Monday, May 31, 2010

2010-06-01 ब्रज का अन्य समाचार

करोड़ों का अर्थ, सेवा के आगे व्यर्थ

मथुरा, कार्यालय संवाददाता (DJ 2010.06.01): भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि एवं उनकी पटरानी यमुना भूमि को प्रदूषण से मुक्त कराने में करोड़ों का अर्थ श्रद्धालुओं की सेवा के आगे व्यर्थ साबित हो गया। रविवार को जब श्री कृष्ण जन्म स्थान सेवा संस्थान के सेवक कालिंदी में सफाई करने के लिये उतरे तो वातावरण निर्मल हो गया। इस कार्य को प्रेरणा एवं भक्ति का पर्याय मानते हुये स्नान को आने वाले सैकड़ों भक्त भी सेवा में जुट गये। जोश और शुद्धि का जुनून से भरे तीर्थयात्रियों ने सेवकों के स्वर में स्वर मिलाते हुये यमुना मैया की जय-जयकार की। मां कहने तथा उसकी कृपा से यश, कीर्ति, भोजन, वैभव तक प्राप्त करने वाले करोड़ों श्रद्धालु होने तथा करोड़ों का देशी व विदेशी धन खर्च किये जाने के बावजूद सरिता गंदगी से सराबोर हो चुकी है। इस स्वरूप के प्रचार, प्रसार और चित्रांकन में अनेक बाह्य आचरण व्यवहार में लाए गये। कई आर्थिक रूप से भी समृद्ध हो गये। कुछ की यश, कीर्ति जिले से प्रदेश और देश तक जा पहुंची। इसके बाद भी बहुतों का दिल नहीं पसीजा और भक्ति के आवरण से आच्छादित हजारों लोगों का मल-मूत्र तक निरंतर मां के आंचल में समाहित हो रहा है।

सरकारी, अर्द्ध सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं के साथ तीर्थयात्रियों के जरिये भी जब तब धन व्यय हुआ एवं सेवा की गई मगर मैया के अतीत का रूप आज भी नजरों से ओझल ही है। मां की इस दशा को देखकर शर्म भले खुद शर्मसार हो मगर कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें थोड़ा ही सही दर्द दिल से होता है। इसे तबके में शामिल श्री कृष्ण सेवक समाज के लोगों ने रविवार को एक और प्रयास के तौर पर गंगा दशहरा सभी घाटों की सफाई कार्य शुरु किया। संस्थान के सेवक गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा है कि बैराज के कारण यमुना तली में जमी सिल्ट के प्लेट फार्म से हट जाने से श्रद्धालुओं को सुविधा का अनुभव अवश्य होगा। गंगा दशहरा के आने से पूर्व सफाई के लिये संकल्पित सेवकों के साथ इस समय प्रदूषण नियंत्रण विभाग के कर्मी, पालिका कर्मी भी सेवा कार्य पर जोर दे रहे हैं। 25 मई से शुरु हुये इस सेवा कार्य में संस्थान की ओर से रविवार को संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव, जन संपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह, अनुरक्षण अधिकारी नारायण राय, सतवीर सिंह, बाबू लाल, राजू समेत कई सेवकों ने अहम सेवा कार्य किया।


टीटीजेड में खड़े पेड़ों से थमी निर्माण रफ्तार

यमुना एक्सप्रेस-वे : सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

आसानी : वन विभाग की बाधा कुछ हद तक दूर कर ली
वन क्षेत्र की भूमि के बजाए दी सुरीर में जमीन


मथुरा (AU 2010.06.01)। कामनवेल्थ गेम्स से पहले यमुना एक्सप्रेस-वे को पूरा करने में सरकारी नियम ही बाधा बने हुए हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे अथारिटी ने वन विभाग की अड़चनों को कुछ हद तक दूर कर लिया है, लेकिन टीटीजेड में खड़े वन विभाग के पेड़ अभी भी इस प्रोजेक्ट के लिए भारी अड़चन पैदा कर रहे हैं। पेड़ों को काटने के मामले में अभी भी उसे सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने का इंतजार है।

नोएडा से आगरा तक एक्सप्रेस-वे निर्माण तो कराया जा चुका है, लेकिन कुछ स्थानों पर वन विभाग और टीटीजेड जोन के अंतर्गत आने वाले पौधे और भूमि के कारण पुल और पुलिया निर्माण का काम अभी भी अधूरा है। कार्यदाई संस्था नोएडा डेवलपमेंट अथारिटी और जेपी ग्रुप ने वन विभाग की अड़चन को लगभग खत्म कर दिया है।

मथुरा, अलीगढ़, हाथरस और आगरा जिले के वन क्षेत्र की भूमि लेने के बदले में अथारिटी ने दूसरे स्थानों पर भूमि खरीद कर दी है। निर्माण के लिए मथुरा में वन क्षेत्र की १.१६७ हेक्टेयर संरक्षित भूमि और आगरा की चार हेक्टेयर भूमि ली गई थी। अॅथारिटी ने आगरा और मथुरा को टुकड़ों में जमीन देने के बजाए मथुरा को दोनों जिलों की मिलाकर कुल ५.१६७ हेक्टेयर भूमि सुरीर कसबे के पास ओहावा बांगर में खरीदकर दे दी है।

हाइवे मार्ग निर्माण में वन विभाग के ५७५ पेड़ कटने हैं। इनका मुआवजा इन दिनों तय करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन सबसे बड़ी बाधा टीटीजेड जोन में लगे पौधे हैं। योजना के अंतर्गत टीटीजेड के ३८० पेड़ आ रहे हैं। इन पौधों के कटवाने के लिए अथारिटी ने भारत सरकार से तो अनुमति ले ली है, लेकिन अभी उसे टीटीजेड अधिनियम के तहत सुप्रीम कोर्ट की अनुमति और चाहिए। इसके लिए अथारिटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी है। प्रभागीय वन निदेशक केएल मीना ने स्वीकार किया कि वन भूमि के एवज में अथारिटी ने उन्हें जमीन खरीद कर दे दी है।


नौहझील को डार्क जोन से मुक्त करने की मांग

१६ मांगों को लेकर कटैलिया के नेतृत्व में धरना जारी

चेतावनी : समस्याओं के समाधान न होने पर आंदोलन होगा तेज


नौहझील (AU 2010.06.01)। यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़ी समस्याओं को लेकर किसानों के दूसरे गुट ने भी आंदोलन की अलख जगा दी। उन्होंने नौहझील विकास खंड पर १६ सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को धरना दिया। किसानों ने किसान नेता रामबाबू कटेलिया के नेतृत्व में एसडीएम को ज्ञापन तो सौंपा, लेकिन धरना-प्रदर्शन जारी रखा।

सोमवार को प्रातः से शुरू हुए धरने पर सैकड़ों ग्रामीण किसान नेता चौ. रामबाबू कटैलिया के नेतृत्व में भीषण गर्मी में भी जमे रहे। धरना दे रहे ग्रामीणों की मांग थी कि जिले की कानून-व्यवस्था दुरुस्त हो। यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण जमीनों की कीमत में और वृद्धि करे। मांट १३२ बिजलीघर से नौहझील का जल्द जोड़ा जाएं।

इसके अलावा बाजना में बिजलीघर जल्द चालू हो, गांव मिठ्ठौली में राष्ट्रीकृत बैंक खुले, नौहझील डार्क जोन से मुक्त हो, पालीखेड़ा और रायपुर में स्वास्थ्य केंद्र खुले, मांट तहसील में चकरोड ओर नालियों पर हो रहे कब्जे हटें।

इन सभी मांगों को लेकर एसडीएम (मांट) राजीव गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के बाद भी ग्रामीणों में उबाल दिखा। किसान नेता रामबाबू कटैलिया ने कहा कि धरना-प्रदर्शन बदस्तूर जारी रहेगा जब तक १६ मांगों को समाधान नहीं हो जाता। इस मौके पर विजेंद्र सिंह, सत्यवीर सिंह, भगवती सिंह, जयवीर सिंह, अमर सिंह, प्रकाश जिंदल, अखिलेश वार्ष्णेय आदि सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। अध्यक्षता झम्मन सिंह ने की। संचालन नेपाल सिंह ने किया। ज्ञापन लेने के लिए प्रशासन की ओर से प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। विदित हो कि कटैलिया के विरोधी गुट ने एक दिन पहले रविवार को धरना देकर प्रशासन को ललकारा है।


मृदा के लिए 16756 नमूना

मथुरा (DJ 2010.06.01)। अपनी मिट्टी पहचानो अभियान में अब तक मृदा के 16756 नमूना एकत्र किए जा चुके हैं। सोमवार को तृतीय चरण में 5155 नमूना एकत्र किए गए। इनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा रहा है। अपनी मिट्टी पहचानो दिवस के तृतीय चरण की शुरूआत उप कृषि निदेशक बलवीर सिंह ने गोवर्धन ब्लॉक के गांव श्यौबा में मिट्टी का नमूना लेकर की।

इस मौके पर भरत सिंह प्रधान के यहां हुई किसान संगोष्ठी में उप कृषि निदेशक ने किसानों को मृदा का परीक्षण करा कर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग किए जाने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को बताया कि असंतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग किए जाने से मृदा की सेहत बिगड़ रही है और भरपूर लागत लगाने के बाद भी उत्पादन में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। उन्होंने किसानों को बताया कि मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए खेतों में गोबर, वर्मी, नाडेप और हरी खाद का प्रयोग करें। उन्होंने सरकार की किसान हित में लागू कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका लाभ उठने को कहा। उप कृषि निदेशक ने किसानों को धान की नर्सरी डालने की तकनीकी भी जानकारी दी। संगोष्ठी में प्रताप सिंह, विजेन्द्र सिंह फौजदार, राम स्वरूप, दिगम्बर, नहार सिंह आदि मौजूद थे। छाता में नगर पंचायत चेयरमैन चौधरी जगपाल सिंह की अध्यक्षता में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भी किसानों को खेती बाड़ी की जानकारी देते हुए मृदा परीक्षण के लाभ बताए। जिले भर में एकत्र किए मृदा के नमूनों को परीक्षण के लिए कृषि प्रक्षेत्र राया की प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।


तालाब न भरवाने पर अधिशासी अभियंता को नोटिस

मथुरा (DJ, 2010-06-01) । पहले तालाब भरवाने की फर्जी रिपोर्टिग, फिर उच्च अधिकारी का फोन रिसीव न करना अपर खण्ड आगरा नहर के अधिशासी अभियंता को भारी पड़ गया है। जनपद के मुख्य विकास अधिकारी ने सोमवार को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

विगत वर्षो की भांति इस साल भी गर्मियों में जिले के गांवों में लोगों के साथ ही पशुओं की पेयजल व्यवस्था के लिए प्रशासन द्वारा कवायद की गई है। नहरों से गांवों में तालाब भरवाने के लिए अपर खण्ड आगरा नहर के अधिशासी अभियंता रमाकांत रस्तोगी को नोडल अफसर मुकर्रर किया गया। मई माह के तीसरे मंगलवार को डीएम डीसी शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित महावन तहसील दिवस में उन्होंने तालाब भरवाये जाने की रिपोर्ट दी थी। जब संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ से स्थलीय सत्यापन कराया गया तो हालात सिंचाई विभाग के दावों से विपरीत पाये गये। बीडीओ की रिपोर्ट के अनुसार खुद नोडल अफसर के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मथुरा ब्लॉक के दस तालाबों में से ग्राम तोष, खामनी एवं बाटी के तालाब सूखे मिले। नंदगांव में मनिहारी कुंज, आर्येश्वर मंदिर व विमल कुंड एवं ग्राम गढ़ी बरबारी समेत सात तालाबों में पानी नहीं मिला। इसी ब्लॉक के बिजवारी गांव के तालाब में पानी तो था, पर यह सिंचाई विभाग द्वारा नहीं भरवाया बताया गया। अपर खण्ड आगरा नहर से ही संबंधित फरह ब्लॉक के लक्षित सभी 19 तालाब स्थलीय सत्यापन में सूखे मिले।

मुख्य विकास अधिकारी सोमवार को जब अपने कार्यालय में जन शिकायतें सुन रहे थे तभी मांट के ग्राम हरिया की गढ़ी के ग्रामीण उनसे मिलने पहुंच गये। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी से गांव में तालाब न भरे जाने तथा इससे पशुओं को पानी पिलाने में हो रही दिक्कतों का जिक्र किया।

ग्रामीणों की शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी ने नोडल अफसर के मोबाइल पर फोन किया। वह स्विच ऑफ बताया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने फिर उनके कार्यालय के लैंड लाइन टेलीफोन पर उनसे सम्पर्क करना चाहा। यह फोन उठा ही नहीं। उन्होंने अपर खण्ड आगरा नहर के अधिशासी अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब तलब किया है।


अंधड़ की तबाही से बरसाना बेहाल

पोल और तार उखड़ने से बिजली आपूर्ति चरमराई

विपत्ति : लगातार ४८ घंटे बिजली नहीं आने से पेयजल संकट गहराया


बरसाना (AU 2010.06.01)। दो दिन पहले आए आंधी-तूफान ने विद्युत समस्या से जूझ रहे कसबे और आसपास के चार दर्जन से अधिक गांवों की समस्या और बढ़ा दी है। अंधड़ में बिजली के पोल उखड़ने, ट्रांसफार्मरों के चरमरा जाने और तार टूटने से विद्युत के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी चरमरा गई है। इससे भीषण गर्मी में ग्रामीणों का अमन-चैन छिन गया है।

शनिवार को आए आंधी-तूफान ने बरसाना कस्बे में त्राहि-त्राहि मचा दी है। अंधड़ से बरसाना में ४०० केवीए का ट्रांसफार्मर फुंक गया। वहीं आसपास के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले ट्रांसफार्मर, विद्युत तार और पोल तक उखड़ गए। इसके चलते बरसाना, कमई, करैला, हाथिया, रांकौली, मानपुर, चिकसौली, ढ़बाला, गाजीपुर, आजनौठ, पिसावा समेत करीब ५० गांवों की विद्युत व्यवस्था ठप हो गई है।
लगातार ४८ घंटे तक बिजली न आने के कारण पेयजल संकट भी खड़ा हो गया है। पहले से ही पेयजल समस्या से जूझते ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। पूर्व में प्राइवेट सबमर्सिबलों से पानी भरकर काम चला रहे ग्रामीण बिजली के चलते ऐसा भी नहीं कर पा रहे हैं। बरसाना निवासी डा. कृष्णमुरारी गोस्वामी, कोका पंडित, राजेश, राजेद्र सिंह ने बताया कि दो दिन से बिजली न आने के कारण खरीद कर पानी पीना पड़ रहा है।


विद्युत व्यवस्था चरमराने से पानी के लिए भटके

सोमवार को दोपहर नगर की बिजली ठप

कोताही : कई इलाकों में सुबह से ही की कटौती
सब स्टेशन पर अधिक लोड से परेशानी


वृंदावन (AU 2010.06.01)। नगर में विद्युत व्यवस्था एक बार फिर बुरी तरह से चरमरा गई है। विद्युत कटौती के चलते गर्मी से लोग व्याकुल हो गए हैं। सोमवार को सुबह से विद्युत कटौती का क्रम जो शुरू हुआ, वह देर शाम तक जारी रहा। कटौती का असर नगर की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा। लोग पानी के लिए भटकते दिखे। विद्युत कटौती के कारण बाजारों में दुकानदार भी दिनभर खासे परेशान नजर आए।

सरकार द्वारा विकास कार्यों में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नगर की विद्युत व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। सोमवार को सुबह से ही नगर की विद्युत व्यवस्था लड़खड़ा गई। सुबह नौ बजे नगर के राधा निवास, गौर नगर कालोनी, मथुरा दरवाजा, किशोरपुरा, अटल्ला चुंगी आदि इलाके के लोगों को विद्युत कटौती की मार झेलनी पड़ी। वहीं, दोपहर दो बजे संपूर्ण नगर की विद्युत व्यवस्था ठप हो गई, जो पांच बजे सुचारु हो सकी। इसके बाद भी बिजली का आना जाना लगा रहा।

बिजली गुल रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विद्युत कटौती का असर नगर की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ता दिखा। लोगों को पानी के लिए घरों से बाहर आकर अन्य हैंडपंपों से पानी की ढुलाई करनी पड़ी। विद्युत उपखंड अधिकारी सुनील सक्सेना ने बिजली गुल होने का कारण सब स्टेशन पर अधिक लोड होना बताया।


चार दिन से बिजली नहीं

वृंदावन (AU 2010.06.01)। नगर के परिक्रमा अटलवन स्थित टहरीवाला सहित पूरे क्षेत्र में पिछले चार दिन से बिजली नहीं है। इस बारे में बाबा सेवक शरण ने बताया कि क्षेत्र का विद्युत तार टूटने के कारण क्षेत्र में बिजली नहीं आ रही है। कई बार विभाग को अवगत करा दिया गया है फिर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।


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