Sunday, August 22, 2010

2010-08-23 ब्रज समाचार

श्रावण में श्रद्धालुओं से ब्रज गुलजार


मथुरा (AU, August 23, 2010) । सावन की भीड़ अब ब्रज में हर ओर दिखने लगी है। रक्षाबंधन से पूर्व रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर चहल-पहल बढ़ गई है। धर्मशालाएं और गेस्टहाउस तीर्थयात्रियों से भर गए हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक मथुरा शहर ही नहीं बरसाना, वृंदावन, गोवर्धन, बलदेव व गोकुल में खासी भीड़ रहेगी।

रक्षाबंधन से पहले ही श्रद्धालुओं ने ब्रज में डेरा डाल लिया है। श्रावण के दौरान शहर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों को देखने की इनकी दिलचस्पी देखते ही बन रही है। द्वारिकाधीश मंदिर और श्री कृष्णजन्म स्थान पर हिंडोलों और घटा दर्शकों को आकर्षित कर रहीं हैं। धर्मशालाओं और गेस्टहाउस पर भी अब रौनक हो गई है। तीर्थ पुरोहित कांतानाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि शहर के ८० प्रतिशत धर्मशाला और गेस्टहाउस पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा है। पहले से ही बुकिंग हो गई है।

वहीं, रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में मिठाई का कारोबार खूब हो रहा है। रात-दिन घेवर तैयार किया जा रहा है। महंगाई के चलते घेवर के दामों में पिछली वर्ष की अपेक्षा ३० से ४० रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। मलाई और सादा घेवर की कीमत ऊंची दुकानों पर २२० रुपये प्रति किलो तक कर दी गई हैं, जबकि छोटे और कस्बाई मिष्ठान विक्रेताओं के यहां १६० रुपये किलो तक घेवर बेचा जा रहा है।

त्योहार पर वन-वे ट्रैफिक

मथुरा (ब्यूरो)। सावन में तीर्थयात्रियों की आमद पर लगा ब्रेक रक्षाबंधन से पूर्व टूटता दिखने लगा है। स्थानीय लोग भी तैयारियों में जुटे हैं। भीड़ को देखते हुए प्रमुख बाजारों में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करनी पड़ रही है। भीड़ का आलम यह है कि छत्ता बाजार में दिन के समय पुलिस को वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।

आकर्षक गिफ्ट आइटम और राखी

मथुरा (ब्यूरो)। रक्षा सूत्र बांधने पर बहनों को उपहार देने का प्रचलन जोर पकड़ने लगा है। आभूषणों से लेकर कपड़ों और खिलौने तक बहनों को गिफ्ट किए जाते हैं। यही वजह है कि आभूषण विक्रेताओं ने जहां चांदी और सोने के रक्षा सूत्र तैयार किए हैं, वहीं वस्त्र विक्रेताओं ने साड़ी, सूट, जींस और टी-शर्ट की खास रैंज प्रदर्शित की है। राखी स्पेशल के नाम से छूट भी दी जा रही है। गिफ्ट आयट्म विक्रेता भी इस दौड़ में पीछे नहीं।



श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू


मथुरा (AU, August 23, 2010) । श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव समिति और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ३० अगस्त से श्रीकृष्ण जन्मस्थान रंगमंच पर वृंदावन के रासाचार्य स्वामी श्रीराम शर्मा निमाई के निर्देशन में १० दिवसीय रासलीलाएं होंगी।

समिति के महामंत्री कृष्ण मुरारी बंसल, सांस्कृतिक कार्यक्रम संयोजक मूलचंद्र गर्ग, गिरीश चंद्र सर्राफ ने बताया कि जन्माष्टमी (दो सितंबर) को सांस्कृतिक कार्यक्रम, भक्ति, संगीत और पदगान आदि होंगे। मुख्य अतिथि कार्ष्णि स्वामी गुरुशरणानंद महाराज होंगे। इसी ही दिन शाम चार बजे शोभायात्रा भरतपुर गेट से होलीगेट, छत्ता बाजार, विश्रामघाट, मंडी रामदास होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पहुंचेगी। छह को भगवान कृष्ण को छप्पन भोग का प्रसाद लगाया जाएगा।



रौद्र रूप लेने लगी कालिंदी


मथुरा/वृंदावन/कोसीकलां ा (AU, August 23, 2010) । यमुना अब रौद्र रूप में आने लगी है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में हुई वर्षा के पानी का दबाव मथुरा की सीमा में बढ़ गया है। पूर्व में छोड़ पानी निकल भी नहीं पाया कि रविवार को ताजेवाला बांध से ३.०४ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया। यह पानी पांच दिन बाद मथुरा में बाढ़ के हालात पैदा कर सकता है। वृंदावन के कुछ निचले इलाकों में पानी भर गया है। इससे ऊपर नौहझील और शेरगढ़ के खादरों में भी यमुना ने फसल को बहा दिया है।

यमुना में एक सप्ताह से ४० हजार ५०० क्यूसेक के आसपास पानी प्रवाहित हो रहा है। पांच दिन पूर्व ६६ हजार क्यूसेक पानी ओखला डैम से छोड़ा गया। यह पानी शनिवार रात से मथुरा की सीमा में है। इससे यमुना के किनारे निचले इलाकों में पानी भरने लगा है। रविवार दोपहर एक बजे मथुरा में यमुना का जल स्तर १६९.९७ था। शाम छह बजे १६९.९८ हो गया। वह खतरे के निशान से मात्र २२ सेमी नीचे है जबकि वर्तमान में यमुना चेतावनी निशान से ७७ सेमी ऊपर है।

जिला प्रशासन ने बढ़ते पानी के खतरे को देख निचले इलाकों में बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को मुनादी करा दी है। आधा दर्जन स्थानों पर बाढ़ चौकियां स्थापित करा दी हैं। गोकुल बैराज के सभी २२ गेट रविवार दोपहर खोल दिए गए। बाढ़ राहत प्रभारी एडीएम (वित्त व राजस्व) ज्ञानेश कुमार ने बताया कि हरियाणा स्थित ताजेवाला हेड से रविवार को ३.०४ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इसका असर मथुरा में पांच दिन बाद देखने को मिलेगा। इसके लिए यमुना किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा है।

वृंदावन संवाददाता के अनुसार दो दिन से जलस्तर तेजी के साथ बढ़ा है। यमुना किनारे बसी कालोनी कालीदह घाट, सूरज घाट, जुगल घाट, पानी घाट, दुर्गापुरम, यमुना नगर कालोनी के कुछ क्षेत्र इसकी चपेट में आ गए हैं। इससे सैकड़ों लोगों घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। कई आश्रम और गौशालाएं भी जलमग्न हो गईं हैं।

कोसीकलां संवाददाता के अनुसार प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए आधे-अधूरे इंतजाम किए हैं। किसानों का कहना है कि यमुना में पानी का चढ़ाव प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रहा है। क्षेत्र के गांव रामपुर, बढ़ा, मंझोई, शाहपुर, पीरपुर, चौड़रस, धीमरी, धानौता, सिहाना की ओर पानी ने फसलों को चपेट में ले लिया है। छाता के तहसीलदार कुलदेव सिंह ने अधीनस्थों के साथ यमुना से प्रभावित होने वाले गांवों का जायजा लिया। बाजना संवाददाता के अनुसार नौहझील के आसपास खादर में पानी बढ़ गया। निचले इलाकों में झोपड़ी डूब गई हैं।



रजवाहों में पानी हो गया ओवर फ्लो


कोसीकलां। बरसात के साथ रजवाहे और ड्रेन उबल पड़े। हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई। कोसी क्षेत्र के गांवों में तबाही का मंजर पैदा हो गया है। धान की फसल नष्ट हो गई। चारे और ईंधन का भी अभाव पैदा हो गया है।

बठैनकलां, बठैनखुर्द, सुरवारी, जाब, धर्मनगर, पीपरवाला, सिरथला, पूठरी, कांमर, गढ़ी बरवारी आदि में भारी बारिश के बाद जलभराव हो गया है। खेतों का पानी सड़क को काटकर गांव की ओर रुख करने लगा है। जलभराव के बाद रजवाहों में पानी ओवर चल रहा है। ग्रामीणों के अनेक मकान भी धराशाई हो गए हैं। बुर्जी-बिटौरे नष्ट होने से चारे और ईंधन का संकट पैदा होने लगा है। खेतों में खड़ी धान की फसल की पानी की भेंट चढ़ जाएगी। ग्रामीण का कहना था कि जैसे-तैसे कर्ज लेकर उन्होंने धान की पौध की रोपाई की थी। यही स्थिती रही तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।



आधा दर्जन गांवों को पानी ने घेरा


मथुरा । बरसात से क्षेत्र के निचले इलाके वाले करीब आधा दर्जन गांवों के हालात बिगड़ सकते हैं। बरसाती पानी खेतों को डुबोकर गांवों के आसपास आ गया है। पशुओं के बांधने से लेकर दैनिक कार्यो के लिए भी कोई स्थान नहीं बचा है। आगे और बरसात हुई तो हालात बेकाबू होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

काफी इंतजार के बाद आई बरसात से मौसम जरूर सुहाना हो गया है लेकिन तराई वाले इलाकों में हालात बद से बदतर होने की कगार पर हैं। गांव लालपुर, कामर, सिरथला, बठैनकलां, बठैन खुर्द, हुलवाना आदि करीब आधा दर्जन गांव बरसाती पानी की चपेट में आ चुके हैं। इनके पड़ोसी गांवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन गांवों से पानी निकासी के इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं। यहां पानी खेतों को ड़ूबोता हुआ गांवों तक पहुंच गया है। फिलहाल पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर हो रही बरसात से यहां खेत खलिहान पानी से लबालब हो गए हैं। सैकड़ों एकड़ फसल बरसाती पानी की चपेट में आ चुकी है।



अब खतरा ही खतरा


मथुरा । यमुना की त्यौरियांच्चढ़ने के साथ ही मथुरा में रविवार को खतरे का 'सायरन' बज ग या। लगातार उफनती जा रही यमुना के तेवर देख प्रशासन ने तटवर्ती इलाके में मुनादी करवा दी। गांवों को खाली करने की सलाह के साथ ही उनके अस्थाई ठिकाने भी बना दिये हैं। अगले दो दिन खतरे की घंटी और तेज होने की आशंका जताई गई है।

यमुना में ताजेवाला बांध से लगातार चौथे दिन 3.24 लाख क्यूसेक पानी और छोडे़ जाने से मथुरा में यमुना खतरे की ओर बढ़ती जा रही है।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रमाकांत रस्तोगी के मुताबिक दिल्ली ओखला से सर्वाधिक जल रविवार सुबह 8 बजे 66003 क्यूसेक छोड़ा गया। हालांकि यमुना अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। यमुना के जल स्तर बढ़ने के साथ ही गोकुल बैराज से डिच्चार्ज बढ़ा दिया गया है।

अपर जिलाधिकारी वित्त ज्ञानेश कुमार का कहना था कि अगले दो दिन में जल स्तर में बढ़ोत्तरी की संभावना के मद्देनजर छाता, मांट, मथुरा एवं महावन तहसीलों में यमुना तटवर्ती क्षेत्र में बसे गांवों में तहसील की टीम भेजकर मुनादी करा दी गई है। बाढ़ में फंसने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर ठहराने के लिये विद्यालय चिन्हित कर लिये गये हैं।


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