके सिंह के पहल पर उनके साथी सहायक अभियंता अवनीश कुमार तिवारी, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी अरविंद कुमार, अवर अभियंता सत्यविजय तथा वैज्ञानिक सहायक स्नेहलता ने भी अपने वेतन का एक निश्चित हिस्सा देकर यमुना शुद्धीकरण कार्य में अपना सहयोग देकर जन अभियान का रूप दे दिया।

यमुना सफाई अभियान से जुड़े कार्यकर्ता गोपेश्वर नाथ चतुव्रेदी ने बताया कि यह अभियान 20 जून तक जारी रहेगा। मथुरा के घाटों की सफाई के पश्चात वृन्दावन के केशीघाट आदि इलाकों की सफाई का कार्य किया जाएगा।



गणना : जनपद भर में मिले सिर्फ १८६ सारस

वन विभाग ने कराई राज्य पक्षी की गणना
हकीकत : सबसे अधिक ६२ सारस कोसी में पाए गए
शेष सारसों को बचाने के लिए प्रयास प्रारंभ


मथुरा (AU 2010.06.22)। वन विभाग द्वारा जनपद में कराई गई सारस गणना में कुल १८६ सारस पाए गए। इनमें वयस्क सारस बहुतायत में मिले जबकि बच्चे सारसों की संख्या काफी कम रही।

सबसे अधिक सारस नगर पंचायत क्षेत्र कोसी में और सबसे कम सारस नगर क्षेत्र मथुरा में मिले। सारस गणना कार्य में एनजीओ और पर्यावरणविद की सहायता भी ली गई। वन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष वन्य जीव-जन्तुओं की गणना कार्य चलाया जाता है। इसी क्रम में जिले में सारस गणना का कार्य विभाग द्वारा किया जा रहा था। सारस गणना कार्य में वन विभाग द्वारा ५० टीमों को गठित कर कार्य में लगाया गया।

इस दौरान स्वयं सेवी संस्थाओं, स्वयं सेविकों एवं पर्यावरणविद की भी गणना कार्य में सहायता ली गई। सारस गणना सर्वे में जनपद में कुल १८६ सारस पाए गए। इनमें १८३ वयस्क सारस एवं तीन बच्चे सारस मिले। कोसी में सबसे अधिक ६२ सारस पाए गए। मथुरा में केवल २३ सारस मिले। वन विभाग ने सारस गणना कार्य धीमी गति से किया। केवल एक दिन में जनपद में सारसों की गणना की गई।

कहां कितने सारस
  • कोसी ६२
  • मांट ४६
  • बल्देव ३१
  • गोवर्धन २४
  • मथुरा २३

खरीफ में उत्पादकता बढ़ाने पर

मथुरा (DJ 2010.06.22)। जनपद स्तरीय खरीफ गोष्ठी में सोमवार को उत्पादकता बढ़ाये जाने की नीति तय की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि किसान कम पानी में पकने वाली फसलों की बुवाई करें। उन्होंने विद्युत निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को समय पर बिजली पानी उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश देते हुए कहा कि खाद बीज की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कृषि अधिकारियों से कहा कि वैज्ञानिकों से सलाह मशविरा कर फसल सघनता को 158 प्रतिशत से बढ़ा कर 200 प्रतिशत किया जाए।

ब्लॉक मथुरा के सभा कक्ष में हुई जनपद स्तरीय खरीफ गोष्ठी को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी दिनेश चन्द्र शुक्ला ने कहा कि नहरों में पानी की कमी है। मानसून की स्थिति का पूर्वानुमान लगना मुश्किल है। इसलिए किसान कम पानी में पकने वाले फसलों की ही बुवाई करें। बीज और खाद की कोई कमी नहीं है।

अतिरिक्त बीज खाद की जरुरत होगी तो उसके भी इंतजाम किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे जरुरत की हिसाब से खाद लें। स्टॉक करने की उनको जरुरत नहीं है। संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर जोर देते हुए डीएम ने कहा कि अधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति प्रभावित होगी। इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।

उन्होंने विद्युत निगम के अधिकारियों से कहा कि किसानों को कम से कम दस बारह घंटे बिजली लगातार दी जाए। काट-काट कर बिजली देने से उनका भला नहीं होगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा कि नहरों को चलाने की जानकारी प्रत्येक किसान को दी जाए। इससे किसान उसी के अनुसार फसलों की बुवाई कर सकें।

किसानों की मांग पर उन्होंने कहा कि खारी पानी के क्षेत्र में मीठे पानी की व्यवस्था के लिए पाइप डालने में आ रही दिक्कतों से शासन को अवगत कराया जाएगा। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता से कहा कि किसानों को योजनाओं को लाभ समय पर दिए जाए। इससे पहले उप कृषि निदेशक बलवीर सिंह ने जिले में खाद बीज की उपलब्धता की जानकारी देते हुए सरकारी योजनाओं से किसानों को अवगत कराया।

कृषि वैज्ञानिक वाई के शर्मा और एएस गुजैल ने खरीफ की फसलों और उनमें लगने वाली बीमारी व कीड़ों से बचाव की जानकारी दी। लघु सिंचाई विभाग सहायक अभियंता महेन्द्र सिंह ने भी योजनाओं की जानकारी दी। गोष्ठी का संचालन करते हुए उप कृषि निदेशक शोध अशोक कुमार तेवतिया ने मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाये जाने और फसलों में होने वाली भूमि जनित बीमारियों की जानकारी देते हुए उसके बचाव बताए।



अतिक्रमण बंद नहीं किया तो सरकारी भवन गिरा देंगेः मुलायम

मैनपुरी (Hindustan, 2010.06.22) : समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रविवार को कहा कि जिला प्रशासन ने अगर अतिक्रमण हटाए जाने के नाम पर व्यापारियों की दुकानों को तोडना बंद नहीं किया कार्यकर्ता सरकारी भवनों को गिरा देंगें।

यादव ने मैनपुरी शहर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर व्यापारियों के प्रतिष्ठानों को गिराए जाने की आलोचना करते हुए जिला प्रशासन से अभियान तत्काल बंद करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन अतिक्रमण अभियान तत्काल बंद करें अन्यथा सपा कार्यकर्ता जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के बंगलों को तोडेगें। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर व्यापारियों की दुकानों को तोडा जा रहा है।

यादव ने कहा कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में पांच सदस्यीय एक दल शहर का मुआयना करेगा और व्यापारी नेताओं की दुकानों की हिफाजत करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिलाधिकारी मैनपुरी में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर दिखाए।

सपा प्रमुख में राज्य सरकार की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता नहीं चाहते कि मैनपुरी सैफई जैसा बने।


श्रीवृन्दावन-महिमामृत १.७१-७३

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अद्यैव मूर्ख चल सर्वमिदं विहाय
वृन्दावनाय सकलार्थसुरद्रुमाय ।
श्रीराधिकासुरतनाथविशुद्धभाव-
सत्रायमैव कुरु कृत्यसमाप्त्यपेक्षाम् ॥

अरे मूर्ख ! आज ही सब कुछ विषय सम्पदादि परित्याग कर सर्व वाञ्छाकल्पतरु श्रीराधासुरतनाथ के विशुद्ध भाव के सुलभ प्राप्ति स्थल इस वृन्दावन की यात्रा कर । जो आरब्ध कर रखे कर्मों की समाप्ति पर्यन्त और अपेक्षा न कर ॥१.७१॥



साधो शक्नोषि नो चेत् सकलमपि हठात् स्वप्नकल्पं विहातुं
तर्हि त्वं ध्याय वृन्दावनमनिशमथोपास्य वृन्दावनेशौ ।
तन्नामान्य् एव नित्यं जप सततमथो तत्कथां संशृणुष्व
श्रीमद्वृन्दावनस्थान् अथ परिचर भो भोजनाच्छादनाद्यैः ॥

हे साधो ! यदि तू इन समस्त स्वप्नकल्पित वस्तुओं का सहसा त्याग नहिं कर सकता, तो श्रीवृन्दावन के युगलकिशोर की उपासना करते हुए निरंतर श्रीवृन्दावन का ध्यान कर । प्रति क्षण उनके नामों का जप कर, निरंतर उनकी लीलाकथाओं को श्रवण कर, और सब वृन्दावन वासियों को भोजन वस्त्रादि देकर उनकी सेवा कर ॥१.७२॥



वस्तुः कोटिगुणं श्रुतं हि सुकृतं वासोऽन्नवासादिभिः
तीर्थे वासयितुः स्वयं हि तरति द्वौ तौ स यत् तारयेत् ।
प्रेमानन्दरसात्मधामनि परे वृन्दावनवासक-
स्त्वाश्चर्यां वृषभानुजाप्रियरतिं प्राप्नोत्यनायसतः ॥

जो वस्त्र-अन्न या वासस्थानादि के द्वारा तीर्थ (अर्थात् श्रीवृन्दावन) में किसीको वास कराता है, वह श्रीवृन्दावन में वास करने वाले से भी कोटिगुणा अधिक पुण्य का पात्र होता है, क्योंकि जो वास करता है, वह तो केवल स्वयं उत्तीर्ण होता है, और जो दूसरे को वास कराता है, वह अपना एवं जिसको वास कराता है, उसका उद्धार करता है । श्रेष्ठ प्रेमानन्द रसस्वरूप श्रीधाम वृन्दावन में जो दूसरे को वास कराता है, वह श्रीवृषभानु किशोरी के प्रिय श्रीकृष्ण में आश्चर्यमय रति को अनायास ही प्राप्त कर लेता है ॥१.७३॥

Sunday, June 20, 2010

2010-06-21 ब्रज का समाचार

यमुना का पान और गंगे में स्नान एक समान


श्रद्धा और उल्लास के साथ आज मनाया जाएगा ‘गंगा दशहरा पर्व’

त्योहार : सोरों स्थित विश्राम घाट पर उमड़ेगा भक्तों का रेला
सतरंगी पतंगों से रंगीन आसमान में होंगे अद्भुत नजारे


मथुरा (AU 2010.06.21)। गंगा दशहरा पर्व सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन ब्रज में सोरों स्थित गंगा और यमुना के विश्राम घाट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ेगा। सतरंगी पतंगों से रंगीन आसमान के अद्भुत नजारे आकर्षण का केंद्र होंगे। बाजारों में जलेबी-कचौड़ी, खरबूजे और तरबूजों की बिक्री चरम पर रहेगी।

कहावत है गंगा स्नान और यमुना का पान एक समान। मतलब यह है कि जो फल गंगा में स्नान करने से प्राप्त होता है, वही यमुना का पान करने से प्राप्त हो जाता है।

किवदंति है कि भगवान विष्णु ने जब वामन अवतार में राजा बली से तीन पैर भूमि मांगी थी तो नापने के दौरान दूसरा पग सत्यलोक में पहुंचा। इस पर ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से जल निकाल कर भगवान के पग धोए थे। यह जल पृथ्वी पर गिरा और गंगा का अवतरण हुआ।

धरती पर हिमालय की गोद से तीन भागों में भागीरथी, अलखनंदा और मंदाकिनी नदियों का संगम गढ़वाल स्थित देवप्रयाग में होता है। मथुरा में गंगा की सहचरी कृष्ण गंगा को गंगा ही माना जाता है। वर्तमान में इस नाम से मात्र घाट ही मौजूद है, वहीं ब्रज में गंगा सोरों तक आती है। यहां ब्रजघाट पर श्रद्धालुओं में स्नान की होड़ सी मचती है।

पतंगबाजी का दंगल आज

गंगा दशहरा पर पतंगबाजी को लेकर शहर में गजब का उत्साह है। बाजारों में भी पतंगों की दुकानें सजी हुई हैं। सुबह से जमकर पतंगबाजी की योजना है। त्यौहार पर पतंग से पेच लड़ाने का मौका कोई भी छोड़ना नहीं चाह रहा। यही नहीं बाजार भी पतंग के इस पर्व के लिए तैयार बैठा है। रंग-बिरंगी पतंगे सभी को लुभा रही हैं। चाइनीज पतंगों का क्रेज सबसे अधिक देखा जा रहा है। इसके अलावा परंपरागत रूप से बासी कागज से तैयार पतंगे भी खूब बिक रही हैं। मार्केट में पतंगे दो रुपये से लेकर ३० रुपये तक में उपलब्ध हैं।

बजेंगे यह गाने

दशहरा पर छत्तों पर पतंगबाजी के साथ डेक भी खूब बजते हैं। चिरपरिचित पतंगों से जुड़े गाने बजाना सभी को पसंद आता है। इस बार भी पतंगबाजी के गीत जमकर बजेंगे। इन गानों की रहेगी धूम।

  • चली चली रे पतंग मेरी चली रे
  • ढ़ील दे दे ढील दे रे भैया
  • आजा-आज नीले आसमान के तले जय हो

बच्चों का रखें ध्यान

पतंगों के इस पर्व पर जरा सी चूक बड़ी दुर्घटना को जन्म भी दे सकती है खासतौर पर बच्चों के मामले में सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है। छत्तों पर पतंगों के पीछे भागते बच्चे किसी न किसी हादसे का शिकार होते आए हैं। थोड़ी सी सावधानी अपनाने से त्योहार का मजा दोगुना हो सकता है।



गंगा दशहरा का पर्व आज, तैयारी पूरी


यमुना पर होंगे सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
प्रबंध : नगर पालिका, पुलिस और निजी संस्थाएं सतर्क
हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है गंगा दशहरा


वृंदावन (AU 2010.06.21)। हिंदुओं की आस्था का प्रतीक गंगा दशहरा का पर्व सोमवार को मनाया जाएगा। इस पावन पर्व पर यमुना स्न्नान के लिए उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के दृष्टिगत नगर पालिका, निजी संस्थाओं और पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

वृंदावन में भले ही ज्यादातर मां यमुना के भक्त हों लेकिन यहां गंगा भक्तों की भी कमी नहीं है। प्रातःकाल से सुदूर क्षेत्रों से आए श्रद्धालु स्नानकर पुण्यलाभ अर्जित करते हैं। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि लोगों की सुरक्षा के लिए बांके बिहारी पुलिस चौकी और रंगजी चौकी की पुलिस को केशीघाट, शृंगारवट, जुगलघाट एवं चीरघाट पर तैनात किया जाएगा। वहीं गोताखोरों भी मुस्तैद किए गए हैं।

मंदिरों में फूल बंगले सजेंगे

गंगा दशहरा के पावन पर्व पर नगर के विभिन्न मंदिरों में भव्य फूल बंगले, छप्पन भोग और भजन संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। गंगा दशहरा के अवसर पर जहां श्रद्धालु दान कर पुण्य अर्जित करेंगे, वहीं बच्चे और युवा पतंगबाजी कर अपने शौक को पूरा करेंगे। दशहरा के कारण नगर में पतंगों की दुकानों पर भीड़ देखी जा सकती है।

इस पावन पर्व पर नगर के अठखंभा स्थित गंगा मंदिर में श्री गंगा लोक कल्याण सेवा संस्थान के तत्वावधान में भव्य फूल बंगले का आयोजन किया जाएगा। सेवायत विनय गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में प्रातः वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन अर्चन सायंकाल विशेष शृंगार दर्शन एवं फूल बंगले का आयोजन होगा। उधर, नगर के ठाकुर राधावल्लभ मंदिर, राधा रमण मंदिर, ठाकुर श्रीबांके बिहारी मंदिर, यशोदा नंदन आदि मंदिरों में भी भव्य फूल बंगला और भजन संध्या के आयोजन होगा।



रेत और कीचड़ लगाकर विरोध प्रदर्शन किया


यमुना में गंदगी देख नाराजगी जताई
गंगा दशहरा : पर्याप्त मात्रा में स्नान योग्य जल नहीं होने से रोष
जिला मनरेगा निगरानी समिति ने किया प्रदर्शन


वृंदावन (AU 2010.06.21)। गंगा दशहरा पर्व होने के बावजूद यमुना नदी में पर्याप्त मात्रा स्नान योग्य जल न होने से नगर के विभिन्न संगठनों में रोष व्याप्त है। शुक्रवार की सुबह जिला मनरेगा निगरानी समिति के कार्यकर्ताओं ने यमुना में जल न होने के अभाव में यमुना में व्याप्त गंदगी को शरीर पर लगाकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

समिति के चेयरमैन ताराचंद गोस्वामी ने कहा कि वृंदावन की विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान है। नगर को उसकी पहचान दिलाने में यमुना का योगदान है। इन दिनों प्रशासन के उदासीन रवैये से यमुना की स्थिति दयनीय बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी यमुना प्रदूषण को दूर करने की आड़ में करोड़ों रुपये हड़प रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा में अब एक दिन ही शेष रह गया है, इसके बावजूद यमुना में पर्याप्त जल ने होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच रही है।

लोकेश शर्मा ने कहा कि यमुना में व्याप्त प्रदूषण को देखकर श्रद्धालु उसमें स्नान तो दूर आचमन करने में भी करता रहा है। ऐसे में दशहरा पर्व पर यमुना स्नान कैसे होगा। इस अवसर पर धर्म सिंह, श्यामसुंदर, बिजली बघेल, फकीरा आदि ने भी नाराजगी जताई।

फोटो-पी-२, कैप्शन- यमुना में व्याप्त गंदगी पर नदी किनारे की मिट्टी को शरीर पर लगाकर विरोध करते मनरेगा निगरानी समिति के सदस्य।



पारे ने तोड़ा पतंगबाजों का हौसला


मथुरा (DJ 2010.06.21)। दशहरा पर गर्मी तो हर बार रहती है, पर इस बार खिसियाई सी धूप और सर ढक कर सो गयी हवाओं ने पतंगबाजों को भी मुंह छिपाने के लिए मजबूर कर दिया, सो दो महीने पहले से शुरू होने वाली पतंगबाजी शनिवार छोटे दशहरा को भी आसमान नहीं ढक सकी। सोमवार को शायद यह तिलिस्म टूट जाए।

ज्येष्ठ मास के सूरज देव से निकलने वाला पारा पतंगबाजी की परंपरा पर कभी हावी नहीं हो सका है। डेढ़-दो महीने पहले से आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें टीकाटीक दोपहरी को भी मात देती रही हैं, पर इस बार तो नजारा ही बदला हुआ है। रविवार को छोटा दशहरा होने के बावजूद सुबह के समय आसमान खाली हाथ था तो दोपहर में बद कर पेच लड़ाने वाले न छतों पर नजर आ रहे थे और न आसमान से बात करती पतंगें एक-दूसरे को मांजे से अलग कर बेगाना बनाने को बेताब थीं। शाम के समय भी मुट्ठी भर पतंग उड़ीं।

पतंगबाजी के पुराने शौकीन भी थोड़ी संख्या में नजर आते रहे, जबकि हाईस्कूल-इंटर के परीक्षा परिणाम आने के बाद छतों पर दिन भर पतंग उड़ाने में मशगूल रहने वाले बालक गायब दिखे। दशहरा पर एक दिन पहले भी आसमान नापने की उनकी हसरतों ने उड़ान नहीं भरीं।

हालांकि पिछला सीजन अच्छा जाने के कारण इस बार पतंग साजों ने अपनी दुकानें पूरी तरह सजा रखी हैं। कई ने तो दो-दो मीटर चौड़ी पतंगें दुकानों पर सजाकर लोगों को आकर्षित करने का प्रयास भी किया है, लेकिन इस बार उनकी बिक्री पहले की तुलना में काफी गिरी है। अब उन्हें दशहरा से ही उम्मीद है।

इस बीच रविवार को पतंग साजों की दुकानें क्रेताओं से भरी रहीं। बालक और युवाओं ने काफी खरीददारी भी की, लेकिन उनका मानना है कि केवल परंपरा का निर्वहन ही किया जा रहा है। गंगा दशहरा पर पतंगबाजी के लिए मशहूर ब्रज में अब केवल सोमवार का ही मेला रह गया है। शौकीन लोगों का कहना है कि इस बार हवाओं ने भी धोखा दिया है। पारे ने लगातार दबाव बनाए रखा और जैसा मौसम सप्ताह भर पहले तक था, उससे उम्मीद बंधी थी, लेकिन आसमान साफ होने से कइयों को बदे पेच कैंसिल करने पड़े हैं। इसके बावजूद दशहरा पर वे पतंगबाजी जरूर करेंगे। संभंव है कि मौसम ठीक होने पर दशहरा बाद शर्तिया पेच हों।



चिलचिलाती धूप ने लोगों को घरों में कैद किया


पारा ४४ और रात का २८ डिग्री रहा

मथुरा (DJ 2010.06.21)। मौसम ने एक बार फिर तल्खी दिखानी शुरू कर दी है। पारा ४४ डिग्री तक उछल गया है। रविवार को तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते लोग घरों में ही कैद होकर रह गये। सड़कों पर सन्नाटा रहा तो बाजार सूने नजर आये। छुट्टी वाले दिन बच्चों ने घरों में टीबी और कंप्यूटर पर गेम खेलकर ही समय बिताया।

सूर्य नारायण के तेवर एक बार फिर प्रखर हो उठे है। रविवार प्रातः से ही आसमान से सूर्य की किरणें आग बरसाने लगीं। बढ़ती गर्मी और उमस के चलते लोग बिलबिला उठे है। छुट्टी के दिन गर्मी की प्रचंडता के चलते लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सड़कों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। बच्चे भी मन मसोस कर घरों में कैद रहे।

रविवार को दिन का तापमान ४४ डिग्री और वहीं रात में २८ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम में आर्द्रता ५५ फीसदी रही।



हैंडपंप का आरक्षण रख रहा प्यासा


मथुरा (DJ 2010.06.21)। सोमवार को गंगा दशहरा है यानि पवित्र स्नान का दिन है और पारा उबल रहा है। यमुना में गंदा पानी बह रहा है तो बस्ती-बस्ती पेयजल के लिए त्राहि मची हुई है। हैंडपंपों की रिबोरिंग और नए हैंडपंपों की स्थापना आरक्षण के झंझट में अटक गयी है।

मथुरा नगर पालिका पेयजल उपलब्ध कराने के भरसक प्रयास कर रही है। आए दिन नए नलकूप वार्डो में लग रहे हैं, पर पेयजल किल्लत अभी काबू में नहीं आ सकी है। डिमांड के अनुरूप सप्लाई देने में अभी दर्जनों नलकूपों की जरूरत तो है ही, पर जिन छोटी बस्तियों में हैंडपंप से गुजारा चल रहा था, वहां आधी से ज्यादा गर्मी पानी की आस में कट गयी है।

शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने निकायों की आवश्यकता अनुसार हैंडपंपों के रिबोर व नयों के लिए डिमांड भेजी थी। डिमांड पर पैसा व स्वीकृति आए हुए एक महीना हो गया है। दावा किया गया था कि दोनों कार्य पंद्रह जून तक हो जाएंगे, पर एक की भी अभी तक शुरूआत नहीं हो सकी है।

बताया गया है कि नगर पालिका ने पचास नए हैंडपंप व 120 रिबोर की सूची जल निगम की निर्माण खंड शाखा को भेजी थी, लेकिन इसमें आरक्षण का लोचा हो गया। शासन का निर्देश है कि रिबोरिंग व नए की स्थापना में दलित व मलिन बस्तियों का ख्याल रखा जाए और पचास फीसदी इन बस्तियों में लगाए जाएं, लेकिन पालिका की लिस्ट में इस कोरम को पूरा नहीं किया गया। फलस्वरूप जल निगम ने उक्त सूची पालिका को लौटा दी।

बताया गया है कि बीस दिन से पालिका स्तर पर ही सूची लंबित है, लेकिन इसका निस्तारण अभी तक नहीं किया गया है। दलित व मलिन बस्तियों में पचास फीसदी का हिस्सा देकर सूची वापस जल निगम को नहीं दी गयी है। इस वजह से एक पुण्य कार्य, जिससे इन बस्तियों के साथ-साथ अन्य इलाकों के नागरिकों को भी पेयजल मिल सकता था, वे भी पानी की प्यास लेकर अभी भी भटक रहे हैं।



नलकूपों से मानसी गंगा को भरने पर मंथन किया


मुड़िया पूर्णिमा मेले से पूर्व विभागों को निर्देश

सभा: अडींग के ऊपर खेतों से रास्ता निकालने पर विचार
गोवर्धन में ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ तेज करें


गोवर्धन (AU 2010.06.21)। प्रशासन ने मुड़िया पूर्णिमा मेले की व्यवस्थाओं पर मंथन शुरू कर दिया है। समस्त संबंधित विभागों से मेले के लिए बजट प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि शासन से जल्द धन मुहैया हो सके। इस बार श्रद्धालुओं को मानसी गंगा में शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए इसे ट्यूबवेलों के जरिए भरने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए जलनिगम की मानसी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलक्ट्रेट सभाकक्ष में एडीएम (कानून व्यवस्था) अवधेश तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुड़िया पूर्णिमा मेले की रूपरेखा पर मंथन किया गया। राजकीय मेले के दौरान सुविधा हो इसके लिए विभागों को गोवर्धन में ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

यही नहीं, इस बार मानसी गंगा को आगरा कैनाल के बजाए ट्यूबवेलों के माध्यम से भरने की योजना तैयार की गई। इसके लिए तीन ट्यूबवेल लगाने को कहा गया है। बैठक में विधायक पूरन प्रकाश ने अडींग में बाईपास बनाने के प्रस्ताव पर अधिकारियों से जानकारी ली। विधायक ने अधिकारियों से कहा कि वे अडींग के ऊपर होकर खेतों से रास्ता निकालें। उन खेतों को छोड़ दें जिनकी चकबंदी में स्टे लगा हुआ है।

जलनिगम की प्रदूषण नियंत्रण इकाई को मानसी गंगा के शुद्धीकरण का काम तेजी से करने को कहा गया। इस मौके पर रोडवेज बस, विद्युत व्यवस्था, सफाई, कानून व्यवस्था समेत अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मंथन किया गया।

नगर पंचायत गोवर्धन को परिक्रमा मार्ग में सफाई के विशेष इंतजाम करने को कहा गया। सभी संबंधित अफसरों को कार्ययोजना तैयार कर मेले की व्यवस्थाएं करने की नसीहत दी गई। इस मौके पर पीडब्ल्यूडी, विप्रा, विद्युत, नगर पंचायत ईओ समेत अन्य संबंधित विभागों के अफसर मौजूद थे।



बरसात से पहले नहीं बन पाएंगे ग्रामीण संपर्क मार्ग


मथुरा (DJ 2010.06.21)। ग्रामीणों को अभी टूटी फूटी सड़कों से ही गुजरना पड़ेगा। बरसात से पहले ग्रामीण संपर्क मार्गो की मरम्मत नहीं हो पाएगी। इनकी बदहाली दूर करने को शासन ने पीडब्ल्यूडी को धनराशि नहीं दी है।

ग्रामीण संपर्क बदहाल स्थिति में है। मथुरा-सौंख मार्ग स्थित ऊंचा गांव से नगरी, रामपुर होते हुए भरतपुर मार्ग को जोड़ने वाली सड़क का एक बड़ा हिस्सा पिछले करीब चार-पांच साल से क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है।

दूसरी तरफ ऊंचागांव, बोरपा, शाहपुर और आगरा कैनाल के किनारे होकर मथुरा-गोवर्धन मार्ग को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील हो गया है। गांव उस्फार से तारसी होकर भरतपुर को जोड़ने वाला मार्ग भी वर्षो से टूटा फूटा पड़ा हुआ है। इस मार्ग पर तो दो से तीन फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। मथुरा-राया मार्ग से गांव दूधाधारिन होकर पानी गांव तक जाने वाला संपर्क मार्ग का हाल बेहाल है।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हरेश ठैनुआ और महासचिव बच्चू सिंह ने बताया कि मार्ग का निर्माण पिछले साल कराया गया था, लेकिन घटिया सामग्री का इस्तेमाल किए जाने से उम्र से पहले ही मार्ग बदहाल हो गया। औहवा, विधौनी, सिंहावन, जरारा, सिंकदरपुर, भदनवार को सुरीर से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग भी अब चलने के काबिल नहीं रहे। टैंटीगांव से सुरखुरू, खायरा से बदन पुर, लोहई, झंडा तिराहे से भालई, खायरा से मोदीपुर संपर्क मार्ग की बदहाल हो गए हैं। इनके अलावा सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गो की भी यही स्थिति बताई जा रही है। इन सड़कों पर निकलने में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दस बीस मिनट का रास्ता भी एक-एक घंटे में तय हो पा रहा है। पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड और निर्माण खंड में पड़ने वाले बदहाल ग्रामीण संपर्क मार्गो की मरम्मत का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। बताया गया है कि सात साल पुरानी इक्कीस सड़कों की मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी ने 237 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को पिछले महीने भेजा था। शासन ने धनराशि तो स्वीकृत कर दी, लेकिन अभी तक उसका आवंटन नहीं किया है। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता संतराम ने बताया कि अभी धनराशि नहीं मिली है। धनराशि आने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। मगर जानकारों का मानना है कि धनराशि हफ्ता दस दिन देर से मिली तो बरसात से पहले ग्रामीण संपर्क मार्गो की बदहाली दूर नहीं हो पाएगी। बारिश शुरू होते ही निर्माण कार्य भी नहीं होगा। इससे साफ जाहिर है कि ग्रामीणों को अभी टूटी-फूटी सड़कों से ही गुजरना पड़ेगा।



प्यास बुझाने को दांव पर लगाई जिंदगी


PIC2 मथुरा (DJ 2010.06.21)। रामपुर ग्राम पंचायत के मजरा नगरी के ग्रामीणों ने प्यास बुझाने के लिए अपनी जिंदगी को ही दांव कर लगा दिया है। अंडर ग्राउंड वाटर टैंक में स्टोरेज किए जा रहे पानी से आठ-दस दिन तक प्यास बुझाई जा रही है। लंबे समय तक इस पानी का इस्तेमाल पेट संबंधी बीमारियों को जन्म दे सकता है।

जनपद के ब्लॉक मथुरा की ग्राम पंचायत रामपुर के मजरा नगरी में खारी पानी है। ग्रामीणों ने मीठे पानी की व्यवस्था के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के दरवाजों पर दस्तक दी। तब कहीं जाकर पूर्व सांसद मानवेन्द्र सिंह ने गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर मीठे पानी में एक नलकूप की स्थापना कराई, लेकिन पाइप लाइन डालने के लिए आज तक धनराशि आवंटित नहीं हो सकी।

चारों तरफ से जब ग्रामीणों की उम्मीद टूट गई तो उन्होंने अपनी प्यास बुझाने के लिए नया तरीका निकला लिया। गांव में अंडर ग्राउंड वाटर टैंकों का ग्रामीणों ने अपने घरों में निर्माण करना शुरू कर दिया। करीब पचास से ज्यादा परिवारों ने गांव में अंडर ग्राउंड टैंक बना लिए हैं। सात-आठ हजार रुपये खर्च कर बनाए गए अंडर ग्राउंड वाटर टैंकों को तीन सौ रुपये में एक बार टैंकर से भरा जा रहा है। इसी पानी को ग्रामीण आठ-दस दिन तक पी रहे हैं। लगातार टैंक में स्टोरेज किए गए पानी से ग्रामीणों को क्या बीमारियां लग जाएंगी। इसका उनको कतई ज्ञान नहीं है।

ग्राम प्रधान मंगल सिंह ने बताया कि गांव और उसके आसपास खारी पानी है। पीने के लिए पानी की किल्लत तो बनी हुई है साथ ही सिंचाई के लिए भी नहरी पानी नहीं मिल पा रहा है। खरीफ की फसल बारिश पर निर्भर है। यदि सितम्बर-अक्टूबर में बारिश हो जाए तो रबी की फसल बोई जा सकती है। गोकुल सिंह ने बताया कि स्कूली छात्रों के लिए करीब तीन किलोमीटर दूर से पाइप लाइन डालकर मीठे पानी की व्यवस्था की जा रही है। कुछ लोगों ने निजी पाइप लाइन भी डाल रखी है। इनसे पीने के पानी के साथ-साथ खेतों की सिंचाई भी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि पाइप लाइन का पानी भी कई-कई दिन तक पीने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पीतम सिंह ने बताया कि गरीबों के लिए पानी की सबसे बड़ी समस्या है। उनको पानी के स्टोरेज के लिए टैंकर बनाने पड़े हैं और वासी पानी पी कर प्यास बुझानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि प्राइमरी स्कूल में भी मीठे पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। छात्र अपने घर से ही पानी लेकर स्कूल जाते हैं।

फिजीशियन डॉ. वीके गर्ग का मानना है कि कई-कई दिन तक वाटर टैंक में पानी स्टोरेज किए जाने से उसमें बैक्टीरिया पनप जाएंगे। काई भी पानी में लग जाएगी। खुले टैंक में कीड़े भी गिर सकते हैं। इस स्थिति में टैंक का पानी दूषित हो जाएगा। यदि ग्रामीण लगातार इस पानी को पीते रहे तो वे उल्टी, दस्त, पेचिश और टाइफाइड जैसी बीमारियों के शिकार हो जाएंगे। इन बीमारियों से बचने के लिए बिना बिजली से चलने वाले वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। इससे पानी शुद्ध हो जाएगा।



गोकुल बर्बाद कर रहे गोकुल वासी


मथुरा (DJ 2010.06.21) । नागरिक सभ्यता की जानकारी न होना भी किसी शहर व कस्बे के लिए दुखदायी होता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गोकुल जैसे तीर्थ की छवि नहीं सुधर पा रही है तो इसके लिए स्थानीय लोग भी दोषी हैं।

ऐसी ही कुछ शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी को अवगत कराया गया है। कुछ जागरुक लोगों ने अवगत कराया है कि गोकुल का ड्रेनेज सिस्टम ठीक हो सकता है, बशर्ते कि इसे अवरोधित न किया जाए। कुछ असरदार लोगों ने गोकुल बस स्टेंड से नगर पंचायत कार्यालय तक बने नए नाले व नगर पंचायत से बॉस फाटक तक अतिक्रमण कर लिए हैं, जबकि कुछ ने स्थायी निर्माण करा लिया है। अगर उक्त अतिक्रमण हटवा लिए जाएं तो कस्बे के ड्रेनेज सिस्टम में काफी सुधार हो सकता है।

बताया गया है कि गोकुल बैराज पर निजी संस्था द्वारा प्रवेश द्वार का निर्माण मानकों के खिलाफ एवं संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किए बगैर ही किया जा रहा है। मानक विपरीत इसके पूरा होने पर कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। इसी प्रकार गोकुल पेयजल पुनर्गठन योजना में अनियमितता बरती जा रही है।

बताया है कि गोकुल स्थित प्राचीन एवं धार्मिक कुंड पतित पावन कुंड पर स्थानीय दबंग द्वारा साठ फीसदी अतिक्रमण किया जा चुका है। इस वजह से इसकी सुंदरता नष्ट हो रही है। इस कुंड पर शासन 22 लाख रुपए का व्यय कर सुंदरीकरण करा चुका है, लेकिन यह किसी काम का नहीं रह गया है।

इसी प्रकार गोकुल परिक्रमा मार्ग अतिक्रमण से घेर लिया गया है और घाटों पर भी अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। गोकुल नगर पंचायत के विकास कार्य नेताओं व अधिकारियों के संबंधित लोग करा रहे हैं, जो मानकों का ख्याल नहीं रख रहे। बैंक आफ बड़ौदा के सामने मंदिर मुख्य मार्ग पर छोटे वाहनों का जमावड़ा रहता है, इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


तृप्ति वो ही प्याऊ वाली

तृप्ति वो ही प्याऊ वाली


लेखक: डॉ. महेश परिमल
Source: अभिव्यक्ति हिन्दी

समाज में कई परंपराएँ जन्म लेती हैं और कई टूट जाती हैं। परंपराओं का प्रारंभ होना और टूटना विकासशील समाज का आवश्यक तत्त्व है। कुछ परंपराएँ टूटने के लिए ही होती हैं पर कुछ परंपराएँ ऐसी होती हैं, जिनका टूटना मन को दु:खी कर जाता है और परंपराएँ हमारे देखते ही देखते समाप्त हो जाती हैं, उसे परंपरा की मौत कहा जा सकता है।

कुछ ऐसा ही अनुभव तब हुआ, जब पाऊच और बोतल संस्कृति के बीच प्याऊ की परंपरा को दम तोड़ते देख रहा हूँ। पहले गाँव, कस्बों और शहरों में कई प्याऊ देखने को मिल जाते थे। जहाँ टाट से घिरे एक कमरे में रेत के ऊपर रखे पानी से भरे लाल रंग के घड़े होते थे। बाहर एक टीन की चादर को मोड़कर पाइपनुमा बना लिया जाता था। पानी कहते ही भीतर कुछ हलचल होती और उस पाइपनुमा यंत्र से ठंडा पानी आना शुरू हो जाता था। प्यास खत्म होने पर केवल अपना सर हिलाने की जरूरत पड़ती और पानी आना बंद।

ज़रा अपने बचपन को टटोलें, इस तरह के अनुभवों का पिटारा ही खुल जाएगा। अब यदि आपको उस पानी पिलाने वाली बाई का चेहरा याद आ रहा हो, तो यह भी याद कर लें कि कितना सुकून हुआ करता था, उसके चेहरे पर। एक अंजीब सी शांति होती थी, उसके चेहरे। इसी शांति और सुकून को कई बार मैंने उन माँओं के चेहरे पर देखा हैं, जब वे अपने मासूम को दूध पिलाती होती हैं।

कई बार रेल्वे स्टेशनों पर गर्मियों में पानी पिलाने का पुण्य कार्य किया जाता। पानी पिलाने वालों की केवल यही प्रार्थना होती, जितना चाहे पानी पीयें, चाहे तो सुराही में भर लें, पर पानी बरबाद न करें। उनकी यह प्रार्थना उस समय लोगों को भले ही प्रभावित न करती हों, पर आज जब उन्हीं रेल्वे स्टेशनों में एक रुपए में पानी का छोटा-सा पाऊच खरीदना पड़ता है, तब समझ में आता है कि सचमुच उनकी प्रार्थना का कोई अर्थ था।

मुहावरों में 'पानी पिलाना' का अर्थ भले ही मजा चखाना होता हो, पर यह सनातन सच है कि पानी पिलाना एक पुण्य कार्य है। अच्छी भावना के साथ किसी प्यासे को पानी पिलाना तो और भी पुण्य का काम है। अधिक दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। कार्यालयों में उस चपरासी या पानी वाली बाई को ही देख लें, जो बहुत ही इत्मीनान से लोगों को पानी पिलाने का पुण्य कार्य करते हैं। हालाँकि वे इस कार्य को अपनी डयूटी समझते हैं। पर यह सच है कि जब वे हमें गिलास में पानी देते हैं, तब उनके चेहरे पर एक सुकून होता है। वह सुकूनभरा चेहरा अब आपको और कहीं नहीं मिलेगा।

समय के साथ सब कुछ बदल जाता है, पर अच्छी परंपराएँ जब देखते ही देखते दम तोड़ने लगती है, तब दु:ख का होना स्वाभाविक है। पुरानी सभी परंपराएँ अच्छी थीं, यह कहना मुश्किल है, पर कई परंपराएँ जिसके पीछे किसी तरह का कोई स्वार्थ न हो, जिसमें केवल परोपकार की भावना हो, उसे तो अनुचित नहीं कहा जा सकता। उस प्याऊ परंपरा में यह भावना कभी हावी नहीं रही कि पानी पिलाना एक पुण्य कार्य है। मात्र कुछ लोग चंदा करते और एक प्याऊ शुरू हो जाता। अब तो कहीं-कहीं प्याऊ के उद्धाटन की खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं, पर कुछ दिनों बाद वह या तो पानी बेचने का व्यावसायिक केंद्र बनकर रहा जाता है या मवेशियों का आश्रय स्थल बन जाता है.

कल्पना करें, कोई राहगीर दूर से चलता हुआ किसी गाँव या शहर में प्रवेश करता है, उसे प्यास लग रही है। वह पानी की तलाश में है, तब उसे कहीं प्याऊ दिखाई देता है। जहाँ वह छककर ठंडा पानी पीता है, उसकी आत्मा ही तृप्त हो जाती है। वह आगे बढ़ता है, बहुत सारी दुआएँ देकर। यही दुआएँ जो उसके दिल से निकली, कभी बेकार नहीं गई। आज एक गिलास पानी भी बड़ी जद्दोजहद के बाद मिलता है। ऐसे में कहाँ की दुआ और कहाँ की प्रार्थना?

देखते ही देखते पानी बेचना एक व्यवसाय बन गया। यह हमारे द्वारा किए गए पानी की बरबादी का ही परिणाम है। आज भले ही हम पानी बरबाद करना अपनी शान समझते हों, पर सच तो यह है कि यही पानी एक दिन हम सबको पानी-पानी कर देगा, तब भी हम शायद समझ नहीं पाएँगे, एक-एक बूँद पानी का महत्व। पानी पिलाने की संस्कृति के साथ ही संवेदना की एक काव्यात्मक अनुभूति भी शायद सदा के लिए मिट जाएगी, तृप्ति की वह अनुभूति जिसके लिए कह गया है-

प्रकृति जागर
भरे गागर,
दूर तक फैला हुआ है
रेत सागर
ढूँढती है दृष्टि खाली
तृप्ति वो ही प्याऊ वाली