Friday, May 21, 2010

वृन्दावन विकास कार्य मन्द गति से

नव निर्मित नाले भविष्य में बनेंगे जान के लाले



आचार्य महेश भारद्वाज

वृन्दावन (वृन्दावन इन्साफ, May 11, 2010): वृन्दावन॒ भगवान् श्री-कृष्ण की क्रीडा स्थली, जिसे तुलसी का वन के नाम से वृन्दावन कहा जाता है, श्री-राधा-कृष्ण की कृपा से विश्व प्रसिद्ध वह वृन्दावन अब वन नहीं रहा । वर्तमान ईंट-पत्थरों का भव्य वृन्दावन वन गया है । चारों ओर आलीशान कोठी, मठ, मन्दिर नजर आते हैं । ऐसे सुन्दर व भव्य वृन्दावन को और भव्य बनाने हेतु मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने २५० करोड़ रुपये से विकास कार्य करा रही हैं । विकास कार्य को एक वर्ष हो गया, अभी भी मन्द गति से चल रहा है । देखते हैं आखिर कब तक चलेगा ।

वृन्दावन को ईको सिटी के अन्तर्गत पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री जगदीश शर्मा के शासनकाल में वृन्दावन की सड़कें इण्टर लाक की बनाना प्रारम्भ हुआ । वर्तमान नगर पालिका अध्यक्षा के कार्यकाल में भी अनेक सड़कें इण्टार लाक की बनीं । प्रायः पूरे वृन्दावन की सड़कें इण्टर लाक ईटों से बनीं, वर्षों कार्य चला, काफी परेशानियां आयीं । वृन्दावन की जनता बेहद परेशान रही । इन इण्टर लाक की सड़कों का करोडों का भुगतान हुआ ।

इसी बीच बहिन मायावती ने वृन्दावन के विकास हेतु २५० करोड़ रुपया के विकास कार्य की योजना आ गयी, कार्य प्रारम्भ हो गया । पूरे वृन्दावन की सड़कें जो करोडों रुपया लगाकर बनी थीं, वह सब खोदकर डाल दीं, पूरा वृन्दावन खोद डाला । सीवर लाइन डाली गयीं, नाले बनाये जा रहे हैं । इन विभागों में ताल-मेल न होने के कारण करोडों रुपयों का नुकसान तो होता ही है, विभागों में आपसी ताल-मेल न होना भी सिद्ध होता है । इन सब कारनामों से स्पष्ट होता हि कि यह केवल कमीशन का खेल है ।

इस विकास कार्य से जनता, वृन्दावनवासी, दर्शनार्थी सभी वर्षों से परेशान हैं । खुदे हुए वृन्दावन में लोग आना नहीं चाहते, इससे वृन्दावन के व्यापार पर ब्रजवासियों पर असर पड़ रहा है । यहा कोई कल-कारखाने तो हैं नहीं, अधिकांश लोग आकाशीय वृत्ति पर ही अपनी गृहस्थी का पालन करते हैं । इन सब बातों का ध्यान रखते हुए कार्य को शीघ्र से शीघ्र पूरा किया जाना चाहिये । ऐसी ठेकेदारों की मनोवृत्ति होनी चाहिये क्योंकि उन्हें भी जनता के मध्य रहना है ।

वृन्दावन में जो नाले बनाये जा रहे हैं, वे भविष्य के लिये अभिशाप सिद्ध होंगे । वृन्दावन की गली और बाजारों की चौडाई छोटी है, लेकिन ठेकेदार द्वारा जो नाले बनाये जा रहे हैं, वह इतने चौडे और गहरे हैं कि अगर कोई व्यक्ति साइकिल, स्कूटर, मोटर साइकिल लेकर जरा असावधानी से गिर जाये, तो पता ही नहीं क्या लगेगा इतने गहरे और चौडे हैं । वर्षा के दिनों में अगर कोई गिर जाये तो वह बह जायेगा, यह कैसा विकास कार्य है ?

अभी तक ओवर ब्रिज भी बनकर तैयार नहीं हो पाया, केशीघाट का अर्ध चन्द्राकार पुल भी अधर में लटका हुआ है । सड़के पर खुदी पडी हैं । परिक्रमा मार्ग की दुर्दशा है । ऐसी स्थिति में ही कुम्भ मेला हो गया, अधिक मास भी निकल गया । अखिर कब तक यह विकास कार्य पूर्ण हो पायेगा ? मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी से कहना कि वे श्रीधाम वृन्दावन की दयनीय स्थिति का अवलोकन स्वयं करें या अपने अधीनस्थ से कराकर शीघ्र से शीघ्र इन विकास कार्यों को पूर्ण करायें, जिस से विकास कार्यों को पूर्ण करायें, जिस से वृन्दावन वासी व आगन्तुक दर्शनार्थी राहत की सांस ले सकें ॥

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