Wednesday, August 25, 2010

श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.६२-६४


बरसाना (Photo from Lake of Flowers).




प्रसीद श्रीवृन्दावन वितनु मां स्वैकतृणकं
यदङ्घ्रिस्पर्शात्युत्सवमनुभवेत्त्वय्युदितयोः ।
तयोर्गौरश्यामाद्भुतरसिकयूनोर्नवनव
स्मरोत्कण्ठाभाजोर्निभृतवनवीथ्यां विहरतोः ॥
हे वृन्दावन ! अपना एकमें क्षुद्र तृण कृपाकर मुखे दान करो, जो तुम्हारे बीच विराजमान नव नव कामोत्कण्ठयुक्त, निर्जन वनपथ में विहार करने वाले उन गौरश्यामवर्ण अद्भुत रसिकयुगल के चरणकमलों के स्पर्श का सुख अनुभव करता रहता है ॥३.६२॥




न कालिन्दीमिन्दीवरकमलकह्लारकुमुदा
दिभिर्नित्योत्फुल्लैर्मधुपकुलझङ्कारमधुरैः ।
सहालिश्रीराधामुरलिधरकेलिप्रणयिनीम्
अपश्यन् यो वृन्दावनपरिसरे जीवित स किम् ॥
नीलोत्पल, कमल, कह्लार और कुमुदिनी आदि पुष्पों से प्रफुल्लित, भंवरों की गुञ्जार से मधुर एवं जिसमें सखियों के सहित श्रीराधा-मुरलीधर केलि करते हैं, ऐसी श्रीयमुना जी के, श्रीवृन्दावन में जो व्यक्ति विना दर्शन किये जीवित रहता है, उसे क्या लाभ ? अर्थात् उसका जन्म वृथा है ॥३.६३॥




वृन्दारण्यमिलत्कलिन्दतनयां वन्देऽरविन्देन तां
नानारत्नमयेन नित्यरुचिरामानन्दसिन्धुस्रुताम् ।
रम्यां चान्यविचित्रदिव्यकुसुमैर् गम्यां न सम्यक् त्रयी
मौलीनामपि मत्तषट्पदखगश्रेणीसुकोलाहलाम् ॥
श्रीवृन्दावन से संयुक्त उस श्रीयमुना जी को मैं नमस्कार करता हूं, जो अनेक प्रकार के रत्नमय कमलों से नित्य मनोहर हो रही है, एवं आनन्द समुद्र की कन्या है, अन्योन्य विचित्र दिव्य कुसुमों से सुशोभिता है, ऋक्, साम, यजु वेदत्रय शिरोमणि भी जिसकी सम्यक् महिमा को नहीं जान सकते एवं मत्त मधुकरों तथा विविध पक्षियों के कोलाहल से मुखरित हो रही है ॥३.६४॥


Tuesday, August 24, 2010

श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.५९-६१


राधाकी मानलीला (बरसाना) (Photo from Lake of Flowers).




स्त्रीपुत्रदेहगेहद्रविणादौ मैव विश्वसीर्मूढ ।
क्षणमपि नैव विचारय चारय वृन्दारण्यमुखं चरणौ ॥
हे मूर्ख! स्त्री पुत्र देह घर सम्पत्ति आदि का विश्वास मत कर, एक क्षण भी विचार न करके श्रीवृन्दावन की ओर पांव बढ़ा ॥३.५९॥




राधाकृष्णविलासरञ्जितलतासाद्मलिपद्माकर-
श्रीकालिन्द्तटीपटीरविपिनाद्यद्रीन्द्रसत्कन्दरम् ।
जीवातुर्मम नित्यसौभगचमत्कारैकधाराकरं
नित्यानङ्कुशवर्धमानपरमाश्चर्यर्द्धि वृन्दावनम् ॥
श्रीराधा-कृष्ण के विलास से रञ्जित लतागृहों एवं तडा़ों से, श्रीकालिन्दी के किनारों पर स्थित चन्दन-वनादिकों से, एवं श्रीगिरिराज की सुन्दर सुन्दर गुफाओं से जो सुशोभित है, जो एकमें सौभाग्य एवं चमत्कार की वर्षा करता है, तथा जो नित्य स्वतन्त्र रूप से वर्धनशील परम आश्चर्य की समृद्धि से पूर्ण है, ऐसा श्रीवृन्दावन मेरी जीवन औषध है ॥३.६०॥




शरीरं श्रीवृन्दावनभुवि सदा स्थापय मनः
सदा पार्श्वे वृन्दावनरसिकयोर्न्यस्य भजने ।
वचस्तत्केलीनामनवरतगाने रमय तत्
कथापीयूषादौ श्रवणयुगलं प्रीतिविकलम् ॥
शरीर को सदा श्रीवृन्दावन भूमि में स्थिर रख, मनको श्रीवृन्दावन रसिकयुगल श्रीराधा-कृष्ण के निकट भजन में लगा, उनकी लीला गान में निरन्तर वाणी का प्रयोग कर एवं प्रेम से व्याकुल कानों को उनके कथामृत से तृप्त कर ॥३.६१॥


Monday, August 23, 2010

श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.५६-५८


बरसाने का दृश्य (Photo from Lake of Flowers).


मानापमानकोटिभिरक्षुभितात्मा समस्तनिरपेक्षः ।
वृन्दावनभुवि राधानागरमाराधये कदा मुदितः ॥
कोटि कोटि मानापमान होने पर भी क्षुभित न होकर किसी की भी अपेक्षा न करते हुए कब श्रीवृन्दावन में श्रीराधानागर की आनन्दपूर्वक मैं आराधना करूंगा ॥३.५६॥




वृन्दावनैकशरणस्त्यक्तश्रुतिलोकवर्त्मसंचरणः ।
भावाद्धरिचर्णान्तरपरिचरणाद्व्याकुलः कदा नु स्याम् ॥
अहो एकमें श्रीवृन्दावन की ही शरण ग्रहण करके वेदमार्ग एवं लौकिक समस्त आचरण त्याग कर, कब भावपूर्वक श्रीहरि के चरणों की मानसी सेवा करके मैं व्याकुल होऊंगा ॥३.५७॥




इह न सुखं न सुखमरे क्वापि वृथा न पत मोहजालेऽस्मिन् ।
अनुदिनं परमानन्दवृन्दावनं हि समाश्रयाद्यैव ॥
इस संसार में सुख नहीं है । अरे ! कहीं भी सुख नहीं है ! वृथा इस मोह जाल में मत फंस । आज ही नित्य परमानन्दमय श्रीवृन्दावन का सम्यक् प्रकार से आश्रय ग्रहण कर ॥३.५८॥


Sunday, August 22, 2010

2010-08-23 ब्रज समाचार

श्रावण में श्रद्धालुओं से ब्रज गुलजार


मथुरा (AU, August 23, 2010) । सावन की भीड़ अब ब्रज में हर ओर दिखने लगी है। रक्षाबंधन से पूर्व रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर चहल-पहल बढ़ गई है। धर्मशालाएं और गेस्टहाउस तीर्थयात्रियों से भर गए हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक मथुरा शहर ही नहीं बरसाना, वृंदावन, गोवर्धन, बलदेव व गोकुल में खासी भीड़ रहेगी।

रक्षाबंधन से पहले ही श्रद्धालुओं ने ब्रज में डेरा डाल लिया है। श्रावण के दौरान शहर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों को देखने की इनकी दिलचस्पी देखते ही बन रही है। द्वारिकाधीश मंदिर और श्री कृष्णजन्म स्थान पर हिंडोलों और घटा दर्शकों को आकर्षित कर रहीं हैं। धर्मशालाओं और गेस्टहाउस पर भी अब रौनक हो गई है। तीर्थ पुरोहित कांतानाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि शहर के ८० प्रतिशत धर्मशाला और गेस्टहाउस पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा है। पहले से ही बुकिंग हो गई है।

वहीं, रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में मिठाई का कारोबार खूब हो रहा है। रात-दिन घेवर तैयार किया जा रहा है। महंगाई के चलते घेवर के दामों में पिछली वर्ष की अपेक्षा ३० से ४० रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। मलाई और सादा घेवर की कीमत ऊंची दुकानों पर २२० रुपये प्रति किलो तक कर दी गई हैं, जबकि छोटे और कस्बाई मिष्ठान विक्रेताओं के यहां १६० रुपये किलो तक घेवर बेचा जा रहा है।

त्योहार पर वन-वे ट्रैफिक

मथुरा (ब्यूरो)। सावन में तीर्थयात्रियों की आमद पर लगा ब्रेक रक्षाबंधन से पूर्व टूटता दिखने लगा है। स्थानीय लोग भी तैयारियों में जुटे हैं। भीड़ को देखते हुए प्रमुख बाजारों में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करनी पड़ रही है। भीड़ का आलम यह है कि छत्ता बाजार में दिन के समय पुलिस को वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।

आकर्षक गिफ्ट आइटम और राखी

मथुरा (ब्यूरो)। रक्षा सूत्र बांधने पर बहनों को उपहार देने का प्रचलन जोर पकड़ने लगा है। आभूषणों से लेकर कपड़ों और खिलौने तक बहनों को गिफ्ट किए जाते हैं। यही वजह है कि आभूषण विक्रेताओं ने जहां चांदी और सोने के रक्षा सूत्र तैयार किए हैं, वहीं वस्त्र विक्रेताओं ने साड़ी, सूट, जींस और टी-शर्ट की खास रैंज प्रदर्शित की है। राखी स्पेशल के नाम से छूट भी दी जा रही है। गिफ्ट आयट्म विक्रेता भी इस दौड़ में पीछे नहीं।



श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू


मथुरा (AU, August 23, 2010) । श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव समिति और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ३० अगस्त से श्रीकृष्ण जन्मस्थान रंगमंच पर वृंदावन के रासाचार्य स्वामी श्रीराम शर्मा निमाई के निर्देशन में १० दिवसीय रासलीलाएं होंगी।

समिति के महामंत्री कृष्ण मुरारी बंसल, सांस्कृतिक कार्यक्रम संयोजक मूलचंद्र गर्ग, गिरीश चंद्र सर्राफ ने बताया कि जन्माष्टमी (दो सितंबर) को सांस्कृतिक कार्यक्रम, भक्ति, संगीत और पदगान आदि होंगे। मुख्य अतिथि कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानंद महाराज होंगे। इसी ही दिन शाम चार बजे शोभायात्रा भरतपुर गेट से होलीगेट, छत्ता बाजार, विश्रामघाट, मंडी रामदास होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पहुंचेगी। छह को भगवान कृष्ण को छप्पन भोग का प्रसाद लगाया जाएगा।



रौद्र रूप लेने लगी कालिंदी


मथुरा/वृंदावन/कोसीकलां ा (AU, August 23, 2010) । यमुना अब रौद्र रूप में आने लगी है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में हुई वर्षा के पानी का दबाव मथुरा की सीमा में बढ़ गया है। पूर्व में छोड़ पानी निकल भी नहीं पाया कि रविवार को ताजेवाला बांध से ३.०४ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया। यह पानी पांच दिन बाद मथुरा में बाढ़ के हालात पैदा कर सकता है। वृंदावन के कुछ निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे ऊपर नौहझील और शेरगढ़ के खादरों में भी यमुना ने फसल को बहा दिया है।

यमुना में एक सप्ताह से ४० हजार ५०० क्यूसेक के आसपास पानी प्रवाहित हो रहा है। पांच दिन पूर्व ६६ हजार क्यूसेक पानी ओखला डैम से छोड़ा गया। यह पानी शनिवार रात से मथुरा की सीमा में है। इससे यमुना के किनारे निचले इलाकों में पानी भरने लगा है। रविवार दोपहर एक बजे मथुरा में यमुना का जल स्तर १६९.९७ था। शाम छह बजे १६९.९८ हो गया। वह खतरे के निशान से मात्र २२ सेमी नीचे है जबकि वर्तमान में यमुना चेतावनी निशान से ७७ सेमी ऊपर है।

जिला प्रशासन ने बढ़ते पानी के खतरे को देख निचले इलाकों में बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को मुनादी करा दी है। आधा दर्जन स्थानों पर बाढ़ चौकियां स्थापित करा दी हैं। गोकुल बैराज के सभी २२ गेट रविवार दोपहर खोल दिए गए। बाढ़ राहत प्रभारी एडीएम (वित्त व राजस्व) ज्ञानेश कुमार ने बताया कि हरियाणा स्थित ताजेवाला हेड से रविवार को ३.०४ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इसका असर मथुरा में पांच दिन बाद देखने को मिलेगा। इसके लिए यमुना किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा है।

वृंदावन संवाददाता के अनुसार दो दिन से जलस्तर तेजी के साथ बढ़ा है। यमुना किनारे बसी कालोनी कालीदह घाट, सूरज घाट, जुगल घाट, पानी घाट, दुर्गापुरम, यमुना नगर कालोनी के कुछ क्षेत्र इसकी चपेट में आ गए हैं। इससे सैकड़ों लोगों घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। कई आश्रम और गौशालाएं भी जलमग्न हो गईं हैं।

कोसीकलां संवाददाता के अनुसार प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए आधे-अधूरे इंतजाम किए हैं। किसानों का कहना है कि यमुना में पानी का चढ़ाव प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रहा है। क्षेत्र के गांव रामपुर, बढ़ा, मंझोई, शाहपुर, पीरपुर, चौड़रस, धीमरी, धानौता, सिहाना की ओर पानी ने फसलों को चपेट में ले लिया है। छाता के तहसीलदार कुलदेव सिंह ने अधीनस्थों के साथ यमुना से प्रभावित होने वाले गांवों का जायजा लिया। बाजना संवाददाता के अनुसार नौहझील के आसपास खादर में पानी बढ़ गया। निचले इलाकों में झोपड़ी डूब गई हैं।



रजवाहों में पानी हो गया ओवर फ्लो


कोसीकलां। बरसात के साथ रजवाहे और ड्रेन उबल पड़े। हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई। कोसी क्षेत्र के गांवों में तबाही का मंजर पैदा हो गया है। धान की फसल नष्ट हो गई। चारे और ईंधन का भी अभाव पैदा हो गया है।

बठैनकलां, बठैनखुर्द, सुरवारी, जाब, धर्मनगर, पीपरवाला, सिरथला, पूठरी, कांमर, गढ़ी बरवारी आदि में भारी बारिश के बाद जलभराव हो गया है। खेतों का पानी सड़क को काटकर गांव की ओर रुख करने लगा है। जलभराव के बाद रजवाहों में पानी ओवर चल रहा है। ग्रामीणों के अनेक मकान भी धराशाई हो गए हैं। बुर्जी-बिटौरे नष्ट होने से चारे और ईंधन का संकट पैदा होने लगा है। खेतों में खड़ी धान की फसल की पानी की भेंट चढ़ जाएगी। ग्रामीण का कहना था कि जैसे-तैसे कर्ज लेकर उन्होंने धान की पौध की रोपाई की थी। यही स्थिती रही तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।



आधा दर्जन गांवों को पानी ने घेरा


मथुरा । बरसात से क्षेत्र के निचले इलाके वाले करीब आधा दर्जन गांवों के हालात बिगड़ सकते हैं। बरसाती पानी खेतों को डुबोकर गांवों के आसपास आ गया है। पशुओं के बांधने से लेकर दैनिक कार्यो के लिए भी कोई स्थान नहीं बचा है। आगे और बरसात हुई तो हालात बेकाबू होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

काफी इंतजार के बाद आई बरसात से मौसम जरूर सुहाना हो गया है लेकिन तराई वाले इलाकों में हालात बद से बदतर होने की कगार पर हैं। गांव लालपुर, कामर, सिरथला, बठैनकलां, बठैन खुर्द, हुलवाना आदि करीब आधा दर्जन गांव बरसाती पानी की चपेट में आ चुके हैं। इनके पड़ोसी गांवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन गांवों से पानी निकासी के इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं। यहां पानी खेतों को ड़ूबोता हुआ गांवों तक पहुंच गया है। फिलहाल पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर हो रही बरसात से यहां खेत खलिहान पानी से लबालब हो गए हैं। सैकड़ों एकड़ फसल बरसाती पानी की चपेट में आ चुकी है।



अब खतरा ही खतरा


मथुरा । यमुना की त्यौरियांच्चढ़ने के साथ ही मथुरा में रविवार को खतरे का 'सायरन' बज ग या। लगातार उफनती जा रही यमुना के तेवर देख प्रशासन ने तटवर्ती इलाके में मुनादी करवा दी। गांवों को खाली करने की सलाह के साथ ही उनके अस्थाई ठिकाने भी बना दिये हैं। अगले दो दिन खतरे की घंटी और तेज होने की आशंका जताई गई है।

यमुना में ताजेवाला बांध से लगातार चौथे दिन 3.24 लाख क्यूसेक पानी और छोडे़ जाने से मथुरा में यमुना खतरे की ओर बढ़ती जा रही है।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रमाकांत रस्तोगी के मुताबिक दिल्ली ओखला से सर्वाधिक जल रविवार सुबह 8 बजे 66003 क्यूसेक छोड़ा गया। हालांकि यमुना अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। यमुना के जल स्तर बढ़ने के साथ ही गोकुल बैराज से डिच्चार्ज बढ़ा दिया गया है।

अपर जिलाधिकारी वित्त ज्ञानेश कुमार का कहना था कि अगले दो दिन में जल स्तर में बढ़ोत्तरी की संभावना के मद्देनजर छाता, मांट, मथुरा एवं महावन तहसीलों में यमुना तटवर्ती क्षेत्र में बसे गांवों में तहसील की टीम भेजकर मुनादी करा दी गई है। बाढ़ में फंसने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर ठहराने के लिये विद्यालय चिन्हित कर लिये गये हैं।


श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् ३.५३-५५


बरसाने का दृश्य (Photo from Lake of Flowers).





वृन्दावनमनुविन्दाम्यहमपि देहं श्वशूकरादीनाम् ।
न पुनः परत्र सच्चित्सुखमयमपि दुर्लभं देवैः ॥
श्रीवृन्दावन के कूकर शूकरादि का शरीर भी धारण करूंगा, किन्तु और जगह देवताओं के लिये भी दुर्लभ सच्चिदानन्दमय शरीर को मैं नहीं चाहता ॥३.५३॥




श्रीवृन्दावनमध्ये बहुदुःखेनापि यातु जन्मैतत् ।
लोकोत्तरसुखसम्पत्त्यापि न चान्यत्र मे निमिषः ॥
श्रीवृन्दावन में अत्यन्त दुखों में ही मेरा यह जन्म बीत जाये, तथापि अन्य स्थान पर अलौकिक सुख सम्पत्ति एक निमिष काल के लिये भी प्रार्थना नहीं करूंगा ॥३.५४॥




करतलकलितकपोलो गलदश्रुलोचनः कृष्ण कृष्णेति ।
विलपन् रहसि कदा स्यां वृन्दारण्येऽत्यकिञ्चनो धन्यः ॥
हथेली पर कपोल धर कर अश्रु पूर्ण नेत्रों से कृष्ण कृष्ण कहकर विलाप करते करते कब श्रीवृन्दावन के निर्जन स्थान पर अति दीनभाव से रहकर मैं कृतार्थ होऊंगा ॥३.५५॥


2010-08-22 ब्रज समाचार (2)

रूप गोस्वामी पाद के जीवन पर प्रकाश डाला


वृंदावन – गौडीय वैष्णवाचार्य रूप गोस्वामी पाद की तिरोभाव तिथि पर पत्थरपुरा स्थित बड़ी सुरमा कुंज में संत-विद्वत संगोष्ठी में प्रेमदास शास्त्री ने कहा कि उन्होंने भगवान चैतन्य महाप्रभु की आज्ञा पर मंत्री पद एवं धन-वैभव को त्याग दिया । वे वृंदावन चले आये ।

डा. अच्युतलाल भट्ट ने कहा कि रूप गोस्वामी का नाम स्मरण ही भक्ति प्रदायक है । महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि रूप गोस्वामी जी महाराज की कृपा से ही राधाकृष्ण की प्रेमसेवा प्राप्त हो सकती है ।

डा. शैलेंद्रनाथ पांडेय एवं पं. बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि उनके भक्तिरसामृतसिन्धु तथा उज्ज्वलनीलमणि भक्तिरस के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ हैं ।

संगोष्ठी में महंत सच्चिदानंद दास, स्वामी जगन्नाथानंद, डा. विनोद बनर्जी, गिरिराज शास्त्री उपस्थित थे ।



श्रद्धालुओं ने लगाई गिरिराज परिक्रमा


गोवर्धन (AU 2010.08.21)। श्रावण के अंतिम शनिवार को श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह उमंग के साथ सप्तकोसी परिक्रमा लगाते एवं प्राचीन नारद कुंड स्नान किया ।

स्नान एवं परिक्रमा के बाद श्रद्धालुओं ने प्रमुख मंदिरों में झूले के दर्शन किए एवं पूजा अर्चना की । गिरिराज महाराज की जय-जयकार से संपूर्ण परिक्रमा मार्ग गुंजायमान हो उठा । राधा कुंड और नारद कुंड पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी ।

नारद कुंड स्नान के बाद शनिदेव की भक्ति भावना के साथ पूजा अर्चना की । इस दौरान बस स्तैंड बिजली घर, सौंख अड्डा पर सड़क निर्माण कार्य के कारण परेशानि का सामना करना पड़ा । एकादशी होने के कारण गिरिराज मुखारविंद मुकट, दान घाटी, नंदबाबा, प्राचीन मंदिर राधा श्यामसुंदर, देवकी नंदन जी महाराज, विश्वकर्मा मंदिर आदि में ठाकुर जी ने झूलों में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए ।



व्रजविभूति थे देवरहा बाबा


वृंदावन – योगी सम्राट देवरहा बाबा की २०वीं पुण्यतिथि पर सभा का आयोजन दावानल कुंड पर किया गया । रामजानकी ट्रस्ट द्वारा संत मधुसूदन दास त्यागी के सांनिध्य में हुई सभा में गोपाल लाल शर्मा ने कहा कि देवरहा बाबा ब्रज विभूति थे । राजकुमार मूदड़ा और त्रिलोकीनाथ ने कथा कि बाबा महाराज के दर्शन मात्र से प्राणी का कल्याण हो जाता था । अवधबिहारी दास और संतोष रस्तोगी ने बताया कि वह सभी संप्रदायों का सम्मान करते थे ।



आया सावन झूम के पर थिरके पांव


अग्रसेन मानव सेवा महिला प्रकोष्ठ का आयोजन
अग्रवाल सभा महिला समिति ने मनाया तीज महोत्सव


मथुरा । हरियाली तीज का खुमार अब तलक महिलाओं पर छाया हुआ है । महिला संगठन पर्व का जश्न धूमधाम से मना रहे हैं । सावन के गीत और मल्हार के मध्य सांस्कृतिक कार्यकर्मों से जश्न में चार चांद लगाए जा रहे हैं ।

अग्रसेन मानव सेवा महिलाओंका प्रकोष्ठ का कार्यक्रम आया सावन झूम के चित्रकूट मसानी पर आयोजित किया गया । शुभारंभ मुख्य अतिथि निर्मल अग्रवाल ने राधा-कृष्ण की छवि के समक्ष दीप प्रवलित कर किया ।

इस मौके पर महिलाओं ने नृत्य किया और प्रतियोगिताओं में भाग लिया । साथ ही लकी ड्रा निकाला गया । सावन के गीत लिखो, बाल उठाओ टब में डालो, सब्जी ढूंढो, बरसात में छाता लगाकर चलो जैसी रोचक प्रतियोगिताएं आयोज्ज्त हुईं ।

श्री अग्रवाल सभा महिला समिति का हरियाली तीज महोत्सव रंगारंग कार्यक्रमों के मध्यम मनाया गया । इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि बीना अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया । महिलाओं ने राधा कृष्ण की अनूठी प्रस्तुतियां दीं । इस अवसर मीरा मित्तल ने हास्य प्रद प्रस्तुति दी जिसे श्रोताओं ने बेहद सराहा ।

इस मौके पर श्रोताओं को सावन के महत्त्व से रूबरू कराया गया । इस दौरान आयोजित किचन चैंपियन शो में संगीता अग्रवाल को विजेता घोषित किया गया ।



भागवत मोक्ष के साधनों में सर्वश्रेष्ठ


वृंदावन –



भागवत मोक्ष के साधनों में सर्वश्रेष्ठ


वृंदावन – श्रीराधा सर्वैश्वर भगवान के प्रथम पाट्योत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में महामंडलेश्वर राधामोहन दास ने कहा कि भागवत मानस के मोक्ष और कल्याण के साधनों में सर्वश्रेष्ठ है ।

श्रीराधा सर्वैश्वर पीठ आश्रम पर महाराज जी ने कहा कि मन को भागवत परायण बनाने के लिए गुरुदेव के वचनों में निष्ठा, संतों क् समागम और ग्रंथों का श्रवण-कीर्तन करना चाहिये । यदि हम भगवान के चरणों में सुख की अनुभूति कर लें तो भगवान गोवर्धननाथ की सहज प्राप्ति हो जाएगी ।

उन्होंने कहा कि भजन मोक्ष प्राप्ति का एक ऐसा सशक्त माध्यम है । इसमें बड़ी से बड़ी से आसुरी शक्तियां भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती हैं । इस मौके पर उन्होंने कथा में भगवान के सभी अवतारों की विस्तार से व्याख्या की ॥



सच्चे मन से करें प्रभु की उपासना


वृंदावन – यदि हमें भगवान की उपासना सच्चे मन से करनी है तो हमें आचरण, व्यवहार और खानपान शुद्ध और सात्त्विक रखना होगा । मन, वचन और कर्म से हमें पूर्णरूपेण सात्त्विक आचरण करना होगा । तभी हम भगवान उपासना के अधिकारी हो सकते हैं । ये वाक्य रमणरेति स्थित पद्मश्री स्वामी रामस्वरूप शर्मा के लीला पंडाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ से भागवताचार्य डा. बड़े ठाकुर ने प्रवचन के दौरान कहे ।

कथा के पश्चात मुख्य यजमान एसएन शर्मा ने पत्नी मनोरमा शर्मा सहित भागवतजी का पूजन-अर्चन किया । इस अवसर पर तोताराम उपाध्याय, ब्रजमोहन खांडल, रतनलाल, सुरेशचंद्र शर्मा, मनीष शुक्ला, दिनेश मनी, नित्यानंद शर्मा, शांति शर्मा, ब्रजभूषण अरोड़ा आदि थे ॥


Saturday, August 21, 2010

2010-08-22 ब्रज समाचार

डगमग व्यवस्था पर अस्था अडिग


मथुरा (DJ 2010.08.21)। यह सावन-भादों का मौसम है, यानि ब्रज की मौज-बहार का समय है। सावन से शुरू होने वाली वैष्णव यात्रियों की आमद कार्तिक तक जारी रहने वाली है, पर व्यवस्थाएं इतनी चौपट हैं कि एनआरआई और गुजराती यात्री सिर्फ रस्म पूरी करने आ रहा है, यानि कि ब्रज का पर्यटन उद्योग अगले महीने शुरू होने वाली ब्रज चौरासी कोस यात्राओं में भी कमर सीधी नहीं कर सकेगा।

वर्ष 1549 में महाप्रभु वल्लभाचार्य को आज ही के दिन गोवर्धन नाथ ने दर्शन दिए थे। श्रावण सुदी ग्यारस यानि शुक्रवार की आधी रात को श्री यमुना की पूजा करने के लिए गोकुल में दो हजार से ज्यादा गुजराती श्रद्धालु पहुंचे हैं। यह तो बानगी भर है। ठीक 21 दिन बाद ब्रज चौरासी कोस की यात्राएं शुरू होंगीं, जिनमें हजारों श्रद्धालु चालीस दिन में इस दूरी को पूरी करेंगे। उनकी आस्था अडिग है, पर चौरासी कोस मार्ग में शासन-प्रशासन की व्यवस्थाएं डिगी हुई हैं।

गोकुल के गोविंद घाट पर शुक्रवार की आधी रात में श्री यमुना को पवित्रा चढ़ाई गयी। गोकुल नाथ जी पर यही क्रम शनिवार को दोहराया जाएगा। लेकिन पौराणिक व धार्मिक महत्व के कुंडों के दर्शन को आतुर श्रद्धालु उबकायी भरते देखे गए। गोकुल के पतित पावन कुंड, पूतना कुंड और कमल कुंड आदि अतिक्रमण व गंदगी से जो भरे हुए हैं। पतित पावन कुंड में तो गटर का पानी गिर रहा है।

यही स्थिति ब्रज चौरासी कोस के सभी कुंड और सरोवरों की है, जबकि पड़ाव स्थल भी जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग की प्राथमिकता में शुमार नहीं हो सके हैं। ब्रज चौरासी कोस की यात्राएं भाद्रपद में सितंबर से शुरू हो रही हैं। यात्रा मार्ग में 25 पड़ाव स्थल हैं, पर अब मात्र 18 ही ऐसे बचे हैं, जिनका कुछ स्वरूप बचा हुआ है। प्रशासन की ओर से इन पड़ाव स्थलों को न तो सुरक्षित रखा गया है और न ही यात्राओं के दौरान कोई व्यवस्था की जाती रही है। गोकुल तीर्थ राज ट्रस्ट के अध्यक्ष नारायण तिवारी ने बताया है कि गोकुल में कुंड, पड़ाव स्थल व महा प्रभु की बैठकें यात्राओं के लायक नहीं बनायी गयी हैं।



रक्षाबंधन और जन्माष्टमी पर आधा दर्जन नई ट्रेन


मथुरा (DJ 2010.08.21)। रक्षाबंधन तथा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा कराने के लिए रेलवे ने कमर कस ली है। इसके लिए रेलवे आधा दर्जन नई गाड़ियां चलाएगा। वहीं आधा दर्जन गाड़ियों में कोच बढ़ाकर उन्हें मथुरा तक चलाया जाएगा।

डीआरएम देवेश मिश्रा की पीआरओ भूपेंद्र कौर ढिल्लन ने बताया कि झांसी-आगरा पैसेंजर तथा ग्वालियर-आगरा पैसेंजर सहित दोनों गाड़ियों को मथुरा तक बढ़ाया गया है। यह गाड़ी २२ से २६ तक मथुरा तक चलेंगी। मथुरा-अलवर पैसेंजर, मथुरा-बांदीकुई पैसेंजर में चार कोच बढ़ाए गए हैं। इलाहाबाद-मथुरा एक्सप्रेस में २२ अगस्त से पांच सितंबर तक तीन कोच बढ़ाए हैं। मेला स्पेशल गाड़ियों में रेवाड़ी से मथुरा के लिए नई गाड़ी चलाई जाएगी। यह गाड़ी रेवाड़ी से अपराह्न ३.३५ बजे चलकर रात्रि नौ बजे मथुरा पहुंचेगी। यह गाड़ी २२ अगस्त से नौ सितंबर तक चलेगी।

बांदीकुई से मथुरा के लिए नई गाड़ी चलेगी। यह गाड़ी बांदीकुई से प्रातः ९.२० चलकर सायंकाल ५ः२० मथुरा आएगी। बांदीकुई से मथुरा के लिए एक और मेला स्पेशल चलाई जाएगी। यह गाड़ी बांदीकुई से ४.१० बजे चलकर ८.४५ बजे मथुरा पहुंचेगी। यह गाड़ी २३ से २७ तक चलेगी। कासगंज-मथुरा स्पेशल नई गाड़ी चलाई जाएगी। यह कासगंज से सुबह १०.२० चलकर १.०५ बजे मथुरा पहुंचेगी। वापसी में १.४० बजे चलकर ४.२० बजे कासगंज पहुंचेगी। यह गाड़ी २३ अगस्त से २५ अगस्त तक चलेगी तथा बाद में ३१ अगस्त से २ सितंबर तक चलेगी। स्पेशल गाड़ियों के सुरक्षित संचालन तथा बेहतरी के लिए बाहर से स्टाफ बुला लिया गया है। भीड़ के दबाव को देखते हुए अतिरिक्त टिकट खिड़की भी खोली जाएगी।l

ब्रज यात्रा पर संकट के बादल


मथुरा (AU 2010.08.21)। ५२५ वर्षों से ब्रज में निकाली जा रही ब्रज यात्रा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यह संकट प्रशासन की टालमटोल के कारण उत्पन्न हुआ है। इस मामले में यात्रा प्रबंधकों द्वारा कई बार प्रार्थना पत्र देने के बावजूद न तो प्रशासन और न ही पुलिस ने अनुमति दी है। इससे तीर्थ पुरोहितों में नाराजगी व्याप्त है। उन्होंने डीएम से यात्रा की अनुमति अतिशीघ्र दिए जाने की मांग की है।

५२५ वर्ष पूर्व दक्षिण भारत के चंपाहरण स्थान पर जन्मे महाप्रभु श्रीमद् वल्लभाचार्य ने भाद्र प्रद माह में ४० दिवसीय ब्रजयात्रा प्रारंभ की थी। यह यात्रा इस बार १२ से १८ सितंबर तक संपूर्ण ब्रज में निकाली जानी है। हर साल निकाली जाने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में साधु महात्मा, तीर्थ पुरोहित, विद्वान और देश विदेश के हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार प्रशासन की हठधर्मिता से यात्रा के आयोजन पर संकट खड़ा हो गया है।

तीर्थ पुरोहित परिषद के प्रांतीय महामंत्री कांतानाथ चतुर्वेदी ने बताया कि यात्रा प्रबंधकों के तमाम प्रार्थना पत्रों के बावजूद न तो पुलिस एवं प्रशासन ने यात्रा की अनुमति दी है। यही नहीं यात्रा के पड़ाव स्थल बनवाने एवं रास्ते में पड़ने वाले कुंड और सरोवरों की सफाई तक नहीं कराई गई है।

उन्होंने डीएम से यात्रा की अनुमति दिलाने की मांग की है। साथ ही राजस्थान और हरियाणा में आने वाले कुछ भाग के लिए वहां के डीएम से वार्ता कर यात्रा की व्यवस्थाएं कराने की अपील की है। मांग करने वालों में राष्ट्रीय महामंत्री प्रयागनाथ चतुर्वेदी, गणेश चतुर्वेदी, शिव चतुर्वेदी, सोमनाथ, माधवलाल, रामदास चतुर्वेदी, कृष्णकांत, प्रवीन, श्यामू, अनिल, आेंकारनाथ, राजू सरदार, मूला पंडित आदि शामिल थे।



यमुना के जलस्तर में और वृद्धि



मथुरा/वृंदावन/कोसीकलां AU 2010.08.21)।। ताजेवाला बांध से छोड़े गए पानी का असर मथुरा जिले में हल्का सा दिखने लगा है। यमुना के जलस्तर में वृंदावन व मथुरा में वृद्धि देखी जा रही है। जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग चिंतित हैं।

कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ सकता है। यमुना के जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती हैं। यमुना के जलस्तर में अगर और बढ़ोत्तरी हुई तो किनारे की कालोनियों में यमुना का पानी घुसने की संभावना है। प्रयाग घाट पर मथुरा में शनिवार को जलस्तर चेतावनी निशान से ५६ सेंटीमीटर ऊपर १६४.७६ मीटर तक पहुंच गया।

इधर, ओखला से ५६ हजार क्यूसेक अतिरिक्त जल छोड़ा गया है। इतनी अधिक मात्रा में पानी आने से वृंदावन, बलदेव एवं अन्य के लो फ्लड एरिया में खलबली मची हुई है। वृंदावन एवं बलदेव में तो यमुना का पानी फसलों को छूने लगा है। इससे दोनों क्षेत्रों में खलबली मची हुई है। इससे निपटने के लिए सिंचाई विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी करा दी है। वृंदावन के सूरजघाट कालोनी निवासी राकेश, विजय और महेश मल्लाह का कहना है कि अगर यमुना का जलस्तर और बढ़ा तो हमे अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ सकता है। कोसीकलां संवाददाता के अनुसार छाता तहसील के यमुना किनारे वाले इलाकों में मुनादी करा दी गई है।



केजेएस के यलो जोन में मीना मसजिद का दरवाजा निकाला


मथुरा AU 2010.08.21)।। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के यलो जोन में स्थित मीना मसजिद में बगैर अनुमति के रातों-रात दरवाजा निकाल लिया गया। एक रेलकर्मी की सूचना पर जन्मस्थान के सुरक्षा अधिकारी सक्रिय हुए। उन्होंने दरवाजे को अस्थाई रूप से बंद कराया। इस घटना से हिंदूवादियों में उबाल है।

डीग गेट के समीप वृंदावन-मथुरा रेल लाइन से लगी मीना मसजिद में ग्रिल काटकर दरवाजा निकाल लिया गया। यह ग्रिल जन्मभूमि और ईदगाह की सुरक्षा के लिए लगी थी। एक रेलकर्मी ने इसे देख लिया। उसने जन्मभूमि के सुरक्षा अधिकारियों को सूचना दी। इस पर जन्मस्थान का खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो गया। पुलिस-प्रशासन के अफसरों में खलबली मच गई। एसपी सुरक्षा आरपीएस यादव समेत प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे और उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।

सूत्र बताते हैं कि इस दरवाजे को बिना रोक-टोक मसजिद में आने-जाने के लिए निकाला गया। इससे हिंदूवादियों में आक्रोश देखा गया। उन्होंने एकत्रित होकर पुलिस-प्रशासन के अफसरों पर दबाव बनाना शुरू किया। मामला बिगड़ न जाए, इसे देखते हुए आनन-फानन में सुरक्षा अधिकारियों ने दरवाजे को बंद करा दिया। अभी दरवाजा अस्थाई रूप से दीवार लगाकर बंद किया गया है। एसपी सुरक्षा आरपीएस यादव का कहना है कि दरवाजा सदैव के लिए बंद करा दिया गया है। उधर, नवागत एसएसपी लव कुमार से इस संबंध में पूछा गया तो वह इस घटना से अनभिज्ञ दिखे। उन्होंने कहा कि वह जन्मस्थान प्रशासन से पूरी घटनाक्रम की जानकारी लेंगे।



केजेएस में गेट निकालने पर रोष


वृंदावन AU 2010.08.21)।। विश्व हिंदू परिषद की शनिवार को बैठक में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के अति सुरक्षा क्षेत्र में मस्जिद की दीवार तोड़कर आवागमन के लिए गेट निकालने पर रोष व्यक्त किया गया।

बैठक में विहिप के कारकारी जिलाध्यक्ष ठा. बच्चू सिंह ने कहा कि करोड़ों रुपया सुरक्षा के नाम पर व्यय होता है। फिर भी पुलिस तथा खुफिया तंत्र को जानकारी नहीं मिली। यह जिला प्रशासन के लिए शर्मनाक है। डा. हरिवल्लभ शर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन को चाहिए कि उस स्थान पर स्थायी रूप से मजबूत दीवार बनाकर पुनः बेरीकेडिंग लगा देनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि पूर्व नियोजित दीर्घकालीन योजना के लिए अति सुरक्षा क्षेत्र में यह कार्य बिना किसी भय के करना किसी साजिश को दर्शाता है। बैठक में ओमप्रकाश शर्मा, गोपाल शर्मा, राधावल्लभ शर्मा, बाबा कंचन दास, केशव सारस्वत, धन्नाराम चौधरी, गोपाल, अजय सिंह आदि रहे।



अधिकारियों का नगर में पैदल भ्रमण


मथुरा (DJ 2010.08.21)। त्यौहारों को मद्देनजर रखते हुए शहरी क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों में नगर में पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

त्यौहारों को मद्देनजर रखते हुए प्रशासन और पुलिस सतर्क बनी हुई है। सिटी मजिस्ट्रेट राम औतार रमन, एसपी सिटी रामलाल वर्मा और सीओ सिटी डॉ. संजय कुमार ने मय फोर्स के डीग गेट, मछली मंडी, खारी कुआं, मटिया गेट, चौक बाजार होते हुए होली गेट तक पैदल ही भ्रमण किया। प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारियों को देखकर पहले तो यह समझा कि कहीं कोई घटना घट गई, लेकिन बाद में पता चला कि अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए निकले हैं।



की फजीहत, कनेक्शन को कवायद


मथुरा (DJ 2010.08.21)। भारत संचार निगम को नेटवर्क सुधारने की चिंता तो है नहीं कनेक्शन बढ़ाने की कवायद में जुटा हुआ है। स्थिति ये है कि जिले में संचार निगम के 120 मोबाइल टावर पूरी तरह कवरेज नहीं दे पा रहे हैं तो गोवर्धन क्षेत्र में नेटवर्क काम करना ही बंद कर देता है। ऐसे में उसके लिए छह महीने में पचास हजार नए कनेक्शनों का लक्ष्य प्राप्त करना आसान नहीं होगा।

बीएसएनएल ग्राहकों को आकर्षित करता रहा है, पर पिछले दो साल में वह एक लाख के आंकड़े तक किसी तरह पहुंच सका है और इसमें वृद्धि अब नाम मात्र को ही हो रही है। इसकी वजह है पूरे जनपद में एक समान कवरेज एरिया न होना। बताया गया है कि हाइवे से ही गोवर्धन मार्ग में अड़ींग से कुछ पहले तक उसके सिगनल पूरी तरह काम नहीं कर रहे हैं। इस मार्ग पर प्रवेश करते ही मोबाइल स्क्रीन चेक मोबाइल आपरेटर मेसेज दिखाने लगती हैं।

निगम प्रशासन इस एरिया में अभी तक कोई नया टावर नहीं लगा सका है। इस तरह के ब्लैंक पैचेज देहात में कई प्रमुख मार्गो पर ही बताए गए हैं। ओल व मगोर्रा के बीच ही निगम के मोबाइल टावर इतने सिगनल नहीं निकाल रहे कि वे राजस्थान से आने वाले सिगनल्स को मात दे सकें। फलस्वरूप स्थानीय ग्राहकों को कई बार रोमिंग दर से कॉल शुल्क अदा करना पड़ रहा है। यही स्थिति जतीपुरा व राधा कुंड के कुछ एरिया में बनी हुई है।

बल्देव, मांट व बरसाना-नंद गांव की ओर भी यही समस्या बतायी गयी है, जबकि उसे शहर की तुलना में देहात से ग्राहक ज्यादा मिल रहे हैं। निगम के वर्तमान में एक सौ बीस मोबाइल टावर काम कर रहे हैं। इसी साल उसने आधा दर्जन से ज्यादा टावर लगाए हैं, पर सितंबर तक जो टावर लगने थे, उन पर अभी कार्य शुरू भी नहीं हुआ है।

निगम प्रशासन को अगले साल मार्च तक 45 टावर और लगाने हैं, जिनमें 17 टावर थ्री जी सेवा के और शेष 28 मोबाइल टावर लगाए जाने हैं। इनकी स्थापना के साथ ही उसे पचास हजार नए कनेक्शन देने का लक्ष्य मिला हुआ है। स्थिति यह है कि टावर सामग्री उसे समय से नहीं मिल पा रही।